मोदी के सुधार कार्यक्रम में 'स्विस क्लब' का अडंगा

(The Sunday Guardian में प्रकाशित आलेख का हिन्दी अनुवाद) माधव नालपत नई दिल्ली | 13 दिसंबर 2014 प्रमुख अधिकारी और कुछ अन्य लोगों का एक ...



(The Sunday Guardian में प्रकाशित आलेख का हिन्दी अनुवाद)

माधव नालपत नई दिल्ली | 13 दिसंबर 2014

प्रमुख अधिकारी और कुछ अन्य लोगों का एक समूह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुधार कार्यक्रमों को रोकने अथवा उनके प्रभाव को न्यूनतम करने के लिए रात दिन एक कर रहा है | इन व्यक्तियों में मुख्यतः 11 नेता, 16 सेवारत एवं सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी, चार वकील और छह व्यापार जगत के शीर्षप्रमुख शामिल हैं | इन सबके समुद्र किनारे स्थित स्वर्ग में पर्याप्त अवैध खाते रहे हैं | ये सभी दशकों से अत्याधिक मूल्य के उत्पादों को भारत में खपाने वाली विदेशी कंपनियों के एजेंटों के रूप में काम करते रहे हैं | 

इस क्लब के अस्तित्व का खुलासा 2 नवम्बर 2014 को इस समाचार पत्र द्वारा पूर्व में भी (Officials confident PM Modi will prevail over 'Swiss Club') शीर्षक समाचार से किया गया था | जहां एक ओर प्रधानमंत्री मोदी के सुधार एजेंडे के लिए प्रतिबद्ध ईमानदार अधिकारी इस "स्विस क्लब" द्वारा किये जा रहे सेबोटेज से निबटने का पुरजोर प्रयत्न कर रहे हैं | किन्तु दूसरी तरफ ये लोग प्रधानमंत्री मोदी की ईमानदारी और कार्यकुशलता वाली छवि को खराब करने का प्रयत्न कर रहे हैं। राजग सरकार का मुख्य राजनीतिक आधार देश की अखंडता के प्रति मोदी की प्रतिबद्धता के प्रति जनता का अटूट विश्वास है, जिसे खंडित करने के लिए इन लोगों ने पूरी योजना बनाई है ।

मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए स्विस क्लब स्केंडल पैदा करेगा, कुछ मंत्रियों के प्रशासनिक अनुभव की कमी व प्रक्रियाओं के शोर्ट सर्किट का लाभ उठाकर सांठगांठ से योजनाबद्ध चुनिन्दा लीक करवाएगा, जिससे न्यायालय में विपरीत प्रभाव उत्पन्न हो | एक अधिकारी ने सरकारी व्यापार इकाई के माध्यम से संपन्न कतिपय कोयला खदान आवंटन का उदाहरण दिया, जो कथित रूप से पूर्ववर्ती नीति के अनुसार प्रारम्भिक तीन बोलीदाताओं को बाँट दी गईं, L1 को 60%, L2 को 25% और L3 को शेष 15% । इस अधिकारी के अनुसार शीर्ष बोलीदाता (एल 1) इस पूरे आवंटन से नाराज है, क्योंकि इससे पूर्ववर्ती नीति को बदलने की बात बेमानी हो गई है । यद्यपि कहा जा रहा है कि यह निर्णय योग्यता के आधार पर किया गया है, किन्तु इससे संसद और मीडिया में पक्षपात के आरोप लग सकते हैं | 

दूसरा आरोप सामने आया है कि एचएसबीसी खाता धारकों की सूची में शामिल कुछ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दायर करने में विलंब किया गया है कि । इस तरह के लीक के पीछे असली उद्देश्य निर्णय लेने की क्षमता पर प्रश्नचिन्ह लगाना है | वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार यूपीए दशक के दौरान प्रधान मंत्री श्री मनमोहन सिंह की निर्णय लेने की धीमी रफ़्तार के विरुद्ध मोदी जी की दक्षता का जो बहुत उच्च स्तर प्रचारित किया गया था, उसे झुठलाया जा सकेगा | 

अधिकारियों के अनुसार एक अन्य घटना में टू जी घोटाले में बैधानिक कठिनाईयों से जूझ रहे एक वरिष्ठ विपक्षी राजनीतिज्ञ द्वारा मुम्बई के मुग़ल एस्केप निर्माण को स्केंडल के रूप में प्रचारित करने का प्रयत्न किया गया | जानकारी के अनुसार एक पूर्व मंत्री ने चेतावनी दी है कि यदि मुग़ल एस्केप निर्माण तथा हवाला कारोवार के आरोप में गिरफ्तार दो बड़े लोगों को नहीं छोड़ा गया तो वह वर्तमान व्यवस्था के व्यक्तियों का पर्दाफाश कर देंगे | प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के लिए प्रतिबद्ध अधिकारियों ने विश्वास जताया है कि प्रधानमंत्री मोदी किसी भी दबाव में नहीं आयेंगे और वे कानून व तथ्यों के आधार पर निर्णय लेंगे, भले ही उनकी अपनी पार्टी के लोग ही उससे प्रभावित हों ।

"स्विस क्लब" अगले वर्ष की शुरूआत में एक घोटाले के सीजन की खोज में है, ताकि राष्ट्रमंडल घोटाले की याद ताजी हों और राजग सरकार को कठघरे में खड़ा किया जा सके । यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है कि "स्विस क्लब" के ये सदस्य पब्लिक में तो एक दूसरे के विरोधी दिखाई देते हैं किन्तु वास्तविकता में एक दूसरे को और अपने दोस्तों को बचाने के लिए संयुक्त रूप से काम करते हैं । साथ ही ये अपना विरोध करने वालों की छवि धूमिल करने का हर संभव प्रयत्न करते हैं | इस काम के लिए वे अपने प्रभाव से आयकर विभाग, सीबीआई और अन्य एजेंसियों का प्रयोग करने में नहीं हिचकिचाते, यहाँ तक कि मीडिया का भी । 

एक अधिकारी का दावा है कि 16 मई 2014 को हुई भाजपा की चुनावी जीत के तुरंत बाद क्लब ने अपने योजनाबद्ध प्रयास प्रारंभ कर दिए थे | जब शीर्ष पदों के लिए उपयुक्त व्यक्तियों की खोज प्रारंभ हुई तब 'स्विस क्लब' ने अपने करीबी लोगों को चतुरता से स्थापित करवाने का काम किया तथा क्लब का विरोध करने वाले निर्दोष लोगों को झूठे आरोप लगाकर रास्ते से हटाया | स्वाभाविक ही यह कार्य बहुत ही गोपनीय ढंग से हुआ, इसलिए जिन पर झूठे आरोप लगाये गए उन्हें भी कानोकान खबर नहीं हुई | मीडिया के माध्यम से उनके खिलाफ दुष्प्रचार किया गया और इस प्रकार अपने विरोधियों को ब्लेकलिस्टेड करवाया गया | 

अधिकारियों का कहना है कि क्लब के प्रभाव में काम करने वाली मशीनरी ने अपनी रिपोर्टिंग में सरकार को गलत जानकारी देकर महत्वपूर्ण पदों पर क्लब के लिए अनुकूल लोगों को नियुक्त करवाने का काम किया, तथा क्लब के प्रभाव क्षेत्र से बाहर के लोगों को प्रमुख पदों से बंचित रखा | प्रधानमंत्री मोदी के सुधार कार्यक्रमों को सफल बनाने के इच्छुक अधिकारियों का मानना है कि मोदी इस सेबोटेज के प्रति सजग हैं और सभी प्रमुख अधिकारियों पर नजर रखे हुए हैं | वे अपनी टीम में सबसे अच्छे और साफ़सुथरे लोगों को ही रखना चाहते हैं, इसलिए सड़े हुए फलों के स्थान पर जल्द ही ईमानदार अधिकारी नियुक्त हो जायेंगे | 

हालांकि, "स्विस क्लब" निश्चिन्त है क्योंकि काले धन के शिकार हेतु किये जाने वाले सारे प्रयत्नों के निराशाजनक परिणाम सामने आये हैं तथा 2014 के चुनाव अभियान में भाजपा ने जिन्हें भ्रष्ट निरूपित किया था वे "बड़ी मछली" चैन की बंशी बजा रही हैं । क्लब अवैध रूप से विदेश में जमा अनुमानित दस हजार करोड़ डॉलर के काले धन से आधिकारिक ध्यान हटाने का प्रयत्न कर रहा है। एसआईटी की जांच प्रक्रिया में अखंडता के बाहरी विशेषज्ञों के स्थान पर वर्तमान प्रणाली से परिचित अधिकारियों की भरमार है, जो केवल नियमों और प्रतिबंधों की ही चर्चा करते हैं | इसी कारण काले धन पर अंकुश की दिशा में बहुत कम होने की संभावना है | लेकिन इससे भविष्य में भारत में निवेश का माहौल अवश्य बाधित होकर परेशानी में वृद्धि होगी। 

एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार "स्विस क्लब" एक ऐसा चेनल है जिसके माध्यम से लगभग सभी दलों के प्रमुख राजनेता अपने गुप्त धन को भारत से बाहर ले जाते रहे थे, अतः ये सभी नेता आज एकजुट होकर एक दूसरे को बचाने में लगे हुए हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि किसी एक के गिरह्वान तक हाथ पहुँचाने का अर्थ है, सबका भांडा फूटना | चाहे 2004 के लोकसभा चुनाव हों या 2014 के, पिछली सरकारों में क्लब का हिस्सा रहे राजनीतिज्ञों को परेशानी से निजात दिलाने के लिए विरोधी राजनेताओं को भुगतान किया जाता रहा है । केवल प्रधानमंत्री मोदी इकलौती शख्सियत हैं, जिनके कारण ऐसे तत्वों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, इसलिए क्लब की पहली प्राथमिकता उनके कुछ मंत्रियों के बहाने प्रधानमंत्री के नाम को धूमिल करना है और वे लगातार इसके लिए अवसर की ताक में रहते हैं | 

मनमोहन सिंह के समय नौकरशाही की बड़ी आरामदायक प्रणाली अस्तित्व में थी | जिसमें ट्रिब्यूनल, कमीशन और अन्य शीर्ष पदों पर नियुक्ति में वरिष्ठता व योग्यता के स्थान पर बफादारी को पुरष्कृत किया जाता था | प्रधानमंत्री मोदी ने नियुक्तियों की इस प्रणाली को खारिज कर दिया है और इसके स्थान पर महत्वपूर्ण नियुक्तियों में केवल योग्यता का मापदंड रखा है, जिसके कारण ऐसे लोग परेशान हैं जो कुछ करने के स्थान पर गणेश परिक्रमा को ही महत्व देते थे | इस तरह के तत्व अब कनिष्ठ नौकरशाही को डराने के लिए अफवाहें फैला रहे है कि पीएम मोदी केन्द्रीय सेवानिवृत्ति की आयु कम कर 58 करने जा रहे हैं, जैसा कि हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने किया है | एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार स्विस क्लब द्वारा कहा जा रहा है कि दिल्ली में होने वाले विधानसभा चुनावों के बाद जैसे ही भाजपा सत्ता में आयेगी सेवानिवृत्ति की उम्र कम कर दी जायेगी ।

आवश्यकता और प्रभावकारिता के आधार पर कैबिनेट सचिव अजीत सेठ को दिये गये छह महीने के एक्सटेंसन के कारण कुछ 1978 और 1979 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी अपनी भविष्य की संभावनाओं के बारे में अनिश्चित हुए हैं । वास्तवविकता यह है कि प्रधानमंत्री केवल परिणाम चाहते हैं और कड़ी मेहनत को पुरष्कृत करते हैं | एक अधिकारी ने इस तथ्य पर ध्यान दिलाया कि शासन प्रणाली में लम्बे समय से मरे हुए लट्ठों की भरमार थी, जिन्हें बदला जाना आवश्यक था | स्विस क्लब के आदेश के अनुसार काम करने वाले ये लोग मोदी के सुधार कार्यक्रमों के शीघ्र कार्यान्वयन में बाधा पहुंचाने का यत्न कर रहे हैं 

उनके सहयोगियों का मानना है कि पूर्व वित्त मंत्री चिदंबरम के समान गिरते उत्पादन के बाबजूद उच्च कराधान से अर्थव्यवस्था विषाक्त हो जाएगी | इस स्थिति से बाहर निकालने का एक ही मार्ग है, और वह है व्यापक सुधारों का मोदी फार्मूला । यद्यपि यह एक कठिन कार्य है | क्योंकि इससे विशेष रूप से उन निहित स्वार्थी तत्वों के निजी हित प्रभावित होंगे जो वरिष्ठ स्तर पर स्थापना के भीतर घुस गए हैं | इसीलिए वे ईमानदारी को सजा दिलाने तथा लीकेज का प्रयत्न करेंगे ।

चुपके से प्रधानमंत्री द्वारा किए गए निर्णायक कदमों के खिलाफ माहौल बनाकर "स्विस क्लब" कुछ मंत्रालयों में भ्रम की स्थिति पैदा कर रहा है। उदाहरण के लिए पर्यावरण मंत्रालय में, जहां अमेरिका में सुरक्षित माने जाने वाले आनुवंशिक रूप से संशोधित खाद्य पदार्थों पर निर्णायक फैसला उसी प्रकार आवश्यक है जैसे कि उत्तराखंड में पनबिजली उत्पन्न करने की जरूरत है जहां इस दृष्टि से आदर्श कही जा सकने वाली कई नदियाँ हैं | 

प्रधानमंत्री मोदी के सुधारों को रोकने अथवा कमसेकम उनमें देरी करवाने के लिए ये लोग समग्र आर्थिक वातावरण पर विपरीत प्रभाव डालने का प्रयत्न कर रहे हैं | विशेष रूप से आवश्यक वस्तुओं पर मुद्रास्फीति की दर कम करने के लिए अधिक पारदर्शी नियमों का निर्माण तथा बोझिल प्रक्रिया वाले पुरातन कानूनों को समाप्त करने का निर्णय | पूर्व में यूपीए सरकार द्वारा पारित श्रम कानूनों में बदलाव तथा भूमि कानूनों को बदलने से भविष्य में रोजगार संभावनाएं प्रभावित हुई हैं तथा मेन्यूफेक्चरिंग इकाईयों की स्थापना असंभव की हद तक कठिन हो गई हैं | मोदी भारतीय अर्थव्यवस्था को मंदी के दौर से बाहर करना चाहते हैं, किन्तु उसके लिए विकास की वर्तमान दर को दुगना करना आवश्यक है । जबकि "स्विस क्लब की एकमात्र रूचि अपने अवैध धन की रक्षा करना है, अतः वे विदेशी हितों की मदद कर रहे हैं | लेकिन प्रधान मंत्री ने उन्हें चेतावनी दे दी है जिसके कारण वे निर्णयों और प्रक्रियाओं में को धीमा करने वाली नीति बदलने को विवश हुए हैं और आने वाले महीनों में सरकार विकास योजनाओं पर आगे बढ़ेगी | वे चाहते हैं कि स्विस क्लब के कुछ सदस्यों को ही उसके प्रति जवाबदेह बना दिया जाए और ईमानदार अधिकारियों का मानना है कि यह हो सकेगा | एक अधिकारी के अनुसार इस समय प्रधानमंत्री के सुधार समर्थक और सेबोटेज करने वालों के बीच आरपार की लड़ाई चल रही है | 


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