कैसे बनते हैं, अमीर और अमीर ?

जब सी ए जी विनोद रॉय रिपोर्ट में कहा गया था कि कोल ब्लॉक आबंटन के औने पौने आबंटन के कारण अगले 35 वर्षों में निजी कंपनियों को 1 लाख 86 ...




जब सी ए जी विनोद रॉय रिपोर्ट में कहा गया था कि कोल ब्लॉक आबंटन के औने पौने आबंटन के कारण अगले 35 वर्षों में निजी कंपनियों को 1 लाख 86 हजार करोड रुपये का लाभ होना संभव है, तथा स्वाभाविक ही सरकार को इतना ही घाटा | उस समय कांग्रेस ने इस पर बड़ा बाबेला मचाया था, तथा कहा था कि सरकार को कोई नुक्सान नहीं हुआ है | बहरहाल सुप्रीम कोर्ट के आदेश से आबंटन रद्द हुए तथा नीलामी प्रक्रिया प्रारम्भ हुई | अभी हाल ही में जिन 15 खदानों की नीलामी हुई है, उनसे ही सरकार को 80 हजार करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है | 25 फरवरी से सरकार 43 और कोल ब्लॉक्स की नीलामी शुरू करेगी, जिसमें सरकार को छप्पर फाड़ कमाई की संभावना है | इससे तो लगता है कि सी ए जी ने जितना अनुमान लगाया था, कोल ब्लॉक घोटाला उससे भी कहीं ज्यादा बड़ा था |

अब सवाल उठता है कि यह निजी कंपनियों ने यह फायदा उठाया कैसे ? सवाल का सीधा साधा जबाब यह है कि प्रजातंत्र का मोटा सिद्धांत कि सभी को प्रगति पथ पर जाने के समान अवसर मिलेंगे, महज किताबी अल्फाज हैं | वास्तविकता तो यह है कि चतुर सुजान राजनीतिज्ञों से नजदीकी बनाकर अवसर पैदा कर लेते हैं, और दूसरों से मीलों आगे निकल जाते हैं | यही वास्तविकता है अमीरों के और अमीर बनने की | कई बार तो धनपति व्यवसाई, राजनीतिज्ञों के इतने घनिष्ठ हो जाते हैं कि वे उनसे मनचाहे फैसले करवा लेते हैं | नौकरशाही तो स्वाभाविक ही अवसरों को भुनाने में माहिर है ही | उसे तो स्वतः लाभ हो ही जाता है |

कोल ब्लॉक आवंटन की कुछ बेशर्म बानगियाँ इस हकीकत को बयान करती हैं –

(१) डी एम के कोटे से सूचना प्रसारण राज्य मंत्री एस जगतरक्षकन की केवल ५ दिन पुरानी कंपनी जे आर पावर जन प्रा. लि. को १७ जनवरी २००७ में कोल ब्लोक आवंटित हुआ, जबकि उनका इस क्षेत्र में कोई अनुभव ही नहीं था ! उन्हें पांडिचेरी सरकार ने अपने स्वामित्व के पुंडुचेरी इंडस्ट्रियल प्रमोशन डवलपमेंट एंड इन्वेस्टमेंट कारपोरेशन को आवंटित ब्लोक एक सब कांट्रेक्ट कर दे दिया, जिसके ५१ प्रतिशत शेयर उन्होंने बाद में हैदरावाद की के एस के इनर्जी बेन्चर्स कंपनी को बेच दिये !

(२) हरियाणा के कुरुक्षेत्र से कांग्रेसी सांसद नवीन जिंदल को समय सीमा बीत जाने के बाद भी आवेदन स्वीकार कर कोल ब्लोक दिया गया, जबकि सरकारी नवरत्न कंपनी को कोयले के लिए मोजाम्बीक जाने के लिए कहा गया ! कोल इंडिया द्वारा बार बार लिखे पत्र को नजर अंदाज किया गया ! जिंदल स्टील लिमिटेड की भागीदारी बाली दो कंपनियों को २७ फरवरी २००९ को ओडिसा में कोल ब्लोक आवंटित किये गए, जिनकी कीमत लगभग २ लाख करोड रु. से ज्यादा है !

(३) इसी प्रकार महाराष्ट्र से कांग्रेसी सांसद विजय दर्डा को भी लाभ पहुंचाया गया ! बेचारे अब सी बी आई के निशाने पर हैं !

(४) छत्तीसगढ़ सरकार ने जो भटगांव कोल ब्लोक शासकीय उपक्रम मिनरल डवलपमेंट कार्पोरेशन के नाम से लिया था, उसे अजय संचेती को कम भाव पर दे दिया ! इससे राज्य सरकार को १०५८ करोड रु. की हानि हुई !

अब आज का एक दूसरा महत्वपूर्ण समाचार जिसमें देश के नंबर एक औद्योगिक घराने रिलायंस कंपनी की कार्यशैली उजागर हुई है | दिल्ली पुलिस ने पेट्रोलियम मंत्रालय के गोपनीय दस्तावेज लीक करने के आरोप में पांच लोगों को गिरफ्तार किया है, जिसमें मंत्रालय के एक क्लर्क व चपरासी के अतिरिक्त रिलायंस समूह का भी एक अधिकारी शामिल है | हालाँकि आनन फानन में रिलायंस ने बयान जारी कर कहा है कि उसका कोई व्यावसायिक हित उन चर्चित कागजातों से जुडा हुआ नहीं है | समूह ने जांच में सहयोग करने की बात भी कही है | लेकिन एक बात तो दिन के उजाले की तरह साफ़ है कि निजी कंपनियां लाभ कमाने के लिए इसी प्रकार तंत्र का लाभ उठाती हैं | केन्द्र की तेल-गैस नीतियों की जानकारी "सबसे पहले" प्राप्त करने एवं दिल्ली में गैस प्लांट्स पर कब्जे को लेकर निश्चित रूप से कारपोरेट घराने परदे के पीछे कोई बड़ा खेल कर रहे हैं | यही वह प्रजातंत्र की कमजोर कड़ी है, जिसके चलते अमीर और अमीर बन रहा है, कालाधन बेख़ौफ़ फलफूल रहा है | 


लेकिन समस्या का समाधान क्या ? काली कमाई के स्थान पर स्वच्छ, सात्विक और नैतिक कमाई की प्रतिद्वंदिता कैसे बढे ? उत्तर केवल एक – सच्चरित्र नेतृत्व और जागरुक समाज | सोशल मीडिया संभवतः जागरूकता बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण उपकरण साबित हो ही रहा है | एक बार समाज जागरुक हो जाए तो देर सबेर मजबूरी में ही सही, नेतृत्व को भी सच्चरित्र रहना ही पडेगा | कमसेकम दिखना तो पडेगा ही | 

दिल्ली पुलिस आयुक्त बी. एस. बस्सी का महत्वपूर्ण बयान - 




श्री बस्सी के अनुसार यह जानकारी मिलने पर कि ये लोग रात में प्रवेश करते हैं, जाल बिछाया गया | जब तीन लोग इंडिगो कार में सवार होकर शास्त्री भवन आए, उनमें से दो लोग कार से नीचे उतरे जबकि तीसरा कार में बैठा रहा. करीब दो घंटे बाद जब दो लोग वापस कार में बैठे तो तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया. उनकी पहचान लालता प्रसाद (36), राकेश कुमार (30) और राज कुमार चौबे (39) के रूप में हुई है. उनके पास से सरकारी दस्तावेज बरामद हुए हैं. 

दिल्ली पुलिस आयुक्त बी. एस. बस्सी ने कहा कि फोटोकॉपी करके इन दस्तावेजों को धन के एवज में लीक किया गया था. जांचकर्ता जल्द ही दस्तावेज पाने वालों को गिरफ्तार करेंगे. उन्होंने कहा कि गोपनीय दस्तावेजों की चोरी और लीक संभवत: कई सालों से चल रही थी. आयुक्त ने कहा कि गोपनीय दस्तावेजों को कुछ स्वतंत्र सलाहकारों और उर्जा कंपनियों को लीक किया गया है और उनमें से कुछ से पूछताछ की जा रही है.

संयुक्त आयुक्त रवींद्र यादव ने बताया, ‘‘साल 2012 में दोनों ने नौकरी छोड़ दी. शास्त्री भवन में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने महसूस किया कि वे आधिकारिक दस्तावेजों पर आसानी से हाथ डाल सकते हैं.उन्होंने यह भी खुलासा किया कि इसमें उनके पिता आसाराम और ईश्वर सिंह (दोनों शास्त्री भवन में मल्टी टास्किंग कर्मचारी) ने सहायता की. इसके बाद आसाराम (58) और ईश्वर सिंह (56) को भी गिरफ्तार कर लिया गया. हमने एओपीएनजी अधिकारियों के कार्यालयों में जाने के लिए उनके द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली डुप्लिकेट चाबी, फर्जी पहचान पत्र और कपटपूर्ण तरीके से हासिल टेंपोररी पास भी बरामद कर ली है.’’ यादव ने कहा, ‘‘इंडिगो कार पर अनधिकृत निशानी थी जिसके जरिए इसे भारत सरकार का बताया गया था और मामला पुलिस की अपराध शाखा में दर्ज कर लिया गया है.’’
ताजा समाचारों के अनुसार लीक दस्तावेज खरीदने के आरोप में पत्रकार शांतनु और इनर्जी कंसल्टेंट प्रयास जैन को भी गिरफ्तार किया गया है


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