सलमान खान के प्रशंसको, यह कहानी भी पढो !

यह कहानी बॉलिवुड डायरेक्टर चारुदत्त आचार्य ने अपनी फेसबुक वॉल पर शेयर की है -  'यह साल 1998 की बात है। मेरी नई-नई शादी हुई थी। उस दौरा...



यह कहानी बॉलिवुड डायरेक्टर चारुदत्त आचार्य ने अपनी फेसबुक वॉल पर शेयर की है - 
'यह साल 1998 की बात है। मेरी नई-नई शादी हुई थी। उस दौरान लेखन, निर्देशन से जुड़ी छोटी-छोटी नौकरियां कर रहा था पर मैं खुश था। अक्टूबर 1998 में मेरे साथ हुए एक वाक्ये ने मेरी ज़िंदगी को बड़ा झटका दिया।

दोपहर के 2 बजे थे। अमेरिकन बेकरी (सलमान हिट ऐंड रन स्पॉट से ज्यादा दूर नहीं) के पास पाली हिल की तरफ से आ रही एक कार ने ऑटो में जबर्दस्त टक्कर मारी। ऑटो में मैं बैठा था और कार चला रही युवती कथित तौर पर फिल्म जगत के किसी 'दिग्गज' की बेटी थी। 

टक्कर के बाद ऑटो का कचूमर निकल गया और मेरे बाएं पैर में बहुत गहरी चोट आई, हालांकि ऑटो ड्राइवर को ख़ास चोट नहीं लगी। कार से वह युवती और उसका पुरुष साथी उतरा, हमें इस हाल में देखा और वापस अपनी कार में बैठकर चले गए। 

सड़क पर गुजरने वालों की भीड़ लग गई और उनमें सभी यह सोचने लगे कि खून से लथपथ पड़े इस शख्स के साथ किया किया जाए... तभी एक मजबूत कद-काठी के आदमी ने मेरा हाथ थामा, उठाया और अपनी कार की पिछली सीट पर बैठा दिया। खून से उसकी कार का पिछला हिस्सा लाल हो गया था। उसने मेरा नंबर पूछा पर मेरे पास पर्सनल फोन नहीं था, मैंने घर का नंबर दिया, पत्नी का नाम बताया। 


मैंने उससे कई बार यह कहा कि अगर मैं मर गया तो... आप बेकार परेशान होंगे, उसने कहा कि ऐसा कुछ भी नहीं होने वाला है आपके साथ, मैं बस आपकी मदद कर रहा हूं। उसने मुझे नजदीकी अस्पताल में भर्ती करवाया और फोन कर मेरी पत्नी को मेरे ऐक्सीडेंट की सूचना दी। ऑटो ड्राइवर ने ऐक्सीडेंट करने वाली कार का आधा नंबर देखा था, जो उसने पुलिस को दे दिया।

अगले दिन वह युवक जिसने मुझे गाड़ी में बैठाकर अस्पताल में भर्ती करवाया था, मुझसे मिलने आया। उसने अपना परिचय दिया कि वह भारतीय है और ऑस्ट्रेलिया में जिम इंस्ट्रक्टर है। उसने मुझे ऐसी कहानी बताई जो काफी फिल्मी लगी पर आज उसे 'सलमान केस' की नज़र से देखा तो कई मायनों से मेरी यादें ताज़ा हो गईं। 

उसने बताया कि उसके बूढ़े पिता बहुत बीमार चल रहे थे। वह अकेले रहते थे, दवाई जैसी जरूरतों के लिए वह देर रात मेडिकल स्टोर के लिए निकले। एक तेज रफ्तार कार ने उन्हें कुचल दिया और मौके से भाग निकले। मेरे पिता नहीं रहे। उसने बताया कि वह ऑस्ट्रेलिया से अपने पिता का अंतिम संस्कार करने मुंबई आया था, 13 दिन के क्रिया-कर्म के बाद वह वापस जा रहा था कि उसने मेरे ऑटो ऐक्सिडेंट को देखकर मदद करने का निश्चय किया। 

मेरी पत्नी उस वक्त गर्भवती थी। भागदौड़ कर उसने पुलिस से ऐक्सिडेंट करने वाली लड़की को पकड़वा लिया। वह मुझे मेरे घर देखने आई। उसने बताया कि वह ऐक्सिडेंट के बाद इसलिए नहीं रुकी कि सड़क से गुजर रहे लोग उसके साथ न जाने कैसा सलूक करते। इस सब के बाद उसने मुझे फूलों का बुके दिया और वापस चली गई। 

उसे कभी दोषी नहीं ठहराया गया, मुझे बीमा से मिली कुछ अपर्याप्त रकम से काम चलाना पड़ा। कुछ सालों में मेरी 3 बार सर्जरी हुई। तब से आज तक मैं नॉर्मल इंसानों की तरह चलने में असमर्थ हूं। वॉकिंग स्टिक के सहारे अपनी जिंदगी गुजार रहा हूं। 

इस ऐक्सिडेंट ने मुझे आर्थिक, मानसिक, भावनात्म नुकसान पहुंचाया। सलमान 13 साल इस संकट से बचने के लिए भागते रहे। पहले ऐक्सिडेंट स्पॉट से फिर अपने केस से बच निकलने के लिए। पीकर गाड़ी चलाना ठीक वैसे ही है जैसे आप अपने हाथ में लोडिड एके-47 लिए घूम रहे हों।

सलमान हिट ऐंड रन केस सिर्फ पीकर गाड़ी चलाने वाले अपराधी तक सीमित नहीं है, यह कायरता से भरा वह कदम भी है, जिसमें गलती करने वाला अपनी गलती छिपाने के लिए साम, दाम, दंड भेद अपनाता फिरता है।'
(जैसा आचार्य ने अपनी वॉल पर लिखा)


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क्रांतिदूत: सलमान खान के प्रशंसको, यह कहानी भी पढो !
सलमान खान के प्रशंसको, यह कहानी भी पढो !
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