ऊर्जा का एक वृहत सागर है, यह भौतिक दुनिया - क्वांटम भौतिकी का सिद्धांत

नोबेल पुरस्कार विजेता भौतिकविदों ने असंदिग्ध रूप से सिद्ध कर दिया है कि यह भौतिक दुनिया और कुछ नहीं वरन ऊर्जा का एक वृहत सागर है, जो कि ...


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नोबेल पुरस्कार विजेता भौतिकविदों ने असंदिग्ध रूप से सिद्ध कर दिया है कि यह भौतिक दुनिया और कुछ नहीं वरन ऊर्जा का एक वृहत सागर है, जो कि मिलीसेकिंड्स में बार बार भीतर से बाहर और बाहर से भीतर संचार कर रहा है ।
यहाँ कुछ भी ठोस नहीं है।
यह क्वांटम भौतिकी की दुनिया है।
वे यह भी सिद्ध कर चुके हैं कि इस बदलते ऊर्जा क्षेत्र को विचार ही एक साथ जकड कर रखते हैं, जिसे हम 'वस्तु' के रूप में देखते हैं ।
तो क्या कारण है कि हमें एक व्यक्ति के स्थान पर ऊर्जा का एक चमकता क्लस्टर दिखाई नहीं देता ?
जरा एक फिल्म रील की कल्पना करें ।
एक चलचित्र में एक सेकिंड में 24 फ्रेम का संग्रह एक के बाद एक आँखों के सामने से गुजरता है | कहने को तो प्रत्येक फ्रेम अलग अलग होते हैं वे निश्चित अंतराल के बाद सामने से गुजरते हैं, किन्तु उनकी गति के कारण हमारी आँखें धोखा खा जाती हैं तथा हमें एक चलचित्र दिखाई देता हैं ।
लगभग ऐसा ही टेलीवीजन में भी होता है |
एक टीवी ट्यूब एक सामान्य ट्यूब है, किन्तु जब इलेक्ट्रॉनों का पुंज स्क्रीन पर एक निश्चित तरीके से आघात करता है तो गतिशील चित्र का भ्रम पैदा होता है ।
सभी वस्तुओं के साथ लगभग ऐसा ही है । आपके पास 5 भौतिक इंद्रियों हैं - दृष्टि, ध्वनि, स्पर्श, गंध और स्वाद ।
इन इंद्रियों में से प्रत्येक के पास एक विशिष्ट स्पेक्ट्रम है | उदाहरण के लिए, एक कुत्ता आपकी तुलना में एक भिन्न ध्वनि तरंग को महसूस करता है, या एक सर्प आपकी तुलना में प्रकाश का एक अलग स्पेक्ट्रम देखता है । आपको दुनिया रंगीन दिखाई देती है तो शायद कुत्ते को ब्लेक एंड वाइट | अब बताएं दुनिया रंगीन है कि श्वेत श्याम ? कुत्ते को अशरीरी प्राणी भी दिखाई देते हैं, जिन्हें देखकर वो रात को भोंकता है, आपको वे दिखाई नहीं देते | अब बूझें कि वे होते हैं अथवा नहीं ? इसी प्रकार सबके साथ होता है |
दूसरे शब्दों में, आपकी भिन्न भिन्न इंद्रियों की अनुभूति का दायरा सीमित है व अपनी क्षमता के अनुसार ऊर्जा के अथाह समुद्र में से ग्रहण कर एक छवि का निर्माण करता है ।


बात अभी पूरी नहीं हुई है, और न ही यह पूर्ण सत्य है। यह सिर्फ समझने का एक प्रयत्न है।
इसीलिए भारतीय मनीषियों ने भी बार बार यही उद्घोष किया है – नेति नेति | यह अंत नहीं है, सत्य की मंजिल अभी दूर है | आज तक जो भी व्याख्याएं की गई हैं, उनसे हम वास्तविकता के आंतरिक नक़्शे भर का महज अनुमान लगा पाते हैं, उसे वास्तविक सत्य समझना नादानी है । यह महज अनुभूति का विषय है | जो जितना डूब पाए | जिन खोजा तीन पाईयां, गहरे पानी पैठ | हमारा आतंरिक नक्शा हमारे निजी जीवन के सम्पूर्ण अनुभवों का परिणाम है ।
हमारे विचार उस अदृश्य ऊर्जा से जुड़कर ऊर्जा रूपों का निर्धारण करते हैं । एक प्रकार से आपके विचार न केवल आपके भौतिक जीवन का निर्माण करते हैं बल्कि कण-दर-कण ब्रह्मांड को को भी प्रभावित करते हैं ।
अपने चारों ओर देखो।
इस भौतिक दुनिया में जो भी आप देखते हैं उसका प्रारम्भ एक विचार से हुआ है | एक विचार तब तक साझा करता है जब तक कि स्टेप बाई स्टेप व्यक्त करने योग्य पर्याप्त विकसित न हो जाए ।
जैसा आप सोचते हैं, अमूमन बैसे ही बन जाते हैं ।
आपकी जिन्दगी बैसी ही हो जाती है, जैसी आप कल्पना करते हैं अथवा जैसे जीवन पर आस्था रखते हैं | 
यह दुनिया एक प्रकार से आपका दर्पण है | यह आपको सक्षम करता है कि आप इसमें अपने अनुसार सत्य को देख पायें | जब तक कि आप उसे बदल न दें ।
क्वांटम भौतिकी का सिद्धांत हमें बताता है कि यह दुनिया उतनी कठोर और अपरिवर्तनीय नहीं है, जैसी कि मानी जाती है । इसके बजाय, यह हमारे व्यक्तिगत और सामूहिक विचारों के अनुरूप सतत प्रवाहमान हो रही है ।
हमें जो सच लगता है, वस्तुतः वह भ्रम होता है, एक जादुई ट्रिक के समान ।
सौभाग्य से हमने इस भ्रम को उजागर करना प्रारम्भ कर दिया है और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसे कैसे बदला जाए यह विचार भी करना शुरू कर दिया है | यह शरीर क्यों बना है इसे जानने की कोशिश तो सतत चल ही रही है ।
मानव शरीर में रक्त संचार, पाचन, endocrine, मांसपेशियों, तंत्रिका, प्रजनन, श्वसन, कंकाल, और मूत्र सहित नौ सिस्टम शामिल हैं ।
ये जो बने हुए हैं, वे क्या हैं?
ऊतक और अंग।
ये ऊतक और अंग किससे बने हैं?
प्रकोष्ठों (Cells) से ।
ये सेल्स किस चीज से बने हैं ?
कोशिकाओं से |
कोशिकाओं का निर्माण किससे हुआ हैं?
अणुओं है।
अणु किससे बने हैं?
परमाणुओं से ।
परमाणु कैसे बने हैं?
सूक्ष्म अणु (Subatomic) से ।
Subatomic कण किससे बने हैं ?
ऊर्जा से !
आप और हम सभी शुद्ध ऊर्जा का प्रकाश हैं जो अपने सबसे सुंदर और बुद्धिमान विन्यास में है । सतह के नीचे यह ऊर्जा सतत परिवर्तनशील है, जिसका नियंत्रण आपके शक्तिशाली मन के माध्यम से हो रहा है । यह अलग बात है कि आपको इसका भान ही नहीं है | आपको पता ही नहीं है कि आप क्या क्या कर गुजरे हैं और क्या क्या करते जा रहे हैं |
आप एक विशाल नाभिकीय और शक्तिशाली मानव है ।
यदि आप एक शक्तिशाली इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप के नीचे स्वयं को रखकर प्रयोग कर पायें तो महसूस करेंगे कि आप कितने इलेक्ट्रॉन, न्यूट्रॉन, फोटोन के रूप में सतत परिवर्तनशील ऊर्जा से निर्मित हैं ।
आपके चारों ओर जो कुछ भी है वह भी ऊर्जा निर्मित ही है । क्वांटम भौतिकी का कहना है कि दिखाई देने वाली बस्तु बैसी ही दिखाई देती है, जैसी हम देखना चाहते हैं | 
एक वस्तु का अपने पर्यवेक्षक से प्रथक कोई स्वतंत्र अस्तित्व नहीं है ! इस प्रकार कहा जा सकता है कि किसी वस्तु के प्रति आपका पर्यवेक्षण, आपका ध्यान, और आपका इरादा उस बस्तु को निर्मित कर देता है । यह वैज्ञानिक भी है और सिद्ध भी किया जा चुका है |
यह दुनिया आत्मा, मन और शरीर से बनी है।
ये तीनों - आत्मा, मन और शरीर का कार्य अपने आप में अलग अलग है, जिसे एक दूसरे से साझा नहीं किया जा सकता । जो कुछ आप अपनी आँखों से देखते हैं, और अपने शरीर से अनुभव करते हैं, वह भौतिक दुनिया है। उसे हम शरीर कहते हैं | शरीर एक प्रभाव है, जिसे एक कारण ने निर्मित किया है ।
और वह कारण है बिचार |
शरीर बनाया नहीं जा सकता, उसे केवल अनुभव किया जा सकता है और अनुभव कराया जा सकता है | यह अपने आप में अनूठा कार्य है।
विचार को अनुभव नहीं किया जा सकता .... इसे केवल निर्मित किया जा सकता है और इसकी व्याख्या की जा सकती है | इसे अनुभव करने के लिए सापेक्ष दुनिया (भौतिक संसार, शरीर) की आवश्यकता होती है।
आत्मा वह सब कुछ है जो जीवन को शरीर और विचार प्रदान करता है ।
शरीर के पास कुछ बनाने की शक्ति नहीं है, कुछ करने की शक्ति का भ्रम अवश्य है । यह भ्रम ही अत्याधिक हताशा का कारण होता है । शरीर विशुद्ध रूप से एक प्रभाव है, जिसके पास उद्देश्य या निर्माण की शक्ति नहीं है ।


यह सब जानकारी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे ब्रह्मांड को देखने का आपका नजरिया बदल जाता है, और तब आप अपनी वास्तविक इच्छानुसार हर चीज की योजना बना सकते हैं ।

अनुवाद - http://peacefulwarriors.net/nothing-is-solid-this-is-the-world-of-quantum-physics/

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