पाकिस्तान में अधिकार विहीन हिंदू - विवाह की भी कोई कानूनी मान्यता नहीं |

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की क्या स्थिति है, इसका जीता जागता उदाहरण है, हिंदू विवाह विधेयक पारित नहीं किया जाना । सवाल उठता है कि फिर भ...


पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की क्या स्थिति है, इसका जीता जागता उदाहरण है, हिंदू विवाह विधेयक पारित नहीं किया जाना । सवाल उठता है कि फिर भारत में मुस्लिम अल्पसंख्यकों के लिए विशेष क़ानून क्यों? 

हिंदू विवाह विधेयक पारित करने में पाकिस्तान को हिचकिचाहट क्यों है ? पढ़िए हमजा अमीर की “The Quint” में 14 जुलाई 2015 को प्रकाशित विशेष रिपोर्ट का हिन्दी अनुवाद :: 

यद्यपि पाकिस्तान सरकार अल्पसंख्यकों को अपना नागरिक तो मानती है, किन्तु पाकिस्तान के संविधान में अल्पसंख्यकों के जन्म और शादी के पंजीकरण को विनियमित करने के लिए कोई तंत्र नहीं है । 

पाकिस्तानी हिंदू इस विसंगति से सबसे अधिक प्रभावित हैं । इसके चलते वे कट्टरपंथी समूहों द्वारा शोषण, उपेक्षा, और अस्वीकृति के शिकार होते हैं, उनके साथ अमानवीय व्यवहार होता हैं, हिन्दू महिलाओं के अपहरण और बलात्कार होते हैं, उनके जबरन विवाह कर उन्हें धर्मांतरण के लिए विवश किया जाता है ।
हिंदू विवाह विधेयक आम सहमति के नाम पर लटका हुआ है 

लगातार तीन बार 2008, 2011 और 2012 के असफल प्रयासों के बाद; पाकिस्तान की सरकार एक बार फिर संसद में विचारार्थ प्रस्ताव लाने जा रही है । किन्तु हिंदू विवाह विधेयक, संवैधानिक कानून तभी बनेगा जब इस पर नेशनल असेंबली के सदस्यों में आम सहमति हो । 

नेशनल असेंबली की कानून, न्याय और मानव अधिकारों संबंधी स्थायी समिति के प्रमुख चौधरी मुहम्मद बशीर विर्क पहले पाकिस्तान मुस्लिम लीग के डॉ दर्शन , नवाज (पीएमएल-एन) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के रमेश लाल द्वारा विगत वर्ष प्रस्तुत विधेयक की समीक्षा करेंगे । 

विधेयक का भाग्य अभी भी अधर में 

* हिंदू विवाह विधेयक 2008, 2011 और 2012 में पाकिस्तानी संसद में अमान्य होने के बाद एक बार फिर उसी परीक्षा का सामना करेगा । 
** कानूनी दस्तावेज के अभाव में पाकिस्तान में हिंदुओं के लिए विरासत और गोद लेने की भी बेहद जटिल प्रक्रिया है। 
*** यदि विधेयक पाक सरकार द्वारा अनुमोदित भी हो जाए तो रूढ़िवादी मुस्लिम मौलवियों की उग्र प्रतिक्रिया की आशंका है ।

प्रस्तावित हिंदू विवाह विधेयक का उद्देश्य पाकिस्तानी हिंदूओं के जन्म, विवाह और तलाक को विनियमित करने के लिए आवश्यक नियमों और विनियमों को स्थापित करना है।

वर्तमान में, पाकिस्तान के हिंदू अल्पसंख्यकों के पास अपनी वैवाहिक स्थिति को साबित करने का कोई कानूनी सबूत नहीं होता | अर्थात हिन्दू पाकिस्तानी देश या विदेश में कहीं भी अपनी शादी को प्रमाणित नहीं कर सकते ।

इसके अतिरिक्त हिंदू महिलाओं को अपने मृतक पति के शरीर का दावा करने में भी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कोई कानूनी दस्तावेज या शादी के प्रमाण पत्र न होने के कारण पत्नी या कानूनी वारिस के रूप में बच्चों की पहचान का संकट होता है, साथ ही विरासत, गोद लेने और अन्य विवाह संबंधी मुद्दे भी जटिल हो जाते हैं ।

हिंदू समुदाय का एक बहुत बड़ा वर्ग, विशेष रूप से महिलाओं के पास उनकी वैवाहिक स्थिति या पहचान साबित करने के लिए बुनियादी दस्तावेज नहीं होते । इसलिए वे विरासत, पुनर्विवाह, तलाक, बच्चों को गोद लेने और शादी से मुक्ति जैसे कानूनी अधिकारों से वंचित रह रहे हैं। इस कानून से शादी और उसके विवाह संबंधी कानूनी अधिकारों को संस्थागत स्वरुप मिल जाएगा। यह अधिनियम उन लोगों पर लागू होगा जिसका धर्म हिन्दू है |

(- बिल के 'उद्देश्यों और कारणों का कथन' )

“The Quint” द्वारा जांच की गई तो ज्ञात हुआ कि इस विधेयक में सरकार को पाकिस्तानी हिन्दूओं के विवाह और तलाक का रिकॉर्ड रखने के लिए एक रजिस्ट्रार की नियुक्ति का सुझाव दिया गया है ।

आखिर विधेयक अटक क्यों रहा है?

पाकिस्तान हिंदू काउंसिल (पीएचसी) के अध्यक्ष व पाकिस्तान नेशनल असेंबली के सदस्य डॉ रमेश कुमार ने हिंदू विवाह अधिनियम 2014 के अनुमोदन को लेकर सरकार द्वारा की जा रही टालमटोल पर गंभीर चिंता व्यक्त की है | 

जबकि हिन्दू मुसलमानों ने एक समय हिंदू विवाह कानूनों, विशेषकर हिंदू महिलाओं के जबरन विवाह जैसे लिपिक विरोधों का मुकाबला करने के लिए, Council of Islamic Ideology (CII) जैसे गैर सरकारी धार्मिक निकाय बनाने का सुझाव दिया था | यह काउंसिल कमसेकम 20 मुस्लिम धार्मिक समुदायों का प्रतिनिधित्व करती है | 

(यहाँ हिन्दू मुसलमानों से लेखक का अभिप्राय संभवतः उन लोगों से है, जो हिन्दू से मुसलमान बन गए हैं |)

इस विधेयक के लिए कानूनी आधार और रुदन करती सामाजिक आवश्यकता एकदम स्पष्ट है, लेकिन विश्लेषकों का मानना ​​है कि पाकिस्तान की संसद को भय है कि रूढ़िवादी मुसलमान विशेषकर पंजाब और सिंध प्रांतों के प्रभावशाली मौलवी इसका विरोध करेंगे ।


पाकिस्तान के अधिकाँश हिंदू सिंध में रहते हैं। लेकिन सिंध की प्रांतीय सरकार विशेष रूप से धीमी है और हिंदू विवाह विधेयक के अनुमोदन या समीक्षा को लेकर कतई अनिच्छुक है।

सिंध में हिंदू महिलाओं को जबरन इस्लाम धर्म में परिवर्तन करने की दर भी सर्वाधिक है । विश्लेषकों का कहना है कि ऐसे धर्मान्तरण का मूल कारण कानूनी सुरक्षा का अभाव है, जिसका लाभ लेकर रूढ़िवादी निहित स्वार्थी तत्वों द्वारा उनका शोषण किया जाता है । 

यद्यपि "हिंदू विवाह अधिनियम 2014 'और' हिंदू विवाह विधेयक" का पाकिस्तानी संसद द्वारा अनुमोदित होते देखने की संभावना बहुत धूमिल है; लेकिन यही आगे बढ़ने का एकमात्र मार्ग है । इस कानूनी गारंटी के बिना, हिन्दू पाकिस्तानियों की सुरक्षा, अधिकार और पहचान खतरे में ही रहेगी, जोकि देश की आबादी के महज 1.6 फीसदी ही शेष बचे हैं । 

(लेखक इस्लामाबाद के एक प्रमुख ब्रोडकास्ट जर्नलिस्ट हैं)

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क्रांतिदूत: पाकिस्तान में अधिकार विहीन हिंदू - विवाह की भी कोई कानूनी मान्यता नहीं |
पाकिस्तान में अधिकार विहीन हिंदू - विवाह की भी कोई कानूनी मान्यता नहीं |
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