माली आतंकवादियों के निशाने पर क्यों ?

आईएसआईएस द्वारा किये गए पेरिस पर हमले के एक सप्ताह के अन्दर कल शुक्रवार को माली की राजधानी बमाको में बन्दूकधारियों ने रैडिसन ब्लू होटल प...

आईएसआईएस द्वारा किये गए पेरिस पर हमले के एक सप्ताह के अन्दर कल शुक्रवार को माली की राजधानी बमाको में बन्दूकधारियों ने रैडिसन ब्लू होटल पर धावा बोल दिया, और 18 लोगों की जान चली गई । माली में इस प्रकार के हमले कोई पहला मामला नहीं है | इसके पूर्व भी पिछले अगस्त में उग्रवादियों ने बमाको के उत्तर-पूर्व में बसे शहर सवारे में एक होटल की 24 घंटे तक घेराबंदी की थी जिसमें पांच संयुक्त राष्ट्र के कर्मचारियों सहित तेरह लोगों की मौत हुई थी ।

आईये एक नजर डालकर समझते हैं माली के हालात -

इन नवीनतम हमलों को लेकर तीन महत्वपूर्ण सवाल उठते हैं:

माली पर हमला क्यों हुआ ?

1.45 करोड़ लोगों का अरबी बोलने वाला देश, माली लंबे समय से इस्लामी आतंकवादियों और विद्रोहियों के निशाने पर रहा है | विशेष रूप से अल्जीरिया, नाइजर और मॉरिटानिया की सीमाओं से लगे माली के उत्तरी क्षेत्रों में आतंक का कहर कुछ ज्यादा ही रहा है । माली का यह उत्तरी भाग अपेक्षाकृत कम आवादी वाला क्षेत्र है, यहाँ गरीबी और कुपोषण है, जबकि दक्षिणी भाग अपेक्षाकृत आर्थिक रूप से समृद्ध है, अतः इन दोनों के वासिंदों में संघर्ष की भावना आमतौर पर देखी जाती है, और यहीं से आतंक की पृष्ठभूमि तैयार होती है ।

माली पश्चिमी अफ्रीका के साहेल क्षेत्र में आता है, जो लंबे समय से आतंकवाद की चपेट में है । साहेल की भौगौलिक स्थिति का विचार करें तो इसके उत्तर में सहारा और दक्षिण में सूडानी सवाना का विशाल रेगिस्तान है । इसका विशाल आकार और खुली सीमा के कारण आतंकवाद, हथियार, ड्रग्स और मानव तस्करी का संचालन करने के लिए यहाँ आतंकवादियों को पूर्ण स्वतंत्रता मिल जाती है।

माली पर 1960 से फ्रेंच औपनिवेशिक शासन रहा तथा महज तीन वर्ष पूर्व मार्च 2012 में उसे आजादी मिली | तबसे ही सरकारी सेना उत्तरी क्षेत्र पर इस्लामी प्रतिद्वंद्वी समूहों से कब्जे की लड़ाई लड़ रही है । जबकि वे समूह लगातार सैन्य तख्तापलट का प्रयास करते रहते हैं ।

माली में सक्रिय आतंकी समूह कौन से हैं?

उत्तरी माली में मुख्यतः पांच प्रमुख इस्लामी उग्रवादी समूह सक्रिय हैं । इन रक्त पिपासु बटालियनों के नाम हैं - अंसार डाइन, पश्चिम अफ्रीका में एकता और जिहाद के लिए आंदोलन Movement for Unity and Jihad in West Africa (MUJAO), इस्लामी मघरेब में अल कायदा Al-Qaeda in the Islamic Maghreb (AQIM),और अज़वाद के लिए इस्लामिक मूवमेंट Islamic Movement for Azawad (IMA) ।

इन अर्ध खानाबदोश विद्रोही समूहों को पुराने समय से तुरेग्स कहा जाता है । माली का उत्तरी पहाड़ी क्षेत्र इनके प्रभाव में है । मजे की बात यह है कि इन सभी समूहों में भी कोई तालमेल नहीं है, किन्तु ये सभी माली सरकार के लिए तो संकट हैं ही ।

अल-कायदा की उत्तर अफ्रीकी विंग AQIM इन सभी पांच इस्लामी समूहों को एकजुट करने को सक्रिय है और उसे ही सबसे ताकतवर भी माना जाता है । अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, AQIM साहेल के उप सहारा क्षेत्र में फिरौती और हथियारों की तस्करी के माध्यम से धन एकत्रित करता है। इसका गठन 2007 में हुआ और तबसे अब तक यह 12 विदेशियों का अपहरण कर चुका है, तथा उनसे फिरौती की रकम ऐंठ चुका है | यही कारण है कि इस क्षेत्र में विदेशी उद्यम भी हतोत्साहित है । इस समूह ने स्पेन और फ्रांस में बभी अपनी सबसे महत्वपूर्ण घोषणा की है "दुश्मन भगाओ ।"

इसका घोषित मुख्य उद्देश्य है अल्जीरिया, लीबिया, माली, मॉरिटानिया, मोरक्को, और ट्यूनीशिया की सरकारों को उखाड़ फेंकना, जो इनकी नजर में धर्मद्रोही है। 2003 में इराक युद्ध के दौरान इसके सदस्य अमेरिका के खिलाफ लड़ने के लिए शामिल हुए थे | शरीयत, इस्लामी कानूनी प्रणाली के आधार पर कट्टरपंथी शासनों स्थापित कर इस्लामी कानून लागू करना यही है AQIM का लक्ष्य ।

विशेष बात यह है कि AQIM ने अभी तक यूरोप या अमेरिका पर हमला नहीं किया है। यह अलग बात है कि इसने फ्रांस में फ्रेंच व्यंग्य पत्रिका चार्ली हेब्दो पर हुए हमलों की प्रशंसा की थी | अतः यूरोप में सक्रिय आतंकी समूहों से उसकी सहानुभूति समझी जा सकती है ।

अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की स्थिति क्या है ?

माली सरकार के खिलाफ विद्रोह शुरू करने के लिए अल-कायदा से जुड़े सेनानियों ने शुरू में तो अल्पसंख्यक विद्रोही समूह तुरेग्स की मदद ली, किन्तु जल्द ही AQIM ने अपने शरीयत कानून के अतिवादी संस्करण को शुरू करने और महिलाओं के अधिकारों को सीमित करने के लिए उन्हें भी बाहर कर दिया ।

अब हालत यह है कि दसियों हजार लोग उत्तरी माली से पलायन कर अल्जीरिया और नाइजर के पड़ोसी देशों तथा दक्षिणी माली में पहुँच रहे हैं, जिसके कारण शरणार्थी संकट पैदा हो गया है | एमनेस्टी ने इसे 1960 में फ्रेंच से आजादी के बाद सबसे खराब संकट बताया है।

दिसंबर 2012 में पश्चिमी देशों ने उत्तरी माली की खतरनाक स्थिति के बारे में प्रतिक्रिया व्यक्त की। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने MINUSMA के नाम से माली में एक सैन्य शांति मिशन, अधिकृत किया । जनवरी 2013 में बामाको की सरकार ने विद्रोहियों से निबटने के लिए फ्रांस से तत्काल सैन्य सहायता का अनुरोध किया।

दक्षिणी माली की सरकार को भय था कि आतंकवादी बामाको तक पहुंच सकते हैं | उसके बाद फ्रांसीसी नेतृत्व वाली सेना ने धीरे-धीरे, आतंकवादी नियंत्रण के गाओ, किदल और टिम्बकटू आदि उत्तरी प्रदेशों को पुनः अपने कब्जे में लिया । इस समय भी लगभग 1,000 फ्रांसीसी सैनिक माली में हैं। इसके बाद भी अपने क्षेत्रों को वापस पाने के लिए तुरेग्स और इस्लामी समूह लगातार जूझते रहते हैं ।

आधार - http://www.msn.com/en-in/news/world/why-did-militants-target-mali/ar-BBnfCBd?li=AAaeRVN&ocid=UP97DHP

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