एक विधवा महिला पुष्पलता राठौड़ उर्फ़ गुडिया से सोलर दीदी बनने की की प्रेरणादायी सत्य कथा

पेचकस-प्लास जैसे तमाम सामानों से भरा बैग लिए गुड़िया का स्कूटर, गाँव की गलियों से गुज़रता हुआ जब किसी घर के बाहर रुकता है, तो उस घर के लो...


पेचकस-प्लास जैसे तमाम सामानों से भरा बैग लिए गुड़िया का स्कूटर, गाँव की गलियों से गुज़रता हुआ जब किसी घर के बाहर रुकता है, तो उस घर के लोगों में खुशी की लहर दौड़ जाती है ! खुशी इसलिए क्योंकि अब उनके घरों में रोशनी आएगी, उनका चूल्हा जलेगा !

गुड़िया (28 वर्ष) ग्रामीणों के घर-घर जाकर सोलर लाइटें, सौर ऊर्जा की मदद से चलने वाला बिना धुंए का चूल्हा, पंखा आदि की देखरेख करती है ! ये सौर लाइटें गैर सरकारी संस्था द्वारा गाँवों के अंधेरे को दूर करने का प्रयास हैं और इन्हें कम दरों पर उपलब्ध कराया जाता है ! 

गुड़िया उदाहरण है ग्रामीण भारत की महिलाओं में आ रहे उस बदलाव का, जो कई बार अनदेखा रह जाता है ! दो बच्चों की माँ गुड़िया का, एक उदास लड़की से आत्मविश्वास से भरी सामाजिक कार्यकर्ता बनने का सफर सीख देने वाली तमाम कहानियों से भरा है ! सोलर दीदी ने अपनी सच्ची मेहनत और लगन की बदौलत सोलर मैकेनिक का रुतबा हासिल किया है !

गुड़िया राठौङ कानपुर के विधानु इलाके के हड़हा गांव की रहने वाली थीं ! उनकी फतेहफुर में शादी हुई ! हालांकि शादी के बाद स्थिति बहुत अच्छी थी, ऐसा नहीं कहा जा सकता है ! कहते हैं मुसीबत अकसर एक ही साथ ही हर तरफ से आती है ! आज से चार साल पहले उनके पति की मौत हो गई ! पति की मौत के बाद अपने दो बच्चों के साथ गुड़िया का ससुराल में रहना दिनो दिन मुश्किल होता जा रहा था ! इसी दौरान गुड़िया ने फैसला किया कि वो अपने बच्चों की अच्छी परवरिश ससुराल में रहकर नहीं दे पाएंगी ! ऐसे में रास्ता एक ही था मायके का ! गुड़िया अपने बच्चों को लेकर मायके आ गईं ! मायके आकर उन्होंने एक और फैसला किया ! फैसला आत्मनिर्भर बनने का ! 

''पति जब नहीं रहा तो मायके आ गए, यहीं लड़का हमारा दुनिया में आया ! हमें किसी का सहारा नहीं चाहिए था, तो चार महीने के अपने लड़के को छोड़कर सिलाई का काम सीखने जाते ! सात-आठ महीने तक सीखा, फिर कानपुर शहर में ही टेलर की दुकान पर काम करने लगे", गुड़िया ने बताया कानपुर की जिस जगह गुड़िया टेलरी सीखने जाती थी, वो उनके गाँव से लगभग 15 किमी दूर थी !

सिलाई के काम के दौरान ही एक बार गुड़िया की मुलाकात भारती सचान (40 वर्ष) नामक सामाजिक कार्यकर्ता से हुई ! भारती कानपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में गाँवों के चौमुखी उत्थान पर काम करने वाली गैर सरकारी संस्था 'श्रमिक भारती' की कार्यकर्ता हैं ! जब भारती के काम के बारे में पता चला तो गुड़िया ने भी उनके साथ शामिल होने की जि़द की, ''भारती दीदी से हमने सीधे कहा कि हमें अपने साथ रख लीजिए ! उन्होंने पूछा क्या-क्या काम कर पाओगी ?"

गुड़िया के पास भारती के इस सवाल का उस समय तो कोई जवाब नहीं था, लेकिन उसने भारती को भरोसा दिलाया की जिस भी तरह का काम हो, वो सीख सकती है ! इसके बाद गुड़िया ने ग्रामीण विकास के मुद्दों को जाना और संस्था के साथ गाँव-गाँव जाकर स्वयं सहायता समूह की बैठकें आयोजित करवाना शुरू किया ! अपनी मेहनत से अगले एक साल में उसने बीस से ज्यादा बैठकें की, जिनके लिए उसे एक हज़ार रुपए मिले !

ये हज़ार रुपए गुड़िया जैसी एक बेरोज़गार ग्रामीण महिला के लिए आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ाए गए कदम का पहला ईनाम था ! इन्हें पाकर उसकी खुशी का हिसाब नहीं रहा ! ''मैं कुछ नहीं थी, गाँव की एक बेरोज़गार लड़की थी, तब से अब तक में बहुत फर्क है ! अब हम अपने पैरों पर खड़े हैं" !

आज गुड़िया को क्षेत्र के सभी लोग जानते हैं, उसका सम्मान करते हैं ! गाँव के लोगों ने भी गुड़िया की मेहनत देखी है, साइकिल से लेकर स्कूटर तक के उसके सफर में साथ रहे हैं इसीलिए वे उसको 'सोलर वाली दीदी' कहने लगे हैं !

गुड़िया को सौर ऊर्जा को गाँव-गाँव पहुंचाने और उसे सुचारू रखने के काम के लिए श्रमिक भारती संस्था से चार हज़ार रुपए मासिक तनख़्वाह और मोबाइल व पेट्रोल के अन्य भत्ते मिलते हैं ! इससे वे न सिर्फ अपने मायके को आर्थिक समर्थन देती है बल्कि वर्तमान में छह साल की अपनी बच्ची और तीन साल के अपने बच्चे को अच्छे स्कूल में पढ़ा रही है !

योजना जिसके तहत काम कर रही गुडिय़ा 

नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों पर शोध और देश भर में उनका विस्तार करने वाली राष्ट्रीय स्तर की संस्था 'टेरी' और 'श्रमिक भारती' मिलकर कानपुर के गाँवों में सौर ऊर्जा के प्रयोग को प्रोत्साहित करने के लिए कार्यक्रम चला रहे हैं ! इस पूरे कार्यक्रम के तहत इच्छुक ग्रामीणों को बहुत सस्ती दरों पर सौर ऊर्जा की एक पूरी किट दी जाती है ! एक किट में एक सोलर पैनल, दो एलईडी बल्ब, एक मोबाइल चार्जर और एक उत्तम चूल्हा देते हैं ! उत्तम चूल्हा इस पूरे किट की सबसे खास वस्तु है, क्योंकि यह चूल्हा टेरी द्वारा ऐसी तकनीक से बनाया गया है कि इससे धुंआ नहीं उठता !

अपने दम पर अकेले एक महिला का इस तरह से दर्जन भर गांवों में काम करना किसी पर्वत पर चढ़ने से कम नहीं है ! शहरों में चाहे जितनी सुविधाएं हो फिर भी आप ने नहीं देखा होगा कि कोई महिला घर-घर जाकर बिजली या सोलर से जुड़ी समस्याओं को दूर करती हों ! गुड़िया उर्फ सोलर दीदी की हिम्मत सिर्फ तारीफ के लायक ही नहीं बल्कि प्रेरणादायक है ! क्रांतिदूत परिवार दीदी की मेहनत और लगन को सलाम करता है !

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क्रांतिदूत: एक विधवा महिला पुष्पलता राठौड़ उर्फ़ गुडिया से सोलर दीदी बनने की की प्रेरणादायी सत्य कथा
एक विधवा महिला पुष्पलता राठौड़ उर्फ़ गुडिया से सोलर दीदी बनने की की प्रेरणादायी सत्य कथा
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