सिंधिया राजवंश - सकारात्मक प्रतिस्पर्धा पर पारस्परिक विरोध का ग्रहण !

आजादी के पूर्व शिवपुरी ग्वालियर रियासत की ग्रीष्मकालीन राजधानी हुआ करता था | ग्वालियर के पूर्व नरेश कैलाशवासी महाराज माधवराव सिंधिया प्रथम...




आजादी के पूर्व शिवपुरी ग्वालियर रियासत की ग्रीष्मकालीन राजधानी हुआ करता था | ग्वालियर के पूर्व नरेश कैलाशवासी महाराज माधवराव सिंधिया प्रथम ने ही एक अनजान से गाँव सीपरी को शिवपुरी में रूपांतरित किया | उनके कार्य काल में शहर तो शहर जंगलों में भी आवागमन के लिए इतनी अच्छी सडकों का जाल बिछाया गया कि लगभग सौ वर्ष बीत जाने के बाद भी वे सड़कें आज विद्यमान हैं | उस जमाने में शिवपुरी के दो बत्ती कहे जाने वाले चौराहे पर गौमुख से चौबीसों घंटे पेय जल का प्रवाह होता रहता था | हैरत की बात है कि यह पानी व्यर्थ नहीं जाता था, बल्कि साईफन सिस्टम से नजदीकी गूजर तालाब में जाता था | 

स्व. माधवराव प्रथम के कार्यकाल में ही राजस्थान के अनेक नामचीन धनपतियों को शिवपुरी लाकर बसाया गया और यहाँ व्यापार व्यवसाय प्राम्भ हुआ | स्थानीय चिंताहरण मंदिर पर सदाव्रत चालू हुआ, जहां कोई भी व्यक्ति भोजन सामग्री प्राप्त कर सकता था | ताल तलैयों की तो गिनती ही नहीं थी | देखते ही देखते शिवपुरी के प्राकृतिक सौन्दर्य में शिवपुरी नगर की सुन्दरता ने चार चाँद लगा दिए | दुनिया के दूसरे शहर वर्षाकाल में गंदे होते हैं, किन्तु शिवपुरी अपवाद थी | इस शहर की पक्की सड़कें बारिश के मौसम में धुलकर कंचन की तरह चमकने लगती थीं | 

स्वाभाविक ही शिवपुरी के जनमानस पर सिंधिया वंश की छाप गहरी है | लेकिन समय के प्रवाह में इस वंश की नई पीढ़ी में घमासान शुरू हुआ | मनोमालिन्य की शुरूआत हुई आपातकाल से | जब श्रीमती इंदिरागांधी ने अपनी व्यक्तिगत नाराजगी के चलते राजमाता श्रीमंत विजयाराजे सिंधिया को दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंदी रखा और उनके एकमात्र पुत्र स्व. माधवराव द्वितीय गिरफ्तारी से बचने के लिए अपनी ससुराल नेपाल चले गए | इतना ही नहीं तो 1977 के चुनाव में माधवराव जी कांग्रेस समर्थित निर्दलीय प्रत्यासी के रूप में शिवपुरी ग्वालियर संसदीय क्षेत्र से चुनाव लडे, जबकि राजमाता ने जनता पार्टी प्रत्यासी के रूप में गुना संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ा | 

बाद में 1980 में माधवराव जी सीधे तौर पर कांग्रेस में शामिल हो गए और यहीं से सिंधिया वंश दो राजनैतिक भागों में विभक्त हो गया, जो आज तक चला आ रहा है | पारिवारिक विभाजन के बाद भी सिंधिया राजघराने में अपने पूर्वजों द्वारा विकसित की गई शिवपुरी के विकास की सकारात्मक प्रतिस्पर्धा रही | किन्तु पहली बार राजवंश के वर्तमान मुखिया कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआ यशोधरा राजे जी सिंधिया के मध्य जुबानी जंग देखी जा रही है। 

विगत दिनों कांग्रेस कार्यालय के शुभारंभ कार्यक्रम के दौरान श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शिवपुरी शहर की विकास के योजनाओ में लेटलतीफी पर अपनी बुआ और मध्यप्रदेश सरकार में उद्योग मंत्री यशोधरा राजे जी पर निशाना साधते हुए कहा कि मेरी सरकार होती तो में जनता से योजना पूरी करने के लिए समय नही मांगता। 

उन्होंने यह व्यंग इसलिए किया क्योंकि दो दिन पूर्व ही यशोधरा जी ने अपने दोदिवसीय दौरे में शिवपुरी की जनता से जलावर्धन योजना पूरी होने के लिए 6 माह और र्धर्य रखने की अपील की थी । श्रीमंत यशोधरा राजे जी ने भी अविलम्ब पलटवार करते हुए पूछा कि मैंने तो जनता से सिर्फ 6 माह ही मांगे हैं, वे तो आठ साल तक केंद्र में मंत्री रहे, उन्होंने क्या किया । बात यहीं पर ख़तम नहीं हुई, ज्योतिरादित्य जी ने भी अपने द्वारा प्राम्भ कराये गए कामों की फेहरिस्त गिना डाली, जिनमें वे कार्य भी सम्मिलित थे, जिनके लिए स्वयं यशोधरा राजे जी लगातार सक्रिय रहीं | आज भी मंत्री के रूप में उन्होंने लगातार शिवपुरी क्षेत्र के विकास के लिए कोई कोरकसर नहीं उठा रखी है |

ध्यान देने योग्य बात यह है कि आजकल शिवपुरी जलावर्धन योजना व सीवर लाईन प्रोजेक्ट को लेकर सडकों की खुदाई के कारण आमजन बेहद परेशान है | इसके मूल में जहां नौकरशाही की ठेकेदारों से मिली भगत है, तो वहीं कुछ हद तक आवश्यकता व अनिवार्यता भी है | आखिर हर बसंत के पहले पतझर भी आता ही है | आज तो स्थिति यह है कि शिवपुरी की पेयजल समस्या के कारण लोग शिवपुरी छोड़ जाने की बात करने लगे हैं, आगे चलकर जब परियोजना  पूर्ण होगी, तब उसका लाभ भी जनसामान्य को ही मिलेगा | साथ ही पुरानी सडकों के स्थान पर चमचमाती सड़कें भी | यशोधरा जी की सक्रियता से लग भी रहा है कि यह सपना जल्द ही पूरा भी होगा | और शायद यही सांसद ज्योतिरादित्य जी को आभास भी हो गया है, अतः वे श्रेय की दौड़ में कूद पड़े है |

खैर भाजपा की नेता श्रीमंत यशोधरा जी के स्थान पर वापस कांग्रेस क्षत्रप ज्योतिरादित्य जी की बात करते हैं | ध्यान देने योग्य बात यह है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया बीजेपी प्रत्याशी के मुकाबले गुना-शिवपुरी संसदीय क्षेत्र से तो चुनाव जीत गए थे पर शिवपुरी विधानसभा क्षेत्र में वे हारे थे। सिंधिया ने ऐसा कभी सपने में नही सोचा होगा,और यह हार बार-बार उनके सीने में चुभती भी होगी | शायद यही कारण है कि वे आजकल कुछ ज्यादा ही सक्रिय हो गए हैं | 

इतना ही नहीं तो कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया इन दिनों बदले हुए अंदाज में भी नजर आ रहे है | उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र में पैदल यात्रा कर आदिवासी महिला के घर पर भोजन किया, तो एक जगह पर वह महिलाओं के साथ पूड़ी बेलते हुए भी नजर आए |


सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने निर्धारित कार्यक्रम के तहत मंगलवार को खोड़ सेक्टर के 6 गांवों की पदयात्रा पर निकले थे। इस दौरान वे जब ग्राम पाली पहुंचे तो गांव में बुजुर्ग भूरी आदिवासी के घर जा पहुंचे और वहां भूरी को खाना पकाते देखा तो खाना खाने की इच्छा जाहिर कर दी। इस पर आदिवासी महिला ने घर में पकी ज्वार की रोटी, चने की भाजी और गुड़ सांसद सिंधिया को परोसा, जिसे उन्होंने बड़े चाव से खाया।

पूर्व केन्द्रीय मंत्री व सिंधिया ने अपने हाथों से बुजुर्ग भूरी को भी भोजन खिलाया। यह नजारा देखकर भूरी की आंखें भर आईं। पदयात्रा के दौरान सांसद सिंधिया करीब 8 किलोमीटर पैदल चले और जब वे ग्राम टीला पहुंचे तो यहां कार्यकर्ताओं के लिए जिस जगह भोजन तैयार हो रहा था, वहां जाकर पूड़ी बेल रहीं महिलाओं के साथ जमीन पर बैठकर कुछ पूडियां भी बेलीं | इस दौरान उन्होंने महिलाओं से बात भी की और उनकी समस्याओं की जानकारी लेकर समाधान करने का भरोसा दिया |

बीते दिनों उद्योग मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने भी इसी खोड क्षेत्र का सघन दौरा किया था, वहीं अब सांसद सिंधिया ने यहां पदयात्रा आयोजित कर सीधे ग्रामीणों से जुड़ने का यह कार्यक्रम बना डाला।

जनता में इन दिनों यह आम चर्चा है कि सिंधिया राजवंश की सकारात्मक प्रतिस्पर्धा पर यह पारस्परिक मनोमालिन्य का ग्रहण क्यों और कैसे लग गया ? साथ ही ज्योतिरादित्य जी की सक्रियता ने भाजपा से ज्यादा दूसरे धड़े के कांग्रेसियों के पेट में ज्यादा दर्द पैदा कर दिया है | न केवल अंचल के बल्कि समूचे मध्य प्रदेश के कांग्रेस नेताओं में इन दिनों अजीब सी बेचैनी है। वे हैरान और परेशान हैं क्योंकि उन्हें उनके सपनों के बिखरने का डर सताने लगा है। वे सोच रहे है कि कहीं हाईकमान ने ज्योतिरादित्य को भावी सीएम उम्मीदवार के रूप में प्रोजेक्ट करने का इरादा तो नहीं कर लिया है ।

बैसे 2013 में भारतीय जनता पार्टी की फायरब्रांड नेता उमा भारती ने तो यहाँ तक कहा था कि कांग्रेस में राहुल गांधी के मुकाबले ज्योतिरादित्य सिंधिया बेहतर नेता हैं। इंदिरा गांधी के पोते और राजीव गांधी के बेटे होने के अलावा राहुल में कोई खास विशेषता नहीं है। राहुल गांधी उत्तर प्रदेश में जहां-जहां गए थे, वहां कांग्रेस की जमानत जब्त हो गई थी।

तो कुल मिलाकर लब्बोलुआब यह है कि शिवपुरी इस बार प्रांतीय और केन्द्रीय राजनीति की धुरी बन सकता है | लेकिन क्या युवराज राहुल के सामने महाराज ज्योतिरादित्य ????????


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क्रांतिदूत: सिंधिया राजवंश - सकारात्मक प्रतिस्पर्धा पर पारस्परिक विरोध का ग्रहण !
सिंधिया राजवंश - सकारात्मक प्रतिस्पर्धा पर पारस्परिक विरोध का ग्रहण !
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