बिहार में नीतीश का जंगल राज, बेखबर यूपी घूम रहे सरताज !

एक हफ्ते में दो हत्याओं से बिहार दहल गया है । गया में पिछले दिनों हुई छात्र आदित्य की हत्या का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि शुक्रवार...



एक हफ्ते में दो हत्याओं से बिहार दहल गया है । गया में पिछले दिनों हुई छात्र आदित्य की हत्या का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि शुक्रवार को एक बार फिर सीवान में बेखौफ बदमाशों ने मौत का खूनी खेल खेला और नामी गिरामी अखबार हिन्दुस्तान के वरिष्ठ पत्रकार को गोलियों से भूनकर उन्हें गहरी नींद सुला दिया । राजदेव रंजन की शुक्रवार देर शाम उस वक्त गोली मारकर हत्या कर दी गई जब शाम करीब 7:45 बजे वह अपनी मोटरसाइकिल से सदर पुलिस थाना क्षेत्र के तहत आने वाले स्टेशन रोड स्थित फल बाजार के पास से गुजर रहे थे।

रंजन कुछ समझ पाते उससे पहले ही हमलावरों ने उनपर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं और वह मौके से फरार हो गए। खून से लथपथ रंजन की अस्पताल ले जाने के दौरान मौत हो गई। 

राजदेव रंजन 24 वर्षों से पत्रकारिता कर रहे थे। सीवान सदर प्रखंड के हकाम गांव निवासी राजदेव रंजन काफी गरीब परिवार से थे. स्टूडेंट लाइफ में वे अपने पिता के साथ उनकी घड़ी बनाने की दूकान पर उनके काम में हाथ बताया करते थे. छपरा से वकालत की डिग्री हासिल करने के बाद कुछ दिनों तक उन्होंने सीवान सिविल कोर्ट में वकालत की प्रैक्टिस भी की.

सन 1999 में वे पत्रकारिता में आये और और नवभारत टाइम्स,आर्यावर्त,राष्ट्रीय सहारा में पत्रकारिता करने के बाद 2005 में सीवान हिंदुस्तान के बतौर प्रभारी बने. स्वछंद और स्वतंत्र लेखनी और विचारधारा वाले राजदेव सदैव निर्भीक और निडर पत्रकार रहे और अपने इसी गुण के चलते कल अपराधियों की आंखों के किरकिरी बन चुके थे.

राजदेव रंजन के परिवार में पत्नी, एक बेटा और एक बेटी है. उनके दो भाई हैं जो गांव में खेती करते हैं.

सन 1999 में 13 मई को जब उनकी शादी हुई थी उसी वर्ष अगस्त माह में उनके आवास पर अपराधियों ने हमला बोल उनकी बाइक तोड़ डाली थी और उनकी कनपटी पर रिवाल्वर रख दैनिक अखबार हिंदुस्तान के तत्कालीन ब्यूरो चीफ और उनके रुम पार्टनर प्रो रविंद्र वर्मा को गोली मार दी थी.

इस घटना में अपराधियों की गोली लगने से दैनिक प्रदीप के पत्रकार रह चुके हिंदुस्तान अखबार के तत्कालीन ब्यूरो चीफ प्रो रविंद्र वर्मा छह माह तक पीएमसीएच में कोमा में थे. अब पत्रकारिता छोड़ दिल्ली में रह रहे हैं.

हत्या के मामले में पुलिस 4 संदिग्ध लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। पुलिस इस मामले का जल्द ही खुलासा करने का दावा कर रही है। राजदेव रंजन की हत्या के मामले में गैंगस्टर शहाबुद्दीन की संलिप्तता भी जाहिर हो रही है. पुलिस ने इस मामले में राजद के पूर्व सांसद शहाबुद्दीन के करीबी उपेंद्र सिंह को हिरासत में लिया है. हिन्दुस्तान टाईम्स के अनुसार राजदेव रंजन पिछले कुछ समय से 2014 में हुए श्रीकांत भारती हत्याकांड केस के मामले में छानबीन कर रहे थे और उन्होंने उस हत्याकांड में पूर्व राजद सांसद शहाबुद्दीन की संलिप्तता को लेकर अपने समाचार पत्र में एक रिपोर्ट भी प्रकाशित की थी ! 

स्मरणीय है कि पूर्व सांसद शाहबुद्दीन को सीवान के एक बाहुबली नेता के रूप में जाना जाता है तथा वर्तमान में वह दो भाईयों की ह्त्या के एक प्रकरण में जेल में आजीवन कारावास की सजा का लुत्फ़ ले रहा है ! 

इससे पहले 2005 में भी रंजन पर कुछ अज्ञात लोगों ने जानलेवा हमला किया था, जिसमें उन्हें काफी गंभीर चोटें आई थीं। एक हफ्ते के भीतर दो हत्याओं से सवाल उठ रहे हैं कि क्या बिहार में जंगलराज की वापसी हो रही है

सीवान में पत्रकार की हत्या पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार वाराणसी घूम रहे हैं और उनके राज्य में चौथा स्तंभ ‘‘खतरे में है।’’ हुसैन ने कहा, ‘‘यह जंगलराज नहीं है। यह महाजंगलराज है...उनकी हत्या के बारे में सुनकर दुखी हूं, राजदेव एक निडर पत्रकार थे।’’ 

अब गौर फरमाईये राजनीति की सबसे बेहतरीन उलटबांसी पर - पत्रकार की ह्त्या में शक की सुई किस पर है ? राजद के पूर्व सांसद शाहबुद्दीन पर ! लेकिन राजद नेता व पूर्व केन्द्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह क्या फरमाते हैं, जरा मुलाहिजा फरमाईये -

विधि व्यवस्था को प्राथमिकता मिलना चाहिए ! नीतीश कुमार ड्राइविंग सीट पर बैठे है, उन्हें ऐसी घटनाओं को रोकना चाहिए ! राजद के ही एक अन्य सांसद मोहम्मद तस्लीमउद्दीन तो इनसे भी आगे निकल गए और बोले - 

बिहार में जंगलराज नहीं, महा जंगलराज कायम हो गया है ! यहाँ पत्रकार भी सुरक्षित नहीं हैं ! बिहार सरकार की तुलना में केंद्र सरकार अच्छा काम कर रही है ! अगर राज्य में अपराध रोकना है तो नीतीश को दारू की बोतल से बाहर निकलना होगा ! 

अब आप ही बताईये कि जब सहयोगी दल इतने तल्ख़ हैं, तो वेचारे नीतीश बिहार के बाहर जमीन न तलाशें तो क्या करें ? शायद वे इसीलिए उत्तरप्रदेश के कुर्मी मतदाताओं में अपनी पैठ बनाने की जुगत कर रहे हैं ! प्रधान मंत्री तो दूर की कौड़ी है !

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बिहार में नीतीश का जंगल राज, बेखबर यूपी घूम रहे सरताज !
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