प्रत्येक भारतीय को अपने हिन्दू सांस्कृतिक आधार पर गर्व होना चाहिए - मार्क टुली

लेखक परिचय - (सर विलियम "मार्क " टुली का जन्म 1935 में हुआ | वे बीबीसी , नई दिल्ली के पूर्व ब्यूरो चीफ रहे | उन्होंने जुला...


लेखक परिचय -

(सर विलियम "मार्क " टुली का जन्म 1935 में हुआ | वे बीबीसी , नई दिल्ली के पूर्व ब्यूरो चीफ रहे | उन्होंने जुलाई 1994 में इस्तीफा देने से पहले 30 साल तक बीबीसी के लिए काम किया | टुली 1985 में ब्रिटिश साम्राज्य के आदेश पर अधिकारी बनाये गये और 1992 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया | 2002 में उन्हें नाइट की उपाधि दी गई , और 2005 में उन्हें पद्म भूषण प्रदान किया गया |)

कांग्रेस पार्टी ने जब मुझे पद्मश्री प्रदान किया तब मुझे हैरत हुई | मैं इसे पाने वाला पहला विदेशी पत्रकार था | भारत में राजनीतिक रिपोर्टिंग के अपने चालीस वर्षों में, मैंने हमेशा नेहरू राजवंश की मुखर आलोचना की |

यह ऑपरेशन ब्लू स्टार के साथ शुरू हुआ | मैं उन चुनिन्दा पश्चिमी संवाददाताओं में से एक था जिन्होंने श्रीमती इंदिरा गांधी की आलोचना की | जैसा कि मैं कई बार कह चुका हूँ कि स्वर्ण मंदिर पर हमले, अत्याचार और सैन्य ऑपरेशन के कारण सिखों के सभी वर्गों में जो आक्रोश की भावनाउत्पन्न हुई, उसे कम करना अत्यंत दुष्कर कार्य है | उस समय मेरा मानना था कि हिन्दू भारत की बहुसंख्या भी भले ही खुले तौर पर राजनैतिक रूप सेइंदिरा गांधी के साथ न हो, अल्पसंख्यकों के साथ हुए इस उद्दंड व्यवहार से प्रसन्न थी |

हर कोई जानता है कि मेरी प्रसिद्धि आपातकाल के दौरान इंदिरा गांधी द्वारा मुझे कैद करने के प्रयत्न और अंत में कुछ समय के लिए भारत से बाहर फेंकने के कारण हुई | परिणाम स्वरुप सम्पूर्ण भारत रेडियो पर मेरे प्रसारण सुनने के लिए आतुर रहने लगा था | उसका कारण यह था कि वह तत्कालीन भारत की आवाज तथा घटनाओं का सही कवरेज था |

जब राजीव गांधी सत्ता में आए तब मुझे लगा कि वह ईमानदारी से राजनीतिक व्यवस्था को बदलने की कोशिश कर रहा था, लेकिन उसे जल्द ही समझ आ गया कि पुरानी व्यवस्था जल्द हिलने वाली नहीं है | जब तमिल टाइगर धनु ने उसे टुकड़े कर उड़ा दिया तब मैंने उसके लिए खेद महसूस किया, हालांकि मैंनेश्रीलंका में उसके मूर्खतापूर्ण साहस की आलोचना की थी | जहां तक सोनिया गांधी का सवाल है, मैंने उस समय उन पर ध्यान नहीं दिया | वह राजीव गांधी की पत्नी थी , किन्तु उसकी मृत्यु के बाद मुझे यह देखकर निराशा हुई कि उन्होंने कांग्रेस पर अधिकार ज़माना शुरू कर दिया, जिससे विवश हो कर मैंने प्रसारण की एक श्रंखला प्रारम्भ की “नेहरू राजवंश”, जिसमें मैंने कहा कि “यह अत्यंत दुखद है कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस एक परिवार पर पूरी तरह से निर्भर हो गई है, एक सम्पूर्ण पार्टी का एक व्यक्ति के समक्ष आत्मसमर्पण दुखद है” | सवाल पूछा जा सकता है कि सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री पद के लिए अपनी उम्मीदवारी का औचित्य साबित करने के लिए क्या दावा प्रस्तुत किया था?

“एक देश चलाना एक कंपनी चलाने की तुलना में कहीं अधिक जटिल है |प्रशिक्षित होना किसी भी पेशे की प्राथमिक आवश्यकता है, विशेषकर राजनीति में तो और अधिक" . मैंने सुना कि सोनिया गांधी मेरे इस प्रसारण से अप्रसन्नहुईं | उसके बाद राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने उन्हें राजभवन में बुलाया औरजैसा कि हममें से अनेक लोग काफी समय से जानते हैं, उन्होंने सोनिया को भारत के प्रधानमंत्री बनने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया क्योंकि सोनिया के पास इतालवी और भारतीय दोनों पासपोर्ट, थे | इसके बाद भी वह पर्दे के पीछेसे भारत की सर्वोच्च नेता बन गईं | तब मैंने कहा कि " मरणासन्न औरनेतृत्वविहीन कांग्रेस पार्टी जन्म से इतालवी और बपतिस्मा द्वारा रोमन कैथोलिक सोनिया गांधी पर आश्रित है" |

उसके लिए सोनिया गांधी ने मुझे कभी माफ नहीं किया | आज भी मैंअसंदिग्ध रूप से कह सकता हूँ कि जब इतिहास लिखा जाएगा तब कांग्रेस और भारत दोनों के लिए उनके प्रभाव का कार्यकाल, भारी भ्रष्टाचार के अंधेरे युग,लोकतंत्र के निरंकुशता में रूपांतरण, और एक ही व्यक्ति , एक गैर भारतीय और मेरे जैसे एक ईसाई के हाथों में , प्रच्छन्न तानाशाही के रूप में अंकित किया जाएगा |

अंत में, भारतीय हिंदुओं , माफ करना इस देश के बुद्धिजीवी वर्ग के रूप में सबसे अधिक हिंदू है किन्तु इस तथ्य ने मुझे हैरत में डाला हुआ है - मेरे यौवनकाल में, मैंने इस देश के 85 करोड़ और पूरी दुनिया के एक अरब हिंदुओं को नीचा दिखाया और इसके बाद भी वे मुझे इतना प्यार करते हैं | मुझे आज पछतावा है : मैं दिल की गहराई से कहता हूँ कि भारत को गर्व और विश्वास के साथयह कहने में सक्षम होने की आवश्यकता है कि " हां , हमारी सभ्यता का आधार हिंदू है |"

इतने लम्बे समय तक हिंदू धर्म के बचे रहने का कारण यह है कि यह अत्यंत प्रतिभाशाली है जो खड़े हो कर लड़ता नहीं है | यह समय के साथ परिवर्तित होता है आधुनिकता को स्वीकारता है जोकि निश्चित ही वैज्ञानिक और उचित तरीका है | मेरा विश्वास है कि हिन्दू धर्म ही वास्तव में , इस सहस्राब्दी का धर्मप्रमाणित हो सकता है |

हिंदुओं को धर्मनिरपेक्षता के नाम पर , अब भी मुसलमानों और ईसाइयों का गुलाम बनाए रखा गया है, सुविधायें और नकद प्रोत्साहन बहुत से मुसलमानों और ईसाइयों को दिया जाता है | हिन्दू मंदिरों पर कर लगाकर वह पैसा हज यात्रा के लिए सब्सिडी के रूप में तथा मुस्लिम शिक्षकों और मुसलमान इमामों को वेतन के रूप में दिया जाता है | ऐसी कोई सब्सिडी हिंदू धार्मिक पुजारियों या हिंदू शिक्षकों के वेतन हेतु अथवा हिंदू धार्मिक स्थानों की यात्रा के लिए किसी हिन्दू को नहीं दी जाती | यह तथ्य है कि कांग्रेस धर्मनिरपेक्ष सरकार अमरनाथ यात्रा पर जाने के लिए हिंदुओं के लिए कई बाधाएं पैदा करती है |स्वतंत्रता के 65 वर्ष बाद भी धार्मिक आधार पर इस प्रकार का आरक्षण दिया जाता है, जोकि इस समय तक समाप्त कर दिया जाना चाहिए था | किन्तु यदिआरक्षण या सब्सिडी की आज भी जरूरत है तो यह विशुद्ध आर्थिक आधार पर होना चाहिए अल्पसंख्यकों के आधार पर नहीं | इस तरह के आरक्षण काम की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं | कांग्रेस पार्टी हिंदूओं द्वारा दिए गए टेक्स के पैसेका उपयोग अपने वोट खरीदने के लिए अल्पसंख्यकों को विभिन्न प्रकार के प्रलोभन देने में कर रही है | सरकार में कई लोग जो नाम से हिंदू प्रतीत होते है, किन्तु वास्तव में वे मुसलमान और ईसाई हैं | हिंदुओं को मूर्ख बनाने और सरकार में अधिकाँश हिन्दू दिखाने के लिए यह तरीका अपनाया जाता है |


English translation 
I was surprised when the Congress party gave me a Padma Shri – I am the only foreign journalist to ever get it. For, in my forty years of political reporting in India, I have always been a vocal critic of the Nehru dynasty. Someone even called me recently: “a vitriolic British journalist, who in his old age chose to live back in the land he never approved”.


It started with Operation Blue Star. I was one of the few western correspondents who criticized Indira. As I have said since then numerous times, the attack on the Golden Temple and the atrocities that followed the army operations, produced in all sections of the Sikhs a sense of outrage that is hard today to alleviate. I believed then that the large majority of Hindu India, even if politically hostile to Indira Gandhi, openly identified with – and exulted in – her will to overwhelmingly humble a recalcitrant minority.

As everybody knows, Indira Gandhi helped my fame grow even more, by wanting to imprison me during the Emergency she clamped and finally throwing me out of India for a short while. But the result was that the whole of India tuned in, then and thereafter, to my radio’s broadcasts, ‘The Voice of India’, to hear what they thought was ‘accurate’ coverage of events.

When Rajiv Gandhi came to power, I first believed that he was sincerely trying to change the political system, but he quickly gave-up when the old guard would not budge. I criticized him for his foolish adventure in Sri Lanka, although I felt sorry for him when he was blown to pieces by Dhanu, the Tamil Tiger. It is in Kashmir, though that I fought most viciously against his Govt and subsequent Congress ones for its human right abuses on the Kashmiri Muslims of the Valley.

The Congress Governments tried indeed several times to censor me and the army even took prisoner my Kashmiri stringer, whom I had to rescue by the skin of his teeth. I am also proud that I was the first one to point out then, that the Indian Government had at that time no proof of the Pakistani involvement in the freedom movement in Kashmir. Thus I always made it a point to start my broadcasts by proclaiming that « the Indian Government accuses Pakistan of fostering terrorism», or that “elections are being held in Indian-controlled Kashmir”…

As I was so popular, all the other foreign journalists used the same parlance to cover Kashmir and they always spoke of the plight of the Muslims, never of the 400.000 Hindus, who after all were chased out of their ancestral land by sheer terror (I also kept mum about it).

As for Sonia Gandhi, I did not mind her, when she was Rajiv Gandhi’s wife, but after his death, I watched with dismay as she started stamping her authority on the Congress, which made me say in a series of broadcasts on the Nehru Dynasty: “It’s sad that the Indian National Congress should be completely dependent on one family; the total surrender of a national party to one person is deplorable. You have to ask the question: what claims does Sonia Gandhi have to justify her candidature for prime-ministership?

Running a country is far more complicated than running a company. Apprenticeship is required in any profession — more so in politics”. I heard that Sonia Gandhi was unhappy about this broadcast. Then, after President APJ Abdul Kalam called her to the Raj Bhavan and told her what some of us already knew, namely that for a long time, she had kept both her Italian and Indian passports, which disqualified her to become the Prime Minister of India, she nevertheless became the Supreme leader of India behind the scenes. It is then that I exclaimed: “the moribund and leaderless Congress party has latched onto Sonia Gandhi, who is Italian by birth and Roman Catholic by baptism”.

She never forgave me for that. Yet, today I can say without the shadow of a doubt that when history will be written, the period over which she presided, both over the Congress and India, will be seen as an era of darkness, of immense corruption and of a democracy verging towards autocracy, if not disguised dictatorship, in the hands of a single person, a non Indian and a Christian like me.

Truth will also come out about her being the main recipient for kickbacks from Bofors to 2G, which she uses to buy votes, as the Wikileaks have just shown.

Finally, I am sometimes flabbergasted at the fact that Indians –Hindus, sorry, as most of this country’s intelligentsia is Hindu – seem to love me so much, considering the fact that in my heydays, I considerably ran down the 850 million Hindus of this country, one billion worldwide. I have repented today: I do profoundly believe that India needs to be able to say with pride, “Yes, our civilization has a Hindu base to it.”

The genius of Hinduism, the very reason it has survived so long, is that it does not stand up and fight. It changes and adapts and modernizes and absorbs–that is the scientific and proper way of going about it. I believe that Hinduism may actually prove to be the religion of this millennium, because it can adapt itself to change.
Hindus are still slaves to Muslims and Christians, on the name of secularism, lots of facilities and cash incentives are given to Muslims and Christians.Haj subsidy is given to Muslims for haj yatra, wages to Muslim teachers and Imams are given to Muslims are given by TAXING looting the Hindu temples.
No such subsidy is given to Hindu for going to Hindu religious places or any wages to Hindu religious priests or Hindu teachers. In facts congress secular government creates many obstacles for Hindus for going to Amarnath Yatra. Even after 65 years of independence reservation is given on religious grounds while it should have been abolished by this time.
If at all reservation or subsidy is needed, then it should be purely on economic grunds rather on grounds of minorities. Such reservation affect the quality of work. Congress party giving various kinds of allurements to minorities to buy their votes with Hindu money.
In the government many people are with Hindu names but in fact many are Muslims and Christians with Hindu names to fool Hindus and to show in the government, majority people are Hindus.
Sir William "Mark" Tully (born 1935) is the former Bureau Chief of BBC, New Delhi. He worked for BBC for 30 years before resigning in July 1994. He held the position of Chief of Bureau, BBC, Delhi for 20 years.

Tully was made an Officer of the Order of the British Empire in 1985 and was awarded thePadma Shree in 1992. He was knighted in the New Year Honours 2002, receiving a KBE, and in 2005 he received the Padma Bhushan.

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क्रांतिदूत: प्रत्येक भारतीय को अपने हिन्दू सांस्कृतिक आधार पर गर्व होना चाहिए - मार्क टुली
प्रत्येक भारतीय को अपने हिन्दू सांस्कृतिक आधार पर गर्व होना चाहिए - मार्क टुली
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