खुद जानिए, अपने पिछले जन्म की कहानी – सौरव दुबे

पुन: जन्म में विश्वास रखने वाला प्रत्येक शख्स यह जानना चाहता है कि वो पिछले जन्म में कौन था, कैसा दिखता था, क्या करता था और कहां रहता था...

पुन: जन्म में विश्वास रखने वाला प्रत्येक शख्स यह जानना चाहता है कि वो पिछले जन्म में कौन था, कैसा दिखता था, क्या करता था और कहां रहता था आदि । ये कुछ ऐसे सवाल हैं जिन पर मानव मस्तिष्क में हमेशा प्रश्न चिन्ह ही लगा रहता है । मगर अब इंसान इन सभी सवालों के जवाब खुद तलाश कर सकता है और अपने पिछले जन्म की मानसिक यात्रा करके वर्तमान समय की बहुत सारी समस्याओं को हल कर सकता है, ऐसा दावा पीएलआर थैरेपी से इलाज करने वाले ट्रेनर करते हैं । पीएलआर का मतलब है पास्ट लाइफ रिग्रेशन । जो भारत में कुछ साल पहले ही प्रचलन में आया है, जानकारों की मानें तो इस थैरेपी में विज्ञान और ध्यान का समावेश किया गया है ताकि लाइलाज समस्याओँ से छुटकारा पाया जा सके । पश्चिमी देशों में पास्ट लाइफ रिग्रेशन थैरेपी का चलन काफी बढ़ गया है, मगर यह अलग बात है कि पौराणिक काल में भारतीय ऋषि-मुनी तीनों लोकों और तीनों कालों का हाल आंख बंद करके बता दिया करते थे और इसी तरह झटपट बड़ी-बड़ी समस्याओं का समधान किया करते थे । उस वक्त पास्ट लाइफ थैरेपी नाम का कोई शब्द नहीं हुआ करता था बल्कि योग साधना के माध्यम से दूरदर्शन संभव था । यही नहीं, पास्ट लाइफ रिग्रेशन करने वालों का यह भी कहना है कि अगर सतत अभ्यास किया जाए तो भबिष्य दर्शन करना भी संभव है, उन्होंने इस भबिष्य दर्शन को फ्यूचर लाइफ प्रोग्रेसन नाम दिया है किंतु उसमें अभी कोई खास सफलता नहीं मिली है । दुनिया की आधी से ज्यादा आबादी पुन: जन्म में विश्वास रखती है, दुर्भाग्यवश जब हमें पुन: जन्म से संबंधित कोई प्रमाण नहीं मिलते तो इस बिषय पर ज्यादा सोच विचार करना समय की बर्बादी जान पड़ने लगता है । वैसे बहुत सारी ऐसी कहानियां अखबारों-टीवी समाचार एवं पत्र पत्रिकाओँ में पढ़ने को मिलती हैं जिसमें किसी बच्चे ने खुद के पिछले जन्म का वृतांत सुनाया और पूर्व जन्म के हत्यारे तक को पकड़वाया । कुछ साल पहले एक टीवी चैनल ने इस थैरेपी पर आधारित एक प्रोग्राम भी प्रसारित किया, जो खासा लोकप्रिय हुआ ।

पास्ट लाइफ रिग्रेशन क्या है ? 

पास्ट लाइफ रिग्रेशन में व्यक्ति को मानसिक रूप से पिछले जन्म की यात्रा कराई जाती है, यह काम प्रशिक्षित ट्रेनर द्वारा किया जाता है । भारत के बहुत सारे मनोवैज्ञानिक पास्ट लाइफ थैरेपी से मरीजों का इलाज करते हैं । यह ध्यान जैसा ही है, हिप्नोटिज्म की मोहनिद्रा इसके काफी नजदीक है और हम इसे योग का अंग भी मान सकते हैं । माना जाता है कि हमारे दिमाग के अवचेतन मन में पुराने सभी जन्मों की याददाश्त बंद रहती है और हमारी मौजूदा कुछ समस्याओं के कारण पिछले जन्म से जुड़े हो सकते हैं । जिन्हें सुलझाने के लिए पिछले जन्म को जानना आवश्यक है । अंत में उन समस्याओं और कारण को मानसिक रूप से पिछले जन्म में छोड़कर वर्तमान में आना होता है। मैस्मेरिज्म का ज्ञाता भी मानते हैं कि हमारे अवचेतन मन की शक्ति अपार है और इस अवचेतन मन की शक्ति से किसी भी काल के दृश्य आंख बंद करके देखे जा सकते हैं । यही नहीं, बताया जाता है कि कोई भी व्यक्ति खुद उचित निर्देशों का पालन करके पिछले जन्म की मानसिक रूप से यात्रा कर सकता है किंतु कुछ जानकार इसे बिना प्रशिक्षक के करना जोखिम भरा भी बताते हैं । उनका कहना है कि पिछले जन्म की यह मानसिक यात्रा किसी प्रशिक्षक की देखरेख में ही करना उचित होता है । बाकायदा इसके लिए बहुत सारे प्रशिक्षण संस्थान उपलब्ध हैं, जो पास्ट लाइफ रिग्रेशन का दावा करते हैं । इंटरनेट पर इनके प्रशिक्षण संस्थान की पूरी जानकारी उपलब्ध है ।

पास्ट लाइफ रिग्रेशन के लाभ 

आज के दौर में मल्टी टैलेन्टेड होना कौन नहीं चाहता, हर कोई चाहता है कि वो प्रतिभाओं का धनी हो । पास्ट लाइफ रिग्रेशन की मदद से व्यक्ति की पिछले जन्म की प्रतिभा की स्मृति भी कराई जाती है । जैसे अगर आप पिछले जन्म में कोई कलाकार रहे हो तो फिर संभव है कि वो कला आपको याद आ जाए और आप अपने इस जीवन में उसका लाभ उठा सके । एक हिप्नोथेरेपिस्ट ने बताया कि एक महिला का जवान लड़का किसी हादसे का शिकार होकर मर गया, उसकी मां २ साल तक सदमे में रही । जब किसी तरह का कोई उपाय कारगर नहीं हुआ तो पास्ट लाइफ रिग्रेशन थैरेपी का सहारा लिया गया । जैसा कि हम सभी जानते हैं कि प्रकृति के पास हर सवाल का जवाब होता है, पिछले जन्म की मानसिक यात्रा के बाद महिला को मालूम हुआ कि उसने पिछले जन्म में किसी से कर्ज लिया था और कर्ज देने वाला इस जन्म में उसका लड़का बना था । अत: वो कर्ज वसूलने आया था और एक निश्चित समय बाद इस दुनिया से चला गया । इस पास्ट लाइफ रिग्रेशन सेशन के बाद महिला को संतोष हुआ और अपने लड़के की मौत का कारण जानने के बाद महिला धीरे धीरे सदमे से बाहर आ गई । खास बात ये है कि इस थैरेपी के जरिए बहुत सारे लोगों ने यह तक बताया है कि वो पिछले जन्म में किसी अन्य धर्म के अनुयायी थे इसलिए धर्म से इसका कोई लेना-देना नहीं है । हिप्नोथैरेपिस्ट दावा करते हैं कि पास्ट लाइफ रिग्रेशन से मानसिक ही नहीं बल्कि शारीरिक कष्ट और बीमारियों से भी बचा जा सकता है ।

हिप्नोथिरेपिस्ट के अनुसार पिछले जन्म की मानसिक सैर के लिए इन निर्देशों का पालन आवश्यक है । बिल्कुल शांत माहौल में आंखें बंद करके आरामदायक स्थिति में लेट जाएं अगर सन्नाटे में हवा चलने की हल्की आवाज सुनाई देती है तो चुपचाप शांती से सुनते रहे मस्तिष्क समेत शरीर के सभी अंगों को आराम दीजिए और महसूस कीजिए कि आपका पूरा शरीर बरसों बाद ऐसा आराम कर रहा है कल्पना कीजिए कि आपका अवचेतन मन अति शक्तिशाली होता जा रहा है और आपके आसपास सफेद रोशनी का औरा है अपने ध्यान को पैरों से सिर तक लाइये और स्थिर करने का प्रयास कीजिए, बीच में अगर कोई भी विचार आता है तो उसे त्याग करने का प्रयत्न कीजिए अपनी श्वास पर ध्यान केंद्रित कीजिए और उगता हुआ सूरज अथवा पूर्णमासी का चंद्रमा, समुंदर आदि की कल्पना कीजिए जब कल्पना के चित्र मस्तिष्क पटल पर बनने लगें तो संकल्प लीजिए कि ( मैं निद्रा में नहीं जाऊंगा ) सामर्थ्य और आवश्यकतानुसार मन ही मन उल्टी गिनती गिनिए, गलत हो जाने पर शुरू से गिनिए तर्क-वितर्क को दिमाग में बिल्कुल जगह मत दीजिए, ४०-५० मिनट बाद किसी द्वार की कल्पना कीजिए और सोचिए कि आप उसकी तरफ धीरे धीरे बढ़ रहे हैं, जैसे ही आप दरबाजे के उस तरफ जाएंगे वैसे ही आपका पूर्वजन्म में प्रवेश हो जाएगा । द्वार के दूसरी ओर दिखने वाली पहली वस्तु को आप अपने पिछले किसी जीवन से जुड़ा हुआ समझिए यदि आपको अपने पूर्वजन्म में ऐसा कुछ दिखता है जो कि अत्यंत अशांत करने वाला है, तब आपको वहाँ रुक कर उन सभी भयानक क्षणों को देखते रहने की आवश्यकता नहीं है। यदि आपको पूर्व जन्म की मानसिक यात्रा से वापस आना है तो उसी दरबाजे की परिकल्पना करनी पड़ेगी, जिस दरबाजे से पूर्व जन्म में प्रवेश किया हो यदि आपको कुछ नहीं दिखता है, तब किसी ऐसी चीज़ की कल्पना करिए जिसमें आपको सदा ही मज़ा आता रहा हो, जैसे कि कोई प्रिय शौक, कौशल या यात्रा स्थल। आप स्वयं से पूछ सकते हैं, “मैं इसे क्यों पसंद करता हूँ? क्या इसका पिछले जन्मों से संबंध हो सकता है?”

सारांश

बच्चों पर पास्ट लाइफ रिग्रेशन की सलाह मनोवैज्ञानिक नहीं देते । बहुत ही कम मामलों में हिप्नोथेरेपिस्ट द्वारा बच्चों पर इस थैरेपी को आजमाया जाता है । कभी कभी पिछले जन्मों में जाने के लिए ऐसे विशेष साधनों की आवश्यकता पड़ती है, जो आम लोगों के पास उपलब्ध नहीं । ऐसे में स्वयं को सम्मोहित कर पाना बहुत ही कठिन हो सकता है, सर्टिफिकेट प्राप्त हिप्नोथिरेपिस्ट प्रशिक्षित होते हैं, उनकी देखरेख में ही इस थैरेपी को आजमाएं। वैसे मेडीकल साइंस इस थैरेपी को खारिज करती आई है लेकिन मनोवैज्ञानिक इसका प्रयोग कर रहे हैं क्योंकि मनोविज्ञान की पैरानार्मल शाखा पिछले जन्म की थ्योरी को मानती है । यहीं नहीं, पश्चमी देशों में पुलिस अपराधियों के खिलाफ सबूत जुटाने में इसी तरह के हिप्नोथेरेपिस्ट की मदद ले रही है । अमेरीकन मनोचिकित्सक डॉक्टर ब्रेन वीइस और डॉक्टर न्यूटन इस पर काफी शोध कर चुके हैं वहीं, कुछ वैज्ञानिक इसे आधुनिक अंधविश्वास भी कहते हैं ।

सौरव दुबे
युवा पत्रकार

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क्रांतिदूत: खुद जानिए, अपने पिछले जन्म की कहानी – सौरव दुबे
खुद जानिए, अपने पिछले जन्म की कहानी – सौरव दुबे
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