घर वापसी की इक्कादुक्का घटनाओं पर स्यापा करने वाले, केरल में योजनाबद्ध घट रही हजारों लवजिहाद की घटनाओं पर मौन क्यों ?

निश्चय ही 11 दिसंबर 1999 केरल और भारत के हिंदुओं के लिए एक काला दिन था ! क्योंकि इस दिन केरल की प्रसिद्ध कवि, लघु कहानी लेखक और एक महान ...



निश्चय ही 11 दिसंबर 1999 केरल और भारत के हिंदुओं के लिए एक काला दिन था ! क्योंकि इस दिन केरल की प्रसिद्ध कवि, लघु कहानी लेखक और एक महान कृष्ण भक्त, माधवी कुट्टी उर्फ ​​कमला दास ने इस्लाम स्वीकार किया था। मलयाली समुदाय के लिए यह आघात इसलिए भी था, क्योंकि वे राज्य की सबसे अच्छे लेखकों में से थीं, यहाँ तक की वर्ष 1984 में साहित्य के नोबेल पुरस्कार के लिए भी उनकी रचनाएँ चुनी गईं थीं ! उनकी कई लघु कथाएँ युवाओं और केरल के समुदाय को प्रभावित करती रही थीं । आखिर क्या हुआ जो इस आजाद पक्षी ने बुर्का पहनना स्वीकार किया और इस्लाम को गले लगा लिया ? 

वस्तुतः कमला दास लव जिहाद की सबसे बड़ी शिकार थीं, जिन्हें योजना पूर्वक शादी का झांसा देकर मुस्लिम लीग के एक प्रभावशाली राजनीतिक नेता ने फंसाया, जबकि उसके पहले से दो पत्नियों भी थीं और बच्चे भी थे । जबकि कमला दास स्वयं एक 65 वर्षीय विधवा थी, जो इस छद्म प्रेमी के जाल में फंस गईं । बाद में उन्होंने अपने करीबी दोस्तों में से कई को अपने मन की पीड़ा बताई भी की कैसे वह परदे में अन्दर ही अंदर घुट रही थीं । वे अब असहाय थीं, और आखिरी तक मुसलमान जीवन जीने के बाद उनका दुखद अंत हुआ और तिरुवनंतपुरम के पलायम जुमा मस्जिद कब्रिस्तान में उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके पूराने दोस्त और कनाडा के लेखक मेर्रिली वेइस्बोर्ड ने उनके जीवन पर एक पुस्तक भी लिखी – लव क्वीन ऑफ़ मालाबार, जिसमें उन्होंने विस्तार से लिखा कि कैसे प्रख्यात लेखक कमला ने एक मुस्लिम उपदेशक और मुस्लिम लीग के राजनीतिज्ञ के झूठे प्यार में धोखा खाया ।

एक अन्य घटना इसके एकदम विपरीत है ! मुस्लिम बहुल मलप्पुरम जिले के वल्लुवनाडु के एक धनी मुस्लिम जमींदार उन्नियन साहिब और उनके भाई अलीयप्पू, एक मौलवी के दुर्व्यवहार से आहत होकर परिवार सहित हिन्दू हो गए । उन्होंने अपना नाम रखा रामसिम्हन और दयालु प्रवृत्ति के उनके भाई अलीयप्पू का नाम हो गया दयासिम्हन नम्बूदरी । दयासिम्हन का विवाह एक ब्राह्मण महिला कमला अन्थरिअनम के साथ हो गई । पूरा परिवार शाकाहारी हो गया और शांति पूर्वक रहने लगा, किन्तु तभी मुस्लिम मौलवी साजिश रची और 2 अगस्त, 1947 की रात को, मुसलमानों के एक समूह द्वारा पूरे परिवार को कत्ल कर दिया गया । ख़ास बात यह की मुस्लिम जमींदारों और प्रभावशाली नेताओं के हस्तक्षेप के चलते एक भी दोषी को सजा नहीं हुई, सभी बरी हुए । इन दोनों घटनाओं का आंकलन कीजिए और फिर सोचिये कि कितने सहिष्णु हैं हिंदू और कितने असहिष्णु मुसलमान ।

राज्य भर के हिंदू संगठन लगातार 35 वर्ष से कम आयु की हिंदू लड़कियों और हिंदू महिलाओं के धर्मांतरण की बढ़ती घटनाओं को लेकर चीख रहे हैं, कि कैसे झूठे प्रेमजाल में फंसाकर इन्हें मुसलमान बनाया जा रहा है और फिर अंत में धोखा दिया जा रहा है। आम तौर पर वे दो - तीन बच्चों को जन्म देने के बाद अपनी दूसरी या तीसरी पत्नी को दरकिनार कर हिन्दू महिलाओं को फंसाते हैं और फिर उन्हें मुसलमान बनाकर फिर उन्हें भी छोड़ देते हैं । पुलिस विभाग में उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि लव जिहाद के इन मामलों में राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण उनके हाथ बंधे रहते हैं और वे चुप रहने को विवश होते हैं ।

केरल के कई हिस्सों में, खाड़ी के पेट्रो धन की मदद से मुस्लिम समुदाय का तेजी से आर्थिक विकास हुआ है, और इस समुदाय ने सभी प्रकार के शिक्षण संस्थानों को प्रारम्भ किया है । राज्य में चाहे कांग्रेस के नेतृत्व वाला संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) हो, अथवा सीपीएम के नेतृत्व वाला वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ), दोनों में ही मुस्लिम समुदाय की गहरी पकड़ है, जिसके कारण कई पेशेवर कॉलेजों में मुस्लिम प्रबंधक नियुक्त हुए हैं । इन कॉलेजों में मुस्लिम छात्र पढाई कम, प्यार की आड़ में धर्मांतरण के कार्य में अधिक संलग्न हैं ! संक्षेप में कहा जाए तो केरल के ये कोलेज लव जिहाद की प्रजनन भूमि है।

केरल पुलिस द्वारा किये गए एक अध्ययन के अनुसार 2011 से 2015 के पिछले पांच वर्षों में, कुल 4719 लोगों ने इस्लाम स्वीकार किया, जिनमें से 2,729 महिलायें थीं जो कुल धर्मांतरण का 47 फीसदी हैं । हड्डियां कंपा देने वाली बात यह है कि इन धर्मान्तरित महिलाओं में से अधिकाँश मुस्लिम युवकों द्वारा प्यार के जाल में फंसाई गईं और धर्मान्तरित करने, शादी करने और बच्चे पैदा होने के बाद उन्हें अनाथ बनाकर छोड़ दिया गया । मुस्लिम संगठन धर्मांतरण के समय तो सक्रिय रहते हैं, किन्तु इन लड़कियों की शादी होने और बच्चे पैदा होने के बाद छोड़ दिए जाने पर, ज़रा भी सहानुभूति नहीं दर्शाते । 

एक उदाहरण देखिये - मलप्पुरम जिले में तिरूर की रहने वाली एक ब्राह्मण लड़की गायत्री (परिवर्तित नाम) को मुनीर ने अपनी लच्छेदार बातों में फंसाया ! उसने बताया कि खाड़ी के देशों में वह बहुत अच्छी स्थिति में काम कर रहा है ! प्रभावित होकर गायत्री मुनीर के साथ भाग गई, किन्तु बाद में उसे मालूम हुआ कि वह तो मुनीर की तीसरी पत्नी है । इतना ही नहीं तो एक बच्ची को जन्म देने के बाद मुनीर ने उसे घर से बाहर फेंक दिया। वह अब सुलेखा के नाम से मंजेरी या मलप्पुरम जिले में रहकर अपनी दस वर्षीय बेटी के साथ जीवन गुजार रही है, एक पुनर्वास केन्द्र में दाई जैसे छोटे मोटे काम कर रही है। किसी मुस्लिम संगठन ने न तो उसका समर्थन किया और न ही उसमें कोई रुचि दिखाई ।

नाम न छापने की शर्त पर मलप्पुरम जिले के एक मुस्लिम नेता ने इस संवाददाता को बताया कि धर्मांतरण बढ़ने का एक मुख्य कारण यह भी है कि कोझिकोड में धर्मांतरण करवाने बाले व्यक्ति को पर्याप्त धन भी दिया जाता है ! पुलिस रिकॉर्ड भी यही दर्शाते हैं कि पापुलर फ्रंट ऑफ़ इण्डिया, जमात-ए-इस्लामी और सुन्नी समूह के एपी और एके गुटों द्वारा राज्य के कोझीकोड, पोन्नानी और मंजेरी में व्यापक पैमाने पर धर्मांतरण करवाया जा रहा है, तथा लव जिहाद इसका प्रमुख आधार है ।

अगस्त 2009 में केरल उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति केटी शंकरन ने अपने ऐतिहासिक फैसले में स्पष्ट किया कि प्यार के बहाने करवाया गया भ्रामक धर्मांतरण बाध्यकारी नहीं हो सकता और उन्होंने लव जिहाद के दो आरोपियों की जमानत याचिका को खारिज कर दिया था। विद्वान् न्यायाधीश ने राज्य सरकार से भी कहा कि वे कानून बनाकर इसे रोकने पर विचार करें । न्यायमूर्ति शंकरन का कहना था कि "मामलों की केस डायरी के अध्ययन से यह स्पष्ट है की कतिपय धार्मिक संगठनों के समर्थन से दूसरे धर्म विशेष की लड़कियों को धर्मान्तरित करने के प्रयास चल रहे हैं । इसके बाद अदालत ने कहा कि 2009 के पूर्व के चार वर्षों में लव जिहाद के माध्यम से 4000 से 5000 धर्मांतरण की घटनायें हुईं, इससे अनुमान लगता है कि इसके पीछे निश्चित रूप से धार्मिक संगठनों का सहयोग है ।

साभार आधार - http://vskts.blogspot.in/2016/08/isis-and-love-jihad-deadly-combination.html

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क्रांतिदूत: घर वापसी की इक्कादुक्का घटनाओं पर स्यापा करने वाले, केरल में योजनाबद्ध घट रही हजारों लवजिहाद की घटनाओं पर मौन क्यों ?
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