हर दूसरे दिन 15 -17 करोड़ कहां से आये बहन जी ? - संजय तिवारी

मायावती, नोटबंदी, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया करोल बाग ब्रांच, मायावती के भाई आनंद कुमार, बीएसपी

नोटबंदी के बाद से ही लगातार प्रेस बुलाकर इसकी आलोचना कर रही बसपा चीफ मायावती पर नकेल कसनी शुरू हो गयी है। बसपा के दिल्ली के एक खाते में इस अवधि में हर दूसरे दिन 15 -17 करोड़ रुपये जमा किये गए है। अब यह मायावती को बताना तो पड़ेगा ही की यह गंगा कहा से बहती हुई उनके खाते तक आयी है। ताज़ा घटनाक्रम यह है कि यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया की करोल बाग ब्रांच में बसपा के खाते में 104 करोड़ और मायावती के भाई आनंद कुमार के खाते में 1.43 करोड़ रुपए की रकम जमा करने का खुलासा हुआ है। एन्फोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ईडी) ने सोमवार को बैंक में सर्वे के दौरान यह मामला पकड़ा। दोनों ही खातों में रकम नोटबंदी के बाद जमा की गई। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट इस मामले में बीएसपी से पूछताछ कर सकता है।जांच में पता चला है कि नोटबंदी के बाद आनंद कुमार के खातों में 18.98 लाख रुपए पुराने नोटों में जमा किए गए। बैंक के रिकॉर्ड्स के मुताबिक, बसपा के खाते में 101 करोड़ रुपए की रकम एक हजार और 3 करोड़ रुपए पांच सौ के पुराने नोटों में जमा कराए गए।करीब 15-17 करोड़ रुपए हर दूसरे दिन जमा किए गए।

ईडी ने बैंक से दोनों खातों के बारे में ब्योरा मांगा है। सीसीटीवी फुटेज और केवाईसी दस्तावेज भी मांगे गए हैं। माना जा रहा है कि आयकर विभाग को भी इस बारे में जानकारी भेजी जाएगी जो पार्टी के चंदे की पड़ताल कर सकती है। ईडी जल्दी ही आनंद को नोटिस जारी कर सकता है। आयकर विभाग आनंद के मामले में टैक्स चोरी के प्रावधानों के तहत जांच कर सकता है।एक अन्य घटनाक्रम में आयकर विभाग ने मायावती और आनंद कुमार के खिलाफ इनकम टैक्स न देने के मामले में 5 पिटीशन सुनवाई के लिए दोबारा लिस्टेड की है। यूपी में विधानसभा चुनाव पास होने के मद्देनजर यह कदम काफी अहम माना जा रहा है। ये पिटीशन्स विभिन्न व्यक्तियों की ओर से दाखिल की गई हैं, जिनमें वित्तीय धांधली या टैक्स चोरी का आरोप लगाया गया है। 

केंद्र की नयी नीति 


इस बीच केंद्र सरकार ने और भी कई उपाय करने शुरू कर दिए है। पुराने नोटों को लेकर नए सिरे से एक नयी नीति 30 दिसंबर तक आने जा रही है। इसके मुताबिक, 30 दिसंबर के बाद 10 हजार या इससे ज्यादा के पुराने नोट रखने पर 50 हजार रुपए का जुर्माना लग सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स में इसकी जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुराने नोटों के लेन-देन पर यह ऑर्डिनेंस 30 दिसंबर के पहले लाया जा सकता है। बता दें कि 30 दिसंबर तक पुराने नोट सिर्फ रिजर्व बैंक में बदलने की इजाजत दी गई है। हालांकि, अभी तक सरकार ने इस कानून को तोड़ने पर दी जाने वाली सजा के बारे में कोई फैसला नहीं किया है, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक 10 हजार से ज्यादा के पुराने नोट रखने वालों पर कम से कम 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया जा सकता है। रिपोर्टस में कहा गया है कि कानून तोड़ने वालों पर क्रिमिनल केस दर्ज किया जा सकता है और जुर्माने का फैसला मजिस्ट्रेट पर छोड़ा जा सकता है। ऑर्डिनेंस के ड्राफ्ट में रिजर्व बैंक की सिफारिशों को भी शामिल किया गया है। बता दें कि नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर को 500 और 1000 के पुराने नोटों को बंद करने का एलान किया था। देश की कुल करंसी का करीब 86 फीसदी (15.44 लाख करोड़) यही नोट थे। आरबीआई के मुताबिक, करीब 13 लाख करोड़ की ओल्ड करंसी बैंकों में वापस आ चुकी है। सरकार के कड़े रुख के बाद पुराने नोटों को जलाने, फेंकने या मंदिरों में दान देने के मामले सामने आए थे। सरकार ने ब्लैकमनी रखने वालों के लिए वन-टाइम विंडो ऑप्शन भी दिया था। इसके मुताबिक, अनडिक्लेयर्ड कैश का 50% टैक्स और पेनल्टी देकर इन्हें अकाउंट में जमा कराया जा सकता है।

अब बेनामी संपत्ति पर एक्शन

नोटबंदी के बाद नरेंद्र मोदी सरकार अब बेनामी संपत्ति पर एक्शन लेने की तैयारी कर रही है। पीएम ने रविवार को ‘मन की बात’ प्रोग्राम में भी इस तरफ इशारा किया था। न्यूज एजेंसी ने एक सीनियर अफसर के हवाले से बताया- मोदी सरकार टैक्स कानून की उन खामियों को भी खंगाल रही है जिसका फायदा उठाकर बेनामी संपत्ति खरीदी जाती है। टैक्स रिर्टन्स के अलावा बैंक ट्रांजेक्शंस और छापों में मिले दस्तावेज चेक किए जा रहे हैं। सरकार का मानना है कि देश के टैक्स कानून में कुछ ऐसी बड़ी खामियां हैं, जिनकी वजह से बेनामी संपत्ति और रियल एस्टेट में गलत तरीकों से इन्वेस्टमेंट किया जाता है। इस साल जुलाई तक हुए इनकम टैक्स रिटर्न की फाइलिंग को चेक किया जा रहा है। संदिग्ध लोगों या कंपनियों को सबसे पहले चेक किया जा रहा है। नोटबंदी के बाद इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने बाकी एजेंसियों के साथ कोऑर्डिनेट कर देश के कई हिस्सों में छापे मारे। इनमें कई कैश और गोल्ड के अलावा अहम दस्तावेज भी मिले। अब इन्हीं दस्तावेजों को बारीकी से चेक किया जा रहा है। आईटी डिपार्टमेंट और बाकी एजेंसियां देशभर में कुछ खास अकाउंट्स पर नजर रख रही हैं। इन अकाउंट्स को ऑपरेट करने वालों पर शक है कि उन्होंने बेनामी संपत्तियां खरीदीं या रियल एस्टेट सेक्टर में गैरकानूनी तरीकों से इन्वेस्टमेंट किया।अब इसमे दिक्कत ये है कि भारत में लैंड रिकॉर्ड्स बहुत साफ-सुथरे और सिस्टमैटिक नहीं हैं। लिहाजा, इनकी बारीकी से जांच में परेशानियां आएंगी।माना जाता है कि नेताओं, कारोबारियों और एनआरआई लोगों ने रिश्तेदारों या करीबियों के नाम से प्रॉपर्टीज में इन्वेस्ट किया है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, देश के करीब-करीब हर शहर में पांच से दस फीसदी बेनामी संपत्तियां हैं। नवंबर में सरकार ने बेनामी प्रॉपर्टी ट्रांजेक्शन एक्ट लागू किया था। इस कानून के मुताबिक, अगर किसी शख्स ने किसी दूसरे के नाम से प्राॅपर्टी खरीदी तो उसको सात साल की सजा हो सकती है। इसके अलावा वो प्रॉपर्टी भी जब्त की जा सकती है। मोदी ने रविवार को मन की बात में करप्शन और नोटबंदी की चर्चा करते हुए कहा था, 

''मैं विश्वास दिलाता हूं कि ये पूर्णविराम नहीं है। रुकने या थकने का सवाल ही नहीं उठता। आपको मालूम होगा कि बेनामी संपत्ति का कानून 1988 में बना था। लेकिन कभी भी उसके नियम नहीं बने, उसे नोटिफाई नहीं किया है। हमने उसे निकालकर धारदार बनाया है। आने वाले दिनों में वह काम करेगा।''

क्या होती है बेनामी संपत्ति? कैसे बनाते हैं? 

बेनामी संपत्ति का मतलब ऐसी प्रॉपर्टी, जिसका ओनर कागजों में कोई और है, जबकि उसके लिए पेमेंट किसी और ने किया है। काली कमाई करने वाले लोग बेटा-बेटी, पति-पत्नी के लिए ऐसी प्रॉपर्टी खरीदते हैं, लेकिन इनकम टैक्स से जुड़े डिक्लेरेशन में उसका जिक्र नहीं करते। कई लोग नौकर-चाकर, पड़ोसी, दोस्तों और रिश्तेदारों के नाम पर प्लाॅट्स, खेती की जमीन, फ्लैट्स खरीद लेते हैं। दरअसल, दूसरे के नाम पर रजिस्ट्री करवाकर उस प्राॅपर्टी की वसीयत बनवा ली जाती है। इसमें वही शख्स वारिस बन जाता है, जिसने काली कमाई से वह प्रॉपर्टी खरीदी होती है। वसीयत के साथ बेनामी मालिक से एक पावर ऑफ़ अटाॅर्नी करवाई जाती थी। इस तरह वह उस प्राॅपर्टी को बेचने के हक दूसरे को दे देता है। बेनामी मालिक से उस प्राॅपर्टी की सेलडीड भी बनवाई जाती थी। इसमें वह उस प्राॅपर्टी का पूरा पेमेंट लेकर असली मालिक या उसके भरोसेमंद शख्स को बेचने का करार कर लेता है। इस तरह ब्लैकमनी रखने वाला शख्स बिना अपना नाम उजागर किए अपना पैसे इन्वेस्ट कर देता है और प्रॉपर्टी पर कब्जा कर उसके पूरे अधिकार अपने पास रख लेता है।

संजय तिवारी 

लेखक भारत संस्कृति न्यास, नयी दिल्ली  के राष्ट्रीय अध्यक्ष और वरिष्ठ पत्रकार है 



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