भाजपा विजय की कहानी अंडर माय बुर्का - डॉ. विश्वास चौहान

...दरवाजे पे सांकल खड़खड़ाने लगी ..खड़$$$$$खड़ $$खड़ ..दरवाजे पे पड़ रही सांकल की चोट से सीलन भरी दीवारों से कच्चे हरे रंग की पपड़ी झडने लगी ....


...दरवाजे पे सांकल खड़खड़ाने लगी ..खड़$$$$$खड़ $$खड़ ..दरवाजे पे पड़ रही सांकल की चोट से सीलन भरी दीवारों से कच्चे हरे रंग की पपड़ी झडने लगी ..और कील पर टँगा उर्दू का काबा बना कैलेंडर भी थरथराने लगा....लकड़ी की रेक पे सलीके से रखे एल्युमिनियम के बर्तन कँपने लगे ...

अब दरवाजे पे सांकल के साथ पान भरे मुह से निकली आवाज ..रेहाना ऐ रेहाना ..भी आई और गजब हो गया जब कर्कश आवाज , सांकल की खड़खड़ के साथ दरवाजे पे घूंसे बाजी भी होने लगी ....

सिलबट्टे पे मसाला पिसती रेहाना ..हाथ दुपट्टे से पोंछ के दरवाजा खोलने भागी ..और ..इतने में बकरी से टकराते और मुर्गी को पैर से बचा कर ..बकरी की लेंडियो पे पैर रख दौड़कर ..अंदर से सांकल खोलने लगी की ..बाहर से लगे दबाव से उसकी ऊँगली अंदर की सांकल में आ गयी ..उसने जोर से दरवाजा बाहर की और भडिक कर ..आखिकार दरवाजा खोल दिया ..

लेकिन ऊँगली की चोट से बिलबिला कर बोली ..की आफत आ गयी है ..क्या आसमान टूट पड़ा है ..सुबु ही कहा था ..ठीक से हग के जाओ .पर माने नही ..अब पिरेसर बना तो ..आसमान सर पे लिए भागे आ रहे हो ..और उसने अपनी चोटखाई ऊँगली मुह में जीभ के ऊपर रख ली ..फिर निकाली और हाथ को जुम्बिश देकर फिर से मुह में रखी ...

जुम्मन इतने में फुर्ती से कोने में रखे सींक के मुढे में बैठ कर धंसा हुआ ..लंबी लंबी साँसे ले रहा था .....रेहाना ..पानी पिला ...

रेहाना ,पानी लेकर आई ....जुम्मन ने मुहँ से पान की पिसी हुई गिलोरी ..पास में रखे तसले में थुंकी और एक सांस में पानी गटक गया ..फिर गले के गमछे से पसीना पोंछ कर ...बोला ..रेहाना ..अल्लहा का कहर टूट गया ..पूरी की पूरी कौम ही काफिरी में तब्दील हो गयी ..लगता है ..साले खबीस ..गद्दार ..हैं ..

रेहाना ..को सब कुछ समझ आ गया था ..वो अपनी खुशी को बनावटी चिंता में लपेट कर ..बोली क्या हुआ ..आज तो काउंटिंग थी ..असलम भाई नही जीते क्या ?..

अरे तू जीत छोड़ ..पुरे सूबे के लगभग सबरे ही हार गए है ..कमल वाले जीत गए हैं ..हमारी सीट पे हमारी कौम के वोट ज्यादा होने पर भी कमल वाले जीत गए हैं..अब ....

दरवाजा भड़ाक से फिर खुलता है ..अब्बू ..अब्बू ..हाती वाली भेन जी के रई थी के मुए अमेत साऐ ने मसीनो में ..दखलन्दाजी करी हे ..अमजद आ चुका था ..ये खबर उसी ने सुनाई थी ..या अल्लाह यकीन नही होता ...इंतिखाब तो संजीदगी से हुए थे ..अकलेस भाईजान ने ..सारे बंदोबस्त चकचोबन्द किए थे ...

दरवाजा फिर से खुलता है ..अब रईस , मूमु, आरिफ , कल्लू , रऊफ ,दानिश, साजिद भी आ गए थे ..जुम्मन मियां के निकाह तो चार हुए थे पे ..पेले वालियों ने कोई बच्चा नही जना..सो तलाकएसुन्ना से तुराह के बाद ..पीछा छुड़ाया ..बाद वालियों में तीसरी का इंतकाल हो गया था ..चौथी रेहाना थी ...जिससे 8 लड़के और एक लड़की शबनम थी ..जिसका निकाह ....उसके मौसेरे भाई सईद से हुआ था ..जो तुनक मिजाज था और आये दिन तलाक की धमकी दिये रहता था ..इसलिए एतिहातन कुछ दिनों से शबनम मायके में ही थी ....

पास में रखे पान सुपारी के डिब्बे से ..आरिफ सरोते से सुपारी काट कर ..अब्बू के पान पर रख चूका था ..अब्बू अब सामान्य होकर भी ..पेशानी ..पे लकीरे ला के सबको समझा रहे थे ..देखो अब कमल वाले जीत गए है ..उनकी सरकारे बनेगी ....तुम लोग सबर करना ..बिलावजह मत उलझना....अब आजम भाई भैंसों को ढूंढने लायक भी नही बचे हैं ...अबि होली आ रही है ..बर्दाश्त न हो तो घर में रहना ..फ़सादी दोनों तरफ हे ..

इतने में शबनम आ गयी ..बोली अम्मी खाना लगा रई हैं ..चिकन बिरयानी ..का थाल लेकर ..रेहाना आ चुकी थी ..जुम्मन ने ..आँखे तरेर कर कहा ..सूबे में हमारे तरफदार हार गए है ..और ...और तुम ..दावती खाना ..बना बैठी ..

रेहाना ..ने पानी का टोंटी वाला जग ..रखते हुए जवाब दिया ..सुबु सुबु तुम नये कुर्ते पजामे में इतर लगा के चले थे..तो हम ने सोचा कि जश्न होगा ही ..कुछ खास बना ले ..अब हमें भी कोनसा पता था ..ये खबर आएगी ..

जुम्मन ..सहमत था .....बाप बेटे थाल के चारो और बैठकर एक ही थाल से बिरयानी खाने में मशगूल हो गए .....उधर.रसोई में रेहाना ने शबनम को बाहों में भरकर कहा ..मेरी बच्ची अल्लाहताला ने हमारी सुन ली अब ..तुझे तलाक देने के पहले उसे 10 बार सोचना पड़ेगा ..अब तलाक उल बिद्दत पे रोक लग ही जायेगी ..

उधर आड़ में जाकर शबनम ने बुर्के के अंदर जेब से कमल चुनाव चिन्ह का बिल्ला निकाल कर चुम लिया ..या अल्लाह ..तेरी मेहरबानी ......गली में बीजेपी के उम्मीदवार के विजयी जुलुस के नगाड़े बज चुके थे ...और भारत माता की जय के नारे में रेहाना और शबनम भी मन ही मन "जय" के नारे दोहरा रही थी ..

भारत माता की जय भारत माता की जय जय ..इति ..

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भाजपा विजय की कहानी अंडर माय बुर्का - डॉ. विश्वास चौहान
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