सावधान ………. ब्लू व्हेल का बाप है स्लीप पैरालिसिस ! - सौरव दुबे

ये दुनिया रोचकता और रहस्यों से भरी पड़ी है । हमारे सामने नए नए रहस्य आते रहते हैं, जिनमें से कुछ रहस्यों से पर्दा उठ जाता है, और कुछ...




ये दुनिया रोचकता और रहस्यों से भरी पड़ी है । हमारे सामने नए नए रहस्य आते रहते हैं, जिनमें से कुछ रहस्यों से पर्दा उठ जाता है, और कुछ बरमूडा ट्रायंगल की तरह अनसुलझे बने रहते हैं। यहां हम उस रहस्यमयी भूतिया आकृति के बारे में बता रहे हैं जिससे कभी भी किसी का भी सामना हो सकता है । उसके सामने आते ही हाथ-पैर काम करना बंद कर देते हैं, आंखें खुली रह जाती हैं यानि शरीर कोमा जैसी स्थिति में चला जाता है, दम घुटने लगता है और सांस रुकने का अहसास होता है । डॉक्टर इस बीमारी को स्लीप पैरालिसिस कहते हैं, जो किसी भी अच्छे खासे सूरमा की नींद हराम कर सकती है । इस बीमारी में अंजाना साया नींद से जागने पर भी गला दबाता महसूस होता है ।

“विशेष - अगर आपका अपना कोई ऐसी समस्या से पीड़ित है और आप उसे इस मुश्किल से निकालना चाहते हैं, तब ही इसके बारे में आगे की अधिक जानकारी पढ़े, अन्यथा इसकी जानकारी जुटाना भी खतरे को आमंत्रण देने जैसा है । जानकारी जुटाने वाले के लिए पहली शर्त पूर्ण आत्मविश्वासी-निर्भीक और निडर होना है – ऐसे लेखक के विचार है !”

क्या है स्लीप पैरालिसिस 

स्लीप पैरालिसिस नींद के बाद जागने के उस अवस्था का नाम है, जिसमें व्यक्ति नींद से जाग जाता है और उसकी आंखें भी खुल जाती हैं लेकिन तकरीबन 1-2 मिनट या फिर उससे ज्यादा समय तक तक हाथ-पैर काम नहीं करते । बहुत कम मामलों में इसकी समय सीमा 2-3 घंटे तक होती है । इस अवस्था में पीड़ित देर तक झटपटाने की कोशिश करने के वाबजूद पलंग से नहीं उठ सकता । मस्तिष्क के संकेतों का शरीर पालन नहीं करता बल्कि मस्तिष्क शरीर से नियंत्रण खो देता हैं। शरीर थोड़ा सा भी नहीं हिल पाता है । स्लीप पैरालिसिस अटैक के वक्त व्यक्ति अपने आसपास सबकुछ देख सकता है और सुन भी सकता है लेकिन चाहते हुए भी कुछ बोल नहीं सकता और कुछ कर नहीं सकता ।

दरअसल, स्लीप पैरालिसिस से पीड़ित व्यक्ति को बेहद खौफनाक सपने आते हैं, जिसमें कोई हैवाननुमा भयानक आकृति रोगी के सीने पर बैठकर गला दबा रही होती है । संभव है उसके हंसने या रोने आदि की आवाज भी सुनाई दे । यही नहीं, इस स्थिति में कभी-कभी व्यक्ति का सपना आंख खुलने के बाद भी उसका पीछा करता है और रोगी को आंख खुलने के बाद भी अपने कमरे में उसी तरह की भयानक परछाई प्रत्यक्ष दिखाई देती हैं, जो सपने में दिखाई दे रही थी यानि वास्तविक रूप से सपना घटित होने का अहसास होने लगता है । हैरान करने वाली बात ये है कि जब व्यक्ति उस बेहद डरावनी शक्ल वाली आकृति को अपना गला दबाते हुए देखता है तो वाकई रोगी की सांस भी उखड़ने लगती है और हार्टबीट बढ़ जाती है । नींद खुलने के बाद भी मस्तिष्क ‘अटैक’ के दायरे में ही रहता है और उस खौफ को महसूस किए रहता है। जब तक मस्तिष्क को इस बात पर यकीन नहीं हो जाए कि अब कोई खतरा नहीं है । यही कारण है कि इस बीमारी वाले के मन में अजीब सा डर घर जाता है और वो सोने से भी डरने लगता है । हालांकि यह स्थिति स्थायी नहीं होती है, कुछ सैकिंड-मिनट या घंटे बाद स्थिति सामान्य हो जाती है । स्लीप पैरालिसिस की स्थिति में दिमाग जाग जाता है लेकिन शरीर हिलने-डुलने से इनकार कर देता है । कहा जा सकता है कि खुली आंखों से शैतानी आकृतियों को देखने का नाम स्लीप पैरालिसिस है ।

स्लीप पैरालिसिस पर क्या कहता है विज्ञान ? 

विज्ञान मानता है कि स्लीपिंग डिसआर्डर की वजह से होता है, इसमें आंखें खुली होने पर भी भ्रम की स्थिति बनती है । इस बीमारी के लिए पोलीसोम्नोग्राफी जांच (निद्रा का अध्ययन) कराई जाती है । डॉक्टरों का कहना है कि निद्रा के विकार, (अधिक नींद आना ) नार्कोलेप्सी, और ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया ( सोते में सांस रुकना ) के कारण सांस लेने में भी अस्थायी रूप से दिक्कत होती है और मनोवैज्ञानिक कारणों से व्यक्ति का अवचेतन मन अपने आसपास ऐसी भ्रम की स्थिति निर्मित कर लेता है कि कोई उसका गला दबा रहा है । यह स्थिति दर्शाती है कि आपका शरीर नींद की प्रक्रिया के साथ सामंजस्य नहीं बैठा पा रहा है। स्लीप पैरालिसिस के कई मामले गंभीर मनोवैज्ञानिक समस्याओं एवं न्यूरोलॉजिकल डिसआर्डर से भी जुड़े होते हैं । डॉक्टरों के मुताबिक स्लीप पैरालिसिस में 2 स्थितियां होती हैं, पहली हिप्नेगॉजिक या प्रीडॉर्मिटल है जब आप सोई हुई अवस्था में होते हैं और सपने में परछाइयों को देखते हैं और दूसरी हिप्नोपॉटिक यानी पोस्टडॉर्मिटल । जब मरीज का दिमाग जाग जाता है मगर शरीर के अंग काम नहीं करते । ऐसे में आंख खुलने पर भी व्यक्ति स्वप्न की स्थिति में ही होता है और वो सपने को ही साकार हकीकत समझता है । डॉक्टरों के मुताबिक नींद पूरी नहीं होना, अनियमित खान-पान, तनाव आदि इसके कारण हो सकते हैं। वैसे भारत में डॉक्टर इसे गंभीर बीमारी नहीं मानते, उनका कहना है कि अभी तक यह बीमारी जानलेवा साबित नहीं हुई है । वैसे ये अलग बात है कि अब तक सोते समय रहस्यमयी तरीके से मरने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, मगर भारत में कभी ऐसा नहीं सुना गया कि किसी डॉक्टर ने स्लीप पैरालिसिस से मौत की पुष्टि की हो। हालांकि दुनिया के दूसरे देशों में स्लीप पैरालिसिस से मौत की कई खबरें आ चुकी हैं ।

वहीं, वैज्ञानिकों का मत है कि सोते वक्त आरईएम यानि रैपिड आई मूवमेण्ट (तेजी से आंखों का हिलना) के दौरान ज्वलंत सपने आते हैं, जब व्यक्ति आरईएम समाप्त होने से पहले जागता है तो स्लीप पक्षाघात होता है। पेंसिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी के 2011 में किए अध्ययन में यह बात सामने आई कि सामान्य जनसंख्या में 7.6 प्रतिशत लोग गंभीर नींद पक्षाघात के शिकार होते हैं जबकि भारत में इसके मरीजों की संख्या कही ज्यादा हो सकती है । किसी भी व्यक्ति को जीवन में कभी भी नींद पक्षाघात हो सकता है, यह सपने आपको ऐसा भ्रमित कर सकते हैं कि जैसे आपकी सांसों ने काम करना बंद कर दिया हो । सामान्यत: यह स्थिति बार बार नहीं आती लेकिन अगर बार बार नींद पक्षाघात हो तब किसी अच्छे मनोचिकित्सक या न्यूरोलाजिस्ट से संपर्क करना चाहिए ।

क्या कहते हैं पैरानार्मल एक्सपर्ट

इस स्थिति का वर्णन दुनियाभर के प्राचीन ग्रंथों और कथाओं में भी मिलता है। इसलिए नींद की इस स्थिति को रहस्यमयी नजरों से भी देखा जाता है। स्लीप पैसालिसिस के दौरान दिखाई देने वाली डरावनी राक्षसी आकृतियों के बारे में कई सारे मिथक है, कोई इन्हें एलियन मानता है तो कोई इन्हें राक्षस । चीन में इसे ‘गुइ या’ का दबाव कहते हैं, चीन में रहने वाले लोग बुरी आत्माओं को गुइ या कहते हैं और वो इसे जानलेवा बताते हैं । पैरानार्मल एक्सपर्ट मानते हैं कि व्यक्ति को नींद पक्षाघाट अधिकतर पूर्णिमा एवं अमावस्या के दिन होता है और इसका अधिक प्रभाव होने पर प्राय: दुर्गंध महसूस होती है । इस अद्भुत घटना के बारे में जानने के लिए पैरानार्मल एक्सपर्ट ने आध्यात्मिक शोध भी किए, इन अनुसंधानों में ज्ञात हुआ है कि जब कोई नैगेटिव एनर्जी हमारे आसपास होती है तो इंसान की छठीं इंद्री काम करती है और वो सपने में व्यक्ति की आंखें खुलवाकर सावधान करती है । 

पैरानार्मल एक्सपर्ट मानते हैं कि व्यक्ति को दिखाई देने वाली परछाइयां कोई भ्रम नहीं होती बल्कि वो वास्तविक रूप में उसके समक्ष होती हैं । नींद के वक्त व्यक्ति नेगेटिव एनर्जी का सॉफ्ट टारगेट होता है और वो आसानी ने उस पर हावी हो जाती हैं । ज्योतिषियों के अनुसार पितृदोष के कारण इस तरह के बुरे स्वप्नों का अनुभव हो सकता है । दुनिया के कुछ देशों में इन परछाइयों को मौत का दूत भी कहते हैं, इन्हें अलग-अलग देशों में अलग-अलग नाम से जाना जाता है । इऩका काम लोगों को परेशान करना, मारना है, । इस बीमारी में सोल ( आत्मा ) जाग जाती है, शरीर सोया रहता है और आत्मा खतरे को भांपकर उसे जगाने की कोशिश करती है । बहरहाल नींद पक्षाघात का कारण कुछ भी हो मगर पैरानार्मल एक्सपर्ट और डॉक्टर दोनों ही मानते हैं कि अपना आत्मविश्वास मजबूत रखकर इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है । आत्मविश्वास की कमी और मन में डर से यह समस्या बढ़ती जाती है । खास बात ये है कि इन परछाइयों को अपने आत्मबल से हराने पर इनका अस्तित्व हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है । पैरानार्मल एक्सपर्ट्स मानते हैं कि ऐसी परछाईयों पर विश्वास करना और इनके बारे में ज्यादा सोचना खतरनाक हो सकता है, अत: इन पर विश्वास न करें । संभवत: इसके पीचे मनोवैज्ञानिक कारण भी जुड़े हैं ।

उपाय 

1-

जब कभी स्लीप पैरालिसिस की स्थिति हो, तब उठने की कोशिश करने के लिए झटपटाएं नहीं क्यों कि आप इस माया के भ्रमजाल से जितना निकलने की कोशिश करेंगे, उतना ही इसमें फंसते जाएंगे । खुद के शरीर को पूरी तरह रिलेक्स छोड़ दें और ध्यान योग की मुद्रा में चले जाएं। जागते हुए हमारा मस्तिष्क “बीटा” अवस्था में होता है जिसकी फ्रीक्वेंसी 13 से 30hz होती है, जबकि स्लीप पैरालिसिस की अवस्था में मस्तिष्क अपने आप ही “थीटा” अवस्था में पहुँच जाता है जिसकी फ्रीक्वेंसी 4 से 8hz होती है । जब हम ध्यान करते हैं तब मष्तिष्क की फ्रीक्वेंसी बदल जाती है और यह हमें स्लीप पैरालिसिस से बाहर निकलने में मदद करती है । ध्यान की अवस्था में मस्तिष्क कभी कभी “अल्फा” अवस्था में पहुँच जाता है जिसकी फ्रीक्वेंसी 8 से 13hz होती है । पैरानार्मल एक्सपर्ट और डॉक्टर दोनों ही इस बात को मानते हैं कि ध्यान से स्लीपिंग पैरालिसिस पर काबू पाया जा सकता है । जाहिर सी बात है ध्यान में जाते वक्त भयंकर दिखाई देने वाली आकृतियों को इगनोरे करने की जरूरत होती है ।

2- 

पैरानार्मल एक्सपर्ट कहते हैं कि अगर पक्षाघात के दौरान ध्यान करने में समस्या आ रही हो तब मन में गायत्री मंत्र-हनुमान चालीसा या किसी भी इष्ट को याद कर संबंधित मंत्र-पाठ आदि करने पर लाभ होगा । हालांकि विज्ञान भी यह मानता है लेकिन वो इसे दूसरे शब्दों में परिभाषित करता है । डॉक्टरों का कहना है कि ऐसी स्थिति में मन को किसी दूसरे बिषय पर केंद्रित कर एक ध्वनि बनाने की जरूरत होती है और वो ध्वनि खाता संख्या, मानसिक गायन, अन्य विचार-शब्द आदि कुछ भी हो सकते है ।


3-

प्राणायाम और सोने से पहले शुद्ध ताज़ी हवा में लंबी सांस लेने से लाभ होता है । अटैक के वक्त गहरी साँस बनाने के लिए कोशिश करनी चाहिए। इस तकनीक में महारत हासिल करने के बाद नींद पक्षाघात ही नहीं बल्कि कई बीमारियों से छुटकारा मिलेगा । 

4-

कुछ लोगों की आंख की पलकें पक्षाघात की स्थिति में हिल सकती हैं, अगर ऐसी स्थिति हो तब पलकें बंद करने और खोलने के लिए कई बार कोशिश करनी चाहिए।

5-

सोने के पहले से कैफीन-मादक पदार्थ और भारी खाना ना लें, इसके स्थान पर हर्बल चाय या एक गिलास दूध, ज्यूस लें। जो आपके दिमाग को आराम देता है । 

6- 

अच्छी, नियमित नींद लें। तनाव ना लें और नकारात्मक सोच से बचें । सोने के पहले मधुर संगीत सुनें, अच्छी पुस्तकें पढ़ें। कमरे में खुशबूदार रूम फ्रेशनर छिड़कें या धूप-अगरबत्ती लगाएं । यानि कमरे का माहौल बेहतर हो और खुद को पूरी तरह सुरक्षित महसूस करें । सोते वक्त इष्ट से रक्षा की प्रार्थना करके करें। 

7- 

सोने से पहले टीवी देखना, विडियो गेम खेलना और मोबाइल फोन पर सन्देश भेजना नींद को अत्यधिक कमजोर करते हैं। ये सब ना करें। 

8- 

अटैक के वक्त खुद पर नियंत्रण रखना ही चाहिए । साथ ही, याद रखना चाहिए कि यह बस कुछ समय के लिए भ्रमजाल है और ये हालात थोड़ी देर में ठीक हो जाएंगे । 

9- 

सभी लोग अलग अलग तरीके से सोना पसंद करते हैं, । चिकित्सा विज्ञान सीधे लेटकर सोना बेहतर मानता है तो योग विशेषज्ञ किसी एक करवट पर । कुछ योग आचार्यों का कहना है कि करवट लेकर सोने में कुंडलिनी शक्ति की 2 प्रमुख नाड़ियों में से एक कार्यरत रहती है । पीठ के बल सोने से कुंडलिनी अल्प मात्रा में कार्यरत रहती है । जिससे दुष्ट परछाइयों के लिए व्यक्ति के शरीर को निसक्रिय कर पाना सहज होता है ।

स्लीप पैरालिसिस की अपुष्ट कहानी 

साल 2013 में एक निजी टीवी चैनल ने सत्य घटनाओं पर आधारित एक खास कार्यक्रम प्रसारित किया था, जिसमें महाराष्ट्र के कोल्हापुर में हुए स्लीप स्लीप पैरालिसिस के एक्सट्रीम केस को दिखाया गया था । इस केस में स्टूडेंट पैरासाइसिस पर रिसर्च करते हुए इतनी गहराई में चला गया कि उसने अंजाने में मौत के दूतों को जीवित कर दिया यानि रिसर्चर खुद हैवानी परछाईयों का शिकार बन गया। उसे ऐसा आभास होने लगा कि मानो उसके सोते ही परछाई आकर उसका गला दबा देगी । हालात कुछ ऐसे बने कि वो छात्र अपनी खुद की परछाई से भी डरने लगा । साथ ही, उसे लगने लगा कि अब उसका खुद की परछाई पर भी नियंत्रण खत्म हो गया है । यही नहीं, जब स्टूडेंट ने यह बात अपने प्रोफेसर और 2 दोस्तों को बताई तो उन्हें भी स्लीप पैरालिसिस वाली परछाईयां दिखाई देने लगी । परछाईयों से बचने के लिए इन लोगों ने थोड़े वक्त में नींद से जागने के लिए अलार्म घड़ी का इस्तेमाल शुरू किया । जैसे ही घड़ी का अलार्म बजता और उनकी नींद खुल जाती और परछाइयां गायब हो जाती । इसके बाद प्रोफेसर ने रिसर्च के लिए हार्ट बीट रिकार्डर का इस्तेमाल किया और तीनों स्टूडेंट्स को सोने के लिए कहा गया । सोने पर स्टूडेंट्स की हार्टबीट मानीटर पर लगातार बढ़ती गई, उन्हें परछाईयां गला दबाती दिखाई दी लेकिन खतरा भांपते ही प्रोफेसर ने स्टूडेंट्स को नींद से सही वक्त पर जगा दिया। निष्कर्ष ये निकला गया कि यह बीमारी सिर्फ इसके बारे में अधिक बात करने-अधिक सोचने और विश्वास पर एक इंसान से दूसरे इंसान में जा सकती है और इस बीमारी के बारे में सोचना बेहद खतरनाक है । बेहतरी इसी में होगी कि इन परछाइयों पर जरा भी विश्वास न किया जाए क्यों कि परछाईयां आखिर इंसान के पीछे चलती हैं।

संभव है कि इसके पीछे बहुत सारे मनोवैज्ञानिक और दूसरे कारण भी हो, मगर बहुत सारे लोगों ने दावा किया है कि गला दबाने वाली हैवानी परछाई कभी कभी कैमरे में कैद हो जाती है । हालांकि, सोने वाले के अलावा नंगी आंखों से दूसरे व्यक्ति को कभी कोई आकृति दिखाई नहीं दी । इस बिषय पर शोध करना खतरे को आमंत्रण देने जैसा है । आत्मविश्वास कमजोर होने और दैत्यनुमा आकृतियों के बारे में ज्यादा सोचने से व्यक्ति खुद इनका शिकार बन जाता है । जब तक अति आवश्यक नहीं हो तब तक स्लीप पैरालिसिस के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं जुटाएं। मुंबई मिरर, डेली मेल, टाइम्स ऑफ इंडिया जैसे कई नामी अंग्रेजी समाचार पत्र स्लीप पैरालिसिस से जुड़ी खबरें कई बार प्रकाशित कर चुके हैं परंतु अभी तक इस बारे में विस्तृत जानकारी हिंदी में बहुत कम प्रकाशित हुई थी, और अब इसे पीड़ितों के हित को ध्यान में रखकर प्रकाशित किया गया है ।

सौरव दुबे 
लेखक परिचय - लेखक पूर्व में इंडिया न्यूज़, समाचार प्लस, आजाद न्यूज़, पीटीसी न्यूज़, जी पंजाबी, दूरदर्शन, नयी दुनिया में विभिन्न पदों पर कार्य कर चुके है ।

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क्रांतिदूत: सावधान ………. ब्लू व्हेल का बाप है स्लीप पैरालिसिस ! - सौरव दुबे
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