बुना जा रहा है, एक बार फिर देश विभाजन का तानाबाना !

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भले ही समाचार पत्रों के किसी कोने में भी ये समाचार जगह ना पा सकें, किन्तु सोशल मीडिया देश के सुधी नागरिकों को झकझोर कर जगाने का प्रयत्...


भले ही समाचार पत्रों के किसी कोने में भी ये समाचार जगह ना पा सकें, किन्तु सोशल मीडिया देश के सुधी नागरिकों को झकझोर कर जगाने का प्रयत्न कर रहा है | दो प्रकरण ध्यान देने योग्य हैं !

पहला तो यह कि मुस्लिम मामलों की उच्चतम निर्णायक संस्था “आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी)”, अब देश के हर जिले में दारुल-क़जा अर्थात शरीयत अदालत, खोलने की योजना बना रहा है। इन अदालतों में इस्लामी कानूनों के अनुरूप मामले हल किये जायेंगे | 

यह प्रस्ताव 15 जुलाई को नई दिल्ली में होने जा रही एआईएमपीएलबी की बैठक में चर्चा के लिए आएगा। 
स्मरणीय है कि वर्तमान में भी उत्तर प्रदेश में ऐसी 40 अदालतें चल रही हैं। 

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वरिष्ठ सदस्य जफरयाब जीलानी ने पत्रकारों को जानकारी दी कि हम देश के सभी जिलों में ऐसी एक एक अदालत खोलने की योजना बना रहे हैं। दारुल-कजा का उद्देश्य शरिया कानूनों के अनुसार मामलों को हल करना है। 

उन्होंने कहा कि “यह देखते हुए कि एक दारुल-कजा को चलाने पर लगभग 50,000 रुपये खर्च होते हैं, अतः 15 जुलाई को नई दिल्ली में होने वाली बोर्ड की बैठक में संसाधनों की व्यवस्था पर भी चर्चा होगी।" 

"जिलानी ने कहा, "हम शरीयत कानूनों के बारे में वकीलों, न्यायाधीशों और आम आदमी को जागरूक करने के लिए ताफिम-ए-शरीयत समिति को सक्रिय करेंगे। हम एआईएमपीएलबी बैठक में इस पर चर्चा करेंगे । 

उन्होंने कहा कि टीएस कमेटी पिछले 15 वर्षों से वकील और न्यायाधीशों को शरिया कानूनों के बारे में प्रशिक्षित करने का काम कर रही है । समिति इसके लिए पूरे देश में सम्मेलन और कार्यशालाओं का आयोजन करती है, जिसमें इस्लामी विशेषज्ञ शरिया कानूनों की जानकारी प्रतिभागियों को देने का प्रयास करते हैं। यह महसूस किया गया है कि समिति को अब और अधिक सक्रिय किया जाना चाहिए और ऐसे कार्यक्रम अधिक आयोजित होने चाहिए। 

विभिन्न कार्यक्रमों में समिति द्वारा उठाए गए मुद्दों में, "ट्रिपल तलाक और विरासत" जैसे मुद्दे भी शामिल हैं। 

दूसरा मामला है कश्मीर के डिप्टी ग्रेंड मुफ्ती नासिर उल इस्लाम और एक अन्य महाशय के भड़काऊ बयानों का, जिसका विडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है | विडियो में ये लोग कहते दिखाई दे रहे हैं कि देश में कभी लव जिहाद के नाम पर, तो कभी गौरक्षा के नाम पर, कभी तलाक के नाम पर, मुसलमानों को परेशान किया जा रहा है | जबकि भारत में दूसरे नंबर की सबसे बड़ी कौम मुस्लिम है | केवल 17 करोड़ मुसलमानों पर पाकिस्तान बन गया था | अगर यही सूरत मुसलमानों की रही, तो अब वह समय आ गया है, जब उन्हें एक अलग मुल्क की मांग करनी चाहिए | 

नासिर आगे कहते हैं कि आगर आपको शरीया कोर्ट पर एतराज है तो आपका रास्ता अलग, हमारा रास्ता अलग | आने वाले दिनों में एक और बटवारे की निशानी जाहिर हो रही है | मैं यह कहना चाहता हूँ कि मुसलमान चाहे यहाँ रहें, चाहे सऊदी अरब में, मुसलमान केवल इस्लामी क़ानून का पाबंद है | 


जफरयाब जीलानी और कश्मीर के मुफ्ती नासिर उल इस्लाम के बयान अलग अलग नहीं देखे जाने चाहिए | यह सोची समझी साजिश का अंग हैं | 1947 का विभाजनकारी विचार भी इसी प्रकार धीरे धीरे पनपा था | आज चंद लोग देश विभाजन की मांग उठा रहे हैं, किन्तु आने वाले दिनों में यह उन्माद बढ़ सकता है | एकजुट भारत ही इस पागलपन भरे मकसद पर लगाम लगा सकता है | किन्तु 2019 के आम चुनावों में कुर्सी की चाहत क्या यह होने देगी, जोकि पागलपन में तब्दील हो रही है | यही कारण है कि विपक्षी राजनैतिक दल और उनके अनुसार संचालित मीडिया एक दूसरे से जुड़े इन दोनों अहम मामलों पर चुप्पी साधे हुए है | 

देश रहे न रहे, कुर्सी पर हम रहें | 

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क्रांतिदूत: बुना जा रहा है, एक बार फिर देश विभाजन का तानाबाना !
बुना जा रहा है, एक बार फिर देश विभाजन का तानाबाना !
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