गाँधी के देश में असली होने की त्रासदी - संजय तिवारी

SHARE:

राष्ट्रपिता महत्मा गाँधी। मोहन दास करम चंद गांधी। बापू। विश्व में अहिंसा के पुजारी के रूप में स्थापित। विश्व में शान्ति और स्थायित्व के...

राष्ट्रपिता महत्मा गाँधी। मोहन दास करम चंद गांधी। बापू। विश्व में अहिंसा के पुजारी के रूप में स्थापित। विश्व में शान्ति और स्थायित्व के लिए सर्वश्रेष्ठ आधुनिक दार्शनिक। भारत के हर राजनीतिक दल के लिए कसम खाने के उपकरण। जिनके नाम पर भारत में एक परिवार की चार पीढ़ियां शासक के रूप स्थापित हैं। आज भी यह गांधी शब्द ही भारत की राजनीति की मुख्यधारा बना हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी तक। सभी संकल्प गांधी जी के नाम का ही लेते है। हर साल देश में गांधी जी के नाम पर करोडो रुपये खर्च किये जाते हैं। उनके आश्रमों , उनकी बकरी की रस्सी , उनके चरखे , उनकी धोती , उनकी लाठी। इन सभी को हमने बहुत संजो कर रखा है। अगर नहीं संजो सके हैं तो उनको जो कभी नमक आंदोलन में उनकी लाठी थामे आगे आगे चलने वाला बच्चा था। जो गांधी जी के अपने प्रवाहित रक्त हैं। जो असली गांधी हैं। उन्ही की सुधि लेने की फुर्सत नहीं देश को। असली गांधी की खबरें भी नहीं ले पाता भारत का राष्ट्रीय मीडिया। असली को असली बताने में इस शर्म जैसी प्रवृत्ति ने बहुत शर्मिंदा कर दिया है। सहारा से वंचित और बेबस हालात में राष्ट्रपिता की पौत्रवधू को दिल्ली छोड़ना पड़ा है। यह वही दिल्ली है जहाँ केवल उधर की गांधी पहचान लगाए एक परिवार भी रहता है , गांधी की कसमें खाता है और गांधी शब्द ही ओढ़ता बिछाता देश पर लम्बे समय तक राज करता रहा है । ऐसे में लाचार दशा में वृद्धावस्था की दुरूह कठिनाइयां झेल रहीं शिवालक्ष्मी कनु गांधी के दिल्ली छोड़ने की खबर ने झकझोर दिया है।

अभाव और मुफलिसी 

यही सच है। अभाव और मुफलिसी में लक्ष्मी के पति कनु रामदास गाँधी ने नवम्बर 2016 में एक मंदिर की सहायता से किसी तरह इलाज तो पाया लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। अब उनकी पत्नी शिवालक्ष्मी कनु गांधी अकेली ही रह गयी । यहां यह बता देना उचित होगा कि कनु गाँधी बापू के वही पौत्र थे जिनकी खींची गयीं तस्वीरों से देश और दुनिया के सभी गांधी संग्रहालय भरे पड़े हैं। नमक सत्याग्रह की वह चर्चित तस्वीर जिसमे एक बच्चा गांधी जी की लाठी पकड़ कर आगे आगे चल रहा है , बहुत ही चर्चित हुई थी। वह बच्चा कनु गांधी ही हैं। उन्ही कनु गांधी की पत्नी हैं शिवलक्ष्मी जी। 

25 साल तक नासा की सेवा 

कनु और शिवालक्ष्मी की कोई संतान नहीं हैं। कनु ने 25 साल तक नासा की सेवा की। चार दशक बाद 2014 में स्वदेश लौटने के बाद उनके हालात बुरे हो गए। भारत में अमेरिका के तत्कालीन राजदूत जान केनेथ गालब्रेथ, कनु को मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) में अध्ययन के लिए ले गए थे। कनु ने नासा और अमेरिकी रक्षा मंत्रालय में काम किया था। शिवालक्ष्मी बोस्टन बॉयोमेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट में प्रोफेसर थीं। भारत लौटने के बाद पति-पत्नी एक-जगह से दूसरी जगह भटकते रहे क्योंकि उनका अपना कोई स्थायी ठिकाना यहां नहीं था। कुछ समय के लिए दोनों आश्रमों और धर्मशालाओं में रहे। 

गुरु विश्राम वृद्धा आश्रम में छह महीने 

एक समय आया जब वह दिल्ली के गुरु विश्राम वृद्धा आश्रम में छह महीने तक रहने के लिए बाध्य हो गए। कहा जा रहा है कि मानसिक रूप से बीमार बुजुर्गो के इस आश्रम में दंपति को भयावह दिन देखने पड़े। यहां तक कि उन्हें अपनी सुरक्षा के लिए निजी सशस्त्र गार्ड रखने पड़े। इन हालात में एक केंद्रीय मंत्री ने कनु से संपर्क किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी बात कराई। प्रधानमंत्री बहुत सहानुभूति से पेश आए और मदद का वादा किया। लेकिन, इसके बाद आज की तारीख तक हमें न तो उनके कार्यालय (पीएमओ) से और न ही गुजरात सरकार की तरफ से, कोई भी संदेश सुनने को नहीं मिला।

इंग्लैंड में पली बढ़ीं डॉक्टर शिवा 

इंग्लैंड में पली बढ़ीं डॉक्टर शिवा लक्ष्मी के पिता वहीं पर बड़े कारोबारी थे। बचपन से ही मेधावी शिवा ने इंग्लैंड में ही पीएचडी की और वहीं पर प्रोफेसर बनीं। उनके पास अमेरिकी नागरिकता भी है।बातचीत में शिवा ने अपने बारे में बताया था कि 1948 में जब गांधी जी की हत्या हुई थी, उस वक्त वह इंग्लैंड में अपने कॉलेज के लैब में थीं, तब वहां के एक प्रफेसर ने आकर इस बारे में बताया था। जब बापू की 1948 में हत्या हुई, तो वह महज 17 बरस के थे। पिछले साल दिल्ली के कादीपुर गांव में 15 अगस्त के रोज झंडारोहण भाग लेने के दौरान कनु गांधी की पत्नी (पौत्रवधु) शिवा लक्ष्मी गांधी ने कहा था कि महात्मा गांधी चाहते थे कि देश के हर बच्चे को समुचित शिक्षा मिले। वह चाहते थे कि हर माता-पिता अपने बच्चों को जरूर पढ़ाएं और उनकी देखभाल व परवरिश इस तरह से करें कि बच्चे बड़े होकर देश के विकास में अपना योगदान भी कर सके। गुजरात स्थित साबरमती आश्रम में महात्मा गांधी से जब लोग मिलने आते थे, तो वह लोगों को अपने बच्चों को शिक्षा दिलाने के लिए जरूर आग्रह किया करते थे।

कई बार आश्रम में जाकर गांधी जी से मिली 

शिवा लक्ष्मी गांधी महात्मा गांधी व साबरमती आश्रम से जुड़ी कई यादों को सुनाकर स्वतंत्रता आंदोलन की यादें ताजा कर दी थीं। उन्होंने बताया था कि वह वर्ष 1930 से 1940 के बीच अपने पिता के साथ कई बार आश्रम में जाकर गांधी जी से मिली थीं। वह उनकी गोद में भी खेल चुकी हैं। उन्होंने कहा कि गांधी जी अच्छे विचार वाले थे, अपनी बातों को वे अधिक से अधिक प्रसार प्रचार करना चाहते थे। उनकी सोच थी कि अच्छे विचार को पुस्तक का रूप देना चाहिए, ताकि ऐसे विचार कभी खत्म न हो और यह पुस्तकों के माध्यम से अधिसंख्य लोगों तक पहुंच सके। जिससे लोगों की सोच में बदलाव हो सके। वह ऐसा इसलिए चाहते थे कि लोगों में सकारात्मक सोच से समाज की कई कुरीतियां स्वत: समाप्त हो जाएगी।

शिवा लक्ष्मी ने बताया था कि गांधी जी के अच्छे विचारों को आश्रम से निकलने वाली छापा (पत्रिका) नवजीवन में प्रकाशित किए जाते थे। शिवा ने तब कहा था कि गांधी आज हमारे विचारों में जिंदा हैं, लेकिन उनके विचारों को तभी पूरी सार्थकता मिलेगी, जब भारत का एक भी बच्चा शिक्षा पाने से वंचित नहीं रहेगा।

एक वर्ष से गुमनामी की जिंदगी 

डॉक्टर शिवा लक्ष्मी गांधी पिछले एक वर्ष से गुमनामी की जिंदगी जी रही थीं। उत्तर पश्चिमी दिल्ली के गांव कादीपुर में हरपाल राणा के घर पर शिवा लक्ष्मी एक साल पहले रहने आईं थीं। हैरानी की बात है कि इस दौरान शासन, प्रशासन की ओर से कोई उनकी खोज खबर भी लेने नहीं आया। तकरीबन दो साल पहले नवंबर, 2016 में पति कनु गांधी के निधन के बाद उन्होंने बाकी बची हुई जिंदगी दिल्ली में ही बिताने की इच्छा जताई थी। शिवा लक्ष्मी पिछले एक साल से दिल्ली के माहौल से कुछ ज्यादा ही परेशान हो गई थी। वह दिल्ली के माहौल से ऊब चुकी थीं। उन्होंने कहा भी था कि दिल्ली का माहौल ठीक नहीं है। सूरत में उन्होंने कहा कि वह अब बापूजी के कार्यों को करेंगीं।कई बार मन किया कि वे भारत छोड़कर इंग्लैंड वापस चली जाएं, लेकिन वहां भी कोई ठिकाना नहीं। ताजा बयान के मुताबिक, वह अब गुजरात के सूरत में ही रहेंगी और गांधी जी के कामों को आगे बढ़ाएंगीं।

अहमदाबाद के धीमंत बधिया 

गांधी जी के एक मित्र के पौत्र और कनु गांधी के बचपन के मित्र अहमदाबाद के धीमंत बधिया ही एक ऐसा नाम है जो अंत तक इस दम्पति से जुड़ा रहा है। वह बताते हैं कि कनु जब बीमार हुए तो राधाकृष्ण मंदिर ने बहुत अधिक साथ दिया। उन्होंने (मंदिर प्रशासन) कनु को पास के शिव ज्योति अस्पताल में भर्ती कराया और वही लोग कनु की 90 वर्षीय पत्नी शिवालक्ष्मी कनु गांधी की देखभाल कर रहे थे । शिवालक्ष्मी सुन नहीं सकती हैं और वृद्धावस्था की अन्य समस्याओं से ग्रस्त हैं। धीमंत कहते हैं कि दुःख इस बात का है कि सब कुछ जानने के बाद भी गुजरात के किसी नेता या मंत्री ने कनु का हाल जानने के लिए पूछताछ करने या अस्पताल आने की जहमत नहीं उठाई। कनु दिल का दौरा पड़ने और मस्तिष्काघात के बाद 22 अक्टूबर 2016 को सूरत पहुंचे थे । उनका आधा शरीर लकवाग्रस्त हो गया था ।

कनु की बहनें पूछती रहीं हाल- चाल 

कनु की बुजुर्ग बहन उषा गोकानी मुंबई से नियमित रूप से उनकी हालचाल पूछती रहती थीं । बेंगलुरु में रहने वाली एक अन्य बहन सुमित्रा कुलकर्णी उन्हें देखने आई थीं। सुमित्रा पूर्व राज्यसभा सदस्य हैं। बहनों ने कहा था कि वे कनु के इलाज का खर्च उठाएंगी लेकिन, मंदिर के अधिकारियों ने विनम्रता से पेशकश को नकार दिया। उनका कहना था कि कनु की सेवा कर वे राष्ट्र के लिए महात्मा गांधी की सेवा का कर्ज चुकाने की थोड़ी कोशिश कर रहे हैं। 

उस समय बधिया की प्रतिक्रिया थी - कनु की हालत को देखकर अहमदाबाद के प्रसिद्ध साबरमती आश्रम से चिढ़ सी हो रही है जिसके होने वाले शताब्दी महोत्सव के लिए करोड़ों खर्च किए जा रहे हैं। ऐसे ही महात्मा गांधी के नाम पर कई संस्थानों को करोड़ों सरकार द्वारा दिए जा रहे हैं। लेकिन, किसी को महात्मा गांधी के विचारों या उनके वारिसों से कोई सरोकार नहीं है।

संजय तिवारी
संस्थापक - भारत संस्कृति न्यास (नयी दिल्ली)
वरिष्ठ पत्रकार 

COMMENTS

Google+ Followers

नाम

अखबारों की कतरन,38,अपराध,1,आंतरिक सुरक्षा,15,इतिहास,59,उत्तराखंड,4,ओशोवाणी,16,कहानियां,35,काव्य सुधा,69,खाना खजाना,20,खेल,19,चिकटे जी,25,तकनीक,83,दतिया,1,दुनिया रंगविरंगी,33,देश,158,धर्म और अध्यात्म,202,पर्यटन,14,पुस्तक सार,42,प्रेरक प्रसंग,81,फिल्मी दुनिया,8,बीजेपी,37,बुरा न मानो होली है,2,भगत सिंह,5,भारत संस्कृति न्यास,6,भोपाल,20,मध्यप्रदेश,271,मनुस्मृति,14,मनोरंजन,44,महापुरुष जीवन गाथा,104,मेरा भारत महान,290,मेरी राम कहानी,23,राजनीति,26,राजीव जी दीक्षित,18,राष्ट्रनीति,15,लेख,942,विज्ञापन,1,विडियो,23,विदेश,46,वैदिक ज्ञान,69,व्यंग,5,व्यक्ति परिचय,19,शिवपुरी,320,संघगाथा,44,संस्मरण,35,समाचार,467,समाचार समीक्षा,697,साक्षात्कार,7,सोशल मीडिया,3,स्वास्थ्य,22,
ltr
item
क्रांतिदूत: गाँधी के देश में असली होने की त्रासदी - संजय तिवारी
गाँधी के देश में असली होने की त्रासदी - संजय तिवारी
https://1.bp.blogspot.com/-yaM8mNnknYQ/W1bjLAKxi_I/AAAAAAAAKQM/hPOcFcC-Hz4MiFqJDzDeEhEkbqKoMM_8QCLcBGAs/s400/kanu%2Bgandhi.jpg
https://1.bp.blogspot.com/-yaM8mNnknYQ/W1bjLAKxi_I/AAAAAAAAKQM/hPOcFcC-Hz4MiFqJDzDeEhEkbqKoMM_8QCLcBGAs/s72-c/kanu%2Bgandhi.jpg
क्रांतिदूत
http://www.krantidoot.in/2018/07/The-tragedy-of-being-true-in-the-country-of-Gandhi.html
http://www.krantidoot.in/
http://www.krantidoot.in/
http://www.krantidoot.in/2018/07/The-tragedy-of-being-true-in-the-country-of-Gandhi.html
true
8510248389967890617
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS CONTENT IS PREMIUM Please share to unlock Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy