निष्ठा और घात-प्रतिघात

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ख्यातनाम अंग्रेजी समाचार पत्र द टेलीग्राफ में 13 अगस्त 2015 को राशीद किदवई का एक आलेख प्रकाशित हुआ, जिसका शीर्षक था – “Loyalty and l...



ख्यातनाम अंग्रेजी समाचार पत्र द टेलीग्राफ में 13 अगस्त 2015 को राशीद किदवई का एक आलेख प्रकाशित हुआ, जिसका शीर्षक था – “Loyalty and let-down, retold now” ! आलेख में श्रीमती सुषमा स्वराज द्वारा एक पुराने प्रसंग का उल्लेख किये जाने को लेकर, उनके कथन की विस्तृत समीक्षा की गई थी | तो आईये देखते हैं कि क्या कुछ है उस आलेख में | साथ ही उस विषय की अपने स्तर पर समीक्षा भी करते हैं - 

12 अगस्त 2015/ सुषमा स्वराज ने आज कांग्रेस को अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन युग की याद ताजा करा दी । 

विदेश मंत्री ने कहा है कि प्रधान मंत्री के रूप में, राजीव गांधी ने अपने बचपन के मित्र आदिल शाहरयार की मदद की थी, जिसे अमेरिका में दोषी ठहराया गया था था। आदिल - जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के करीबी सहयोगी मोहम्मद यूनुस के पुत्र थे। 

जून 1985 में एक राजकीय यात्रा के दौरान राजीव ने रीगन को व्यक्तिगत अनुरोध किया था जिसके परिणामस्वरूप अमेरिकी राष्ट्रपति ने आदिल को मुक्त कर दिया था । आदिल को कथित रूप से फायरबॉम्ब को लगाने और फ्लोरिडा में धोखाधड़ी और अन्य अपराधों के लिए 35 साल की सजा सुनाई गई थी । 

उस समय के भारतीय और विदेशी समाचार पत्रों के अनुसार, राजीव ने इस बात से तो इनकार किया था कि उन्होंने अपने मित्र की सजा को कम करने के लिए कहा था, लेकिन यह भी जोड़ा कि: "हमें लगता है उसे गलत तरीके से कैद किया गया है।" 

15 अगस्त, 1985 को न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक जिस दिन राजीव वाशिंगटन पहुंचे , उसी दिन अर्थात 11 जून को रीगन ने आदिल को क्षमा किये जाने के पत्र पर हस्ताक्षर किए । 

" व्हाइट हाउस द्वारा राष्ट्रपति के अन्य पेपर्स के विपरीत, क्षमा पत्र के कागजात नियमित रूप से प्रकाशित नहीं किए जाते हैं और न ही प्रेस को उपलब्ध कराए जाते हैं, अतः यह कार्यवाही किसी की जानकारी में नहीं आई । भारतीय प्रेस में शहरयार की माफी संबंधी समाचार आने के बाद व्हाइट हाउस के प्रेस ऑफिस ने इसकी पुष्टि की । एक विभागीय प्रवक्ता, जोसेफ क्रॉविस्की ने कहा कि वह आधिकारिक क्षमादान पत्र के आगे कुछ नहीं बता सकते, जिसमें कहा गया था कि श्री शहरयार, फिर लेवेनवर्थ, कान्सास में संघीय दंड संहिता में, 1991 तक पैरोल के लिए भी पात्र नहीं थे। इरविन मोलोत्स्की और वॉरेन वीवर जूनियर ने टाईम्स में लिखा : 'ऐसा लगता है कि न्याय की पूर्णता आवश्यक नहीं है जिसके अनुसार आदिल शहरयार को उपरोक्त सजा पूरी करनी चाहिए थी । 

हालांकि इस सजा माफी का कुछ अधिक फायदा नहीं हुआ और आदिल ज्यादा समय तक जिन्दा नहीं रहा । निजी बातचीत में उसके पिता यूनुस कहा करते थे कि उनका बेटा "बुरी संगत" में पड़ गया था। जब संजय गांधी रोल्स-रॉयस की विशेषज्ञता के लिए ब्रिटेन गए, तब आदिल भी उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका गया था । 

आदिल अमिताभ बच्चन, उनके भाई अजीताभ और कबीर बेदी का भी करीबी दोस्त था। इंदिरा गांधी की जीवनी लेखक कैथरीन फ्रैंक ने अपनी पुस्तक “द लाईफ ऑफ़ इंदिरा नेहरू गांधी” में दावा किया है कि आदिल केवल मजे के लिए कारों को चुरा लेता था और फिर उन्हें दिल्ली में छोड़ देता था, हालांकि उसके पिता यूनुस ने इससे इनकार किया । 

पाकिस्तान के एबोटाबाद में पैदा हुए यूनुस को नेहरू ने भारतीय विदेश सेवा में शामिल किया था और उनके समय यूनुस ने तुर्की, इंडोनेशिया, इराक और स्पेन के राजदूत के रूप में कार्य किया । यूनुस वाणिज्य मंत्रालय के सचिव के रूप में सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हुए। 

संजय आदिल की मौजूदगी में ही पहली बार मेनका से मिले थे। विदेश जाकर बस चुके एक सेवानिवृत्त जनरल बी डी कपूर और उनकी पत्नी कमला, यूनुस के मित्र थे। वे छुट्टी बिताने आये तो यूनुस के घर पर ही रहे | उनके बेटे विनू की संजय और आदिल के साथ दोस्ती हो गई । उस दौरान जनरल कपूर की भतीजी मेनका भी उनसे मिलने अक्सर यूनुस के घर आती जाती थी । 

मेनका के माता-पिता टीएस आनंद और अमतेश्वर तब नई दिल्ली के ग्रेटर कैलाश में रह रहे थे। सितंबर 1974 में संजय-मेनका की शादी यूनुस के आधिकारिक निवास 12 विलिंगडन क्रिसेंट पर ही संपन्न हुई । 

उन दिनों मितव्ययता के चलते सरकार ने सरकारी मकानों की पुताई रोक दी थी। अतः शादी समारोह के लिए आदिल ने अपनी जेब से मकान की पुताई, रोशनी व सजावट आदि की व्यवस्था की । 

मेनका के पिता आनंद को दृढ़ता से कुछ भी भुगतान करने से मना कर दिया गया गया था। इंदिरा जी के साथ मेनका के सम्बन्ध कभी अच्छे नहीं रहे, किन्तु "यूनुस चाचा" उनके पसंदीदा रहे । 

1977 की चुनावी हार के बाद इंदिरा जी को यूनुस ने ही अपने घर में जगह दी | नेहरू-गांधी परिवार के पांच वयस्क, दो बच्चे, पांच कुत्ते, किताबों और कागजात के दर्जनों बक्से उनके आवास में ही रहे । 

उक्त आलेख को पढकर कई सवाल दिमाग में आते हैं – 

आखिर मुहम्मद यूनुस जैसे विदेश सेवा के एक अधिकारी की इंदिरा जी से इतनी नजदीकी कैसे थी, कि वह इमेरजेंसी के दौरान संजय गांधी के बाद सबसे ताक़तवर शख़्सियत थे? 

मुहम्मद यूनुस के घर पर ही संजय गांधी और मेनका का विवाह क्यूं हुआ और शादी की सारी तैयारी आदिल शहरयार ने क्यों की ? 

1977 में प्रधानमंत्री आवास छोड़ने के बाद इंदिरा जी का परिवार मोहम्मद यूनुस के घर ही आकर क्यों रहा ? 

जब आदिल शहरयार को अमेरिका में 35 साल की सज़ा सुना दी गई, तब प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने अमरीकी राष्ट्रपति से गुहार क्यों लगाई ? 

यहाँ ध्यान देने योग्य बात यह भी है कि 2 दिसम्बर 1984 की रात भोपाल में यूनियन कार्बाइड की दुर्घटना घटी जिसमें 15000 से ज्यादा लोग मारे गए। कारखाने का मालिक अमेरिकी नागरिक एंडरसन गिरफ्तार कर लिया गया । किन्तु क्या कारण था कि तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ने जैसे ही उसे रिहा करवा कर अमेरिका भेजा और अगस्त 1985 में आदिल शहरयार को अमरीकी सरकार ने रिहा कर दिया? 

इन सवालों को पूछते पूछते, मुझे तो जबाब मिल गया, आपको मिला या नहीं ?

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