शबरीमला के षडयंत्र को समझें !

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यह कितने हैरत की बात है कि जो शबरीमला शैव और वैष्णवों के बीच की अद्भुत कड़ी है। जो मंदिर समन्वय और सद्भाव का प्रतीक माना जाता है। जह...



यह कितने हैरत की बात है कि जो शबरीमला शैव और वैष्णवों के बीच की अद्भुत कड़ी है। जो मंदिर समन्वय और सद्भाव का प्रतीक माना जाता है। जहां किसी भी जाति-बिरादरी का और किसी भी धर्म का पालन करने वाला व्यक्ति आ सकता है।स्थापत्य और शान्ति के प्रतीक उस अय्यप्पा मंदिर को आजकल हिंसा की आग में झोंका जा रहा है | इस षडयंत्र पर चर्चा करने के पूर्व आईये उस पवित्र स्थान के विषय में कुछ तथ्य स्मरण करें – 

मलयालम में 'शबरीमला' का अर्थ होता है, पर्वत। यह मंदिर भी सह्यपर्वत श्रृंखलाओं के घने वनों के बीच, समुद्रतल से लगभग १००० मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। मक्का-मदीना के बाद यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तीर्थ माना जाता है, जहां हर साल करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं।कंब रामायण, महाभागवत के अष्टम स्कंध और स्कंदपुराण के असुर कांड के अनुसार मोहिनी वेषधारी विष्णु और शिव के समागम से जन्मे अय्यप्पन का यहाँ पूजन होता है | चूंकि अय्यप्पन को ब्रह्मचारी माना जाता है, अतः इस मंदिर में छोटी बच्चियों और बूढ़ी औरतें ही आ सकती हैं, जो रजस्वला न हुई हों या जो इससे मुक्त हो चुकी हों। 

इस पुरातन मान्यता को सुप्रीम कोर्ट ने भले ही असंगत ठहरा दिया हो, किन्तु परंपरा को मानने वाली कोई हिन्दू श्रद्धालू महिला, इस नियम को नहीं तोड़ना चाहती | और आखिर तोड़े भी क्यों ? जैसे कि दतिया के प्रसिद्ध व पवित्र पीताम्बरा मंदिर में मां धूमावती के दर्शन कोई सुहागन स्त्री नहीं करती | वहां कोई प्रतिबन्ध नहीं है, फिर भी कोई सुहागन स्त्री वहां नहीं जाती | यह श्रद्धा, आस्था, परम्परा व मान्यता का प्रश्न है | इसमें सुप्रीम कोर्ट किसी को जबरन भेज तो नहीं सकता ? 

किन्तु कामरेड और ईसाई ब्रिगेड इस बहाने क़ानून और व्यवस्था की स्थिति बिगाड़कर, पांच राज्यों के चुनावी माहौल में सरकार को अकारण कठघरे में खड़ा करना चाहते हैं, ताकि उन्हें किसी प्रकार राजनैतिक लाभ मिल सके | 

यहाँ ध्यान देने योग्य बात है कि दक्षिण भारत कुछ मामलों में अत्यंत ही संवेदनशील है | वहां किसी बड़े नेता के मरने के बाद, कई प्रशंसक आत्महत्या कर लेते हैं, अपनी जान दे देते हैं | आज शबरीमला मंदिर की पवित्रता पर आक्रमण के नाम पर कोयिलंदी के एक पन्दल्लुर रामकृष्णन गुरुस्वामी द्वारा आत्महत्या कर ली गई | (देखें ऊपर चित्र) 

समाचार चेनलों में लगातार भड़काऊ सामग्री प्रसारित हो रही है, मसलन कुछ महिलायें अपने बच्चों के साथ मंदिर की ओर जा रही हैं, और कुछ लोग उन्हें रोकते हैं | सवाल उठता है कि कोई सामान्य महिला किसी विवाद ग्रस्त स्थान पर, जहाँ उपद्रव की भी संभावना हो, क्या अपने बच्चों को साथ लेकर जायेगी ? 

एक महिला जो अपनी ट्विटर पोस्ट पर लिखती है कि वह किसी भगवान को नहीं मानती, चित्र में शबरीमला जाने का प्रयास करती दिखाई देती है | 


यह और कुछ नहीं, केरल की लाल सलाम बामपंथी ब्रिगेड की साजिश है, जो अपने ईसाई सहयोगियों के साथ पूरे देश में अशांति भड़काने की साजिश रच रहे हैं | 

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के नाम पर मोदी सरकार व संघ उनके निशाने पर है | केरल के एक मंत्री ने आरोप लगाया है कि संघ के उपद्रवी, जंगल में छुपे हुए हैं और शबरीमला जाने वालों पर हमला कर रहे हैं | यह और कुछ नहीं उपद्रव भड़का कर उसका आरोप संघ पर मढने की उनकी साजिश की पूर्व भूमिका बनाना भर है | 

वे वहां अक्टूबर 1990 के अयोध्या गोलीकांड जैसा माहौल बना रहे हैं और कोई अचम्भा नहीं कि आने वाले कुछ दिनों में शबरीमला परिसर में बड़े पैमाने पर हिंसा का तांडव दिखाई दे । 

ब्रिंदा करात और कविताताकृष्णन जैसी ब्रिगेड शबरीमला की ओर कूच करती दिखाई दे सकती हैं । बरखादत्त तो एक्टिव हो ही चुकी हैं | भले ही ये महिलाएं 50 वर्ष से अधिक आयु की हैं, और उनके मंदिर में जाने पर परंपरा में भी कोई रोकटोक नहीं है, लेकिन वे वहां कोई दर्शन को थोड़े ही जायेंगी, उनका उद्देश्य तो होगा अव्यवस्था पैदा करना, संघर्ष ही उनका मूल मन्त्र है | 

बला से पुलिस की गोलियों से लोग मरें, कमसेकम उनके भांड टीवी चेनल पर उनके एंकर चिल्ला चिल्ला कर, गला फाडकर संघ और भाजपा को तो कोस पायेंगे | लाल सलाम ब्रिगेड तो कानून और व्यवस्था की समस्या पैदा करना चाहती हैं ताकि सरकार को कठघरे में खड़ा किया जा सके और फिर स्वाभाविक ही गृह मंत्री राजनाथ सिंह का स्तीफा तो माँगा ही जाएगा | एक मंत्री अकबर के बाद दूसरे मंत्री पर निशाना साधा जाएगा | अब या तो भाजपा सरकार कडाई से काम ले, क़ानून व्यवस्था के नाम पर केरल में राष्ट्रपति शासन लगाए, अन्यथा उनके सामने घुटने टेक दे | 

आमतौर पर हिन्दू शान्तिप्रिय होते हैं, संघर्ष से कतराते हैं| किन्तु एक एक कट्टर कम्युनिस्ट बहुरूपिया अगर स्वयं को हिंदू बताते हुए गड़बड़ी फैलाएगा, तो दोष तो हिन्दू समाज पर ही मढा जाएगा ? और गोयबल्स के इन झूठे चेलों के लिए यह कोई कठिन और नया काम भी नहीं है । 

और फिर केरल में तो करेला और नीम चढ़ा जैसी स्थिति है, वेटिकन भी उनके साथ है । ईसाई सोनिया राहुल की कांग्रेस के पक्ष में वातावरण बनाने के लिए, वे कुछ भी कर सकते हैं | बैसे भी केरल के बहुचर्चित नन काण्ड में पादरियों की कलई खुलने से वे लोग झल्लाए हुए हैं | अतः शबरीमला प्रकरण तो एक प्रकार से बिल्ली के भाग्य से छींका टूटने जैसा है | वे लोग इस मौके का लाभ उठाने से नहीं चूकने वाले | 

शबरीमला और रामजन्मभूमि प्रकरण में बहुत साम्य है | दोनों मामलों को वेटिकन ब्रिगेड द्वारा षडयंत्र पूर्वक उलझाया गया है | क्योंकि इटली की बिटिया ने वैटिकन की मदद जो मांगी है | लाल सलाम ब्रिगेड भी पूरी ताकत से उनके साथ है। दोनों के उद्देश्य एक समान है कि कैसे नरेन्द्रमोदी सरकार को पटका जाए | 

इसके पहले कि शबरीमला में जलियाँबाला बाग़ काण्ड दोहराया जाए - 

जागो हिन्दू जागो !
पुलिसिया अत्याचार शुरू हो चुके हैं, चित्र उसका नमूना है !

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शबरीमला के षडयंत्र को समझें !
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