संघ शाखा के विरुद्ध कांग्रेस का विधवा प्रलाप - प्रवीण गुगनानी

SHARE:

#RSSvsCongress #IamRSS

कांग्रेस ने अपने मप्र के चुनावी घोषणा पत्र में संघ की शाखाओं पर शासकीय कर्मचारियों के जाने पर प्रतिबंध की बात की है वहीं अभी अभी पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी संघ के मंच पर संघ के सरसंघचालक संग खड़े होकर संघ की प्रसंशा करते दिखाई दिए थे. संघ एक पूर्णतः सांस्कृतिक, सामाजिक व वैचारिक संगठन है. आश्चर्य होता है कि देश में चल रहे सैकड़ों आतंकी संगठनों पर बात करने में जिस कांग्रेस की जिव्हा को लकवा मार जाता हो, “भारत तेरे टुकड़े होंगे” जैसी बात सुनकर जो कांग्रेस कोई प्रतिक्रया न कर पाती हो, “हमें चाहिए आजादी” जैसे नारे लगाने वाले संगठनों को जो कांग्रेस अपने सर माथे बैठाती है वह संघ जैसे सामाजिक संगठन से इतना भयग्रस्त रहती है?! वैसे कांग्रेस का यह संघ विरोध कोई छुपा हुआ एजेंडा नही है. सरदार पटेल भी कभी संघ के आलोचक हुआ करते थे. गांधी जी की हत्या के लिए संघ को दोषी ठहराने के षड्यंत्र शिल्पी जवाहरलाल नेहरु ने जब संघ पर प्रतिबंध लगाया था तब सरदार पटेल ने गांधी हत्याकांड की कड़ी व गहन जांच को संपूर्ण करके 27 फरवरी, 1948 को संघ के विषय में कहा था -

 "अभियुक्तों की गवाही से स्पष्ट होता है कि आरएसएस की इसमें कोई भूमिका नहीं थी. हिंदू महासभा के एक धड़े ने इस साज़िश को गढ़ा था और अंजाम दिया था. आरएसएस और महासभा के जो लोग गांधी जी की विचारधारा और नीतियों के विरोधी थे, उन्होंने इस हत्या का स्वागत किया था. मगर इससे ज्यादा आरएसएस या हिंदू महासभा के और किसी व्यक्ति को, हमारे पास जो सबूत हैं, उनके आधार पर, इससे जोड़ना सही नहीं है”. 

महात्मा गांधी संघ के वर्धा में 1934 के शिविर में यूं ही नहीं चले गए थे, वे भी संघ को समीप से जानना चाहते थे. गांधी जी तब संघ के मंच से कहा था –

 “मैं छुआछूत के खिलाफ अभियान चला रहा हूं, उस पर संघ पहले से ही अमल कर रहा है. शिविर में एक साथ भोजन करने पर पता ही नहीं चलता कि कौन सा स्वयं सेवक किस जाति का है. महात्मा गांधी ने संघ के सामाजिक कार्यों की भी प्रशंसा की थी. वर्धा शिविर के प्रभारी अप्पा जी से गांधीजी ने पूछा कि इस शिविर में कितने हरिजन है? तब अप्पा जी ने कहा कि यह बताना तो कठिन है क्योंकि हम सभी को हिन्दू रूप में देखते हैं और शिविर में केवल नाम से नामांकित करते हैं, जातिनाम या उपनाम के साथ नहीं.

 यही कारण है आज संघ की जिस शाखा में शासकीय कर्मचारियों के जाने पर कांग्रेस प्रतिबंध की बात कर रही है, संघ की उस शाखा की प्रसंशा गांधी जी से लेकर जवाहरलाल नेहरू, वल्लभ भाई, बाबासाहेब अम्बेडकर, लाल बहादुर शास्त्री, पूर्व राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी, पूर्व राष्ट्रपति डॉ. जाकिर हुसैन, विनोबा भावे, जगजीवन राम, सर्वोदय नेता प्रभाकर राव, जनरल करियप्पा, जस्टिस केटी थॉमस, वैज्ञानिक जी. माधवन नायर, के. राधाकृष्णन, के. कस्तूरीरंगन और उद्यमी रतन टाटा, एपीजे अब्दुल कलाम आदि आदि भी कर चुकें हैं. गांधी जी तो दो बार संघ के कार्यक्रम में सम्मिलित हुए थे, एक बार वर्धा में और एक बार दिल्ली में.

 16 सितंबर, 1947 की सुबह दिल्ली की शाखा में स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए गांधीजी ने कहा था कि आरएसएस कार्यकर्ता अनुशासन और देशप्रेम की का ज्वलंत उदाहरण हैं. 1962 में नेहरूजी ने भारत-चीन युद्ध में संघ की भूमिका को देखते हुए 26 जनवरी, 1963 को गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होने के लिए संघ को आमंत्रित किया था और संघ के 3000 स्वयंसेवकों ने परेड में हिस्सा लिया था. 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय लाल बहादुर शास्त्री ने संघ की मदद ली और संघकार्य की प्रसंशा करते हुए संघ के द्वितीय सरसंघचालक गुरुजी को सर्वदलीय बैठक में आमंत्रित किया था. स्वयं इंदिरा गांधी संघ के आमंत्रण पर विहिप के एकात्म जलयात्रा कार्यक्रम में शामिल हुई थीं. 1977 में संघ के वरिष्ठ प्रचारक एकनाथ रानाडे के निमंत्रण पर इंदिरा गांधी ने विवेकानंद रॉक मेमोरियल का अनावरण भी किया था. 1967 में बिहार में भीषण अकाल के दौरान संघ ने लोगों की मदद के लिए दिन-रात एक कर दिया था. तब लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने संघ की श्रमसाध्य कार्यशैली देखने के बाद पटना में कहा था कि संघ की देशभक्ति किसी प्रधानमंत्री से कम नहीं है, और अगर संघ फासीवादी है तो मैं भी फासीवादी हूं. अभी वर्तमान में केरल में आई भीषण बाढ़ के बाद केरल के पुनर्निर्माण में संघ द्वारा किये जा रहे कार्यों की पुरे देश में प्रसंशा हो रही है. 

कांग्रेस मध्यप्रदेश में शाखा में शासकीय कर्मचारियों के जाने पर जिस प्रतिबंध का स्वप्न देख रही है वह कांग्रेस का कोई पहला संघ विरोधी कदम नहीं है. इसके पूर्व कांग्रेस द्वारा संघ पर तीन बार पूर्णतः प्रतिंबंध लगा चुकी है. गांधीजी की हत्या पश्चात नेहरु द्वारा संघ पर लगाया गया प्रतिबंध और गुरूजी को 18 माह जेल में बंद रखना, इंदिराजी द्वारा 1975 में संघ पर प्रतिबन्ध लगाना और हजारों लाखों स्वयंसेवकों को मीसा बंदी बनाकर यातनाएं देना और फिर 1992 में बाबरी ढांचें के विध्वंस के बाद संघ पर प्रतिबंध लगाना और फिर रामभक्त स्वयंसेवकों को जेलों में ठूंस देना, अंधाधुंध गोलीचालन कर हत्याएं करना, ये सब कुचक्र संघ सहन कर चुका है. संघ प्रत्येक कुचक्र के बाद अधिक सशक्त हुआ है. 

यहां यह समझना चाहिए कि वह कौन सा मनोभाव, कौन सी मनोवृत्ति व कौन व्यक्ति है जो संघ की शाखा शक्ति को समझ कर शाखा तंत्र पर दुष्प्रभाव डालना चाहता है?? इसके पीछे पूर्णतः मष्तिष्क लगा है ईसाई मिशनरियों का. वही ईसाई मिशनरियां जो इटली से आई सोनिया गांधी द्वारा युपीए के शासन काल में बड़ी ही कुटिलता व बदमाशी से भारत में “साम्प्रदायिक हिंसा लक्षित अधिनियम” डिजाइन करके लाई थी व उसे संसद में बस पास कराने की देर भर रह गई थी, कि संघ आड़े आया और अड़ गया ! संघ का इस खतरनाक अधिनियम को पहचानना और इसे रोकने के लिए एड़ी चोंटी का जोर लगाना और देश भर में ग्राम ग्राम और नगर नगर में आन्दोलन खड़ा कर देना सोनिया नेतृत्व वाले ईसाई धर्मांतरण संगठनों पर एक बड़ा तुषारापात था. सोनिया गांधी और उनका भारत से लेकर रोम तक का चतुर व शक्तिशाली मिशनरी संगठन इस चोट को भूल न पा रहा है. संघ की शाखा पर यह ताजा प्रहार कांग्रेस पर सोनिया गांधी की वेटिकन सोच का सपोला है. 

वेटिकन को पता है कि अब आरएसएस के देश में करोड़ से अधिक प्रशिक्षित स्वयंसेवक हैं. वह संघ के एक सैकड़ा से अधिक संगठनों की शक्ति को पहचान गया है. विश्व के 40 देशों में सक्रिय संघ की अभी छप्पन हजार छः सौ दैनिक शाखाएं लगती हैं. 13 हजार 847 साप्ताहिक मंडली और 9 हजार मासिक शाखाएं भी हैं. 50 लाख से ज्यादा स्वयंसेवक नियमित रूप से शाखाओं में आते हैं. देश की हर तहसील और करीब 55 हजार गांवों में संघ की शाखाएं लग रही हैं. आज संघ अपनी 30 अलग अलग, 12 भाषाओं वाली जागरण पत्रिका के माध्यम से देशभर के सुदूरपूर्व 2 लाख ग्रामों तक अपना संदेश लिखित में पहुंचाता है व देशवासी उसे पढ़कर उसका अनुसरण करते हैं. देखते हैं कांग्रेस आगे और कितने प्रतिबंधो की बात करती है.

प्रवीण गुगनानी


COMMENTS

Google+ Followers

नाम

अखबारों की कतरन,38,अपराध,1,आंतरिक सुरक्षा,15,इतिहास,59,उत्तराखंड,4,ओशोवाणी,16,कहानियां,35,काव्य सुधा,69,खाना खजाना,20,खेल,19,चिकटे जी,25,तकनीक,83,दतिया,1,दुनिया रंगविरंगी,33,देश,158,धर्म और अध्यात्म,202,पर्यटन,14,पुस्तक सार,42,प्रेरक प्रसंग,81,फिल्मी दुनिया,8,बीजेपी,37,बुरा न मानो होली है,2,भगत सिंह,5,भारत संस्कृति न्यास,6,भोपाल,20,मध्यप्रदेश,271,मनुस्मृति,14,मनोरंजन,44,महापुरुष जीवन गाथा,104,मेरा भारत महान,290,मेरी राम कहानी,23,राजनीति,26,राजीव जी दीक्षित,18,राष्ट्रनीति,15,लेख,942,विज्ञापन,1,विडियो,23,विदेश,46,वैदिक ज्ञान,69,व्यंग,5,व्यक्ति परिचय,19,शिवपुरी,320,संघगाथा,44,संस्मरण,35,समाचार,467,समाचार समीक्षा,697,साक्षात्कार,7,सोशल मीडिया,3,स्वास्थ्य,22,
ltr
item
क्रांतिदूत: संघ शाखा के विरुद्ध कांग्रेस का विधवा प्रलाप - प्रवीण गुगनानी
संघ शाखा के विरुद्ध कांग्रेस का विधवा प्रलाप - प्रवीण गुगनानी
#RSSvsCongress #IamRSS
https://1.bp.blogspot.com/-_-B-8IwwIBo/W-mPYtXZ6AI/AAAAAAAAKkE/JRfCGN0arnMZNUUJtlwKBrfqUp6CZz9kACLcBGAs/s400/sangh%2Bvs%2Bcongress.jpg
https://1.bp.blogspot.com/-_-B-8IwwIBo/W-mPYtXZ6AI/AAAAAAAAKkE/JRfCGN0arnMZNUUJtlwKBrfqUp6CZz9kACLcBGAs/s72-c/sangh%2Bvs%2Bcongress.jpg
क्रांतिदूत
http://www.krantidoot.in/2018/11/Congress-widow-devastation-against-RSS-branch.html
http://www.krantidoot.in/
http://www.krantidoot.in/
http://www.krantidoot.in/2018/11/Congress-widow-devastation-against-RSS-branch.html
true
8510248389967890617
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS CONTENT IS PREMIUM Please share to unlock Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy