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रजत शर्मा केस में बड़ा उलटफेर! हाईकोर्ट ने एफआईआर रद्द, बोले - 'सत्यमेव जयते'

 

शिवपुरी के बहुचर्चित और लंबे समय से राजनीतिक तथा सामाजिक गलियारों में चर्चा का विषय बने मामले में आखिरकार बड़ा कानूनी मोड़ आ गया। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने राजत शर्मा के विरुद्ध थाना कोतवाली, शिवपुरी में भारतीय न्याय संहिता की धारा 69 के तहत दर्ज एफआईआर को निरस्त करते हुए उससे जुड़ी समस्त कार्यवाही समाप्त कर दी है। न्यायालय ने अपने आदेश में माना कि मामले के तथ्यों के आधार पर धारा 69 के आवश्यक तत्व प्रथम दृष्टया स्थापित नहीं होते, इसलिए एफआईआर और उससे संबंधित कार्यवाही जारी रखना उचित नहीं होगा।

यह मामला केवल एक आपराधिक प्रकरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पिछले कुछ समय से शिवपुरी की राजनीति में भी लगातार चर्चा का केंद्र बना हुआ था। इसकी एक बड़ी वजह यह भी रही कि राजत शर्मा की माता गायत्री शर्मा वर्तमान में शिवपुरी नगर पालिका अध्यक्ष हैं। विपक्षी और राजनीतिक विरोधियों ने इस प्रकरण को लेकर लगातार उन्हें घेरने का प्रयास किया और विभिन्न मंचों तथा सोशल मीडिया पर इस मामले को व्यापक रूप से प्रचारित किया गया। राजनीतिक हलकों में इसे नगर पालिका अध्यक्ष की छवि पर प्रहार के रूप में भी देखा जाता रहा।

हाईकोर्ट ने अपने विस्तृत आदेश में कहा कि यदि दो वयस्कों के बीच लंबे समय तक सहमति से संबंध रहे हों, तो केवल संबंध टूट जाने के बाद प्रत्येक मामले को शादी के झूठे वादे के आधार पर अपराध नहीं माना जा सकता। न्यायालय ने सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में यह देखना आवश्यक है कि क्या संबंध वास्तव में केवल झूठे विवाह-वादे के कारण बने थे या फिर दोनों पक्षों के बीच सहमति से विकसित हुए थे। उपलब्ध तथ्यों के आधार पर न्यायालय ने माना कि इस प्रकरण में धारा 69 के आवश्यक तत्व दिखाई नहीं देते, इसलिए एफआईआर को निरस्त किया जाना उचित है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच शहर में एक और चर्चा भी जोर पकड़ रही है। पिछले कई महीनों से नगर पालिका अध्यक्ष को पद से हटाने की मांग को लेकर उनके विरोधी प्रत्येक सप्ताह सामूहिक सुंदरकांड का आयोजन करते रहे हैं। ऐसे में लोगों के बीच अब यह सवाल भी चर्चा का विषय बन गया है कि क्या यह महज संयोग है कि जिस मामले को लेकर लगातार राजनीतिक और सामाजिक बहस होती रही, उसका फैसला मंगलवार को आया जिस दिन को भगवान हनुमान की विशेष आराधना का दिन माना जाता है। हालांकि इसे आस्था, संयोग या व्यक्तिगत विश्वास के रूप में ही देखा जाना चाहिए और इसका न्यायिक निर्णय से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।

हाईकोर्ट का आदेश सामने आने के बाद जब इस प्रतिनिधि ने राजत शर्मा से उनकी प्रतिक्रिया जानने के लिए दूरभाष पर संपर्क किया, तो उन्होंने केवल दो शब्दों में अपनी बात समाप्त करते हुए कहा - "सत्यमेव जयते।"

हाईकोर्ट के इस निर्णय के बाद यह मामला एक बार फिर पूरे शिवपुरी में चर्चा का विषय बन गया है। जहां एक पक्ष इसे न्यायिक प्रक्रिया की जीत बता रहा है, वहीं अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि क्या इस आदेश को आगे उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी जाएगी या फिर यहीं इस बहुचर्चित विवाद का पटाक्षेप हो जाएगा।

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