अमरीक विचार
हम बीमार हैं क्योंकि हमने अपनी परंपराओं को 'पिछड़ापन' मान लिया – डॉ.अमरीक सिंह ठाकुर
दातून से दूर भागे, तो रोग पास आए वापसी का वक्त आ गया है! "बासी पानी जे पिये, ते नित हर्रा खाय। मोटी दत…
दातून से दूर भागे, तो रोग पास आए वापसी का वक्त आ गया है! "बासी पानी जे पिये, ते नित हर्रा खाय। मोटी दत…
शिवपुरी में पत्रकारिता अब कई बार खबरों की नहीं, बल्कि नकाबों की दुनिया लगने लगी है। सवाल यह नहीं कि पत्रकार…
भारत का इतिहास किसी राजसिंहासन की कथा भर नहीं है, यह उस राष्ट्र की आत्मा का इतिहास है जो नदियों के तट पर जन…
आज की वैश्विक राजनीति एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहाँ पुराने शक्ति संतुलन (Balance of Power) टूट रहे हैं और नए …
शिवपुरी में पुलिस व्यवस्था इन दिनों किसी गहरे आत्ममंथन की नहीं, बल्कि आत्मसंतोष की अवस्था में दिखाई देती है…
भारत की आत्मा में ‘सेवा’ केवल एक क्रिया नहीं, बल्कि एक शाश्वत दृष्टिकोण है। यह दर्शन हमें बताता है कि समाज,…