पाकिस्तान पर अभूतपूर्व विजय की शौर्य गाथा : 16 दिसंबर ढाका विजय दिवस

भारत ने सन् 1971 में पाकिस्तान पर अभूतपूर्व विजय हासिल कर बांग्लादेश के निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। इस विजय दिवस 16 दिसंबर पर प्रस्तु...


भारत ने सन् 1971 में पाकिस्तान पर अभूतपूर्व विजय हासिल कर बांग्लादेश के निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। इस विजय दिवस 16 दिसंबर पर प्रस्तुत है लेफ्टिनेंट जनरल के.के. नंदा द्वारा लिखित इस युद्ध का सिलसलेवार ब्योरा देने वाली पुस्तक “1971 भारत-पाक युद्ध, 161वीं इन्फैंट्री ब्रिगेड की शौर्य गाथा” के अंश :


पाकिस्तान द्वारा 3 दिसम्बर, 1971 को भारत के पश्चिम में एक व्यापक युद्ध की शुरूआत कर देने के तुरंत बाद सेना मुख्यालय ने पूर्वी कमांड के जी.ओ.सी. इन चीफ लेफ्टिनेंट जनरल जे.एस. अरो़डा को "आगे बढ़ने" के आदेश दिए। वे इस आकस्मिक घटना के लिए सारे प्रबंध कर चुके थे तथा पूरी तरह से तैयार थे। अगली सुबह से ही स्वतंत्रता अभियान शुरू कर दिया गया। भारतीय सेना जब ढाका पर नकेल कस रही थी, सेना प्रमुख सैम मानेकशॉ ने अपना मनोवैज्ञानिक आक्रमण आरंभ कर दिया।

तंगेल पर कब्जा और पाकिस्तानी सेना के ढाका भागने वाले मार्गो को बंद करने के तुरंत बाद उन्होंने नियाजी को अपना प्रथम संदेश दिया तथा उसमें उन्हें आत्मसमर्पण का सुझाव दिया। मेजर जनरल फरमान अली पूर्वी पाकिस्तान के गवर्नर के सलाहकार थे। जब उन्होंने देखा कि पाकिस्तानी सेनाओं ने आत्मसमर्पण करना प्रारंभ कर दिया है तथा महसूस किया कि पराजय निश्चित है और सिर्फ कुछ ही दिन दूर है, उन्होंने भागने का प्रयास किया; परंतु असफल रहे। 11 दिसम्बर को उन्होंने गवर्नर के माध्यम से यू.एन. को पाकिस्तानी सेनाओं तथा अन्य सिविल अधिकारियों को पाकिस्तान भेजने की व्यवस्था करने के लिए एक अपील की तथा प्रांत में निर्वाचित सरकार को स्थापित करने की मांग की। 

इससे पहले कि सुरक्षा परिषद् इस पर सोच-विचार कर पाती, याह्या खां द्वारा इसे वापस ले लिया गया। सैम मानेकशॉ ने अपनी दूसरी अपील में फरमान अली को संबोधित करते हुए कहा, ""आत्मसमर्पण करनेवाली सेनाओं को सुरक्षा तथा न्यायपूर्ण व्यवहार का आश्वासन दिया जाना चाहिए।"" परेशान ढाका को डराने के लिए शतरंज के खेल के घो़डों की भांति आज रात भारतीय घेराबंदी को क़डा किया जा रहा है। याह्या खां, नियाजी को डटे रहने और भारतीयों को ढाका की ओर बढ़ने से रोकने के लिए समझाते रहे तथा उनसे वादा किया कि कुछ ब़डा आने वाला है, अर्थात् यू.एस. का 7वां जहाजी बे़डा, जो पहले से ही शीघ्रता से बंगाल की ख़ाडी की ओर बढ़ रहा था, उनकी सहायता के लिए प्रभावकारी हो जाएगा। उन्होंने यह वादा भी किया कि उनके मित्र राष्ट्र उनके लिए तथा पाकिस्तान के लिए हालातों को पूरी तरह बदल देंगे, लेकिन नियाजी तथा पूर्वी पाकिस्तान के गवर्नर डॉ. ए.एम. मलिक कुछ अलग ही सोच रहे थे। 

14 दिसम्बर को जब डॉ. मलिक सरकारी भवन के बाएं भाग में अपने मंत्रिमंडल के साथ एक बैठक कर रहे थे, आई.ए.एफ की आगे बढ़ने की सूचना पर बैठक स्थान में बवाल खडा कर दिया तथा विचलित मलिक को निर्णय लेने के लिए विवश कर दिया। उन्होंने अपने मंत्रिमंडल के साथ इस्तीफा दे दिया तथा इंटरकॉण्टिनेंटल होटल के तटस्थ क्षेत्र में आश्रय ले लिया। 16 लोक सेवक तथा महानिरीक्षक पहले से ही होटल में आश्रय लिए हुए थे। सारी जिम्मेदारी परेशान नियाजी पर आ गई। उन्होंने आखिरी सैनिक के जिंदा रहने तक संघर्ष करने का निश्चय कर लिया। याह्या खां दोपहर में ही उनकी सहायता हेतु प्रस्तुत हो गए और भारतीय सेना कमांडर के समक्ष उनकी सेनाओं को आत्मसमर्पण करने की आज्ञा दे दी और उन्हें संघर्ष को रोकने तथा पश्चिमी पाकिस्तान के सभी सशस्त्र सैन्य कर्मियों एवं सभी निष्ठावान लोगों की जान बचाने का निर्देश दिया। 

भारतीय सेना जब ढाका के समीप पहुंची तो खबरें आने लगीं कि यू.एस. 7वां जहाजी बे़डा अपने नाभिकीय शक्ति-संपन्न विमानवाहक पोत प्रतिष्ठान के साथ पैसिफिक महासागर से बंगाल की ख़ाडी की ओर बढ़ रहा है तथा उसका प्रयोजन पूर्वी पाकिस्तान में मौजूद कुछ अमेरिकी कर्मचारियों को मुक्त करवाना है। परंतु वास्तव में उसकी अतिरिक्त क्षमता का प्रयोग, आवश्यकता होने पर, नियाजी की सेनाओं को वहां से निकालने के लिए किया जाना था। उसकी विशाल गोलाबारी क्षमता को याह्या खां के लिए उपलब्ध कराया जाना था, ताकि वे ढाका में पाकिस्तानी कसाइयों को पुन: तैनात कर सकें और पूर्वी बंगाल की जनसंख्या में से भारतीय रक्षकों का सफाया कर सकें। प्रतिक्रियास्वरूप भारत ने वायुसेना के विमानों तथा नौ सेना के जहाजों का प्रयोग करते हुए चटगांव व कोक्स बाजार की नाकेबंदी कर दी तथा समुद्र-निकास के इन स्थानों को पूर्ण रूप से नष्ट कर दिया। 

15 दिसम्बर को जनरल नियाजी ने नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास से वास्तविक आत्मसमर्पण के बिना युद्ध-विराम की संभावना के संबंध में पूछताछ की। सैम मानेकशॉ ने उत्तर दिया कि युद्ध-विराम सिर्फ आत्मसर्पण के साथ ही स्वीकार किया जाएगा। उन्होंने नियाजी को सुरक्षा तथा न्यायपूर्ण बरताव का वादा किया। उन्होंने "उनकी सद्भावना के प्रतीक रूप में" 15 दिसम्बर को शाम के 5 बजे से लेकर अगले दिन सुबह 9 बजे तक ढाका पर वायु सेना के द्वारा सभी आक्रमण भी बंद करवा दिए तथा साथ ही यह वादा भी किया कि इसका पालन न किए जाने की स्थिति में आक्रमणों को और अधिक तीव्रता से आरंभ कर दिया जाएगा। 

नियाजी ने 16 तारीख की सुबह लगभग 8 बजे इस अवधि को छह घंटे बढ़ाने की बात कही तथा इसे स्वीकार कर लिया गया। इसके बाद उन्होंने कुछ आश्वासन और वादे भी लेने के प्रयास किए; परंतु उन्हें अस्वीकार कर दिया गया। भारतीय सेना प्रमुख ने बिना शर्त आत्मसमर्पण की मांग रखी तथा जेनेवा संधि का सम्मान करते हुए इसके पूर्ण पालन का वादा किया। 16 दिसम्बर को सुबह 10:40 पर - अल्टीमेटम समाप्त होने से पहले ही - पैरा बटालियन, जो ढाका के बाहरी क्षेत्र में पहुंच गई थी, ने मेजर जनरल मोहम्मद जमशेद और उनकी 26 इन्फैंट्री डिवीजन के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। दोपहर के 3.30 बजे मेजर जनरल नागरा ने एक ब्रिगेड प्लस के साथ ढाका में प्रवेश किया तथा समस्त जन-समूह द्वारा उनका प्रफुçल्लत स्वागत किया गया। 

16 दिसम्बर, 1971 को दोपहर के 2.30 बजे जनरल नियाजी ने आत्मसमर्पण की प्रक्रिया शुरू कर दी तथा शाम के 4:31 बजे तक उन्होंने ऎतिहासिक ढाका रेसकोर्स में पूर्वी फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल कृष्णन, पूर्व के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ एयर मार्शल दीवान तथा बांग्लादेश की मुक्ति वाहिनी हाई कमांड के चीफ ऑफ स्टाफ ग्रुप कैप्टन खोंदाकर की उपस्थिति में पूर्वी कमांड के जी.ओ.सी. इन चीफ लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत अरो़डा के समक्ष औपचारिक रूप से आत्मसमर्पण कर दिया। उल्लेखनीय है कि इसी स्थान पर से मुजीबुर्रहमान ने मार्च 1971 में राष्ट्रपति याह्या खां का जबर्दस्त विरोध किया था। ढाका खुशी से झूम उठा। लोगों का यह उन्माद महीनों का भय तथा आतंक की बेहद सहज प्रतिक्रिया थी। 

समारोह के तुरंत बाद नियाजी ने अपनी कमान को युद्ध-विराम तथा आत्मसमर्पण करने के आदेश जारी कर दिए। 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों ने भारतीय सेना के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। याह्या खां पूरी तरह से हार मान चुके थे तथा बांग्लादेश एक स्वतंत्र संप्रभु देश के रूप में अस्तित्व में आ गया।

एंबेडेड छवि की स्थायी लिंक

रक्षा मंत्री श्री मनोहर परिक्कर अमर जवान ज्योति पर शहीद सैनिकों को नमन करते हुए 

COMMENTS

नाम

अखबारों की कतरन अपराध आंतरिक सुरक्षा इतिहास उत्तराखंड ओशोवाणी कहानियां काव्य सुधा खाना खजाना खेल चिकटे जी तकनीक दुनिया रंगविरंगी देश धर्म और अध्यात्म पर्यटन पुस्तक सार प्रेरक प्रसंग बीजेपी बुरा न मानो होली है भगत सिंह भोपाल मध्यप्रदेश मनुस्मृति मनोरंजन महापुरुष जीवन गाथा मेरा भारत महान मेरी राम कहानी राजीव जी दीक्षित लेख विज्ञापन विडियो विदेश वैदिक ज्ञान व्यंग शिवपुरी संघगाथा संस्मरण समाचार समाचार समीक्षा साक्षात्कार सोशल मीडिया स्वास्थ्य
false
ltr
item
क्रांतिदूत: पाकिस्तान पर अभूतपूर्व विजय की शौर्य गाथा : 16 दिसंबर ढाका विजय दिवस
पाकिस्तान पर अभूतपूर्व विजय की शौर्य गाथा : 16 दिसंबर ढाका विजय दिवस
http://ichef.bbci.co.uk/news/ws/660/amz/worldservice/live/assets/images/2011/12/16/111216100525_niyazi_surrender_304x171_bharatrakshak_nocredit.jpg
क्रांतिदूत
http://www.krantidoot.in/2014/12/16.html
http://www.krantidoot.in/
http://www.krantidoot.in/
http://www.krantidoot.in/2014/12/16.html
true
8510248389967890617
UTF-8
Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS CONTENT IS PREMIUM Please share to unlock Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy