श्रीलंका में सत्ता परिवर्तन का भारत पर प्रभाव और संभावनाएं |

अति आत्मविश्वास में राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे का जल्दी चुनाव कराने का निर्णय बहुत भारी पड़ा और वे सत्ता से बाहर हो गए | जबकि उनके कार्यक...

अति आत्मविश्वास में राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे का जल्दी चुनाव कराने का निर्णय बहुत भारी पड़ा और वे सत्ता से बाहर हो गए | जबकि उनके कार्यकाल के अभी दो वर्ष और शेष थे |
पराजय के कारण -राजपक्षे ने अत्यंत दम्भी ढंग से अपनी अधिनायकवादी, वंशवादी और भ्रष्ट सरकार चलाई । सरकार में रिश्तेदारों और नजदीकियों को भरा | उनके एक भाई रक्षा मंत्री थे, दूसरे वित्त मंत्री थे और तीसरे संसद में स्पीकर थे ।
राजपक्षे के सत्तासीन होने का मुख्य कारण था 2009 में LTTE (लिबरेशन टाईगर्स ऑफ़ तमिल ईलम) पर विजय | यद्यपि यह विजय क्रूर सैन्य रणनीति की मिसाल थी, जिसमें दसियों हजार नागरिकों की ह्त्या हुई | सिंहली श्रीलंकाई सेना पर युद्ध अपराधों के कई आरोप हैं, फिर भी जांच आयोग ने तमिलों की शिकायतों को सिरे से खारिज किया | 26 साल के गृह युद्ध का खामियाजा सबसे अधिक उन्हें उठाना पड़ा | हालांकि यह भी सही है कि तमिल टाइगर्स एक क्रूर अलगाववादी समूह था |
 इसके अलावा, राजपक्षे को चीन का नजदीकी माना जाता है | उन्होंने देश के दक्षिणी सिरे पर तमिल बहुल इलाके से दूर हम्बंतोता में चीन के सहयोग से एक नया बंदरगाह का निर्माण करवाया तथा कोलम्बो में भी एक नए कंटेनर बंदरगाह का निर्माण करवाया जो भारत के लिए एक सामरिक सामरिक खतरा माना गया । नव निर्वाचित राष्ट्रपति मैथ्रिपला सिरिसेना राजपक्षे के नजदीकी साथी तथा उनकी सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे हैं | वे 2009 में तमिल टाइगर्स के खिलाफ हुए अभियान के समय रक्षा मंत्री थे । वे एक मजबूत सिंहली राष्ट्रवादी के रूप में जाने जाते है। इसके बाद भी उन्हें उत्तर और पूर्व के तमिल और मुस्लिम बहुल क्षेत्र में समर्थन प्राप्त हुआ | ये दोनों समूह कुल मतदाताओं के 25 प्रतिशत हैं |
इस सब को देखते हुए भारत के सर्वोत्तम हित में यह होगा कि श्रीलंका के तमिल शांतिपूर्ण जीवन यापन कर सकें तथा श्रीलंका में चीनी प्रभाव कम हो सके |
सिरीसेना की सफलता को लेकर अफवाहों का बाजार गर्म है | कहा जा रहा है कि उन्हें पश्चिमी देशों की मदद हासिल है | कारण बताया जा रहा है कि पूर्वी श्रीलंका स्थित क्षेत्र का सबसे बेहतरीन और प्राकृतिक गहराई वाले बंदरगाह त्रिंकोमाली पर पश्चिमी देशों की ललचाई नजरें हैं |
श्रीलंका का अपना सामरिक महत्व है। अतः यह उम्मीद की जानी चाहिए कि श्रीलंका के राष्ट्रवादी सिंघली नेता सिरिसेना और भारत के राष्ट्रवादी नायक नरेंद्र मोदी की बेहतर जुगलबंदी हो और दोनों राष्ट्रों के बीच पारस्परिक लाभ की संभावना बने |
 

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क्रांतिदूत: श्रीलंका में सत्ता परिवर्तन का भारत पर प्रभाव और संभावनाएं |
श्रीलंका में सत्ता परिवर्तन का भारत पर प्रभाव और संभावनाएं |
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