भाजपा उपाध्यक्ष श्री विनय सहस्त्रबुद्धे द्वारा पार्टी की भावी रणनीति का खुलासा |

अंग्रेजी पत्रिका बिजनेस स्टेंडर्ड के लिए श्री संजय जोग को दिए एक इंटरव्यू में भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व सामाजिक नीति व शोध केंद्...


अंग्रेजी पत्रिका बिजनेस स्टेंडर्ड के लिए श्री संजय जोग को दिए एक इंटरव्यू में भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व सामाजिक नीति व शोध केंद्र के संचालक श्री विनय सहस्त्रबुद्धे ने पार्टी की भावी रणनीति का विस्तार से ब्यौरा दिया | जहाँ उन्होंने विगत दस माह की केंद्र सरकार की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला, वहीं विरोधियों के आरोपों की भी बखियां उधेडी |

विपक्ष और गैर सरकारी संगठनों द्वारा विशेष रूप से भूमि अधिग्रहण बिल को लेकर भाजपा पर आरोप लगाया जा रहा है कि वह अमीर समर्थक और उद्योग समर्थक है । स्वयं को गरीब समर्थक बताने वाली पार्टी इसका कैसे मुकाबला करने वाली है ?

एक तरह से यह हमारे नए सिरे से प्रयासों का एक हिस्सा है। कई राज्य सरकारों से राय लेने के बाद, जिनमें कांग्रेस शासित राज्य भी शामिल थे, यह नया बिल बना | हम आशान्वित थे कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इसे समझेंगे और इसका समर्थन करेंगे क्योंकि यह उनके अपने मुख्यमंत्रियों के विचारों पर आधारित था ।

लेकिन दुर्भाग्य से, उन्होंने गरीबी की वही पुरानी राजनीति पुन्हः शुरू कर दी । उन्होंने नए बिल पर कालिख पोतकर बड़े पैमाने पर झूठा प्रचार प्रारम्भ कर दिया । इस मिथ्या सूचना अभियान के प्रभाव को नष्ट करने के लिए हमें विशेष प्रयत्न करने होंगे और हमारा यह अभियान उसी उद्देश्य को लेकर है । यह प्रश्न धारणा से कहीं अधिक है, क्योंकि इसके पीछे भाजपा विरोधी शक्तियों और मीडिया के एक वर्ग द्वारा फैलाई गई झूठी अफवाहें हैं ।

भूमि अधिग्रहण बिल में संशोधन के बावजूद, नया अध्यादेश जारी होने के बाद विपक्ष विशेष रूप से कांग्रेस सरकार के खिलाफ आंदोलन शुरू करने जा रहा है । आप किसान विरोधी होने की धारणा को कैसे परिवर्तित करेंगे ?

हम केवल लोगों तक पहुँचेंगे और उन्हें सही और तथ्यात्मक जानकारी उपलब्ध करायेंगे । हम बड़े पैमाने पर अभियान चलाकर लोगों को जागरूक करेंगे । हम लोगों को सवाल पूछने के लिये प्रेरित करेंगे । यह सामाजिक-आर्थिक प्रभाव का आकलन तब कहाँ गया था, जब देश में वाड्रा को भूमि दी गई या फिर कोयला ब्लॉक अपनी चहेती कंपनियों को आवंटित कर दिए गए थे ? 

इसके अलावा उस समय सहमति का यह अनुच्छेद कहाँ था ? कांग्रेस को किसानों की इतनी ही चिंता है तो उसने कई दशक तक सत्ता में रहने के बाद भी किसानों को पेंशन क्यों प्रदान नहीं की ? यह हमारी सरकार है जिसने सामाजिक सुरक्षा का दायरा बिस्तृत किया ।

क्या पार्टी में बदलाव की यह योजना इसलिए जरूरी हुई क्योंकि विभिन्न राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं ?

कैसा बदलाव? संगठनात्मक दृष्टि से हम कई राज्यों में सुद्रढ़ हैं । हमने पिछले कई विधानसभा चुनाव जीते हैं और बिहार में भी जीतने की स्थिति में हैं | इसके साथ ही आसाम, तमिलनाडु, केरल और बंगाल में भी, जहाँ लोग उपलब्ध दो विकल्पों से तंग आ चुके हैं, तीसरे सर्वाधिक विश्वसनीय विकल्प के रूप में भाजपा मजबूत पैठ बना रही है । अतः आगामी चुनावों को लेकर हम पूरी तरह आशान्वित हैं ।

सफल सदस्यता अभियान के माध्यम से हम अपने मतदाता आधार को एक प्रकार से संगठनात्मक आधार में परिवर्तित करने में सफल हुए हैं । हम उद्देश्यहीनता के उस संकट को समाप्त करने में जुटे हुए हैं जिसकी चपेट में अधिकांश राजनीतिक दल फंसे हुए हैं ।

कांग्रेस भूमि अधिग्रहण बिल के खिलाफ पदयात्रा शुरू करने जा रही है, और उनका कहना है कि वे इस पर कोई समझौता नहीं करेंगे । इस पर आपकी क्या टिप्पणी है?

हमारी उनको शुभकामनाएं । उन्हें जल्द ही अहसास हो जाएगा कि किसान उनका साथ देने के मूड में नहीं हैं । उन्हें अब और मूर्ख नहीं बनाया जा सकता । वे जानते हैं कि उन्हें पेंशन तथा मृदा व स्वास्थ्य कार्ड जैसी योजनायें किसने दी हैं |

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने घोषणा की है कि सरकार आर्थिक सुधारों को गरीब केन्द्रित रखते हुए लागू करेगी । क्या इसका यह अर्थ है कि जन धन जैसी योजनायें भी पार्टी की गरीब समर्थक छवि बनाने में असफल रहीं?

यह एक बिल्कुल गलत व्याख्या है । पार्टी जब सत्ता में रहती है, तब वह आम जनता और सरकार के बीच एक सेतु के रूप में काम करती है। इसके अलावा, कार्यान्वयन के स्तर पर, कमजोर वर्गों की जरूरतों के प्रति संवेदनशीलता अत्यंत महत्वपूर्ण है और हम इसे सुनिश्चित करेंगे । हमें जन-धन और जन-मन दोनों का ध्यान है ।

विपक्ष का यह भी दावा है कि मुद्रास्फीति की दर के समान अच्छे दिन भी कागज़ पर ही हैं, अन्य बातों के साथ औद्योगिक विकास की धीमी गति भी लगातार चिंता का विषय बनी हुई है । इसमें परिवर्तन कैसे होगा?

कौन कहता है अच्छे दिन नहीं आये ? वे आये हैं, दस महीने पहले क्या स्थिति थी उस प्रष्ठभूमि में निष्पक्ष रूप से देखने की आवश्यकता है। लोग अनिर्णय, नेतृत्व संकट और कु-शासन से तंग आ चुके थे।

अब, हर नागरिक सचेत है और आश्वस्त भी कि कोई ऐसा व्यक्ति दिल्ली में बैठा है जो उनकी चिंता करता है । पिछले दस महीनों के दौरान, सरकार ने देश के राजनीतिक शब्दकोश से भ्रष्टाचार शब्द को हटाने में सफलता पाई है। इसका प्रमाण है खनिज, कोयला और स्पेक्ट्रम की ठीक प्रकार से हुई नीलामी ।

हमने सरकार के खजाने में करोड़ों रुपयों का इजाफा किया है, जिसे पूर्ववर्ती शासकों ने दिन दहाड़े लूट लिया था । क्या विपक्ष को एक बार भी भ्रष्टाचार के मुद्दे पर संसद को बाधित करने का अवसर मिला है ? हमने पिछले साल की तुलना में इस वर्ष राज्यों को 1.88 लाख करोड़ रुपये अधिक दिए हैं, जन-धन से लेकर पेंशन और बीमा जैसी योजनायें आई है, अच्छे दिन के लिए और क्या सबूत चाहिए ?

क्या आप पार्टी के “अंत्योदय हमारा संकल्प” के संबंध में और अधिक जानकारी प्रदान कर सकते हैं?

अन्त्योदय सदैव से भाजपा का प्रमुख एजेंडा रहा है । वस्तुतः इसका अर्थ है, सर्वाधिक बंचित वर्ग का प्राथमिकता से ध्यान रखना । यह महात्मा गांधी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय दोनों द्वारा प्रतिपादित किया गया था।

1970 के दशक में जब राजस्थान में भैरोसिंह शेखावत सरकार थी, राजकीय दृष्टि से उन्होंने सबसे पहले योजना बनाकर ग्राम स्तर पर अन्त्योदय कार्यक्रम लागू किया था | 

अब, हम इसे एक सामाजिक विस्तार या बृद्धि कार्यक्रम से कहीं अधिक के रूप में देख रहे हैं। एजेंडे में मुख्यतः चार बातें हैं। मैला ढोने की प्रथा की समाप्ति, कन्या भ्रूण हत्या उन्मूलन, स्वच्छ गंगा और स्वच्छ भारत को बढ़ावा देना । पार्टी नेतृत्व को आशा है कि पार्टी कार्यकर्ता और अधिक सक्रिय होकर इन गतिविधियों में जुटेंगे ।

इस प्रकार यह इस अहसास को दर्शाता है कि पार्टी की गतिविधि दिनचर्या के समान बने, लोगों की अपेक्षा है कि घिसीपिटी और क्लांत पारंपरिक राजनीति का युग समाप्त हो, उसके स्थान पर मूल्य आधारित उच्च राजनीति की प्रक्रिया मूर्त रूप ले | 

माना जाता है कि राजनीति आत्मस्तुति, कपट, धूर्ततापूर्ण व्यवहार, टांग खिंचाई, महत्वाकांक्षाओं का अखाड़ा बन गया है जो आधुनिक समाज की आशा और आकांक्षाओं से मेल नहीं खाता | हमारी पार्टी नेतृत्व इस परिवर्तन की गहराई से सचेत है।

मंत्रियों और पार्टी के कुछ नेताओं के आपत्तिजनक बयानों से भाजपा की छवि, विशेष रूप से प्रधानमंत्री का विकास एजेंडा क्षतिग्रस्त हुआ है ? क्या सांप्रदायिक और जातीय टिप्पणी करना जारी रखने वाले मंत्रियों और नेताओं पर पार्टी कड़ी कार्रवाई करेगी ?

पार्टी ने इस मामले पर ध्यान दिया है और हमारे नेतृत्व की इन सांसदों पर नजर है । जल्दी ही अथवा बाद में आवश्यकतानुसार वे करेंगे ।

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क्रांतिदूत: भाजपा उपाध्यक्ष श्री विनय सहस्त्रबुद्धे द्वारा पार्टी की भावी रणनीति का खुलासा |
भाजपा उपाध्यक्ष श्री विनय सहस्त्रबुद्धे द्वारा पार्टी की भावी रणनीति का खुलासा |
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क्रांतिदूत
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