जांच के घेरे में राबर्ट वाड्रा - कांग्रेस का किसान विरोधी चेहरा - डा. गणेश दत्त (हरियाणा)

कांग्रेस की पूर्व हुड्डा सरकार ने चहेतों को बांटी रेवडि़यां कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा अपने 10 साल के कार्य...

कांग्रेस की पूर्व हुड्डा सरकार ने चहेतों को बांटी रेवडि़यां

कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा अपने 10 साल के कार्यकाल में आला कमान और अपने चहेतों को खुश करने में ही लगे रहे। जिसके लिए उन्होंने नियमों को ही ताक पर नहीं रखा बल्कि सरकार के खजाने को भी नुकसान पहुंचाया और जमीन अनुबंध में जिस तरह अनदेखी की उससे प्रदेश के किसानों को भी भारी खामियाजा उठाना पड़ा। हुड्डा के इसी किसान विरोधी चेहरे को बेनकाब करने के लिए प्रदेश सरकार ही नहीं दुसरे राजनीतिक दल भी उन्हें कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। वाड्रा प्रकरण में फजीहत झेल रहे पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा पर पंचकुला में 14 औद्योगिक प्लाॅटों के आबंटन में की गई धांधली भी उनपर भारी पड़ रही है। आरोप है कि ये प्लाट हुड्डा के करीबी लोगों को ही दिए गए है। इस पर न्यायालय ने भी सरकार को स्टेटस रिपोर्ट पेश करने को कहा है। उधर प्रदेश भाजपा सरकार ने वाड्रा-डीएलएफ करार सहित सभी मामलों की निष्पक्ष जांच कराने की बात कही है। सरकार ने राबर्ट वाड्रा और डीएलएफ भूमि सौदे की जांच के लिए एक सदस्यीय आयोग की अधिसूचना जारी कर उन्हें 6 महीने के अंतराल में अपनी रिपोर्ट पेश करने को कहा है।ऐसे में यह साफ हो जाता है कि हुड्डा ने अपने कार्यकाल में किसानों को भारी नुक्सान पहुंचाया और अपने चहेते और हाई कमान को खुश करने के लिए सभी नियम एवं कानून भी दरकिनार किए।
क्या है राबर्ट वाड्रा डीएलएफ भूमि अनुबंध मामला, जांच के लिए आयोग का गठन
आखिर करीब साढे 3 साल के बाद राबर्ट वाड्रा डीएलएफ भूमि अनुबंध की हकीकत का खुलासा होने की उम्मीद जगी है। भाजपा सरकार ने दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश एस एन ढींगड़ा को राबर्ट वाड्रा और डीएलएफ भूमि सौदे की जांच का जिम्मा सौंपा है। आयोग की अधिसूचना जारी कर दी गई है, उन्हें 6 महीने के अंतराल में अपनी रिपोर्ट पेश करने को कहा है। इसके साथ ही सरकार ने गुड़गांव के सैक्टर- 83 में टाऊन एंड कंर्टी प्लांनिंग विभाग द्वारा दिए गए सभी कमर्शियल लाईसेंस की जांच करवाने का भी फैंसला लिया है।
अनुबंध मामला एवं अधिकारी की रिपोर्ट
राबर्ट वाड्रा मामला गुड़गांव के शिकोहपुर गांव की 3.53 एकड़ जमीन से संबन्धित है। जिसमें तत्कालीन हुड्डा सरकार पर सभी नियमों को ताक पर रखकर सोनिया गांधी के दामाद वाड्रा को फायदा पहुंचाने का आरोप लगा। मामला का खुलासा तब हुआ जब अनुबंध का इंतकाल करने में जल्दबाजी करने का संदेह हुआ और उसे तत्कालीन निदेशक चकबंदी आईएएस अधिकारी अशोक खेमका ने 15 अक्टूबर, 2012 को डीएलएफ का इंतकाल रद्द कर दिया। जो कि ऐसा आदेश देने के सक्षम अधिकारी रहे, लेकिन सरकार ने अधिकारी के इंतकाल रद्द करने को अनुचित ठहराकर उसे अनदेखा करते हुए अधिकारी का ही स्थानंतरण कर दिया। अधिकारी अशोक खेमका ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया था कि डीएलएफ को दो बार लाइसेंस से इनकार किया जा चुका था, लेकिन जैसे ही वाड्रा की कंपनी इसमें शामिल हुई, लाइसेंस जारी हो गया। इसके बदले में वाड्रा की कंपनी के प्रति एकड़ 15 करोड़ 78 लाख रूपए का प्रीमियम मिला। फरवरी 2008 में वाड्रा की कंपनी स्काईलाईट हाॅस्पिलिटी ने ओंकारेश्वर प्राॅपर्टीज से शिकोहपुर गांव में 3.53 एकड. जमीन खरीदी। सेल डीड में साढे सात करोड़ रूपए के चेक से भुगतान का जिक्र है। उन्होंने कहा कि जो चैक दिया गया यदि उसकी बैंक रिपोर्ट को देखें तो उस दौरान वाड्रा के बैंक खाते में सौदे से संबंधित पर्याप्त राशि ही नहीं थी जिससे चेक फर्जी होने की पुष्टि होती है। उन्होंने कहा कि फरवरी में डील और मार्च 2008 में हरियाणा सरकार के डिपार्टमेंट आॅफ टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (डीटीसीपी) से वाड्रा की कंपनी ने कमर्शियल काॅलोनी का लाइसेंस हासिल किया और अगस्त 2008 में वाड्रा की कंपनी ने जमीन 58 करोड़ रूपए में डीएलएफ को बेच दी। जिसपर अप्रैल 2012 में डीटीसीपी ने डीएलएफ को काॅलोनी लाइसेंस ट्रांसफर करने की अनुमति दी। गुड़गांव के शिकोहपुर गांव में राबर्ट वाड्रा-डी एल एफ अनुबंध से संबंधित जमीन खसरा न. 730 में है। प्रारम्भ में 9 एकड़ इस जमीन को 21 फरवरी 2006 में मालिक बदलु राम ने लक्ष्य बिलडर्स को बेचा। जिसे बाद में ओंकारेश्वर प्राॅपर्टीज को बेचा गया। इसी भू-भाग में से 3.53 एकड़ जमीन पर वाड्रा डीएलएफ अनुबंध हुआ। स्काईलाईट प्राॅपर्टीज के मालिक खुद राबर्ट वाड्रा हैं। जबकि ओंकरेश्वर प्राॅपर्टीज के मालिक सत्यानंद काजी हैं। इसी मामले में तत्कालीन अधिकारी खेमका ने जब आर टी आई के तहत सम्बन्धित फाईल की काॅपी मांगी तो फाईल पूरी नही थी उसमें कुछ महत्वपूर्ण पृष्ठ गायब थे। उनमें हुड्डा सरकार के कार्यकाल के दौरान जांच के लिए जो पैनल गठन किया गया था और जिसने वाड्रा फर्म को क्लीन चीट देकर सही ठहराया था कि पूरी जानकारी थी। लेकिन अब ये पृष्ठ मिलने की बात कही जा रही है। उधर भाजपा सरकार ने कांग्रेस के कार्यकाल में हुए सभी जमीन घोटालों की जांच कराने का भी निर्णय लिया है।
पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में हुए भूमि अधिग्रहण मामलों की जांच का निर्णय
20 हजार एकड़ जमीन में घोटाले का संदेह
भाजपा सरकार ने पूर्ववर्ती हुड्डा और चैटाला सरकार के कार्यकाल में भूमि अधिग्रहण के नोटिस जारी जाने के बाद भी जमीन रिलीज करने के मामलों की जांच का फैंसला लिया है। जिसमें गुड़गांव के मानेसर में स्थापित होने वाली देवीलाल औद्योगिक आदर्श नगर के लिए चैटाला सरकार के समय अधिगृहीत की गई 912 एकड़ भूमि के मामले की जांच होगी। प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने इस भूमि अधिग्रहण को रद्द तो कर दिया था, लेकिन इससे पहले ही इसमें से 294 एकड़ भूमि को भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया। इसमें से 224 एकड़ भूमि सेक्शन-4 और 5 ए के बाद जारी की गई और 70 एकड़ भूमि सेक्शन - 6 के बाद रिलीज कर दी गई। तत्कालीन हुड्डा सरकार द्वारा राजीव गांधी धर्मार्थ न्यास को पट्टे (लीज) पर दी गई पंचायती भूमि की भी जांच होगी। जो गुड़गांव के उहलावास की 5 एकड़ 3 मरला भूमि दिसंबर- 2009 में इस ट्रस्ट को 33 वर्षों के लिए पट्टे पर दी गई थी। पट्टे की शर्ताें के अनुसार न्यास को 2 वर्षें में धर्मार्थ नेत्र अस्पताल का निर्माण करवाना था, लेकिन पूर्व की सरकार ने बार-बार अस्पताल के निर्माण की अवधि को बढ़ाया गया, जिसकी अवधि अस्पताल के निर्माण के लिए 7 जनवरी 2017 तक न्यास के पास है। यही नहीं ऐसी ही करीब 20.000 एकड़ जमीन है जिसमें पादर्शिता नहीं रखी गई और धारा 4,6 और 9 की कार्रवाई करने के बाद प्राॅपर्टी डिलर्स, बिल्डर्स और प्राईवेट कंपनियों के पक्ष में रिलीज की गई और बाद में इन्हीं को काॅलोनी के लाइसेंस जारी कर दिए गए।
सरकारी खजाने में कौडी भी नहीं, बिल्डरों ने कमाए 215 करोड़
पूर्व कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में जहां सरकारी खजाने को टैक्स के रुप में कौड़ी भी नहीं मिल सकी उसमें बिल्डरों ने 215 करोड़ रुपए की कमाई की है। इसमें 2013-14 के दौरान रियल एस्टेट से जुड़ी पांच बड़ी कंपनियों को लाभ मिला है। इन कंपनियों में राबर्ट वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हाॅस्पिटेलिटी प्राईवेट लिमिटेड व उप्पल हाउसिंग प्राईवेट लिमिटेड का नाम भी शामिल है। हरियाणा से संबन्धित वर्ष 2013-14 की यह रिपोर्ट हरियाणा विधानसभा सत्र के दौरान सदन पटल पर रखी गयी। रिपोर्ट के अनुसार किसानों से तो जमीन कौडि़यों के भाव पर खरीदी गई लेकिन मनाफा कई गुणा कमाया गया। नियमानुसार कंपनियों को 15 प्रतिशत से अधिक लाभ पर एक राशि सरकार के पास जमा करवानी थी लेकिन ऐसा नहीं किया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि राबर्ट वाड्रा की कम्पनी ने गुड़गांव के शिकोहपुर गांव की भूमि को मूल लागत से 7.73 गुणा से अधिक कीमत पर डी एल एफ यूनिवर्सल को बेचा कंपनी ने 15 प्रतिशत से अधिक लाभ सरकारी खजाने में जमा नहीं करवाया। तीन कंपनियों - सन स्टार बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड, विटनेस कंस्ट्रक्शन प्राइेवट लिमिटेड और बोटिल आॅयल टूल्स इंडिया प्राईवेट लिमिटेड ने 300 से लेकर करीब पौने 900 गुणा तक मुनाफा कमाया। इसी तरह से उप्पल हाउसिंग प्राइवेट लिमिटेड ने मार्च 2013 में अपनी सब्सिडीयर कंपनी सौम्य रियलटेक को कई गुणा दामों पर 69.50 करोड़ रुपए में जमीन बेची। उधर भाजपा सरकार ने सभी ममालों की जांच निष्पक्ष कराने का निर्णय लिया है।
पंचकूला के 14 औद्योगिक प्लाटों के आबंटन में प्रश्न चिन्ह, उच्च न्यायालय ने लिया संज्ञान
हुड्डा सरकार के कार्यकाल में पंचकूला के 14 औद्योगिक प्लाटों के आबंटन में भी प्रश्न चिन्ह लगा है। इसमें निजी रिश्तेदार एवं चहेतों को प्लाटों के आबंटन करने का आरोप पुर्व मुख्यमंत्री हुड्डा पर लगा है। यह मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। पंचकूला में 14 औद्योगिक प्लाटों का आबंटन वर्ष 2013 में किया गया था। जिसकी याचिका पंचकूला निवासी कर्नल एस.के. जैन ने दायर की थी जिसमें कहा गया कि पूर्व मुख्यमंत्री उस समय हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुड्डा) के अध्यक्ष थे, ऐसे में साफ है कि 14 औद्योगिक प्लाॅटों की अलाॅटमैंट उनकी अनुमति के बाद ही हुई है।

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जांच के घेरे में राबर्ट वाड्रा - कांग्रेस का किसान विरोधी चेहरा - डा. गणेश दत्त (हरियाणा)
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