भारत को विश्व का सिरमौर बनाने के लिए भारतीयता को बनाये रखना होगा - श्री भागवत

गोवा की राज्यपाल के उपन्यास "परितप्त लंकेश्वरी" का लोकार्पण भोपाल : शनिवार, जुलाई 11, 2015, 21:35 IST राष्ट्रीय स्वयं सेवक...

गोवा की राज्यपाल के उपन्यास "परितप्त लंकेश्वरी" का लोकार्पण
भोपाल : शनिवार, जुलाई 11, 2015, 21:35 IST

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने गोवा की राज्यपाल श्रीमती मृदुला सिन्हा के उपन्यास 'परितप्त लंकेश्वरी' का आज यहाँ समन्वय भवन में लोकार्पण किया।

श्री मोहनराव भागवत ने कहा कि भारत को विश्व का सिरमौर बनना है, तो उसे भारतीयता को बनाए रखना होगा। अपनी जमीन पर पैर रखे हुए, समाज को बदलना होगा। समाज को महिलाओं और कमजोर वर्ग के प्रति अनुचित व्यवहार की प्रथाओं और परंपराओं को फेंकना होगा। सीता के साथ ही तारा और मंदोदरी को भी समझना होगा। उन्होंने कहा कि भारतीय महिला तेजस्वी और वात्सल्य से परिपूर्ण है। उसका वात्सल्य केवल मोह नहीं है वह सत्मार्ग का दिग्दर्शन भी कराती है। मंदोदरी का पात्र ऐसा ही है। मंदोदरी के प्रयास भले ही असफल रहे किन्तु वो असफल नहीं थी। इसीलिये जो परिवार प्रात: स्मरणीय पाँच कन्याओं का स्मरण करेगा, उसके मर्म को समझेगा, वह सब प्रकार के पाप कर्मों से मुक्त रहेगा।

श्री भागवत ने कहा कि लेखिका श्रीमती मृदुला सिन्हा ने मंदोदरी के पात्र को पर्याप्त विस्तार दिया है। यह उनकी कल्पनाशीलता और मंदोदरी के हृदय के भावों को समझने की क्षमता का परिणाम है।

लोकसभा अध्यक्ष श्रीमती सुमित्रा महाजन ने कहा कि परितप्त लंकेश्वरी में मंदोदरी के मनोभावों का अद्वितीय प्रगटीकरण है। मंदोदरी ने तामसी वैभव में रहते हुए सात्विकता को कायम रखने का प्रयास किया। उसकी सात्विकता का उल्लेख हनुमान के प्रसंग में भी मिलता है जब लंका में उसे मंदोदरी में सीता का भान होता है। उन्होंने कहा कि मंदोदरी ने राक्षस वृत्ति के व्यक्ति के साथ रहते हुए अच्छे संस्कारों को जीवित रखने का प्रयास किया।

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उपन्यास समाज के लिये प्रकाश स्तम्भ का कार्य करेगा। उन्होंने कहा कि उपन्यास में लेखिका ने मंदोदरी को कुशल चितेरे की तरह मनोभावों से भरा है। अनिष्ट की छाया में मंदोदारी की पति, कुल और लंका को बचाने की कोशिशों ने उसे अनोखा पात्र बना दिया है। उन्होंने कहा कि मंदोदरी का सुख अगर पहाड़ से ऊँचा है तो दु:ख भी सागर से गहरा है। वह भारतीय नारी का प्रतीक है जो शक्तिशाली रावण को निरंतर सतमार्ग पर चलाने का हिम्मत और दृढ़ता के साथ प्रयास करती है। उन्होंने कहा कि मेरे मन में लेखिका द्वारा पात्र चयन के संबंध में सवाल खड़ा हुआ था कि मंदोदरी ही क्यों किन्तु उपन्यास के प्रारंभिक अध्ययन से मेरी जिज्ञासा का समाधान हो गया।

उपन्यास की लेखक और गोवा की राज्यपाल श्रीमती मृदुला सिन्हा ने कहा कि मंदोदरी के पात्र के माध्यम से भारतीय समाज को प्रकाश दिखाने का प्रयास यह उपन्यास है। समाज जिसके पति की हजारों प्रतिमाओं का हर वर्ष दहन करता है उसकी पत्नी को प्रात: स्मरणीय पाँच महिलाओं में शामिल भी करता है। आधुनिक भारतीय महिला को सीता, सावित्री और मंदोदरी जैसे पात्रों के माध्यम से संबल प्रदान करने का यह उनका प्रयास है। आभार प्रदर्शन प्रभात प्रकाशन के श्री प्रभात कुमार ने किया।



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भारत को विश्व का सिरमौर बनाने के लिए भारतीयता को बनाये रखना होगा - श्री भागवत
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