केरल में बदलते सामाजिक-राजनीतिक समीकरण - भाजपा की बढ़ती पैठ - G Sreedathan

हालांकि अभी तक केरल में कम्युनिस्टों और कांग्रेस का ही बोलबाला रहा है, भारतीय जनता पार्टी ने तो अपना चुनावी खाता भी नहीं खोला है, लेकिन ...

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हालांकि अभी तक केरल में कम्युनिस्टों और कांग्रेस का ही बोलबाला रहा है, भारतीय जनता पार्टी ने तो अपना चुनावी खाता भी नहीं खोला है, लेकिन राजनैतिक समीक्षक पिछले कुछ वर्षों में भाजपा के वोट प्रतिशत में लगातार हो रही वृद्धि को उसके बढ़ते जनाधार का प्रमाण मान रहे हैं | हाल ही में हुए अरुविक्करा विधानसभा उपचुनाव परिणाम में भी यह बढ़त साफ़ दिखाई दी | भाजपा का वोट प्रतिशत छः से बढ़कर 24 प्रतिशत हो गया | स्मरणीय है कि राज्य में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का एक मजबूत और अनुशासित कैडर है |

2011 की जनगणना के अनुसार, राज्य में हिंदुओं की जनसंख्या 54.7 प्रतिशत है, जबकि मुस्लिम 24.6 फीसदी और ईसाइ 18.4 फीसदी हैं | कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (मार्क्सवादी) या सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाले लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) को सामान्यतः अधिकाँश हिन्दू वोट मिलते रहे हैं, जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे को अधिकाँश अल्पसंख्यक समूहों का समर्थन प्राप्त होता है और वही वर्तमान में सत्ता में है। इसके कारण भाजपा के लिए उम्मीद की किरण दिखाई दे रही है।

हालांकि पिछले आम चुनाव में राज्य में हिन्दू वोट बेंक ध्रुवीकरण हेतु किये गए संघ परिवार के प्रयत्न सफल नहीं हुए, क्योंकि एझावा समुदाय (उत्तरी केरल में थिया), जोकि राज्य की आबादी का 24 प्रतिशतहै , वह लगातार कम्युनिस्ट पार्टियों का समर्थन करता रहा | लेकिन अब जबकि अन्य पिछड़ा वर्ग समुदाय के नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय पटल पर उभरे हैं, साथ साथ राष्ट्रीय स्तर पर वाम दलों की हैसियत भी गिरी है, इसे देखते हुए यह समुदाय भाजपा के पक्ष में मुड़ता प्रतीत होता है।

पिछले साल के चुनावी अभियान में शक्तिशाली एज्हावा नेता व मुखर वक्ता और श्री नारायण धर्म परिपालन योगम (एसएनडीपी) के प्रमुख वेल्लाप्पल्ली नटेसन ने भाजपा के तत्कालीन प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के साथ मंच साझा किया था। इससे नाराज सीपीआई (एम) नेतृत्व ने नटेसन पर तीखा हमला किया। अरुविक्करा विधानसभा उपचुनाव में भाजपा ने सत्ता विरोधी मतों का एक महत्वपूर्ण भाग लेकर सीपीआई (एम) के गणित को बिगाड़ दिया | साफ़ तौर पर सीपीआई (एम) के वोट बैंक में कांग्रेस से अधिक भाजपा ने सेंध लगाई ।

जबसे नटेसन ने पिछले वर्ष हिन्दू एकता और विश्व हिंदू परिषद के घर वापसी अभियान का समर्थन किया है, वे हिंदुत्ववादी शक्तियों के प्रिय बन गये है।

राजनीतिक विश्लेषक जयशंकर के अनुसार उभरते SNDP- भाजपा गठजोड़ के कारण आने वाले दिनों में राज्य में एक "हिंदुत्व तूफान" दिखाई दे सकता है । उनके अनुसार जिस प्रकार केरल की राजनीति जटिल है, उसी प्रकार भाजपा और नटेसन के सम्बन्ध भी गूढ़ हैं । वह एझावा समुदाय का पोप नहीं है, और अधिकाँश लोग अपने अपने हिसाब से वोट भी करेंगे, फिर भी नटेसन का रुख राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।"

यह आम धारणा है कि इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) और चर्च-समर्थित ओमन चांडी के नेतृत्व वाली केरल कांग्रेस की सरकार अल्पसंख्यकों की प्रति झुकाव की नीति अपनाए हुए है ।

आमतौर पर, यूडीएफ से नाराज हिन्दू वोटों का लाभ एलडीएफ को मिलता रहा है। अपना नाम न बताने के आग्रह के साथ एक यूडीएफ नेता ने माना कि ईयूएमएल और केरल कांग्रेस द्वारा उठाए गए कुछ सांप्रदायिक निर्णयों से यह स्पष्ट संकेत मिले हैं कि सरकार अल्पसंख्यकों के लिए ही काम कर रही है । कांग्रेस के अन्दर भी यह महसूस किया जा रहा है कि आईयूएमएल हाथ-मरोड़ कर यह काम करवा रहा है, और इसके कारण हिन्दू वोटों का ध्रुवीकरण होगा, जोकि आगे चलकर कांग्रेस को प्रभावित कर सकता है | यद्यपि अभी तक पार्टी के शीर्ष पदों पर अल्पसंख्यक समुदाय के नेताओं का ही कब्जा है । 

ऐसे में राजमोहन उन्नीथन जैसे कांग्रेस नेताओं ने इन आशंकाओं को व्यक्त भी किया है । उन्होंने कहा कि "हम सीपीआई (एम) की पराजय से बहुत खुश नहीं हैं। भाजपा बढ़ रही है यह हमारे लिए चिंता का कारण है ।"

अरुविक्करा उपचुनाव के बाद, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष कनम राजेंद्रन ने "अल्पसंख्यक तुष्टीकरण" पर चिंता जताई है । लेकिन इसके साथ ही सीपीआई (एम) द्वारा अपनी धर्मनिरपेक्ष साख बचाने को उठाये गए कदमों से न केवल एझावा उससे दूर हुए हैं, बल्कि हार्ड कोर कम्युनिस्टों के बीच भी संदेह और भ्रम का वातावरण बना है।

ऐसा ही एक कदम है सीपीआई (एम) द्वारा जन्माष्टमी पर श्री कृष्ण जयंती का आयोजन । इसे लेकर जब आलोचना हुई कि पार्टी नरम हिंदुत्व की लाईन पर चल रही है, तो उसके जबाब में कहा गया कि यह केवल "आरएसएस के बालगोकुलम’ का मुकाबला करने हेतु किया गया ओणम उत्सव का विस्तार है।

लेकिन सीपीआई (एम) के श्री कृष्ण जयंती जुलूस की एक झांकी में समाज सुधारक श्री नारायण गुरु को क्रॉस पर दिखाए जाने से एझावा समुदाय उत्तेजित हुआ । जनता के आक्रोश को देखते हुए पार्टी माफी माँगने विवश हुई । लेकिन तब तक नुकसान हो चुका था।

इसी तरह, सीपीआई (एम) से सम्बंधित संगठन डीवाईएफआई ने महाराष्ट्र में गोमांस की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के जवाब में राज्य भर में गोमांस त्योहारों का आयोजन किया | किन्तु इसके विपरीत एक घटना हुई जब राज्य सरकार के मंत्री आईयूएमएल नेता अब्दुल रब्ब ने पारंपरिक दीप प्रज्वलन को इस्लाम विरोधी बताकर उसे करने से इनकार किया और पार्टी कार्यकर्ताओं ने रब्ब के खिलाफ दीप प्रज्वलन अभियान चलाया तो डीवाईएफ़आई ने उससे स्वयं को दूर रखा ।

सीपीआई (एम) के लोकसभा सदस्य एमबी राजेश का कहना है कि " संघ परिवार श्री नारायण गुरु का उपयोग करने हेतु प्रयत्नशील है । नटेसन एसएनडीपी को संघ परिवार में सम्मिलित करने की कोशिश कर रहे है। अगर यह होता है तो संगठन के अन्दर एक विद्रोह की स्थिति बनेगी, क्योंकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आदर्श नारायण गुरु के आदर्शों के विपरीत है ।"

इसके जबाब में संघ परिवार के एक नेता टीजी मोहन दास ने कहा कि "सीपीआई (एम) ने हमेशा श्री नारायण गुरु की निंदा की है । और अब जबकि एझावा समुदाय पार्टी से दूर जा रहा है, तो गुरु के प्रति नया नया प्यार जताया जा रहा है।"

और शानदार अंतिम प्रहार नटेशन ने स्वयं किया | उन्होंने एक मलयालम टीवी चैनल से कहा कि "भाजपा निश्चित रूप से आने वाले विधानसभा चुनाव में अपना खाता खोलने में सफल हो जायेगी " ।

अनुवादक - हरिहर शर्मा 

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