पुस्तक सार - श्री लालकृष्ण आडवानी जी की आत्मकथा "मेरा देश मेरा जीवन"

मेरी एक आदत रही है कि कोई भी पुस्तक पढ़ता हूँ, तो उसके नोट्स भी बनाता चलता हूँ ! इसका एक लाभ यह होता है कि कोई प्रसंग ढूँढना हो तो पूरी प...

मेरी एक आदत रही है कि कोई भी पुस्तक पढ़ता हूँ, तो उसके नोट्स भी बनाता चलता हूँ ! इसका एक लाभ यह होता है कि कोई प्रसंग ढूँढना हो तो पूरी पुस्तक दोबारा नहीं पढ़ना पड़ती ! ऐसे में ये नोट्स बड़े कीमती प्रतीत होते हैं ! ऐसी ही एक पुस्तक के नोट्स शायद आप महानुभावों को भी रुचिकर लगें और शायद सहेजकर रखने योग्य भी प्रतीत हों ? पुस्तक है श्री लालकृष्ण जी आडवाणी की आत्मकथा "मेरा देश मेरा जीवन" - 

श्री आडवानी जी का जन्म १९२७ में हुआ |
१९ वर्षीय हेमू कालानी को १९४३ में " करो या मरो" आन्दोलन में भाग लेने के कारण ब्रिटिश हुकूमत द्वारा फांसी पर चढ़ा दिया गया |
मोहम्मद अली जिन्ना का जन्म २६ दिसंबर १८७६ को कराची में हुआ | उनकी माँ मीठी बाई एक हिन्दू महिला तथा पिता जिन्ना भाई पूंगा काठियाबाड के खोजा मुसलमान थे |
मोहनजोदड़ो और हरप्पा लरकाना साहब से लगभग २० कि.मी. दूरी पर स्थित हैं | लरकाना ही स्व. जुल्फिकार अली भुट्टो तथा बेनजीर भुट्टो का गृह नगर भी है | प्रसिद्ध अभिभाषक श्री राम जेठमलानी भी यहीं के हैं |
राधास्वामी सत्संग सन १८६१ में पंजाब के व्यास नदी के तट पर स्वामी शिवदयाल सिंह द्वारा प्रारम्भ किया गया था | उन्होंने बताया कि "शबद" सुनने और इश्वर का नाम स्मरण करने से मानव ईश्वर को प्राप्त कर सकता है | यह समुदाय संतो की सीख "संतमत" से प्रभावित है |

डॉ.मुखर्जी देश के पूर्वी भाग में हिन्दुओ को तेजी से हाशिये पर डाले जाने से चिंतित थे | उनका यह सरोकार उन्हें हिन्दू महासभा के नजदीक ले गया, जो उस समय वीर सावरकर के नेतृत्व में सक्रिय थी | सन १९३९ में वे उसके कार्यकारी अध्यक्ष बन गए | उनके हिन्दू महासभा में शामिल होने का महात्मा गांधी ने यह कहकर स्वागत किया कि प. मदन मोहन मालवीय जी के बाद हिन्दुओं का नेतृत्व करने के लिए कोई चाहिए था | उन्होंने डॉ.मुखर्जी से कहा "पटेल एक हिन्दूमना कांग्रेसी हैं, आप एक कांग्रेसमना हिन्दू सभाई बनिए" गांधी जी ने ही पहले स्वातंत्रोत्तर मंत्रिमंडल में डॉ.मुखर्जी को शामिल करने का आग्रह प.नेहरू से किया, जिसके फलस्वरूप डॉ.मुखर्जी भारत के पहले उद्योगमंत्री बने | उनके कार्यकाल में ही बंगलोर के हिन्दुस्तान एरोनोटिक्स, चित्तरंजन लोकोमोटिव फेक्टरी, सिंदडी फर्टीलाइजर प्लांट जैसे कई बड़े सार्वजनिक उपक्रमों की आधारशिला रखी गई |

१९५० में नेहरू जी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री लियाकत अली खान के साथ जो करार किया था उसे श्री मुखर्जी हिन्दू हितों के साथ विश्वासघात मानते थे | वे पूर्वी पाकिस्तान के लाखों हिन्दुओं के धार्मिक उत्पीडन और सरकार प्रायोजित हिंसा के मुखर आलोचक थे |

मक्खनलाल की पुस्तक "सेक्यूलर पोलिटिक्स कम्युनल एजेंडा" पेज २०७-२०८ में उद्धृत है कि भारत पाक समझौते का जो प्रारूप नेहरू ने मंत्रिमंडल के सम्मुख रखा, उसमें मुसलमानों को सरकारी सेवाओं और भारत के राज्यों के प्रतिनिधि निकायों में जनसंख्या के आधार पर आरक्षण के प्रावधान थे | शरणार्थी पुनर्वास मंत्री श्री व्ही.एन.गाडगिल ने इसका पुरजोर विरोध किया | परिणामस्वरूप पाकिस्तान के प्रधान मंत्री को सरदार पटेल ने बाद में इन मुद्दों पर दो टूक मनाही की |

इन सब स्थितियों से खिन्नमना श्री मुखर्जी ने स्वेच्छा से मंत्रीमंडल छोड़ने का निर्णय लिया वा एक नए राजनैतिक दल "जनसंघ" की स्थापना की | 

राजस्थान विधानसभा के पहले चुनाव में जनसंघ ने अपने घोषणापत्र में जागीरदारी प्रथा उन्मूलन का वायदा किया जिसके अंतर्गत सामंती परिवार हजारों एकड़ कृषि भूमि के स्वामी बने हुए थे | राजस्थान की कुल १६० सदस्यीय विधानसभा में जनसंघ के कुल ८ सदस्य जीते | सबके सब जागीरदार | चुनाव के बाद बारी आई वायदे के क्रियान्वयन की | ८ में से ६ ने विद्रोह कर दिया | केवल श्री भेरोसिंह शेखावत और श्री जगतसिंह झाला साथ रहे | पार्टी ने भी सभी ६ विद्रोहियों को बाहर का रास्ता दिखाने में देर नहीं की | 

१९५२ के लोकसभा चुनाव में बिभिन्न राजनैतिक दलों का मत प्रतिशत -
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस - ४५
प्रजा सोसलिस्ट पार्टी - ५.८
भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी - ३.३
भारतीय जनसंघ - ३.१ 

जनसंघ के तीन सदस्य वा कांग्रेस के ३६४ | जीतने बालों में एक डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी भी थे |

१९५७ के चुनाव में अटल जी को लखनऊ, बलरामपुर तथा मथुरा से चुनाव लड़वाया गया | चुनाव के बाद वे मजाक में कहते थे - " मथुरा से मैंने जमानत गंवाई, लखनऊ में बहुत कम अंतर से हारा तथा बलरामपुर में शान से जीता | इन चुनावों में पार्टी ने कुल ४ सीटों पर जीत हासिल की | २ उत्तर प्रदेश तथा २ महाराष्ट्र | वोट प्रतिशत रहा ५.९ | उत्तर प्रदेश का वोट प्रतिशत था १५ |

लोकसभा चुनाव १९६२ में जनसंघ के कुल १४ सदस्य जीते |
लोकसभा चुनाव १९६7 में जनसंघ के कुल 35 सदस्य जीते | दिल्ली की ७ में से ६ सीटें जीतीं |
लोकसभा चुनाव १९७१ में जनसंघ के कुल २२ सदस्य जीते |
लोकसभा चुनाव १९७७ में जनता पार्टी में जनसंघ के कुल ९३ सदस्य थे |
लोकसभा चुनाव १९८० में भाजपा के कुल १६ सदस्य जीते |
लोकसभा चुनाव १९८४ में भाजपा के कुल २ सदस्य जीते |
लोकसभा चुनाव १९८९ में भाजपा के कुल ८६ सदस्य जीते |
लोकसभा चुनाव १९९१ में भाजपा के कुल ११९ सदस्य जीते |
लोकसभा चुनाव १९९६ में भाजपा के कुल १६१ सदस्य जीते | कांग्रेस १३६
लोकसभा चुनाव १९९८ में भाजपा के कुल १८१ सदस्य जीते | कांग्रेस १४१
लोकसभा चुनाव १९९९ में भाजपा के कुल १८२ सदस्य जीते | कांग्रेस ११४
लोकसभा चुनाव मई २००४ में भाजपा के कुल १३८ सदस्य जीते | कांग्रेस १४५
लोकसभा चुनाव मई २००९ में भाजपा के कुल १३८ सदस्य जीते | कांग्रेस १४५ 

न मांस भक्षणे दोषः न मद्ये न च मैथुने,
प्रवृत्तिरेषा भूतानां निवृत्तिस्तु गरीयसी |

Bible to every hand, church to every village.

धियो यो नः प्रचोदयात (हमारी "धी" शक्ति अर्थात क्या करना, क्या नहीं सदा जागृत रहे)
ऋषि वो जिसके चर्म चक्षु के साथ- मनो चक्षु, प्रज्ञा चक्षु, दिव्य चक्षु भी खुले हों |

दशरथ श्री राम के द्वारा, वसुदेव श्री कृष्ण के द्वारा धन्य हुए, हम भी अपने बच्चों के द्वारा धन्य बने, यही हर माता पिता का लक्ष्य होना चाहिए ! इस हेतु आवश्यक सुसंस्कार बच्चों को देना सबका प्राथमिक दायित्व है !

जिस प्रकार जामा मस्जिद व हजरत बल का काश्मीर में धार्मिक महत्व है, उसी प्रकार लाल चौक काश्मीर की राजनैतिक आत्मा है | इसी कारण यहाँ घटित प्रत्येक घटना पूरे राज्य का ध्यान खींचती है | यही वह चौक है जहां १९४८ में उमर अब्दुल्ला के दादा शेख अब्दुल्ला के साथ स्व.प.जवाहर लाल नेहरू ने राष्ट्र ध्वज फहराया और कश्मीरी जनता से स्वायत्तता का वायदा किया | किन्तु पांच साल बाद शेख अब्दुल्ला जेल में थे तथा श्री नेहरू के अनुसार स्वायत्तता अव्यवहारिक ! यहीं से कश्मीर देश के लिए एक समस्या बनता चला गया | 

इतिहास लाल चौक झंडावंदन का ! - १९९० में जे के एल एफ ने एक कलर टीव्ही लाल चौक पर रखा और घोषणा की कि जो कोई भी हिम्मत करे और तिरंगा फहराए वो यह टीव्ही इनाम में ले जाए | जब किसी ने भी यह हिम्मत नहीं दिखाई तब एक एन एस जी कमांडो ने यह चुनौती स्वीकार की | उसने अपनी वर्दी उतार कर सामान्य वस्त्रों में राष्ट्र ध्वज वहां फहराया | उसके बाद लम्बे समय तक सेना के ऑफीसर्स मेस में वह टीव्ही एक ट्रोफी के तौर पर रखा रहा !

एक रात एक व्यक्ति ने देखा एक स्वप्न
उसने देखा वाह चल रहा है समुद्रतट पर परमात्मा के साथ !
क्षितिज पर चमक रहे थे उसके जीवन के द्रश्य !
हर द्रश्य के लिए थे रेत पर दो जोड़ी पदचिन्ह,
एक उसके और दूसरे परमात्मा के !
और जब आकाश पर चमका उसके जीवन का आखरी द्रश्य,
तो उसने गौर किया
की जीवन के रेतीले पथ पर
कई बार दिखे सिर्फ एक ही जोड़ी पदचिन्ह !
तब तब नहीं थे दूसरी जोड़ी के पदचिन्ह,
जब जब वह डूबा था उदासी के समंदर में,
या दुःख के पहाड़ तले !
उद्विग्न हुआ उसका मन
और उसने परमात्मा से पूछ ही लिया -
" हे परमात्मा ! तुमने कहा था
की अगर मैं निर्णय लूं तुम्हारे साथ का
तो तुम भी चलोगे सदा साथ मेरे !
पर गौर किया मैंने
की मेरे जीवन के कष्टतम समय में
रेत पर छपे थे सिर्फ एक ही जोड़ी पदचिन्ह !
समझ नहीं पाया मैं
जब जब थी मुझे तुम्हारी सबसे ज्यादा जरूरत
तब तब क्यों छोड़ गए तुम मेरा साथ ----"
परमात्मा ने जबाब दिया -
" मेरे प्रिय, मेरे अमूल्य बच्चे
मुझे तुमसे है अगाध स्नेह और प्रेम,
मैं कैसे तुम्हें छोड़ सकता हूँ अकेले,
संकट और दुःख के समय !
जब जब दिखाई दिए तुम्हें
सिर्फ एक ही जोड़ी पदचिन्ह
तब तब थे तुम मेरी गोदी में !
उठाया हुआ था मैंने तुम्हारा वजूद
सम्हाला हुआ था तुम्हारा अस्तित्व
अपने हाथो में !

जुलाई १९९१ में उ.प्र.में भाजपा विजई हुई व कल्याण सिंह मुख्यमंत्री बने | इसके तुरंत बाद अक्टूबर १९९१ में विवादित ढांचे के पास २.७७ एकड़ भूमि सरकार ने अधिग्रहित कर ली, जिसमें से २.०४ एकड़ भूमि विश्व हिन्दू परिषद् की थी | विहिप ने यह भूमि भू स्वामी से खरीद कर व उपहार में प्राप्त की थी | इस अधिग्रहण को आल इण्डिया बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी | उच्च न्यायालय ने अधिग्रहण तो स्वीकार किया किन्तु स्थाई निर्माण पर प्रतिवंध लगा दिया |

मंदिर आन्दोलन के नेता उ.प्र. सरकार के उस रुख से सहमत थे कि २.७७ एकड़ भूमि तथा विवादित ढांचा दो अलग अलग मुद्दे हैं, अतः यदि न्यायालय से अनुकूल निर्णय आ जाए तो ६ दिसंबर को निर्विवाद स्थल पर कार सेवा प्रारम्भ कर राम मंदिर निर्माण प्रारम्भ हो सकता है | अदालत ने ४ दिसंबर को सुनबाई पूरी कर निर्णय सुरक्षित रख लिया था |इस हेतु संघ के तत्कालीन सह सर कार्यवाह रज्जू भैया, मोरोपंत जी पिंगले, राजस्थान के तत्कालीन मुख्य मंत्री भैरोसिंह शेखावत, स्वामी चिन्मयानंद, नाना जी देशमुख, स्वामी रामचंद्र दास, सतत प्रधान मंत्री तथा शरद पंवार व् कुमार मंगलम से मिलकर न्यायालय से यथाशीघ्र निराकरण के आग्रह हेतु प्रयत्न करते रहे, जिससे न्यायालयीन फैसला ६ दिसंबर के पूर्व आ जाए तथा किसी अनहोनी को टाला जा सके | इन लोगों का यह मानना था कि फैसला सरकार के पक्ष में आने पर सरकार २.७७ एकड़ भूमि पर कार सेवकों को मंदिर निर्माण प्रारम्भ करने की अनुमति दे देगी तथा विपक्ष में आने पर विहिप अपने स्वामित्व की भूमि पर निर्माण कार्य प्रारम्भ करवा सकेगा | किन्तु फैसला ना आ सका फिर भला कारसेवक सरयू की एक एक मुट्ठी रेत से कैसे कारसेवा कर संतुष्ट होते | मंदिर आन्दोलन के नेतागण आन्दोलन में सलग्न कार्यकर्ताओं की भावनात्मक अधीरता का अंदाज पहले से नहीं लगा सके |

राम लला की जो मूर्तियाँ १९४९ से गुम्वद के नीचे रखी थीं दोपहर तीन बजे बहां से हटाकर विहिप के शिविर कार्यालय में कारसेवकों द्वारा सुरक्षित पहुंचा दी गई तथा बाद में अस्थाई मंदिर में स्थापित की गईं |

७ दिसम्वर को राव ने संसद में घोषणा की कि सरकार मस्जिद का पुनर्निर्माण करवायेगी | जबकि उसके दो घंटे पहले ही ढाँचे के स्थान पर अस्थाई मंदिर बनाने की अनुमति भी दे दी गई थी |

८ दिसम्वर को आडवानी जी, मुरली मनोहर जोशी, अशोक सिंघल, विष्णु हरि डाल मियाँ, विनय कटियार, उमा भारती को गिरफ्तार कर लिया गया | आडवानी जी को माताटीला में रखा गया, जहां से अदालती निर्णय अनुसार वे १० जनवरी १९९३ को मुक्त किये गए |

१० दिसम्वर को रा.स्व.संघ, विश्व हिन्दू परिषद्, बजरंग दल, जमायत ए इस्लामी, इस्लामी सेवक संघ पर प्रतिवंध लगाया गया |
१५ दिसम्वर को राजस्थान, मध्य प्रदेश व हिमाचल प्रदेश की भाजपा सरकारें बरखास्त की गईं |
आडवानी जी १९४८ में संघ प्रतिवंध के समय ३ माह, १९७५ में आपातकाल के समय १९ माह, रथ यात्रा के दौरान विहार के समस्तीपुर से गिरफ्तार कर एक माह आसंजोर जेल में रहे |
२४ फरवरी २००२ को मंदिर आन्दोलन से सलग्न संगठनों ने अयोध्या में १०० दिवसीय पूर्णाहुति यज्ञ प्रारम्भ किया | वहां से लौटते कार सेवकों के साथ गोधरा में २७ फरवरी को वीभत्स काण्ड हुआ |
१७ अक्टूबर २००३ को विहिप ने अयोध्या में एक बड़ा समागम रखा | ३०००० कार्यकर्ता गिरफ्तार हुए | अशोक सिंघल जी को भी धक्के खाने पड़े | यह दोहरे माप दंडों का खुला उदाहरण था |

नरसिम्हाराव ने स्वामी रामानंद की प्रेरणा से हैदरावाद में निजामशाही के विरुद्ध स्वाधीनता आन्दोलन के समय महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी | नरसिंहाराव ने ही इसराइल से कूटनीतिक सम्बन्ध कायम किये | १९९२ में शेअर बाज़ार घोटाले के आरोपी हर्षद मेहता ने आरोप लगाया कि उसने एक करोड़ रुपये चंदे में कांग्रेस को दिए हैं | जुलाई १९९३ में अविश्वास प्रस्ताव के दौरान शिवू सोरेन को चार सांसदों के लिए रिश्वत दी गई | मई १९९४ में शिबू सोरेन के निजी सचिव की रांची में अपहरण कर हत्या कर दी गई |

वी.पी, सिंह के समय मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रूबिया सईद का अपहरण हुआ व आतंकियों की रिहाई भी |

१९९६ में मनमोहन सिंह दक्षिण दिल्ली से वी.के.मल्होत्रा से चुनाव में पराजित हुए | किन्तु आसाम से राज्य सभा में आकर राव सरकार में वित्त मंत्री बने | यह संयोग था या अमरीकी कूट नीति कि भारत, पाकिस्तान व बंगलादेश तीनों के वित्त मंत्री वर्ल्ड बेंक के कर्मचारी रहे लोग ही बने | श्री मन मोहन सिंह २००४ में प्रधान मंत्री भी राज्य सभा सदस्य के रूप में ही बने |

यदि सामाजिक संबंधों में अस्पृश्यता गलत और अनुचित है तो राजनैतिक संबंधों में वह कैसे सही और उचित हो सकती है ?

१९९९ में मुलायम सिंह का बयान - राष्ट्रपति, उप राष्ट्रपति, प्रधान मंत्री, लोक सभा अध्यक्ष जैसे महत्व पूर्ण पदों पर एक विदेशी को नहीं बैठाया जाना चाहिए !

आडवानी जी के गृह मंत्री काल में उनके साथ राज्य मंत्री के रूप में स्वामी चिन्मयानन्द रहे |

प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना प्रारम्भ करने का सुझाव मूलतः तत्कालीन संघ सर कार्यवाह स्व. हो.वे.शेषाद्री जी का था |

जन्म से मैं भारतीय हूँ, संस्कृति से मैं हिन्दू हूँ तथा धर्म की दृष्टि से इसाई हूँ - हैदरावाद आर्च विशप स्व. एस. अरुलप्पा (भारत की सांस्कृतिक सहिष्णुता का यह भाव सभी के लिए अनुकरणीय है |

जिन्ना ने बम्बई के सबसे धनाढ्य पारसी व्यवसाई सर दिनशा पेटिट की बेटी रतन बाई उर्फ़ रत्ती से शादी की थी | जिन्ना की बेटी दीना ने नेवले वाडिया से शादी की जिससे नाराज होकर जिन्ना ने उससे सम्बन्ध विच्छेद कर लिए | इनके बेटे नुस्ली वाडिया आडवानी जी के मित्र हैं तथा भाजपा से सम्बंधित भी |

गृह मंत्री के रूप में आडवानी जी की महत्व पूर्ण उपलव्धि -

वर्ष २००१ में त्रिपुरा में वन वासी क्षेत्र में कार्यरत संघ के चार प्रचारकों श्यामल सेन गुप्ता, दिनेक डे, सुधामय दत्त तथा शुभंकर चक्रवर्ती का उत्तरी त्रिपुरा जिले के फटिक राय थाना क्षेत्र के कंचन पारा से नॅशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ़ त्रिपुरा द्वारा अपहरण कर लिया गया | यह उग्रवादी संगठन बेप्टिस्ट चर्च का सहयोगी संगठन है, जिसका उद्देश्य त्रिपुरा से बंगालियों को हटाना, परम्परागत दुर्गापूजा, भक्तिगीत गायन तथा महिलाओं द्वारा चूड़ी, विंदी आदि धारण करने से रोकना तथा इस प्रकार हिन्दू जीवन शैली को समाप्त कर इसाई राष्ट्र बनाना शामिल है | अपह्रत प्रचारकों को एन एल एफ टी के विभिन्न अड्डों पर रखने के बाद बंगला देश के चटगाँव स्थित प्रशिक्षण शिविर में ले जाकर ह्त्या कर दी गई | संघ परिवार को लगा कि गृह मंत्री श्री लाल कृष्ण जी आडवानी ने उन प्रचारकों को बचाने का पूरा प्रयत्न नहीं किया |

१६ जनवरी १९९६ को श्री आडवानी पर आरोप लगा कि उन्होंने हवाला कारोबारी भोपाल निवासी एस.के.जैन तथा जे.के.जैन एक बार २५ लाख रुपये तथा दूसरी बार ३५ लाख रुपये प्राप्त किये | प्रमाण स्वरुप सी.बी.आई. ने जैन वन्धुओं की डायरियां प्रस्तुत कीं | जैन वन्धुओं पर आरोप था कि इन्ही के माध्यम से कश्मीरी आतंकवादियों तक पैसा पहुंचाया जाता रहा था | आरोप लगने की जानकारी मिलते ही श्री आडवानी ने एक प्रेस कांफ्रेंस बुलाकर घोषणा की कि वे लोकसभा की सदस्यता से तुरंत त्यागपत्र दे रहे हैं तथा आरोप मुक्त होने तक कोई चुनाव भी वे नहीं लड़ेंगे |
उनके सहयोगियों ने उन्हें स्मरण दिलाया कि सी.जे एम. कोर्ट ग्वालियर में एक छोटा सा मुक़दमा लम्बे समय से चल रहा है | १९८२ में ग्वालियर की मतदाता सूची में उन्होंने अपना नाम दर्ज कराया था जहां उनकी चचेरी बहिन रहती थी | ग्वालियर के मतदाता होने को कुछ लोगों ने न्यायालय में चुनौती दी थी जिसके आधार पर उनके खिलाफ आपराधिक मुक़दमा दर्ज किया गया था | जब वह छोटा सा मुक़दमा १४ साल तक लंबित रहा तो यह हवाला का मुक़दमा तो आडवानी जी के राजनैतिक जीवन को ही समाप्त कर देगा | किन्तु आडवानी जी अडिग रहे | दिल्ली उच्च न्यायालय में १६ माह हवाला केस चला | अंततः ८ अप्रेल १९९७ को न्यायमूर्ति मोहम्मद शमीम ने आरोपों के मिथ्या होने का निर्णय दिया | आडवानी जी का नाम ना तो हवाला कारोबारियों की बहियों में था और नाही दैनिक खातों में | मई १९९१ में जब्त की गई जैन वन्धुओं की मदर डायरी में भी आडवानी जी का नाम स्पष्ट रूप से अलग से जोड़े गए एक कागज़ पर अंकित था | जिसे दुरभिसंधि भी माना जा सकता था और माना भी गया | न्यायमूर्ति शमीम ने अपने ७० प्रष्ठीय निर्णय में लिखा कि श्री आडवानी पर लगाए गए आरोप ना केवल गलत साबित हुए हैं वल्कि न्यायिक जांच के योग्य भी नहीं हैं | दिल्ली हाई कोर्ट के निर्णय के विरुद्ध सी.बी.आई. सर्वोच्च न्यायालय भी गई, किन्तु २ मार्च १९९८ को तीन न्यायाधीशों की खंडपीठ ने इस याचिका को ख़ारिज कर दिया तथा श्री आडवानी जी को क्लीन चिट दी |

तत्कालीन प्रधान मंत्री पी.वी. नरसिम्हाराव पर भ्रष्टाचार में लिप्त होने के गंभीर आरोप लग रहे थे | उन पर से ध्यान हटाने के लिए अपनी आज्ञापालक एजेंसी सी.बी.आई. का उपयोग किया गया ताकि जनता के बीच यह सन्देश जाए कि विपक्षी दल के नेता पर भी भ्रष्टाचार के आरोप हैं व मुक़दमा चल रहा है | 

१९९७ में आजादी की पचासवी सालगिरह के अवसर पर आडवानी जी के नेतृत्व में स्वर्ण जयन्ती रथ यात्रा निकाली गई जो देश भर में स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों से सम्बंधित स्थानों पर गई | इस दौरान पश्चिमी वन्गाल के गोपीवल्लभ पुर के नजदीक एक छोटे से गाँव में एक युवती को विशाल फूल माला लिए खडी देख कर आडवानी जी ने रथ रोक कर उससे पूछा १०८ कमल फूलों की यह माला क्यों बनाई है ? उसने बंगला में उत्तर दिया "यह अयोध्या बाबा के लिए है"| यह तथ्य आज विस्मृत हो रहा है कि राम भक्ती ही राष्ट्र शक्ति है |

आडवानी जी की आत्म कथा मेरा देश मेरा जीवन के पेज नंबर ४२० पर लिखे गए विचार -

मेरा हमेशा से यह विश्वास रहा है कि यह प्रचलित धारणा कि सभी राज नेता भ्रष्ट हैं, ना केवल असत्य है, वल्कि यदि इसका प्रतिकार ना किया गया तो यह हमारी लोक तांत्रिक प्रणाली के लिए एक गंभीर खतरा बन सकती है | सभी राजनैतिक दलों में इमानदार नेता हैं - किसी में ज्यादा हैं, किसी में कम | स्वयं एक राज नेता होने के कारण मैंने भद्दे भारतीय राज नेता की छवि बदलने की आवश्यकता को गहराई से अनुभव किया है | .... भ्रष्टाचार ऊपर से नीचे की ओर बहता है, ना कि नीचे से ऊपर की और | इस सम्बन्ध में दोष पूरे राजनैतिक तंत्र को दिया जाना चाहिए, और किसी सीमा तक मैं अपनी पार्टी को इससे अछूता नहीं मानता | स्वाधीनता आन्दोलन के समय राज नीति एक अभियान हुआ करती थी | कई विकसित देशों में कई अन्य देशों की तरह राजनीति भी एक पेशा है, जिसके लिए पेशागत प्रशिक्षण आवश्यक है | यह दुःख की बात है कि भारत में कई लोगों के लिए राजनीति शुद्ध वाणिज्य बन गई है | इस स्थिति को बदला जाना चाहिए | यदि हम सुशासन चाहते हैं तो हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि देश की राज नीति में इमानदार और कार्य कुशल व्यक्तियों का वर्चस्व हो | .....

हमारे समाज में नैतिक मूल्यों का चिंताजनक ह्रास हुआ है | अपरिहार्य रूप से शासक और शाषित दोनों यह समझने लगे हैं कि देश भक्ति और अनुशासन, जो स्वाधीनता आन्दोलन में भले ही उपयोगी रहे हों, की अब आवश्यकता नहीं है | हमारे दैनंदिन जीवन में मनुष्य को ऊंचाई पर ले जाने बाले इन मूल्यों के अभाव से उपजे खालीपन को स्वार्थ, बेईमानी और भ्रष्टाचार से भर दिया गया है | क़ानून बनाकर या सरकारी कार्यवाही द्वारा भी इस क्षय को ठीक नहीं किया जा सकता | इस पतन को रोके बिना हम अपने शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों के भारत का निर्माण नहीं कर सकेंगे और इसके लिए हममे से प्रत्येक को अपना कर्तव्य निभाना है |
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आतंकवादी घटनाएँ -
१२ मार्च १९९३ - मुंबई में मुंबई स्टाक एक्सचेंज व एअर इण्डिया मुख्यालय पर श्रंखलाबद्ध बम विस्फोट - २५७ मृत | आरोपी दाऊद इब्राहीम |
फरबरी १९९८ - कोयम्बतूर आडवानी जी की सभा पर हमला - ५७ मृत
मार्च २००८ - अमरीकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के भारत आगमन की पूर्व संध्या पर कश्मीर के छत्तीसिंहपुरा गाँव में ३६ सिक्खों को भून दिया गया | उद्देश्य साफ़ था कि सिक्ख भी पंडितों की तरह कश्मीर घाटी से हट जाएँ |
११ सितम्बर २००१ को अमरीकी बर्ल्ड ट्रेड सेंटर के जुड़ाव टावरों तथा पेंटागन पर हमला हुआ वह भी आत्मघाती विमानों द्वारा | इसमें ३००० लोग मारे | मरने बालों में ११७ भारतीय मूल के लोग भी थे |
१ अक्टूबर २००१ को जम्मू कश्मीर विधान सभा के पास कार बम विस्फोट में ३८ लोग मारे | इसके तुरंत बाद तीन सशस्त्र आतंक वादियों ने विधान सभा परिसर में गोलीबारी की |
१३ दिसंबर २००१ को भारतीय संसद पर हमला हुआ जिसमें १९ सुरक्षाकर्मी शहीद हुए | इस जघन्य कृत्य के सूत्रधार अफजल गुरू को फांसी ना दिए जाने के विरोध में शहीद सुरक्षाकर्मियों के परिजनों ने वीरता मेडल शासन को लौटा दिए | बेशर्मी की पराकाष्ठा है कि अफजल को इसके बाद भी फांसी नहीं दी जा रही |
जनवरी २००२ को अमरीकी सांस्कृतिक केंद्र कलकत्ता पर हमला - ४३ पुलिस कर्मी शहीद |
मार्च २००२ को रघुनाथ मंदिर जम्मू पर हमला जिसमें ७ लोग मरे | नवम्बर २००२ को दोबारा हमला जिसमें १३ भक्त मृत |
मई २००२ को कालूचक केंटोन्मेंट में ३० लोग का नर संहार, जिनमे अधिकांस सैन्य कर्मियों के परिजन थे | इसी महीने मध्य मार्गी नेता अब्दुल गनी लोन की श्रीनगर में गोली मारकर हत्या |
जुलाई २००२ में जम्मू के निकट कासिम नगर में २० ग्रामीणों की हत्या |
अगस्त २००२ में पहलगांव के निकट अमरनाथ यात्रियों पर हमला कर ८ तीर्थ यात्री मारे गए | दूसरे हमले में ३३ भक्तों की हत्या |
सितम्बर २००२ में अक्षर धाम गांधीनगर में २९ भक्तों को मारा गया |
मार्च २००३ में पुलिस की वर्दी पहनकर श्री नगर के समीप नदी मार्ग गाँव पर हमला कर २४ स्त्री, पुरुष बच्चों की हत्या | इसे महीने मुंबई लोकल ट्रेन बम विस्फोट में १० यात्री मरे |
अगस्त २००३ में दक्षिण मुंबई में दो शक्तिशाली कार बम विस्फोट हुए, जिसमें ४६ लोग मरे |
विगत दो दशक में साठ हजार निर्दोषों को मारा गया | 

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क्रांतिदूत: पुस्तक सार - श्री लालकृष्ण आडवानी जी की आत्मकथा "मेरा देश मेरा जीवन"
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क्रांतिदूत
http://www.krantidoot.in/2016/07/autobiography-of-LK-Advani-My-Country-My-Life.html
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