नोटबंदी के उद्देश्य को पलीता लगाते बैंक - प्रमोद भार्गव

पुराने नोटों के बदले नए नोटों के रूप में जिस तरह से कालेधन को सफेद धन में बदलने का काम बैंक कर रहे हैं, उससे साफ है नरेंद्र मोदी की इस प...



पुराने नोटों के बदले नए नोटों के रूप में जिस तरह से कालेधन को सफेद धन में बदलने का काम बैंक कर रहे हैं, उससे साफ है नरेंद्र मोदी की इस पहल को पलीता लगाने का काम देश के सरकारी और निजी बैंक कर रहे हैं। तय है, जिस तरह से थोक में कालेधन के रूप में 2000 के नोट बरामद हो रहे है, उस गोरखधंधे को बैंक ही अंजाम दे रहे हैं। यही वजह है कि बैंकों में कतारें थमने का नाम नहीं ले रही हैं और यह आशंका भी सच होती दिख रही है कि हजार-पांच सौ के जितने नोट रिजर्व बैंक ने नोटबंदी के पहले तक छापे हैं, लगभग उतने ही वापस आ जाएंगे। अब तक 14.5 लाख करोड़ के हजार-पांच सौ के कुल नोट छापे गए हैं। जबकि 7 दिसंबर को रिजर्व बैंक द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक 11.5 लाख करोड़ के पुराने नोट वापस आ भी गए हैं। जबकि नोट वापसी का सिलसिला 30 दिसंबर तक जारी रहने वाला है। 

हजार-पांच सौ के नोटों को अमान्य घोषित करने के बाद से विपक्ष और कुछ अर्थशास्त्री यह दावा कर रहे हैं, कि इस कार्रवाही से ज्यादा कालाधन वापस नहीं आएगा। इसके उलट लोग विभिन्न तरीकों से कालेधन को सफेद धन में बदलने में सफल हो जाएंगे। उनकी यह बात आंशिक ही सत्य होती लग रही है। क्योंकि पिछले एक सप्ताह के भीतर ही अरबों का कालाधन जब्त हुआ है। जाहिर है काला धन रखने वालों और सरकार के बीच चूहा बिल्ली का खेल चल रहा है ! गुजरात के व्यापारी महेश शाह ने 13,860 करोड़ रुपए का कालाधन घोषित करने के बाद बयान दिया कि यह पूरा पैसा अकेले उसका नहीं है, बल्कि इसमें कुछ बड़े लोगों का धन भी शामिल है । इस प्रकार बेनामी संपत्ति के साथ बेनामी मनी का गोरखधंधा भी उजागर हुआ है ! 

नए नोट जमाकर बाजार में नोटों की नकली कमी पैदा करने का षडयंत्र भी साथ साथ चल रहा है, तो छापा मारकर उन्हें जब्त करने का काम भी हो रहा है ! कर्नाटक में 4.7 करोड़ के 2000 के नए नोट बरामद हुए हैं। चंडीगढ़ के सेना-परिवार के भाई-बहन 3 करोड़ के नकली नोटों के साथ पकड़े गए। बैंगलुरू में दो जगह से 5.7 करोड़ की नई मुद्रा में कालाधन पकड़ा गया। रेल के शौचालय से 4 लाख रूपए बहाते तीन लोग पकड़े गए। इसी तरह होशंगाबाद में एक टीवी कलाकार से 43 लाख, चित्रदुर्ग में शौचालय से 5.75 करोड़, सूरत से 76 लाख, दंतेवाड़ा से 10 लाख, मुबंई से 85 लाख, चैन्नई से 130 करोड़, भीलवाड़ा 20 लाख, होशंगाबाद से 16 लाख, जयपुर से 104 करोड़, गाजियाबाद से 28.5 लाख, फतेहाबाद से 30 लाख, पणजी से 125 करोड़ और इंदौर से 12 लाख रुपए पकड़े गए। 

इन राशियों में 90 फीसदी बेहिसाबी धन नई मुद्रा में हैं। इसीलिए रिजर्व बैंक ने 27 सरकारी बैंकों के प्रबंधकों को निलंबित कर 6 का तबादला किया है। दिल्ली में ऐक्सिस बैंक के दो प्रबंधकों को नोट बदलने के आरोप में हिरासत में लिया है। इन बानगियों से साफ होता है कि कालेधन पर लगाम की इस पहल को बैंक उसी तरह से चूना लगा रहे हैं, जिस तरह से लोक कल्याणकारी योजनाओं को सरकारी मुलाजिम बट्टा लगाते हैं। यही वजह है कि जो भी योजनाएं जनहित में लागू की जाती हैं, वे भ्रष्टाचार के चलते लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाती हैं। 

जनधन खातों के माध्यम से भी काले-कारोबारियों ने सफेद धन बनाने की कोशिश की है। किंतु अब यह बाजीगरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नजर में आ गई है। उन्होंने मुरादाबाद की सभा में इस बाबत बोलते हुए साफ कर दिया है कि ‘जनधन खातों में जिन बेईमानों का पैसा है, वे जेल जाएंगे और पैसा गरीबों के घर जाएगा। इसी नजरिए से जनधन खातों से एक माह में केवल दस हजार रुपए निकालने की इजाजत दी गई है। प्रधानमंत्री के बयान ने उन गरीबों का डर भी खत्म कर दिया है, जिनके खातों में राजी या गैर-राजी धन जमा किया गया।

उल्लेखनीय है कि नोटबंदी के बाद 9 नबंवर को जनधन के 25.51 करोड़ खातों में 45,637 करोड़ रुपए जमा थे, लेकिन 23 नवंबर में जब इन खातों में जमा राशि का आकलन किया गया तो पता चला कि 25.67 करोड़ खातों में राशि बढ़कर 72,835 करोड़ रुपए हो गई। मसलन 27,198 करोड़ रुपए इन खातों में कालेधन के रूप में जमा हुए। इनमें सबसे ज्यादा धनराशि पष्चिम बंगाल में 25,553,85 करोड़ उत्तर-प्रदेश में, 4,287.55 करोड़ और राजस्थान में 2,574.85 करोड़ रुपए जमा हुए। 

यही नहीं चुनाव आयुक्त नसीम जैदी ने बताया है कि भारत में पंजीकृत 1900 राजनीतिक दल हैं। किंतु 400 से भी ज्यादा दलों ने कभी कोई चुनाव नहीं लड़ा। इसलिए संभव है कि ये दल काले धन को सफेद में बदलने के काम आते हो। गोया, जरूरी है कि नोटबंदी के बाद इन दलों के खातों में हुए लेन-देन को भी जनधन खातों की तरह खंगाला जाए। कुछ दवा कंपनियों ने भी चिकित्सकों के कालेधन को सफेद बनाने का काम किया है। लिहाजा इन खोतों को भी खंगालने की जरूरत है। सियालदेह के कर सलाहकार संजय जैन और निजी बैंक के उप प्रबंधक को प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किया है। इन पर आरोप है कि नोटबंदी के बाद ये अपने खातों में दूसरों के करोड़ों रुपए जमा कर रहे थे। साफ है, नोटबंदी से कर सलाहकार भी बारे-न्यारे करने में लगे हैं। असम और छत्तीसगढ़ में नक्सलियों की मुखबिरी करने वालों से लाखों में पुराने नोटों के रूप में कालाधन बरामद हुआ है। ये इसे सफेद करने की फिराक में थे। 

भारत की कुल आधिकारिक जीडीपी काला व सफेद धन मिलाकर 225 लाख करोड़ रुपए हैं एक अनुमान के मुताबिक इसमें 75 लाख करोड़ कालेधन और 150 लाख करोड़ सफेद धन के रूप में गतिशील है। एक अनुमान के मुताबिक देश में मौजूदा कालाधन 8 प्रतिशत ही नकदी के रूप में है। मसलन 75 लाख करोड़ का 8 प्रतिशत हिस्सा यानी 6 लाख करोड़ रुपए नकदी के रूप में प्रचलन में है। हालांकि आर्थिक मामलों के जानकारों में कालेधन की राशि को लेकर मतभेद हैं, अर्थशास्त्री अरुण कुमार इसे 6.5 लाख करोड़ मानते हैं। जबकि सर्वोच्च न्यायालय को सरकार ने बताया है कि 5 लाख करोड़ रूपए नोटबंदी के चलते अर्थव्यवस्था से बाहर हो जाएंगे। 

इन आंकड़ों को अगर सही माने तो अब नोटों की वापसी समाप्त हो जानी चाहिए थी, लेकिन नहीं हुई। यदि हमारे बैंक भ्रष्टाचार मुक्त बने रहकर कालेधन को नई मुद्रा में बदलने का काम नहीं करते तो तय था कि 5 लाख करोड़ रुपए बैंकों में वापस नहीं आते। क्योंकि नोटबंदी के बाद से अब तक जो नई मुद्रा बेहिसाबी धन के रूप में बरामद हुई है, वही 1 लाख करोड़ रुपए के करीब हो गई होगी ? साफ है, बैंकों ने भ्रष्टाचार के चलते पुराने नोटों के बदले नए नोट देकर कालाधन नए सिरे से उत्सर्जन का राष्ट्रविरोधी महापाप कर दिया है। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन नए पापियों को नहीं बख्शने का ऐलान गुजरात की सभा में किया है, लेकिन इन्हें कितनी सजा मिल पाती है, यह तो भविश्य ही तय करेगा। 

प्रमोद भार्गव
लेखक/पत्रकार
शब्दार्थ 49, श्रीराम कॉलोनी
शिवपुरी म.प्र.
मो. 09425488224,09981061100
फोन 07492 232007


लेखक, वरिष्ठ साहित्यकार और पत्रकार हैं।


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नोटबंदी के उद्देश्य को पलीता लगाते बैंक - प्रमोद भार्गव
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