प्री वेडिंग-यानी भारतीय संस्कृति के संपन्न घरेलु परिवारो में पश्चिमी विकृति का आगमन - दिवाकर शर्मा

यूरोपीय लोगों ने व्यापार के उद्धेश्य से 17वी सदी में भारत आना प्रारंभ कर दिया था ! और उसके बाद 18वीं सदी में ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कंपनी ...


यूरोपीय लोगों ने व्यापार के उद्धेश्य से 17वी सदी में भारत आना प्रारंभ कर दिया था ! और उसके बाद 18वीं सदी में ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कंपनी के मध्यम से पाश्चात्य संस्कृति का भी आगमन हो गया था ! भारतीय समाज और संस्कृति लगभग चार सौ वर्षों तक पाश्चात्य सभ्यता और संस्कृति की चपेट में रहा ! यही कारण है कि भारतीय जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में आज यूरोपीय संस्कृति का प्रभाव देखने को मिल रहा है ! आज स्वतंत्र भारत में पाश्चात्य संस्कृति के प्रति दीवानेपन को देखते हुए यह प्रश्न मन में आता है कि यह कैसी स्वतंत्रता जिसमे शारीरिक रूप से तो आजादी भले ही मिल गयी हो, परन्तु मानसिक रूप से गुलामी आज भी मौजूद है और यह मानसिक गुलामी वर्ष १९४७ से पूर्व की गुलामी से भी भयंकर है ! अंग्रेजों के द्वारा भारतीयों को सदा के लिए गुलाम बनाए रखने के हेतु यह षड़यंत्र रचा था और इस षड़यंत्र को पूर्ण करने में मैकाले नामक व्यक्ति ने महती भूमिका का निर्वहन किया था ! मैकाले के द्वारा बनायी गयी शिक्षा व्यवस्था ही आज इस देश में लागू है, जिसके परिणामस्वरूप मैकाले आधारित शिक्षा प्रणाली से संचालित विद्या के केन्द्रों से पढ़कर निकलने वाले विद्यार्थी दिखने मात्र में भारतीय होते है पर उनकी सोच पूरी तरह से अंग्रेजों की होती है और यही अधकचरापन भारतीय संस्कृति के ह्रास का मूल कारण है ! भारतीय संस्कृति के ह्रास के कारण ही हमारे समाज से नैतिक मूल्यों में गिरावट आ रही है और नतीजा है बलात्कार, व्यभिचार वा भ्रष्टाचार  ! 

हिन्दू संकृति में विवाह एक संस्कार था, और वही उसका वैशिष्ट्य था ! विवाह संस्कार में आध्यात्मिकता निहित थी ! किन्तु आज जन्म जन्मान्तर का माना जाने वाला यह अटूट बंधन पाश्चात्य संस्कृति के रंग में रंगकर विकृत होता जा रहा है  ! यह आज भावो और हृदयों का बंधन न रहकर आर्थिक बंधन का एक उत्सव बन चुका है ! वर्तमान में हम देखते है कि विवाह को एक पवित्र संस्कार न मानकर एक संविदा मान लेने की मूर्खता हमारे समाज में की जा रही है ! पाश्चात्य सभ्यता एवं संस्कृति का अन्धानुकरण भारतीय जीवन के प्रत्येक पक्ष को दिग्भ्रमित कर रहा है ! 

प्री वेडिंग के जरिये नष्ट की जा रही है भारतीय संस्कृति 

पिछले वर्षो से देश में भारतीय संस्कृति से होने वाले विवाह समारोह में एक नया प्रचलन सामने आया है, -उसका नाम है- प्री वेडिंग ! जिसको वर्तमान में ऐसे परिवारो द्वारा आयोजित किया जा रहा है जो समाज की रीढ़ कहे जाते है,जिनकी समाज में तूती बोलती है या जो समाज के संचालक होते है !

इसके तहत भावी दूल्हा- दुल्हन अपने परिवारजनो की सहमति से शादी से पूर्व फ़ोटो ग्राफर के एक समूह के साथ देश के अलग-अलग स्थानों पर सैर सपाटा करते हैं, बड़े होटलो, हेरिटेज बिल्डिंगों, समुद्री बीच व अन्य ऐसी जगहों पर जहाँ सामान्यतः पति पत्नी शादी के बाद हनीमून मनाने जाते है, जाकर अलग- अलग और कम से कम परिधानों में एक दूसरे की बाहो में समाते हुए वीडियो शूट करवाते है ! 

और फिर शादी के दिन एक बड़ी सी स्क्रीन लगाकर, वही वीडियो सार्वजनिक रूप से लड़की और लड़के के परिवार से जुड़े तमाम रिश्तेदारों को दिखाई जाती है ! ये वे लोग होने हैं जो वर वधु के जीवन साथी बनने के पलों के साक्षी बनने और उन्हें आशीर्वाद देने के लिये मौजूद होंते है ! 

लेकिन यह क्या ? 

गेट के अंदर घुसते ही जो देखने को मिलता है वह शर्मसार करने वाला होता है ! जिस भावी कपल को वे आशीर्वाद देने पहुँचते है वो वहाँ पहले से ही एक दूसरे की बाहो में झूल रहे होंते है !सामने स्क्रीन पर चल रहे वीडिओ में उस कपल को, जिनकी अभी शादी भी नहीं हुई है,  वो सब करते हुए देखते हैं ! और सबसे बड़ी बात यह है की यह सब दोनों परिवारो की सहमति से होता है 

लड़का- लड़की कई दिन तक बाहर रहकर साथ में कई राते बिता चुके होंते है ! यह सब देखकर एक विचार मन में आता है, जब सब कुछ हो चुका है तो आखिर हमें यहाँ क्यों बुलाया गया है ! यह उन घरानो में हो रहा है, जो समाज के नेतृत्वकर्ता और समाज को राह दिखाने वाले बड़े बड़े समाजसेवी पैसे वाले है जो समाज सुधार की दिशा में कार्यक्रम करते रहते है ! ऐसे बड़े परिवार ऐसी शादियों को जो अपने पैसो के बल पर इस प्रकार की गलत प्रवर्तियो को बढ़ावा देकर समाज के छोटे तबके के परिवारो को संकट में डाल रहे है ! समाज को ऐसी पश्चिमी विकृति को बढ़ावा देने वाले परिवारो से ऐसी प्रवृत्ति को बंद करने का अनुरोध करना चाहिए, अन्यथा ऐसी शादियों का सामाजिक बहिष्कार हो ! तब ही ऐसी प्रवर्तियो पर रोक लगना संभव हो सकेगा, अन्यथा ऐसी संस्कृति से आगे चलकर समाज का इतना बड़ा नुकसान होंगा जिसकी भरपाई कई पीढ़ियों तक करना संभव नहीं हो सकेगा और कुछ परिवारो की वजह से शादी जैसे पवित्र बंधन पर शादी से पूर्व ही एक बदनुमा दाग लगेगा ! जिसका खामियाजा समाज के छोटे तबके को भुगतना पड़ेंगा, जिसकी परिणीति में शादी से पूर्व सम्बन्ध टूटना या शादी के बाद तलाक की संख्या में वृद्धि के रूप में होंगी !

जरूर सोचे एवं विचार करे कि हम क्या कर रहे है ! 

दिवाकर शर्मा
सम्पादक क्रांतिदूत डॉट इन
प्रदेश अध्यक्ष - भारत संस्कृति न्यास मध्यप्रदेश 

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क्रांतिदूत: प्री वेडिंग-यानी भारतीय संस्कृति के संपन्न घरेलु परिवारो में पश्चिमी विकृति का आगमन - दिवाकर शर्मा
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