चंदे की हेराफेरी केस और तीस्ता सीतलवाड़ !

गुजरात दंगा पीड़ितों के लिए डोनेशन के द्वारा इकट्ठा किए गए एक करोड़ 51 लाख रुपये के फंड के दुरुपयोग के आरोप में तीस्ता सीतलवाड़ की गिरफ्ता...

गुजरात दंगा पीड़ितों के लिए डोनेशन के द्वारा इकट्ठा किए गए एक करोड़ 51 लाख रुपये के फंड के दुरुपयोग के आरोप में तीस्ता सीतलवाड़ की गिरफ्तारी पर सुप्रीम कोर्ट ने अब एक दिन की रोक लगा दी है !

इससे पूर्व गुजरात हाईकोर्ट ने तीस्ता सीतलवाड़ की अग्रिम जमानत की याचिका को नामंजूर कर दिया था ! इसके बाद गुजरात पुलिस का एक दल मुंबई के जुहू स्थित तीस्ता के घर पहुंचा, लेकिन तीस्ता घर में मौजूद नहीं थीं ! तीस्ता पर आरोप है कि उन्होंने गुजरात दंगा पीड़ितों के लिए इकट्ठा किए गए डोनेशन का दुरुपयोग किया ! तीस्ता पर एक करोड़ 51 लाख रुपये के फंड के दुरुपयोग का आरोप है ! ये पैसा दंगों से जुड़ा एक म्यूज़ियम बनाने के लिए जमा किया गया था !

तीस्ता के केस की सुनवाई 30 जनवरी को हुई थी ! आज हाईकोर्ट ने उनकी ज़मानत याचिका खारिज कर दी ! तीस्ता ने कोर्ट से अपील की है कि उनकी गिरफ्तारी के वारंट पर रोक लगा दी जाए, ताकि वो सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल कर सकें, लेकिन जस्टिस जेबी परडींवाला ने उनकी इस अर्जी को भी खारिज कर दिया ! अदालत ने न सिर्फ तीस्ता सीतलवाड़ और जावेद आनंद की याचिकाएं खारिज की, बल्कि जमकर फटकार भी लगाई ! अदालत ने कहा कि तीस्ता सीतलवाड़ और जावेद आनंद ने जांच में मदद नहीं की है और अलग-अलग अदालतों में अलग-अलद याचिकाएं दायर कर बीते 13 महीनों से ज़मानत पर हैं !

क्या है पूरा मामला -


तीस्ता सीतलवाड़ गुजरात दंगा पीड़ितों की वकील है | नरेंद्र मोदी की मुखर विरोधी के तौर पर इनकी पहचान है। लेकिन अब तीस्ता पर गंभीर आरोप लग रहे हैं। आरोप दंगा पीड़ितों के लिए जुटाए गए चंदे की रकम को खुद पर इस्तेमाल करने का है। दंगा पीड़ितों के लिए जुटाई गई रकम को ब्यूटी पार्लर, जूते और ज्वेलरी पर खर्चने का आरोप है। चंदे की रकम से अपने क्रेडिट कार्ड के लाखों के बिल भरने का भी उनपर आरोप लग रहा है। उस रकम से लाखों रुपए अपने निजी बैंक अकाउंट में ट्रांसफर करने का भी आरोप है। 
दंगा पीड़ितों के नाम पर तीस्ता ने 2007 से फंड के नाम पर पैसा इकठ्ठा करना शुरू किया। FCRA यानि फॉरेन कॉन्ट्रिब्यूशन रेगुलेशन एक्ट के तहत मिली जानकारी के मुताबिक तीस्ता का मुंबई की IDBI और UBI बैंक में अकाउंट है। IDBI ब्रांच में तीस्ता के एनजीओ सिटीजन फॉर पीस एंड जस्टिस के नाम पर अकाउंट खोला गया था क्योंकि फिलहाल ये अकाउंट अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने सीज करवा दिया है। 
अकाउंट का नंबर था 1404000204736। अप्रैल 2007 से जनवरी 2014 के बीच इसमें विदेश से 1 करोड़ 2 लाख 5 हजार 312 रुपए जमा हुए। जबकि IDBI के ही सेविंग्स बैंक अकाउंट नंबर 014104000105705 में देश से 4 करोड़ 11 लाख 17 हज़ार 234 रुपए जमा किए गए। 
इसके अलावा यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया में सबरंग ट्रस्ट के अकाउंट नंबर 369102010802885 में विदेश से 1 करोड़ 35 लाख 10 हजार 311 रुपए जमा हुए। जबकि UBI के ही सेविंग्स बैंक अकाउंट नंबर 369102010037353 में देश से 3 करोड़ 25 लाख 62 हजार 243 रुपए जमा हुए। 
तीस्ता के इन खातों में देश विदेश से आए ये वो पैसे थे जिन्हें भेजने का मकसद था दंगा पीड़ितों की मदद करना, उनके लिए इंसाफ की लड़ाई लड़ना, उन्हें इंसाफ दिलाना। लेकिन जो जानकारी सामने आ रही है उसने तीस्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। देखिए एनजीओ के खातों से कैसे तीस्ता और उनके पति के निजी खातों में मोटी मोटी रकम ट्रांसफर की गई। यही नहीं क्रेडिट कार्ड के लाखों के बिल का भुगतान भी उन अकाउंट से ही किया गया। 
तीस्ता के खातों में देश विदेश से कुल 9 करोड़ 74 लाख 75 हजार रुपए जमा हुए। आरोप है कि इसमें से तीस्ता ने अपने निजी खाते में 46 लाख 91 हजार 250 रुपए ट्रांसफर किए। जबकि तीस्ता के पति जावेद आनंद के खाते में 28 लाख 34 हजार 804 रुपए ट्रांसफर किए गए। इसके अलावा तीस्ता ने अपने सिटी बैंक के क्रेडिट कार्ड के पेमेंट के तौर पर 8 लाख 19 हजार 388 रुपए का भुगतान भी इन अकाउंट से किया। जबकि पति जावेद आनंद ने अपने क्रेडिट कार्ड के 53,618 रुपये का भुगतान भी इन अकाउंट से ही किया। 
ब्यूटी पार्लर, ज्वेलरी पर खर्च 
ब्यूटी पार्लर से लेकर ज्वेलरी तक पर खर्च कर पैसे का गलत इस्तेमाल किया। दंगा पीड़ितों के साथ एक तरह से छल किया। 
देश विदेश से दंगा पीड़ितों के नाम पर करोड़ों रुपये जुटाए गए। लेकिन उनमें से लाखों रुपए तीस्ता और उनके पति के निजी अकाउंट में ट्रांसफर किए गए। इसके अलावा क्रेडिट कार्ड का लाखों का बिल भी उन पैसों से दिया गया। तीस्ता ने क्रेडिट कार्ड के जरिए खुद पर धड़ल्ले से पैसे खर्चे, शॉपिंग की, ज्वेलरी खरीदी, जूते खरीदे। ढेर सारे पैसे सलून में भी खर्चे। इन सबका भुगतान उन अकाउंट्स से किया गया जिनमें दंगा पीड़ितों के लिए पैसा जमा कराया गया था। 
आपको बता दें कि तीस्ता के पास सिटी बैंक का क्रेडिट कार्ड था, जबकि उनके पति जावेद आनंद UBI यानि युनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया का क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल कर रहे थे। आरोपों के मुताबिक सबरंग ट्रस्ट के UBI अकाउंट से तीस्ता ने 22 लाख 49 हजार 956 रुपये निजी तौर पर खर्च किए। 
जबकि तीस्ता के पति जावेद आनंद ने 19,18,676 रुपये खर्च किए। बेटी तमारा के नाम पर भी डेढ़ लाख रुपये इसी अकाउंट से निजी तौर पर खर्च किए गए। जबकि 12,75,000 रुपये नकद उठाए गए। इसी बैंक अकाउंट से तीस्ता ने तकरीबन 7 लाख रुपये का क्रेडिट कार्ड का बिल और जावेद ने एक लाख 70 हज़ार का क्रेडिट कार्ड बिल चुकाया। 
क्रेडिट कार्ड की डिटेल्स ने और भी चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। अमूमन हर रोज़ एयर टिकट बुक होते थे जिसके लिए लाखों का भुगतान किया गया। चलिए यहां ये दलील हो सकती है कि तीस्ता या उनके पति केस के सिलसिले में ये टिकट बुक करते हों और पेमेंट क्रेडिट कार्ड से करते हों। लेकिन क्रेडिट कार्ड के खर्चे का पूरा ब्यौरा हैरान करने वाला है । 
उन खर्चों की बानगी कुछ इस तरह है। 09/12/2010 को न्यू ब्यूटी सेंटर मुंबई में 955 रुपए का भुगतान। 20/01/2011 को दिल्ली के बाहरी संस से 5689 रुपये की खरीदारी। 20/01/2011 को ही दिल्ली के आम्रपाली ज्वेलर्स से 5000 रुपये की खरीदारी। 25/04/2011 को मुंबई के शिवास हेयर ब्यूटी सलून में 3800 खर्चे। 28/04/2011 को इस्लामाबाद के विलेज आर्ट गैलरी में इसी क्रेडिट कार्ड से 11,222 रुपये खर्च किए गए। 
30/12/20111 को दिल्ली के कलानिकेतन शू शॉप से 1090 की खरीददारी की गई। 12/01/2012 को शिवास ब्यूटी हेयर सलून में 2300 का खर्च। 28/02/2012 को अहमदाबाद के बारबेक्यू नेशन में 3068 रुपये का खाना खाया। 05/11/2012 को शराब खरीदी गई जिसका 1640 का पेमेंट इसी क्रेडिट कार्ड से किया गया। इन सब का पेमेंट आया CJP या सबरंग के अकाउंट से। 
म्यूजियम की बात पर सवाल उठने शुरू 
दरअसल, तीस्ता पर दंगा पीड़ितों ने तब सवाल खड़े करने शुरू किए जब उन्होंने दंगों में जला दिए गए अहमदाबाद के गुलबर्ग सोसाइटी को म्यूजियम बनाने की बात कही। सूत्रों के मुताबिक तीस्ता ने म्यूजियम बनाने के नाम पर फंड इकठ्ठा करना शुरू किया। बहुत सा पैसा जमा भी हुआ। लेकिन दंगा पीड़ितों के विरोध के बाद म्यूजियम बनाने का मामला बंद हो गया। 
लेकिन म्यूजियम बनाने के नाम पर कितना फंड इकठ्ठा हुआ इसकी कोई ठोस जानकारी नहीं मिली। खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे कुछ दंगा पीड़ितों ने इसके खिलाफ शिकायत की। कोर्ट ने तीस्ता की एक न सुनी और अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने तीस्ता के तमाम अकाउंट फ्रीज कर दिए। 
तीस्ता ने जांच एजेंसियों को अपने बयान में कहा कि दोनों संगठनों के चेयरमैन के नाते उन्हें खर्च करने का अधिकार है और उनपर लगाए जा रहे आरोप गलत और प्रेरित हैं। 
गुलबर्गा हत्याकांड में फिरोज का सबकुछ लुट गया। आरोपियों को सजा हो सके इसके लिए तीस्ता के साथ सुप्रीम कोर्ट तक केस लड़े। लेकिन तीस्ता से उनका मोहभंग तब हुआ जब उन्होंने गुलबर्ग सोसाइटी को म्यूजियम बनाने की पेशकश की और इसके लिए देश विदेश से चंदा जुटाना शुरू किया। 
फिरोज का कहना है कि तीस्ता ने हमारे साथ धोखा किया है। उसने भरोसा दिया था कि मैं फंड लेकर आउंगी और आपको सेटल करुंगी। उसने अपने परिवार के लिए पैसा खर्च किया। हम जिसे मसीहा समझते थे उसने हमसे गद्दारी की है। फिरोज की ही तरह उनके भाई इम्तियाज को भी लगता है कि तीस्ता ने उन्हें ठगा है। 
कल तक जिन तीस्ता सीतलवाड़ को गुजरात दंगा पीड़ितों का सबसे बड़ा हमदर्द और उनकी लड़ाई का प्रतीक माना जाता था आज उनपर कुछ दंगा पीड़ित सवाल खड़े कर रहे हैं। इन लोगों को उनके सवाल का जवाब मिलेगा या नहीं, ये तो हमें नहीं पता। लेकिन अहमदाबाद क्राइम ब्रांच की जांच में जो जानकारियां सामने आई हैं उन्होंने तीस्ता की नीयत पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। 
2002 के गुजरात दंगों के पीड़ितों को इंसाफ दिलाने का दावा करने वालीं सामाजिक कार्यकर्ता सीतलवाड़ कहती रही हैं कि राजनीतिक साजिश के तहत उनके खिलाफ यह मामला बनाया गया है। पिछले साल जनवरी में सीतलवाड़ और अन्य लोगों के खिलाफ दंगा पीड़ितों की मदद के लिए जमा हुए धन का गबन करने का केस दर्ज हुआ था। ये फंड अहमदाबाद की गुलबर्ग सोसायटी में दंगे में मारे गए लोगों की याद में स्मारक बनाने के लिए जमा हुआ था। हालांकि, बाद में स्मारक बनाने की योजना रद्द कर दी गई। सोसायटी के 12 लोगों ने सीतलवाड़ और अन्य लोगों के खिलाफ फंड के गबन का आरोप लगाया था।

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