त्याग की गाथा का साक्षी झालावाड़ जिले में स्थित गागरोन का किला, यूनेस्को ने वर्ल्ड हेरिटेज की सूची में किया है शामिल !

राजस्थान के किसी भी हिस्से में चले जाइए, कोई न कोई दुर्ग या किला सीना ताने आपका इंतजार करता हुआ आपको दिख जाएगा, वह इसलिए क्यूंकि दुनिया ...

राजस्थान के किसी भी हिस्से में चले जाइए, कोई न कोई दुर्ग या किला सीना ताने आपका इंतजार करता हुआ आपको दिख जाएगा, वह इसलिए क्यूंकि दुनिया में सबसे अधिक किले और गढ़ राजस्थान में ही है ! चारों ओर से पानी से घिरा हुआ यह किला राजस्थान के झालावाड़ जिले में स्थित है ! आश्चर्यचकित कर देने वाली बात यह भी है कि यह भारत का एकमात्र ऐसा किला है जिसकी नींव नहीं है ! गागरोन का किला अपने प्राकृतिक वातावरण के साथ-साथ रणनीतिक कौशल के आधार पर निर्मित होने के कारण भी विशेष स्थान रखता है !

यह दुर्ग शौर्य ही नहीं, भक्ति और त्याग की स्थली भी रहा है ! महान संत रामानन्द के शिष्य संत पीपा इसी गागरोन के शासक थे जिन्होंने राजसी वैभव त्याग कर राज्य अपने अनुज अचलदास खींची को सौंप दिया था ! अचलदास की महारानी उमादे की सुंदरता की चर्चा उस समय खूब थी जिसे पाने के लिए 1436 में मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी ने किले पर आक्रमण किया ! भीषण युद्ध हुआ और राजपूत वीरता से लड़े ! फिर भी जब खिलजी को परास्त करने का रास्ता न सूझा तो वे केसरिया बाना पहन कर जूझ गए और अपने प्राणों की आहुति दी ! दुर्ग की सभी स्त्रियां जौहर की ज्वाला में सती हो गई ! चितौड़़गढ़ की तरह गागरोण का यह जौहर भी रोमांचकारी है ! इस शानदार धरोहर को यूनेस्को ने वर्ल्ड हेरिटेज की सूची में भी शामिल किया है !

इतिहास में उल्लेख मिलता है कि रियासतों ने संकट काल में अपनी प्रजा को शत्रुओं से बचाने के लिए दुर्गों का निर्माण किया ! रियासत पर जब संकट आता था तो पूरा नगर इन दुर्गों में शरण लेता था ! यहां अनाज के भंडार और पर्याप्त जलाशय होते थे ! एक साथ हजारों लोगों के कई महीनों तक ठहरने की व्यवस्था होती थी ! सुरक्षा प्रमुख मुद्दा होता था इसलिए अधिकतर ये दुर्ग पहाड़ियों पर बनाए गए, लेकिन जहां पहाड़ियां नहीं थीं वहां सुरक्षा के अन्य उपाय भी अपनाए गए ! कुछ दुर्ग सपाट रेगिस्तान में बने, कुछ घने जंगलों के बीच और कुछ जल के बीचों बीच, ऐसा इसलिए किया गया कि शत्रु सेनाओं को इन पर चढ़ाई करने में दिक्कतों का सामना करना पड़े ! ऊंची और मजबूत प्राचीरें तथा विशाल द्वार इन दुर्गों की पहचान हैं ! यह उत्तरी भारत का एकमात्र ऐसा किला है जो चारों ओर से पानी से घिरा हुआ है इस कारण इसे जलदुर्ग के नाम से भी जाना जाता है यह किला जल-दुर्ग का बेहतरीन उदाहरण है !

इस अभेद्य दुर्ग की नींव सातवीं सदी में रखी गई और चौदहवीं सदी तक इसका निर्माण पूर्ण हुआ ! गागरोन किले का निर्माण कार्य डोड राजा बीजलदेव ने करवाया था और 300 साल तक यहां खीची राजा रहे ! यहां 14 युद्ध और 2 जोहर (जिसमें महिलाओं ने अपने को मौत के गले लगा लिया) हुए हैं ! सामान्यतया सभी किलो के दो ही परकोटे हैं परन्तु यह एकमात्र ऐसा किला है जिसके तीन परकोटे हैं ! बिना नीव के इस किले की बुर्ज पहाडियों से मिली हुई है ! किले के पृष्ठ भाग में स्थित ऊंची और खड़ी पहाड़ी ’गिद्ध कराई’ इस दुर्ग की रक्षा किया करती थी ! पहाडी दुर्ग के रास्ते को दुर्गम बना देती है !

होशंगशाह जीत के बाद अचलदास की वीरता से इतना प्रभावित हुआ कि उसने राजा के व्यक्तिगत निवास और अन्य स्मृतियों से कोई छेड़छाड़ नहीं किया ! सैकड़ों वर्षों तक यह दुर्ग मुसलमानों के पास रहा, लेकिन न जाने किसी भय या आदर से किसी ने भी अचलदास के शयनकक्ष में से उसके पलंग को हटाने या नष्ट करने का साहस नहीं किया ! 1950 तक यह पलंग उसी जगह पर लगा रहा !

मान्यता अनुसार राजा हर रात को आते थे यहाँ और पीते थे हुक्का 

रेलवे में सुपरिटेंडेंट रहे ठाकुर जसवंत सिंह ने इस पलंग के बारे में रोचक बात बताई ! उनके चाचा मोती सिंह जब गागरोन के किलेदार थे तब वे कई दिनों तक इस किले में रहे थे ! उन्होंने स्वयं इस पलंग और उसके जीर्ण-शीर्ण बिस्तरों को देखा था ! उन्होंने बतलाया कि उस समय लोगों की मान्यता थी कि राजा हर रात आ कर इस पलंग पर शयन करते हैं ! रात को कई लोगों ने भी इस कक्ष से किसी के हुक्का पीने की आवाजें सुनी थीं !

रोज पलंग के निकट मिलते थे 5 रुपये 

हर शाम पलंग पर लगे बिस्तर को साफ कर, व्यवस्थित करने का काम राज्य की ओर एक नाई करता था और उसे रोज सुबह पलंग के सिरहाने पांच रुपए रखे मिलते थे ! कहते हैं एक दिन रुपए मिलने की बात नाई ने किसी से कह दी ! तबसे रुपए मिलने बंद हो गए, लेकिन बिस्तरों की व्यवस्था, जब तक कोटा रियासत रही, बदस्तूर चलती रही ! कोटा रियासत के राजस्थान में विलय के बाद यह परंपरा धीरे-धीरे समाप्त होने लगी !

मौत की सजा के लिए होता था इसका प्रयोग

किले के दो मुख्य प्रवेश द्वार हैं ! एक द्वार नदी की ओर निकलता है तो दूसरा पहाड़ी रास्ते की ओर ! इतिहासकारों के अनुसार, इस दुर्ग का निर्माण सातवीं सदी से लेकर चौदहवीं सदी तक चला था ! पहले इस किले का उपयोग दुश्मनों को मौत की सजा देने के लिए किया जाता था !

किले के अंदर हैं कई खास महल

किले के अंदर गणेश पोल, नक्कारखाना, भैरवी पोल, किशन पोल, सिलेहखाना का दरवाजा महत्पवूर्ण दरवाजे हैं ! इसके अलावा दीवान-ए-आम, दीवान-ए-खास, जनाना महल, मधुसूदन मंदिर, रंग महल आदि दुर्ग परिसर में बने अन्य महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल हैं !

खींची राजा की भारी तलवार को एक एडीसी साहब उड़ा ले गए ! लेकिन वजनी खांडा चुरा कर ले जाने वाले उसका वजन न उठा सके तो उसें रास्ते में ही छोड़ गए ! अब वह झालावाड़ के थाने में बंद पड़ा है ! खींची राजा के सदियों पुराने पलंग और उसके बिस्तरों को लोगों ने गायब कर दिया है ! तोपें लोगों ने गला दीं !

सबसे अलग हैं यहां के तोते हूबहू मनुष्यों के जैसे बोलते हैं

गागरोन के तोते बड़े मशहूर हैं ये सामान्य तोतों से आकार में दोगुने होते हैं तथा इनका रंग भी अधिक गहरा होता है इनके पंखों पर लाल निशान होते हैं नर तोते के गले के नीचे गहरे काले रंग की और ऊपर गहरे लाल रंग की कंठी होती है। !कहा जाता है कि गागरोन किले की राम-बुर्ज में पैदा हुए हीरामन तोते बोलने में बड़े दक्ष होते हैं ! यहां के तोते मनुष्यों के बोली की हूबहू नकल कर लेता है !

सेनापति की गद्दारी पर तोते ने पुकारा गद्दार-गद्दार

बहादुरशाह ने 1532 में यह किला मेवाड़ के महाराणा विक्रमादित्य से जीत लिया था ! बहादुरशाह गागरोन का एक तोता अपने साथ रखता था ! बाद में, जब हुमायूं ने बहादुरशाह पर विजय प्राप्त की तो जीत के सामानों में आदमी की जुबान में बोलनेवाला यह तोता भी उसे सोने के पिंजरे में बंद मिला ! हुमायूं उस समय मंदसौर में था ! उस समय एक सेनापति की दगाबाजी पर हुमायूं ने तोते को मारने की बात कही थी !

बहादुरशाह का सेनापति रूमी खान अपने मालिक को छोड़ कर हुमायूं से जा मिला था ! कहते हैं जब रूमी खान हुमायूं के शिविर में आया तो उसे देख कर यह तोता गद्दार-गद्दार चिल्लाने लगा ! इसे सुन कर रूमी खान बड़ा लज्जित हुआ तथा हुमायूं ने नाराज हो कर कहा कि यदि तोते कि जगह यह आदमी होता तो मैं इसकी जबान कटवा देता !

बेहतर पर्यटन स्थल 

कालीसिंध व आहू नदी के संगम स्थल पर बना यह दुर्ग आसपास की हरी भरी पहाडिय़ों की वजह से पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है ! गागरोन दुर्ग का विहंगम नजारा पीपाधाम से काफी लुभाता है ! इन स्थानों पर लोग आकर गोठ पार्टियां करते हैं ! लोगों के लिए यह बेहतर पिकनिक स्पॉट है !

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क्रांतिदूत: त्याग की गाथा का साक्षी झालावाड़ जिले में स्थित गागरोन का किला, यूनेस्को ने वर्ल्ड हेरिटेज की सूची में किया है शामिल !
त्याग की गाथा का साक्षी झालावाड़ जिले में स्थित गागरोन का किला, यूनेस्को ने वर्ल्ड हेरिटेज की सूची में किया है शामिल !
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