बर्बादी किसकी ? विजय माल्या की अथवा बेंक कार्यप्रणाली की ?

जब से यह तथ्य सामने आया है कि किंग ऑफ गुड टाइम्स कहलाने वाले विजय माल्या बैंकों के करीब 8 हजार करोड़ रुपए के कर्ज तले दबे हुए हैं, बेंको...

जब से यह तथ्य सामने आया है कि किंग ऑफ गुड टाइम्स कहलाने वाले विजय माल्या बैंकों के करीब 8 हजार करोड़ रुपए के कर्ज तले दबे हुए हैं, बेंकों की कार्यप्रणाली पर पुनर्विचार की आवश्यकता भी महसूस होने लगी है । एक ओर तो एक आम आदमी बेंक से ऋण पाने के लिए चप्पलें घिसघिस कर वर्षों में कहीं जाकर सफल हो पाता है, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग करोड़ों रूपया डकार कर ऐशो आराम की जिन्दगी गुजारते हैं | 

राजनेता और विजय माल्या जैसे उद्योगपतियों की दोस्ती हमेशा से गरीब आम हिन्दुस्तानी को भारी पड़ती रही है | कुछ वर्षों पूर्व जब नितिन गडकरी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हुआ करते थे, उन्होंने एक आरोप लगाया था कि तत्कालीन कृषि मंत्री शरद पंवार सडा हुआ अनाज औने पौने दामों में माल्या को शराब बनाने को देते हैं –

योजनानुसार पहले गोदामों के अभाव में अनाज सडवाते हैं,
फिर दोस्त की शराब कम्पनी को औने पौने बिकवाते हैं !

आइये विरोधाभाष पर एक नजर डालते हैं –

- विजय माल्या और साढ़े तीन साल से बंद पड़ी उनकी किंगफिशर एयरलाइंस से बैंकों को करीब 7,800 करोड़ रुपए वसूलने हैं। - इसमें एसबीआई के सबसे ज्यादा 1,600 करोड़ रुपए हैं। - किंगफिशर या माल्या ने 2012 से इस कर्ज पर न तो ब्याज दिया है और न ही मूल पैसा लौटाया है। - माल्या को विदेश जाने से रोकने के लिए 17 सरकारी बैंकों के कंसोर्टियम ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी लगाई है।
- इतना ही नहीं तो विजय माल्या के स्वामित्व के यूबी ग्रुप की एक सीनियर महिला अफसर ने वुमंस डे पर माल्या के नाम एक खुला लेटर लिखकर आरोप लगाया है कि किंगफ़िशर ने सैकड़ों लोगों को सैलरी नहीं दी है। दो इम्पलॉइज सैलरी न मिलने की वजह से सुसाइड भी कर चुके हैं। वहीं दूसरी ओर माल्या ने एक मीटिंग में गोपनीय रूप से बताया था कि बैंक 5 से 10 परसेंट से ज्यादा नहीं वसूल पाएगा। ये आम आदमियों के पैसों को लेकर दुर्भावनापूर्ण इरादा है।

और मजे की बात यह कि –

कर्ज में डूबे यूबी ग्रुप के पूर्व चेयरमैन विजय माल्या अपनी लग्जरी लाइफ के लिए फेमस हैं। वे विंटेज कार्स, याट्स, हॉर्सरेस के अलावा डिफरेंट लुक्स फॉलो करने के लिए भी जाने जाते हैं। आज माल्या 60 साल के हैं, बावजूद आज भी वे स्टाइलिश लुक्स में ही नजर आते हैं।

आईये देखते हैं माल्या के निजी जीवन की कुछ झलकियाँ –

कोलकाता में पैदा हुए माल्या के पिता विठ्ठल माल्या भी देश के जाने-माने कारोबारी थे। वहीं उनकी माता का नाम ललिता रमईया था। 
विजय माल्या ने अपनी जिंदगी में दो बार शादी की। जिन समीरा माल्या से पहली शादी की वे एयर इंडिया एयरलाइंस की एयर होस्टेस थी। समीरा और विजय माल्या से जो बेटा हुआ उसका नाम है सिद्धार्थ माल्या ।

सिद्धार्थ माल्या अपने पिता के साथ बिजनेस हैंडल करते हैं। पेज थ्री पार्टीज और आईपीएल मैच में नज़र आने वाले सिद्धार्थ किसी न किसी एक्ट्रेस या मॉडल के साथ अफेयर को लेकर चर्चा में रहे हैं। एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण, कटरीना कैफ, मशहूर गोल्फर और मॉडल र्मिला निकोलेट, एक्ट्रेस सोफी चौधरी, फ्रीडा पिंटो समेत कई एक्ट्रेस के साथ अफेयर को लेकर वे चर्चा में रहे हैं।

समीरा के बाद माल्या ने बेंगलुरु में अपनी ही पड़ोसी रेखा से शादी की। रेखा और विजय दोनों की ही यह दूसरी शादी थी। रेखा के पहले पति मिस्टर महमूद विजय के अच्छे दोस्त थे और पहले पति से रेखा ने एक लड़की लैला को जन्म दिया था। जिसे बाद में विजय माल्या ने गोद ले लिया था। गोद लेने के बाद लैला महमूद लैला माल्या कहलाने लगी। लैला आईपीएल के पूर्व कमिशनर ललित मोदी के साथ काम करती थीं। आईपीएल विवाद में ललित मोदी के साथ ही उनका नाम भी आया था।
दूसरी शादी के बाद रेखा ने दो लड़कियों को और जन्म दिया। आजकल रेखा माल्या अपनी दोनों लड़कियों लीना माल्या और तान्या माल्या के साथ ज्यादातर अपने कैलिफोर्निया वाले घर में ही रहती हैं और एक प्रकार से गोपनीय जीवन बिता रही हैं । 

यह तो हुआ विजय माल्या का पारिवारिक जीवन, अब देखते हैं विजय माल्या की जीवन शैली को –

माल्या हमेशा से ही अपनी लाइफस्टाइल के लिए जाने जाते रहे हैं, उनके महंगे शौक भी मीडिया में छाए रहते हैं। कुछ वक्त पहले वे भारत के सबसे महंगे याट 'इंडियन एम्प्रेस' खरीदने के बाद सुर्खियों में आए थे।

- ये याट विजय माल्या ने 2006 में क़तर की एक रॉयल फैमिली से खरीदा था। - उस वक्त की मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, याट की कीमत 756 करोड़ थी और यह भारत का सबसे महंगा याट था। - 'इंडियन एम्प्रेस' समुद्र पर तैरते किसी लग्जरी घर की तरह नजर आता था। - 2011 में माल्या ने इसे एक यूरोप की कंपनी को बेच दिया। हालांकि, एक कॉन्ट्रैक्ट के तहत माल्या का अब भी इस याट पर स्पेशल राइट है। - कहा जाता है कि याट माल्या के दिल के बेहद करीब था। वे ज्यादातर समय याट पर बिताते थे।- कई बड़े फिल्मी सेलेब्स, नेता, क्रिकेटर्स इस याट पर पार्टी करते अक्सर नजर आते थे।
-10 हजार हॉर्स पावर के तीन इंजन लगे हैं इस याट में। लम्बाई 93 मीटर। - 2007 के किंगफिशर कैलेंडर की शूटिंग इस याट पर की गई थी।- तीन मंजिला इस याट में 16 लग्जरी केबिन हैं, जिनमें हर तरह की सुविधा मौजूद है।- हेलिपैड के साथ दो मर्सडीज़ कार पार्क करने की भी जगह है इसमें।

-याट का इंटीरियर पूरी तरह से विजय माल्या की पसंद को ध्यान में रखते हुए बनाया गया था।-यहां तक की गेस्ट को परोसे जाने वाली लिकर भी माल्या की पसंद की रहती है। - लाउंज में लगी पेंटिंग्स मशहूर आर्टिस्ट रेनोइर, चागल और एम.एफ हुसैन द्वारा बनाई गई है।
 - याट का निचला डेक गेस्ट के लिए रिजर्व रहता था। यहां एक बार भी है।- इसके अगले डेक पर विजय माल्या का प्राइवेट बेडरूम है। इससे सटा माल्या का प्राइवेट डेक है।- इस प्राइवेट डेक पर ओपन जकूजी भी है। साथ ही, गोल्ड फर्निश चमचमाते बाथरूम है।

यह अलग बात है कि बैंकों द्वारा विलफुल डिफॉल्टर घोषित किए जाने के बाद विजय माल्या की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। बताया जा रहा है कि कर्ज वसूलने के लिए माल्या के प्राइवेट जेट, याट्स समेत अन्य प्रॉपर्टीज की नीलामी होगी। 

कैसे बना साम्राज्य, कैसे हुआ ध्वस्त –

वैसे तो माल्या ने 28 की उम्र में अपने पिता के बिजनेस की कमान संभाल ली थी, पर उन्हें उन्हें सही पहचान किंगफिशर ब्रांड के हिट होने के बाद मिली।
लेकिन समय बदला और 2007 में किया गया एक सौदा माल्या के लिए सबसे बड़ी गलती बन गया। इस सौदे के पांच साल के भीतर माल्या की किंगफिशर एयरलाइंस बंद हो गई और उनका पूरा कारोबारी साम्राज्य लगभग खत्म हो गया। 
प्रीमियम सेवाओं के लिए जानी जाने वाली किंगफिशर एयरलाइंस की स्थापना वर्ष 2003 में हुई थी। इसका स्वामित्व विजय माल्या के अगुआई वाले यूनाइटेड ब्रेवरीज ग्रुप के पास था। 2005 में इसका कमर्शियल ऑपरेशन शुरू हुआ। कुछ समय के भीतर ही यह एविएशन सेक्टर की बड़ी कंपनी बन गई। उस दौर में प्रीमियम सेवाओं में इसका कोई जोड़ नहीं था। हालांकि, कंपनी को इसके लिए भारी रकम खर्च करनी पड़ रही थी, जिससे उसे कॉस्ट निकालना मुश्किल हो रहा था। ऐसे में कंपनी ने देश की एक लो कॉस्ट (किफायती) एविएशन कंपनी खरीदने की कोशिशें शुरू कर दीं। यह कोशिश 2007 में जाकर कामयाब हुई, लेकिन इस तरह उन्होंने अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी गलती की ओर कदम बढ़ा दिए। 
माल्या ने 2007 में देश की पहली लो कॉस्ट एविएशन कंपनी एयर डेक्कन का अधिग्रहण किया। इसके लिए 30 करोड़ डॉलर की भारी रकम खर्च की, जो उस समय लगभग 1,200 करोड़ रुपए (2007 में 1 डॉलर लगभग 40 रुपए के बराबर था) के बराबर थी। इस सौदे से माल्या को फायदा भी हुआ और 2011 में किंगफिशर देश की दूसरी बड़ी एविएशन कंपनी बन गई। हालांकि, कंपनी एयर डेक्कन को खरीदने के पीछे के लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाई और उसकी ऊंची कॉस्ट की समस्या जस की तस बनी रही। 
माल्या भले ही एयर डेक्कन को खरीदने में कामयाब रहे, लेकिन उनकी इसके माध्यम से किंगफिशर को मजबूती देने की स्ट्रैटजी बुरी तरह फेल हो गई। बाद में माल्या ने दोनों एयरलाइंस का विलय कर दिया और फिर एयर डेक्कन का नाम बदलकर किंगफिशर रेड हो गया, जो प्रीमियम सेवाओं के साथ ही लो कॉस्ट सेवाएं भी देने लगी। इस प्रकार कंपनी एक ही ब्रांड किंगफिशर के अंतर्गत लो कॉस्ट और प्रीमियम सेवाएं देने लगी। भारत में लो कॉस्ट एविएशन मॉडल को लाने वाले और एयर डेक्कन के संस्थापक कैप्टन गोपीनाथ ने एक मीडिया रिपोर्ट में कहा था, 'माल्या का एक ब्रांड का फैसला संभावित तौर पर अच्छा था, लेकिन उन्हें सभी घरेलू सेवाओं को लो-कॉस्ट और अंतरराष्ट्रीय सेवाओं को प्रीमियम रखना चाहिए था।' गोपीनाथ के मुताबिक, एक ब्रांड की दोनों सेवाओं में ज्यादा अंतर भी नहीं था, बस तभी से समस्याएं पैदा होने लगीं। 
गोपीनाथ के मुताबिक, इस तरह अप्रत्यक्ष रूप से किंगफिशर की दोनों सर्विसेज के बीच अपने मौजूदा कस्टमर बेस को छीनने के लिए होड़ होने लगी। इससे किंगफिशर पर दोहरी मार पड़ी। पहली किंगफिशर के इकोनॉमी पैसेंजर्स ने किंगफिशर रेड की ओर देखना शुरू कर दिया जहां सुविधाएं काफी हद तक समान थीं, लेकिन कॉस्ट कम थी। जब माल्या ने किंगफिशर रेड की ओर देखना शुरू कर दिया जहां सुविधाएं काफी हद तक समान थीं, लेकिन कॉस्ट कम थी। जब माल्या ने किंगफिशर रेड के किराये बढ़ाने का फैसला किया तो कस्टमर इंडिगो या स्पाइसजेट जैसी लो कॉस्ट एयरलाइंस की ओर रुख करने लगे। 

आमदनी अठन्नी और खर्चा रुपैया वाली कहावत के अनुसार माल्या शाह खर्ची पर अंकुश लगा नहीं पाए और बेंकों का करोड़ों रूपया डूबने के कगार पर है ! माल्या साहब का क्या बिगड़ेगा ? आज तक किसी बड़े आदमी का कुछ बिगड़ पाया क्या ? 

लेकिन अगर इस प्रकार के अनुभव से कुछ सीख लेकर भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके तभी देश और समाज का भला होगा !

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क्रांतिदूत: बर्बादी किसकी ? विजय माल्या की अथवा बेंक कार्यप्रणाली की ?
बर्बादी किसकी ? विजय माल्या की अथवा बेंक कार्यप्रणाली की ?
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