हकीकत न बन जाए उनका मुगलिस्तान का सपना – व्ही. के. गौर (सेवानिवृत्त आईजी, बीएसएफ)

ढाका में कट्टरपंथी इस्लामवादियों द्वारा हाल ही में हुईं आतंकवादी हिंसा खतरनाक है। राजनीतिक षड्यंत्र, बांग्लादेश में उथल-पुथल और हमारे सी...


ढाका में कट्टरपंथी इस्लामवादियों द्वारा हाल ही में हुईं आतंकवादी हिंसा खतरनाक है। राजनीतिक षड्यंत्र, बांग्लादेश में उथल-पुथल और हमारे सीमावर्ती राज्यों में नियमित रूप से होने वाली घुसपैठ इन सबने मिलकर गंभीर सुरक्षा समस्या पैदा कर दी है । शेख हसीना की सत्ता में वापसी से पहले तक बांग्लादेश में भारत विरोधी शासन था, जिसने अपनी भारत विरोधी मुहिम के चलते कट्टरपंथियों को प्रोत्साहित किया । उन दिनों पूर्वोत्तर के कई उग्रवादी और अलगाववादी समूहों के लिए बांग्लादेश सुरक्षित अभयारण्य हो गया । खालिदा जिया के प्रधानमंत्री काल में बांग्लादेश की राष्ट्रीय स्तर की खुफिया एजेंसियों डीएफ़आई और एनएसआई के प्रमुखों ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के साथ घनिष्ठ संबंध स्थापित किये ।

पाकिस्तान की इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) और बांग्लादेश सेना के महानिदेशक इंटेलीजेंस दोनों के संरक्षण में जहांगीर नगर विश्वविद्यालय ने मुगलिस्तान अनुसंधान संस्थान (एमआरआई) विकसित किया गया और भारत के दूसरे विभाजन के लिए एक व्यापक योजना बनी । बांग्लादेश के मुगलिस्तान अनुसंधान संस्थान (एमआरआई) ने एक नक्शा जारी किया, जिसमें पाकिस्तान और बांग्लादेश को जोड़ने वाले एक मुस्लिमबहुल “मुगलिस्तान” गलियारे की परिकल्पना प्रस्तावित थी । 1971 के युद्ध में शर्मनाक हार का सामना करने के बाद पाकिस्तान ने भारत को खून के आंसू रुलाने की कसम खाई है । उसी के चलते बांग्लादेश और पाक खुफिया संगठनों ने संयुक्त रूप से भारत के दूसरे विभाजन की कार्य योजना बनाई है ।

भारत में इस्लामी जिहादियों को हथियारों से भरपूर लैस किया जाना इसी योजना का एक भाग है और पड़ोसी इस्लामी शासनों द्वारा उसे भरपूर वित्त पोषित किया गया है – पाकिस्तान के स्व. राष्ट्रपति जिया-उल-हक ने भारत के टुकडे करने की यह भव्य साजिश रची थी ।

भारत के मुसलमानों को हिंदुओं से 'आजाद' कराने की अवधारणा से ओसामा बिन लादेन ने भी वृहत्तर पाकिस्तान की इस योजना को उस समय अपना पूर्ण समर्थन दिया था। 1993 में हुए मुंबई के भीषण बम विस्फोट के आरोपी अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के नेतृत्व में जमात-ए-इस्लामी, लश्कर-ए-तैय्यबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन का एकीकृत समर्थन भारतीय उपमहाद्वीप में इस अविभाजित इस्लामी राज्य को बनाने के लिए है ही । भारत में भी स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) और इंडियन मुजाहिदीन उपरोक्त संगठनों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं और भारत के हिन्दुओं के खिलाफ जिहाद का राग जप रहे हैं ।

लश्कर-ए-तैय्यबा की स्पष्ट घोषणा है कि हिन्दू "इस्लाम के दुश्मन" हैं अतः या तो इन्हें धर्मान्तरित किया जाना चाहिए अथवा मार दिया जाना चाहिए, उनकी नजर में यही "धर्म युद्ध" है। लश्कर-ए-तैय्यबा समूह ने एक बार नहीं बार-बार अपनी पत्रिकाओं और वेबसाइटों के माध्यम से दावा किया है कि उसका मुख्य उद्देश्य भारतीय गणराज्य को नष्ट करना और हिंदू धर्म का सफाया करना है। जैश-ए-मोहम्मद ने भी कसम खाई हुई है कि वे न केवल कश्मीर को आजाद करेंगे बल्कि नई दिल्ली और भारत के अन्य हिस्सों पर कब्जा करने के बाद ऐतिहासिक लाल किले पर इस्लामी झंडा फहरायेंगे ।

सिमी "इस्लाम के माध्यम से भारत की मुक्ति" का समर्थक है और उसका उद्देश्य भारतीय संविधान के मूल तत्वों - भारतीय गणराज्य, धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र और राष्ट्रवाद पर खिलाफत (इस्लामी खलीफा), मुस्लिम उम्मा (इस्लामी) के माध्यम से इस्लाम की सर्वोच्चता को बहाल करना है ! वे इन अवधारणाओं को इस्लाम के विपरीत मानकर इनके खिलाफ जिहाद छेड़ने पर जोर देते हैं।

इंडियन मुजाहिदीन ने ईमेल भेजकर 2007 और 2008 के दौरान लखनऊ, वाराणसी और फैजाबाद (उत्तर प्रदेश), बंगलौर, जयपुर, अहमदाबाद और नई दिल्ली में हुए कई बम विस्फोट की जिम्मेदारी ली थी ! ईमेल में कुख्यात आक्रान्ताओं मोहम्मद बिन कासिम, मोहम्मद गौरी और महमूद गजनवी को अपना नायक बताते हुए “हिन्दू रक्त को दुनिया का सबसे सस्ता रक्त” बताकर ताना दिया गया था ! ई मेल में कहा गया था कि हिंदू इतिहास विजेता इस्लाम के द्वारा पराभव, अधीनता और अपमान,का इतिहास है । 

उपरोक्त षडयंत्रों के अतिरिक्त भारत बांग्लादेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में झूठा प्रचार किया गया कि भारतीय सेना कभी भी बांग्लादेश के इलाके पर कब्जा कर सकती है, इस प्रकार उनके मन में दहशत पैदा की गई । प्रशिक्षित अपराधियों को बांग्लादेश से बड़ी संख्या में घुसपैठ करने और भारत में बसने के लिए प्रेरित किया गया । उनके बीच पत्रक बांटे गए कि वोट की ताकत से आप भारत पर शासन कर सकते हो, इसलिए ज्यादा से ज्यादा बच्चे पैदा करो । यही कारण है कि पश्चिम बंगाल और उत्तर पूर्वी राज्यों के सीमावर्ती जिलों में अल्पसंख्यक आबादी की चिंताजनक वृद्धि देखी गई है। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के एक सीमावर्ती शहर “लाल गोला” तथा असम के धुबरी और मनकछार के बहुत से मुसलमान ऐसे हैं, जिनके 30 – 35 बच्चे हैं। हैरत की बात यह है कि इन राज्यों का राजनीतिक नेतृत्व इसे अपना बढ़ता वोट बैंक मानकर खुश है ।

इसी दौरान 28 जुलाई 2016 को भारत और बांग्लादेश के गृह मंत्रियों की आतंकवादी संगठनों से निपटने के लिए रोडमैप बनाने को लेकर चर्चा हुई । भारत ने "आतंकवाद, उग्रवाद और कट्टरपंथ" के खिलाफ लड़ाई में बांग्लादेश को पूरा समर्थन देने का वादा किया ! बांग्लादेश सुरक्षा बलों ने कल्याणपुर के एक छिपे ठिकाने पर छापा मारकर नौ कथित आतंकवादियों को मार गिराया उसके तत्काल बाद ढाका में 26 जुलाई 2016 को यह बैठक सिर्फ आयोजित की गई ।

घर के अन्दर आतंकवादियों के ग्रुप फोटो प्राप्त हुए हैं, जिनकी पृष्ठभूमि में इस्लामी स्टेट का झंडा बना हुआ है । जांचकर्ताओं को संदेह है कि चित्रों की पृष्ठभूमि वही है, जो गुलशन हमलावरों द्वारा इस्लामी राज्य के अमक समाचार एजेंसी के लिए भेजे गये चित्रों की थीं और जिन्हें 1 जुलाई, 2016 को होली अर्टीजन बेकरी पर हुए हमले के दौरान एजेंसी द्वारा जारी किया गया था ।

स्मरणीय है कि 1 अप्रैल 2004 को बांग्लादेश पुलिस और तटरक्षकों ने अत्याधुनिक आग्नेयास्त्रों को जब्त किया गया था, जिनमें 27,020 ग्रेनेड; 840 रॉकेट लांचर, 300 रॉकेट, 2,000 ग्रेनेड लांचिंग ट्यूब,; 6392 मैगजीन और 11,40,520 राउंड मिश्रित गोला बारूद शामिल था ! बांग्लादेश मीडिया के अनुसार हथियारों की यह खेप पूर्वोत्तर के विद्रोहियों और बांग्लादेश के कट्टरपंथी धार्मिक संगठनों के लिए थी ।

उन दिनों उल्फा की सैन्य शाखा का प्रमुख परेश बरुआ, अपनी टीम के साथ ढाका में रह रहा था। वहां उसने आईएसआई के गुर्गों, पाक उच्चायोग के अधिकारियों और बांग्लादेश की तत्कालीन प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान के साथ नियमित बैठकें की थीं ।

हथियारों की जब्ती बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के शासन के दौरान हुई थी ! चार दलों के इस गठबंधन का नेतृत्व खालिदा जिया कर रही थीं, जिसमें कट्टरपंथी धार्मिक दल शामिल थे । 2007 के प्रारम्भ में केयर टेकर सरकार ने कार्यभार संभाल और 160 से अधिक राजनेताओं, बांग्लादेश के सिविल सेवकों और व्यवसायियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप दायर किये ।

हथियार, गोला बारूद की तस्करी और काले धन में अपनी भागीदारी को लेकर खालिदा जिया के बेटे का नाम सुर्खियों में रहा है । 2013 में ढाका की एक अदालत ने रहमान को बरी कर दिया, आरोप था कि उसने और उसके दोस्त, गियासुद्दीन अल मामुन ने 204 मिलियन टका सिंगापुर पहुंचाए । किन्तु निचली अदालत द्वारा बरी किए जाने के 3 साल बाद 16 जुलाई 2016 को ढाका उच्च न्यायालय ने उसे सात साल कैद की सजा सुनाई, साथ ही 200 करोड़ टका का जुर्माना भी लगाया । वर्तमान में निर्वासित होकर वह इंग्लैंड में है।

जिन लोगों पर मुकदमे चले, उनमें तस्करी मामले में 50 और 52 हथियारों के मामले में आरोपी हैं। जिन राजनीतिक नेताओं को आरोपी बनाया गया, उनमें मोतिउर्रहमान निजामी, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी सरकार में पूर्व उद्योग मंत्री; और लुटफोज्ज्मान बाबर, गृह राज्यमंत्री थे ।

मेजर जनरल हैदर चौधरी, राष्ट्रीय पूर्व सुरक्षा खुफिया महानिदेशक मेजर जनरल रेज्ज़कुल हैदर चौधरी, निदेशक राष्ट्रीय सुरक्षा खुफिया पूर्व ब्रिगेडियर जनरल अबंग्लादेसुर्र्हीम, उद्योग मंत्रालय में पूर्व अतिरिक्त सचिव, नुरुल अमीन; पूर्व एनएसआई निर्देशक: विंग कमांडर शहाबुद्दीन अहमद भी उन लोगों में थे।

दक्षिण एशिया में बांग्लादेश मानव तस्करी और हथियारों की तस्करी के लिए एक प्रमुख 'पारगमन मार्ग' माना जाता है। तस्करी के लिए हवा, जमीन और समुद्री सभी मार्गों का तस्कर इस्तेमाल कर रहे हैं ! यह आरोप भी है कि बांग्लादेश-भारत भूमि मार्गों का भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है ।

हथियार और गोला बारूद का बड़े पैमाने पर हो रहा यह प्रवाह पाकिस्तान और बांग्लादेश के राजनीतिक नेतृत्व और उनके राष्ट्रीय सुरक्षा बलों और खुफिया प्रमुखों के द्वारा रची गहरी साजिश का हिस्सा है ।

भारत के सीमावर्ती इलाकों में योजनाबद्ध बांग्लादेश के नागरिकों की घुसपैठ जारी है। 1971 में पूर्वी बंगाल से भारत में आये घुसपैठियों की संख्या लाखों में है । ऐसे आप्रवासियों की कुल आबादी चार से पांच करोड़ होने का अनुमान है।

हमारे महान ज्ञानी राजनीतिक नेतृत्व को क्या कहें, जिनकी मेहरवानी से इन लोगों के राशन कार्ड, मतदाता कार्ड, आधार कार्ड और भारतीय पहचान पत्र भी बन चुके हैं । उन्होंने राजमार्गों और सड़कों के किनारे अनगिनत छोटी छोटी भूमि पर अवैध कब्जा कर लिया है, वे मदरसों और मस्जिदों का संचालन कर रहे हैं, नदी परिवहन प्रणाली पर कब्जा जमा लिया है, नदियों के माध्यम से कोयला ढोने वाले तंत्र पर उनका पूरा प्रभाव है । अक्सर शहरी क्षेत्रों में जघन्य अपराध करने वाले हार्ड कोर अपराधी गिरोहों में भी वे पाए जाते हैं ।

धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक भारत के दुश्मन धर्मयुद्ध (जिहाद) के लिए तैयार हो रहे हैं, और वोट की ताकत से भारत पर राज करने का सपना संजो रहे हैं । उनकी जनसंख्या लगातार बढ़ भी रही है ! उनका लक्ष्य ही है, भारत की बहुसंख्यक आबादी बनना और वे इसी कार्य में व्यस्त हैं।

(लेखक बीएसएफ के पूर्व आईजी है और उन्होंने अनेक वर्षों तक असम के पूर्वोत्तर राज्यों, मेघालय, मणिपुर, त्रिपुरा नागालेंड, कछार और मिजोरम में सेवा दी है। उन्होंने अब तक 50 से अधिक पुस्तकें लिखी है और वर्तमान में वे गुड़गांव, हरियाणा में रहते है)
881, सेक्टर 17 बी
गुड़गांव, पिन 122005


संपर्क +919310641489, 9868058960

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क्रांतिदूत: हकीकत न बन जाए उनका मुगलिस्तान का सपना – व्ही. के. गौर (सेवानिवृत्त आईजी, बीएसएफ)
हकीकत न बन जाए उनका मुगलिस्तान का सपना – व्ही. के. गौर (सेवानिवृत्त आईजी, बीएसएफ)
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