असहिष्णुता का निकृष्टतम केंद्र "केरल"

  पिछले वर्ष वामपंथी साहित्यकारों ने असहिष्णुता का बहुत हल्ला मचाया ! पुरष्कार वापसी की नौटंकी भी बहुत जोरशोर से हुईं ! वस्तुतः असहि...

 

पिछले वर्ष वामपंथी साहित्यकारों ने असहिष्णुता का बहुत हल्ला मचाया ! पुरष्कार वापसी की नौटंकी भी बहुत जोरशोर से हुईं ! वस्तुतः असहिष्णुता किसे कहते हैं, इसे देखना हो तो वामपंथियों के प्रभाव वाले राज्य केरल में हो रहे हिंसाचार की ओर नजर दौड़ाना पर्याप्त है ! आरएसएस के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख जे. नंदकुमार ने 24 अक्टूबर, 2016 को हैदराबाद में संपन्न हुई राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी मंडल की बैठक के दूसरे दिन मीडिया से चर्चा करते हुए कहा :
 
"जबसे केरल में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा सरकार का गठन हुआ है, कम्युनिस्ट हिंसा अत्यधिक बढ़ गई है । केरल राज्य इन दिनों माकपा के असहिष्णुता पूर्ण हिंसक व्यवहार के कारण सर्वाधिक अशांत दौर से गुजर रहा है। यह हिंसाचार हर उस समूह के साथ होता है, जिसके विषय में उन्हें लगता है कि वह उनका विरोध कर सकता है । 

प्रस्तुत हैं श्री जे नंदकुमार की प्रेस वार्ता का सारांश -

पूरे देश में अब केवल केरल में ही माकपा का प्रभाव शेष बचा है । जबकि 60 के दशक के दौरान, वे पूरे देश में प्रभावी होने का सपना संजोये हुए थे। उन दिनों उनका एक नारा बहुचर्चित था - "नेहरू के बाद ईएमएस!" किन्तु अपने जन विरोधी कृत्यों के कारण पिछले 6 दशकों में सीपीएम के बंगाल सारे गढ़ ढह गए हैं, इसका मुख्य कारण है, उनके नेताओं की असहिष्णुता, घृणा की राजनीति और अहंकार। इस के बावजूद भी वे केरल में असहिष्णुता के ही रास्ते पर लगातार चलते जा रहे हैं ।

केरल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपना कार्य 1940 में शुरू किया। प्रारंभ में संघ को लेकर कम्युनिस्ट दृष्टिकोण उपेक्षा और तिरस्कार पूर्ण था। उनका मानना था कि मलयाली मन संघ विचारधारा को स्वीकार नहीं करेगा। लेकिन जब उन्होंने देखा कि संघ की विचारधारा कम्यूनिस्टों के मजबूत प्रभाव क्षेत्र में भी पैठ बनाने लगी है, तो वे संघ के प्रति असहिष्णु होने लगे।

साम्यवाद से मोहभंग होने के कारण अनेक कम्युनिस्ट कार्यकर्ताओं ने आरएसएस की शाखाओं में जाना प्रारम्भ कर दिया । कम्युनिस्ट पार्टी का दावा है कि वे श्रमिक वर्ग के लिए कार्य करते हैं, किन्तु वे उन्हें भी आरएसएस में शामिल होने से रोकने में सक्षम नहीं थे। नतीजा यह हुआ कि उन्होंने आरएसएस के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए बल प्रयोग शुरू कर दिया।

उनका पहला शिकार बने श्रीवदिक्कल रामकृष्णन, जो पेशे से दर्जी थे और आरएसएस की थालास्सेरी शाखा के मुख्यशिक्षक थे ! 28 अप्रैल 1969 को जब वे अपनी छोटी सी सिलाई की दुकान पर काम कर रहे थे, उन्हें दिनदहाड़े बेरहमी से क़त्ल कर दिया गया ! उस ह्त्या के मुख्य आरोपी और कोई नहीं, आज के मुख्यमंत्री पिनारयी विजयन थे ! इस हत्याकांड का दूसरा आरोपी राजू मास्टर था, जो सीपीआई (एम) के राज्य सचिव श्री कोदियेरी बालाकृष्णन का श्वसुर था । लेकिन इन सक्षम लोगों के प्रभाव में स्थानीय पुलिस ने कमजोर केस बनाया, नतीजा यह हुआ कि इन लोगों को अदालत ने संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया ।

लेकिन श्रीरामकृष्णन की हत्या भी संघ की विचारधारा को केरल के कोने कोने में फैलने से रोक नहीं सकी । स्वयंसेवक दूने उत्साह से उन गाँवों में भी संघ का सन्देश प्रभावी ढंग से ले जाने लगे, जिन्हें कम्युनिस्ट पार्टी का गढ़ माना जाता था, और जिन्हें वे "पार्टी गांव" (पार्टी ग्रामम) कहते थे और जहाँ किसी अन्य को काम करने की अनुमति नहीं थी । स्वयंसेवकों ने बहादुरी से सीपीआई (एम) की आतंकवादी शैली का विरोध किया।

80 के दशक में मोहन नामक एक तालुका कार्यवाह की सीपीआई (एम) के कार्यकर्ताओं द्वारा हत्या कर दी गई । उसकी बेटी निवेदिता की आयु उस समय केवल 2 वर्ष की थी, बाद में उसका विवाह आरएसएस के ही एक कार्यकर्ता से हुआ । हाल ही में, निवेदिता के घर में सीपीआई (एम) के कार्यकर्ताओं ने तोड़फोड़ की और उसे पूरी तरह ध्वस्त कर दिया । उन्होंने उसकी गर्दन पर चाकू रखकर धमकी भी दी कि उसका और उसके पति का भी वही हश्र होगा, जो उसके पिता का हुआ। यह सब पुलिस की मौजूदगी में हुआ।

वर्तमान L.D.F सरकार द्वारा कार्यभार ग्रहण करने के बाद स्थिति और भी गंभीर हुई है और उसका कारण भी साफ़ है, क्योंकि मुख्यमंत्री पिनारयी विजयन है, जो पहले हत्याकांड के पहले आरोपी थे, जिसका कि उल्लेख पूर्व में किया है ।

पिछले दिनों 11 जुलाई 2016 को भारतीय मजदूर संघ के पदाधिकारी श्री सी के रामचंद्रन की उनकी पत्नी और बच्चों के सामने घर में घुसकर ह्त्या कर दी गई । वे कन्नूर के पय्यान्नुर में ऑटो चलाकर अपने परिवार का भरण पोषण करते थे । 3 सितम्बर 2016 को कन्नूर के ही थिल्लान्केरी पंचायत के एक स्वयंसेवक श्री विनीश जब अपने काम से घर वापस आ रहे थे, उनकी मार्ग में ही ह्त्या कर दी गई । अन्त में पिनारयी के श्री रेमिथ उथमान का उल्लेख जिनकी अभी अभी 12 अक्टूबर 2016 को दिनदहाड़े उस समय मार डाला गया, जब वे अपनी बीमार बहिन के लिए दवा खरीदने जा रहे थे ! स्मरणीय है कि पिनारयी वर्तमान मुख्यमंत्री का निर्वाचन क्षेत्र है । यह भी उल्लेखनीय है कि 22 फरवरी 2002 को रेमिथ के पिता श्री उथमान की भी हत्या कर दी गई थी ! वे भी एक स्वयंसेवक थे और एक बस ड्राइवर के रूप में परिवार चलाते थे । अब श्री उथमान के परिवार में कोई पुरुष सदस्य नहीं है। यह कन्नूर जिले में सीपीआई (एम) की क्रूरता का निकृष्टतम उदाहरण है। इस तरह के उदाहरण असंख्य हैं।

ऐसा नहीं है कि सीपीएम के गुंडों की असहिष्णुता केवल भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं के प्रति ही हो, अन्य राजनीतिक दलों को भी इसका शिकार बनना पड़ा है । लगभग सभी गैर-सीपीएम दलों के खिलाफ सीपीएम की उन्मुक्त हिंसा की घटनायें हुई हैं । व्यक्तियों, संपत्तियों और वाहनों पर बम फेंके जाने की घटनाएँ आम हैं । यहां तक ​​कि महिलाओं, बच्चों और पालतू जानवरों को बख्शा नहीं गया हैं। फसलें नष्ट की गई हैं, वाहनों और मकानों को जलाया गया है, यहाँ तक कि स्कूल भवनों पर भी हमला कर उन्हें ध्वस्त किया गया है ।

केरल की वर्तमान दुर्दशा पर टिप्पणी करते हुए पुलिस महानिरीक्षक ने भी अपनी पीड़ा व्यक्त की है, तथा सीपीआई (एम) कार्यकर्ताओं के उग्रवाद से निपटने में पुलिस मशीनरी की लाचारी भी व्यक्त की है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकारी मंडल ने आरएसएस और अन्य विरोधियों के खिलाफ सीपीआई (एम) के जारी हिंसा अभियान की निंदा की है । केरल की सरकार के साथ ही केंद्र सरकार का भी आह्वान किया है कि केरल में कानून का शासन सुनिश्चित करने के लिए, हिंसा रोकने के आवश्यक उपाय करें तथा अपराधियों के खिलाफ तत्काल कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करें । कार्यकारी मंडल ने सीपीआई (एम) की हिंसक रणनीति के खिलाफ जनमत जागृत करने के लिए मीडिया सहित सभी लोगों से अपील की है ।

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क्रांतिदूत: असहिष्णुता का निकृष्टतम केंद्र "केरल"
असहिष्णुता का निकृष्टतम केंद्र "केरल"
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