मोदी सरकार के तीन साल - संजय तिवारी

भारतीय जनता पार्टी सभी महत्वपूर्ण चुनाव जीतती जा रही है. इसका मतलब है कि नरेंद्र मोदी से लोगों का विश्वास एक प्रतिशत भी नहीं हटा है.शुरु...

भारतीय जनता पार्टी सभी महत्वपूर्ण चुनाव जीतती जा रही है. इसका मतलब है कि नरेंद्र मोदी से लोगों का विश्वास एक प्रतिशत भी नहीं हटा है.शुरुआत में बीजेपी दिल्ली का चुनाव हारी और बाद में बिहार के चुनाव में उन्हें हार मिली. लेकिन उसके बाद उन्हें जीत मिली.चुनाव को पैमाना मानें तो लोगों का विश्वास मोदी पर कायम है. लेकिन चुनाव नतीजे और सरकार ने ज़मीनी स्तर पर क्या किया, इसमें अंतर तो है ही. सरकार के बारे में पूरा विश्लेषण करना है तो हमें ये देखना होगा कि ज़मीनी स्तर पर क्या हुआ ? अपने वादे पर सरकार खरी उतरी या नहीं ? 

इस मोर्चे पर परिणाम मिलाजुला सा है. जम्मू कश्मीर प्रदेश तो बीते कई सरकारों से ठीक से संभाला नहीं गया. ऐसे में मोदी सरकार पर आरोप लगाना ठीक नहीं होगा. जहां तक किसानों का सवाल है, उत्तर प्रदेश में ऋण माफी की गई है लेकिन महाराष्ट्र और अन्य प्रदेशों से अब भी किसानों की आत्महत्या की ख़बर आ रही है. सरकार की सबसे बड़ी नाकामी रोजगार के मोर्चे पर ही है. चुनाव के पहले मोदी ने 'बेरोजगारों को रोजगार' का बड़ा सा नारा दिया था. निर्माण के क्षेत्र में भी कोई बदलाव नहीं आया है. आईटी सेक्टर में भी भारी छंटनी हो रही है. नौकरियां नहीं देना इस सरकार की बड़ी नाकामी है. हमें नहीं लगता कि उत्तर प्रदेश में अगर बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी इकट्ठा हो जाते हैं तो बीजेपी के छुट्टी कर सकते हैं. विपक्ष के सामने सबसे बड़ी चुनौती गठबंधन तैयार करने और नेता चुनने की है. 

कांग्रेस अच्छी स्थिति में नहीं है. लोगों को राहुल गांधी के नेतृत्व पर विश्वास नहीं है. विपक्ष ने अभी तक ऐसा कोई मुद्दा नहीं उठाया है जिससे सरकार को रक्षात्मक होने के लिए मजबूर कर दें. हालांकि राजनीति के पंडितो में से बहुतेरे ऐसे भी मिल जायेंगे जिनकी नज़र में मोदी सरकार की छवि बहुत चमकदार नहीं दिखती लेकिन वे भी यह स्वीकार करते हैं कि विश्वमंच पर भारत की मज़बूती बहुत बढ़ चुकी है। हां यह जरूर है कि कुछ प्रश्न यदि खड़े हो रहे हैं तो चिंताए भी स्वाभाविक है। मसलन सीमा पर अतिक्रमण और सैनिकों के हताहत होने की संख्या बढ़ी है. कश्मीर का मसला पहले से भी गंभीर हो गया है .आंतरिक सुरक्षा की बात करें तो सुकमा से लेकर नक्सलवादियों की वारदातों की संख्या बढ़ी है. सरकार सिर्फ़ अधिकारियों की बैठक से संतुष्टि हासिल कर लेती है. किसानों से वादा किया गया था कि पहली सरकारों के मुक़ाबले हम किसानों का ज़्यादा ख़्याल रखेंगे.सरकार की तरफ़ से तय न्यूनतम समर्थन मूल्य में 50 फ़ीसद के इज़ाफ़े का वादा किया गया था, लेकिन साढ़े तीन फ़ीसद से ज़्यादा दाम नहीं बढ़े हैं. भारतीय जनता पार्टी ने 'सबका साथ सबका विकास' का वादा किया था, लेकिन इस पर प्रश्नचिन्ह लगा हुआ है. आम भारतीय की राय समझें तो कुल मिलाकर भरोसा केवल नमो पर ही है, और यह अभी भी कायम है। 

कितने खुश या नाखुश हैं लोग

2014 में हुए लोकसभा चुनाव में एनडीए को बहुमत मिला था. 26 मई 2017 को सरकार के तीन साल पूरे हो जाएंगे. इस मौके पर सरकार के कामकाज के बारे में लोगों की राय क्या है, यह जानने के लिए नागरिक जुड़ाव मंच लोकल सर्किल्‍स ने एक सर्वेक्षण किया . इस सर्वे में 40,000 से भी ज्यादा नागरिकों ने हिस्सा लिया और इस सर्वे में 20,000 से भी अधिक वोट डाले गए. इस सर्वे में करीब 68 प्रतिशत लोग पुरुष, जबकि 32 प्रतिशत महिलाओं ने हिस्‍सा लिया. लोकल सर्किल्‍स की प्रेस रिलीज़ के हिसाब से इस सर्वे में लगभग 42 प्रतिशत उत्तरदाता टियर-1 शहरों के थे, 28 प्रतिशत टियर-2 के, 30 प्रतिशत टियर-3 और ग्रामीण स्थानों के थे. चुनाव में हिस्सा लेने वालों की औसत उम्र 32 वर्ष थी. इस सर्वे में नोटबंदी, महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा, बेरोज़गारी के साथ कई दूसरे मामलों में सवाल पूछे गए...

पिछले तीन सालों में सरकार का प्रदर्शन कैसा रहा ?

सर्वे में 17 प्रतिशत लोगों ने कहा कि सरकार ने उम्मीद से बेहतर काम किया है. 44 प्रतिशत लोगों ने कहा कि सरकार ने उम्मीद के मुताबिक काम किया है, जबकि 39 प्रतिशत लोगों ने कहा कि सरकार ने उम्मीद से कम काम किया है. जब लोगों से यह पूछा कि क्या सरकार अत्यावश्यक वस्तुओं की कीमत कम करने में सफल हुई है.. तो 28 प्रतिशत लोगों ने कहा कि सरकार सफल हुई है, जबकि 66 प्रतिशत लोगों ने कहा कि सरकार सफल नहीं हुई है. जब लोगों से यह पूछा गया कि क्या सांप्रदायिकता से जुड़े मुद्दे को कंट्रोल करने में सरकार सफल हुई है तो 61 प्रतिशत लोगों ने 'हां' में जबाब दिया, जबकि 31 फीसदी ने 'न' में जबाब दिया.

क्या नोटबंदी के जरिए सरकार कालेधन पर शिकंजा कस पाई है ?

8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी का ऐलान किया था. नोटबंदी के तहत 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों पर प्रतिबंध लगाया दिया गया था. प्रधानमंत्री मोदी के इस कदम से पूरे भारत में हलचल मच गई थी. कुछ लोग इस कदम से पूरी तरह खुश थे तो कुछ लोग सरकार के इस कदम की घोर आलोचना भी की थी. लोकल सर्किल्‍स की तरफ से लोगों से यह भी पूछा गया कि क्या नोटबंदी के जरिए सरकार कालेधन पर शिकंजा कसने में सफल हुई है, तो 51 प्रतिशत लोगों ने कहा कि सरकार शिकंजा कसने में कामयाब हुई है, जबकि 37 प्रतिशत लोगों ने 'न' में जवाब दिया. जब लोगों से यह सवाल पूछा गया क्या नोटबंदी के बाद भ्रष्टाचार कम हुआ है तो 47 प्रतिशत लोगों ने कहा कि नोटबंदी की वजह से भ्रष्टाचार में कमी नहीं आई है, जबकि 37 प्रतिशत लोगों ने कहा की भ्रष्टाचार में कमी आई है. जब लोगों से पूछा गया क्या पिछले तीन सालों में भारत में भ्रष्टाचार में कमी आई है तो 47 प्रतिशत लोगों ने 'हां' में जबाब दिया, जबकि 43 प्रतिशत लोगों ने कहा कि भ्रष्टाचार कम नहीं हुआ है.

बेरोज़गारी दर को लेकर लोगों का क्या कहना है ?

केंद्र सरकार ने बेरोज़गारी कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं, लेकिन शायद इसका असर अब आम लोगों के ऊपर नहीं हुआ है. जब लोगों से यह सवाल पूछा गया क्या भारत में बेरोज़गारी दर कम हुई है तो 63 प्रतिशत लोगों ने कहा बेरोज़गारी दर में कोई कमी नहीं आई है, जबकि 21 प्रतिशत लोगों ने कहा कि बेरोज़गारी दर में कमी आई है. जब लोगों से यह पूछा गया क्या भारत में वह खुद के और अपने परिवार के भविष्य को लेकर आशावादी है तो 69 लोगों ने कहा कि वे आशावादी हैं, जबकि 21 प्रतिशत लोगों ने कहा, वह आशावादी नहीं है. भारत में व्यापार करने के मामले में जब लोगों से सवाल किया गया तो 36 प्रतिशत लोगों ने कहा कि भारत में व्यापार करना आसान हो गया है, जबकि 36 फीसदी ने कहा कि भारत में व्यापार करना आसान नहीं है. 28 प्रतिशत लोगों ने कोई जबाब नहीं दिया.

स्वच्छ भारत अभियान से क्या शहर साफ़ हुए हैं ?

2 अक्टूबर 2014 को सरकार ने स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत की थी. इस अभियान तहत सरकार द्वारा करोड़ों रुपये भी खर्च किए गए. शहरी क्षेत्रों में स्वच्छ भारत मिशन के तहत व्यक्तिगत शौचालयों के निर्माण.. ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायत स्तर पर पारस्परिक संवाद, कार्यान्वयन और वितरण तंत्र को मज़बूती के साथ-साथ लोगों में व्यावहारिक बदलाव पर जोर दिया गया. जब लोगों से पूछा गया कि क्या पिछले तीन सालों में उनके शहर ज्यादा साफ़-सुथरे हुए हैं तो 57 प्रतिशत लोगों ने कहा कि नहीं हुई है, जबकि 35 प्रतिशत लोगों ने कहा की शहर साफ हुए हैं. आठ प्रतिशत ने लोग कुछ भी कहने से मना कर दिया. जब लोगों से यह भी पूछा गया क्या उनके शहर में स्वास्थ्य सुविधा और सेवा में सुधार आया है तो 58 प्रतिशत लोगों ने कहा कि कोई सुधार नहीं हुआ है, जबकि 23 प्रतिशत लोगों ने कहा की सुधार हुआ है.

महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध :

इस सर्वे में 60 प्रतिशत लोगों ने कहा कि पिछले तीन सालों में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध कम नहीं हुए हैं, जबकि 28 प्रतिशत लोगों ने कहा कि अपराध में गिरावट आई है. चुनाव से पहले बीजेपी ने अपने घोषणा पत्र में कई वादे किए थे. जब लोगों से यह पूछा गया क्या पिछले तीन सालों में अपने घोषणा पत्र में किए गए वादों को निभाने में सरकार सफल हुई है तो 59 प्रतिशत लोगों ने कहा कि सरकार सफल हुई है, जबकि 32 प्रतिशत लोगों ने कहा कि सरकार सफल नहीं हुए हैं.

क्या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि में सुधार आया है ?

सर्वे में विदेश मामलों को लेकर भी लोगों से सवाल किए गए. जब लोगों से पूछा गया क्या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि में सुधार आया है तो 81 प्रतिशत लोगों ने कहा कि हां सुधार आया है, जबकि 13 प्रतिशत लोगों ने कहा कोई सुधार नहीं आया है और 6 प्रतिशत लोगों ने कोई जवाब नहीं दिया. जब लोगों से यह भी पूछा गया कि पाकिस्तान को भारत ने जिस ढंग से हैंडल किया है, क्या वे उसे अनुमोदित करते हैं तो 64 प्रतिशत लोगों ने 'हां' में जवाब दिया, जबकि 30 प्रतिशत लोगों ने 'न' में जवाब दिया.

क्या सांसद अपने चुनाव क्षेत्र की समस्या को दूर करने में सफल हुए हैं ?

इस सर्वे में यह सामने आया है कि पिछले तीन सालों में सांसदों के कामकाज को लेकर लोग खुश नहीं है. लोगों से यह सवाल किया गया क्या सांसद अपने चुनाव क्षेत्र की समस्या को दूर करने में सफल हुए हैं तो 69 प्रतिशत लोगों ने कहा कि ऐसा नहीं हुया है, जबकि 14 प्रतिशत लोगों ने कहा कि सांसद समस्या दूर करने में सफल हुए हैं. 17 प्रतिशत लोगों ने कोई जवाब नहीं दिए. लेकिन संसद में सरकार के कामकाज को लेकर लोग खुश नज़र आए. जब लोगों से यह पूछा गया क्या सरकार ने संसद को सही तरीके से हैंडल करने के साथ-साथ महत्पूर्ण बिलों पर सही कदम उठाया है तो 65 प्रतिशत लोग इस मामले में सरकार से खुश नज़र आए, जबकि 28 प्रतिशत लोग नाखुश दिखे.

वे काम जो बनाते हैं पीएम मोदी को खास

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी को तीन साल पहले जनता ने गुजरात छोड़कर दिल्ली में आने को मजबूर कर दिया. खुद बीजेपी ने नहीं सोचा था कि पार्टी को इस प्रकार का बहुमत मिलेगा जो ऐतिहासिक होकर भारतीय राजनीति के सुनहरे पन्नों में दर्ज हो जाएगा. यह पहली बार हुआ कि एक वर्तमान मुख्यमंत्री देश के प्रधानमंत्री पद का उत्तराधिकारी बना.कारण साफ था गुजरात के बाहर मोदी की कार्यशैली, निर्णय लेने की क्षमता, कुछ नया करने की इच्छाशक्ति और भविष्य को ध्यान में रखकर तकनीक का प्रयोग आदि की खबरें जो आई उसने लोगों के दिलोदिमाग पर एक ही छाप छोड़ी, अबकी बार मोदी सरकार. लोगों ने यह नारे नहीं लगाए, अबकी बार बीजेपी सरकार.पिछले तीन सालों में पीएम मोदी के प्रति लोगों का लगाव कुछ ऐसा बढ़ा है कि उनकी लोकप्रियता का ग्राफ नीचे आने का नाम ही नहीं ले रहा है. विपक्ष इसी बात से परेशान है. पीएम नरेंद्र मोदी की सरकार के तीन साल में पीएम को लोगों को जानने और समझने का मौका मिला. इन तीन सालों में पीएम मोदी के कुछ ऐसे काम रहे जो तमाम लोगों की नजर बेहतर पाए हैं. इनमें से कुछ का जिक्र अब बनता है-

नरेंद्र मोदी का स्वच्छता के प्रति झुकाव

शायद ही इससे पहले किसी प्रधानमंत्री का स्वच्छता के प्रति इतना झुकाव देश ने देखा होगा. स्वच्छता को एक अभियान बनाना. अभियान का हिस्सा बनना. खुद झाड़ू लेकर मैदान में उतरना और लाखों लोगों को इसके लिए प्रेरित करना. आसान काम नहीं है. लेकिन पीएम मोदी ने बखूबी कर दिया. परिणाम कितना मिला इस बारे में ज्यादा नहीं कहा जा सकता, लेकिन देश में लोग इस बारे में प्राथमिकता से विचार करने लगे, यह इस अभियान की सफलता के पयमाने में एक जरूर है.

पीएम नरेंद्र मोदी का समय का पालन करना

पीएम नरेंद्र मोदी काफी मेहनती है. कहा जाता है कि दिन में 18 घंटे वह काम करते हैं. समय की पाबंदी पसंद करते हैं. जब से सत्ता में आए इन्होंने सरकारी कर्मचारियों में इसे लागू करवाने की प्रक्रिया आरंभ कर दी. कई मंत्रालयों में जहां कर्मचारी 11 बजे के बाद दिखाई देते थे और 3 बजे तक कुर्सियां खाली होना शुरू हो जाती वहां की परिस्थिति बिल्कुल बदल गई है. पीएम मोदी ने आदेश देकर लगभग सभी केंद्रीय सरकारी कार्यालयों में बायोमेट्रिक मशीन लगाने के आदेश दे दिए.

सर्जिकल स्ट्राइक कर पाकिस्तान और विपक्ष का मुंह बंद

नरेंद्र मोदी सरकार ने पाकिस्तान के नियंत्रण वाले कश्मीर के हिस्से में सर्जिकल स्ट्राइक की मंजूरी दी और भारतीय सेना ने पहली यह कारनामा कर पूरी दुनिया को अचरज में डाल दिया. यह अलग बाद है कि कांग्रेस की ओर से कहा गया कि उनके कार्यकाल के दौरान में ऐसा हुआ लेकिन उन्होंने ढिंढोरा नहीं पीटा. वर्तमान डीजीएमओ ने इसे अपनी तरह का पहला आपरेशन बताया तो कुछ पूर्व सैन्य अधिकारियों ने कहा कि सीमा पर अकसर इस तरह की कार्रवाई होती है.

पीएम के मन की बात

सत्ता में आने के बाद किसी प्रधानमंत्री ने जनता से जुड़ने का अनोखा माध्यम निकाला मन की बात. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महीने के अंतिम रविवार को लगातार मन की बात कार्यक्रम के जरिए लोगों को संबोधित करते हैं. इस कार्यक्रम के लिए लोगों से सुझाव मंगाते और कई मुद्दों पर लोगों से बात करते हैं. पीएम की इस पहल की लोगों ने काफी सराहना की है.

भ्रष्टाचार पर अंकुश की कोशिश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्ता में आते ही यह प्रयास आरंभ किए कि भ्रष्टाचार पर हर प्रकार का अंकुश लगे. इसके लिए सरकार सभी सरकारी भुगतान ऑनलाइन करने का निर्णय लिया. टेंडरिंग को पूरी तरह ऑनलाइन करने का आदेश दिया. इस प्रकार के कई आदेश सरकार दिए और इसकी उपलब्धि कितनी है इस बारे में ठोस नहीं कहा जा सकता है. कहा जा सकता है तो सिर्फ इतना कि पिछले तीन साल में अभी तक सरकार पर भ्रष्टाचार का एक भी आरोप नहीं लगा है. जबकि पिछली सरकार में मंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक पर आरोप लगते रहे हैं.

नोटबंदी का ऐलान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 8 नवंबर को तत्कालीन 500 और 1000 के नोट को बंद करने का ऐलान किया. देश की पूरी अर्थव्यवस्था जैसे रुक गई. पीएम ने लोगों ने दो महीने का समय मांगा और लोगों ने दिया. लोगों को काफी कष्ट झेलने पड़े. विपक्ष ने इसे मुद्दा बनाने का प्रयास किया. नोटबंदी को गलत कदम करार दिया. चुनाव में भुनाने का प्रयास भी लेकिन यह लोगों का मोदी से विश्वास कम नहीं हुआ.

स्वस्थता के प्रति सजगता

पीएम मोदी स्वास्थ्य के प्रति काफी सजग हैं. वह सुबह उठकर योग करते हैं. उन्होंने पूरी दुनिया में योग दिवस मनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र से संपर्क किया और भारत के नाम एक अंतरराष्ट्रीय सफलता लगी. इतना ही नहीं वह लगातार लोगों से यह अपील कर रहे हैं कि वे अपने स्वास्थ्य पर ध्यान दें. योग को अपनाएं और स्वस्थ जीवन शैली.

तकनीक के प्रति रुझान

प्रधानमंत्री बनने से पहले नरेंद्र मोदी गुजरात के सीएम थे. वहां से वह लगातार सोशल मीडिया के जरिए लोगों से जुड़े रहे हैं. मोबाइल तकनीक और तकनीक का प्रयोग कामकाज में करने ताकि पारदर्शिता बने और काम सहज हो. यह प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी की देश को एक देन है. भारत में राष्ट्रपति का एक ट्विटर हैंडल बना. पीएमओ का ट्वीटर हैंडल, पीएम का, सभी मंत्रालयों और मंत्री को ट्वीटर पर लोगों से जुड़ने का आदेश दिया गया और सभी को सक्रियता से इससे जुड़ने की बात कही गई. परिणाम साफ है कि विदेश मंत्रालय से लेकर रेल, और कई मंत्रालयों में लोगों ने ट्विटर के जरिए अपनी समस्याओं का समाधान किया. कई बार तो बड़ी समस्याओं का समाधान एक ट्वीट से हो गया. उससे से बड़ी बात समय पर लोगों को सुविधा मिली और लोगों ने पीएम की इस मुहिम का लाभ उठाया और दिया धन्यवाद.

डिजिटल भारत की मुहिम

डिजिटल भारत के सपने को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी आगे बढ़ रहे हैं. उनके पिछले तीन साल के कार्यक्रम में वह लगातार इस ओर बढ़ते जा रहे हैं. लोगों ने इस दिशा में काम करने का आग्रह कर रहे हैं. सरकार के सभी विभागों को डिजिटलाइजेशन के लिए प्रेरित कर रहे हैं. उनका मानना है कि इससे पर्यावरण से लेकर धन की हानि दोनों को बचाया जा सकता है. कई सरकारी काम अब इस माध्यम से होने लगे हैं. इतना ही नहीं कई ऐसे फॉर्म को सरल किया जिसके चलते लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ता था.

कैशलेश भारत की मुहिम

पीएम ने न्यू इंडिया की संकल्पना की है. उन्होंने इसके लिए कैशलेस भारत की बात कही है. वह चाहते हैं कि देश में नकदी का चलन न हो. यह सबसे बड़ा माध्यम है भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने का. पीएम को कितनी कामयाबी मिली, या मिलेगी यह तो साफ नहीं कहा जा सकता है, लेकिन लोगों ने माना कि पीएम भ्रष्टाचार के खिलाफ मजबूत किलेबंदी की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं.

रोज एक कानून किया खत्म

आजादी के पहले अंग्रेजों ने भारत के लिए कई कानून बनाए. आजादी के बाद भी हजारों की संख्या में इस प्रकार के कानून भारत में चलते रहे. कई ऐसे कानून भी हैं जिनकी अब आवश्यकता भी नहीं रही. आजादी के 70 से भी ज्यादा हो गए कई सरकारें आईं कई लेकिन किसी ने भी इस ओर विचार नहीं किया. नरेंद्र मोदी सरकार ने कई ऐसे कानून रद्द कर दिए जिनकी अब कोई जरूरत नहीं है. एक कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा कि जब से वह सरकार में आए हैं तब से लेकर अब तक उन्होंने 1000 से ज्यादा कानून रद्द कर दिये हैं. वे अपनी इस मुहिम में रोज आगे बढ़ रहे हैं. उनका मानना है कि कई गैरजरूरी कानून लोगों के लिए दिक्कत पैदा करते हैं.

नीति आयोग का गठन

योजना आयोग अब इतिहास हो गया है. इसके स्थान पर पीएम मोदी ने नीति आयोग का गठन किया है. जब मोदी गुजरात के सीएम थे तब योजना आयोग, उसकी कार्यशैली और राज्यों से व्यवहार उन्हें उचित नहीं लगा. राज्यों से केंद्र के बेहतर समन्वय के लिए उन्होंने नीति आयोग का गठन किया.

पाकिस्तान को अलग थलग करना

अंतरराष्ट्रीय मंच पर आतंकवाद को नीति के रूप में प्रयोग कर रहे पाकिस्तान को भारत ने अलग थलग कर दिया. आज पाकिस्तान पर अमेरिका से लेकर कई देशों ने दबाव बनाया है कि वह आतंकवाद को प्रशय देना बंद करे. इस काम में मोदी सरकार को बड़ी कामयाबी मिली है.

चीन की आंखों में आंख डालना

पिछले काफी समय से चीन भारत के बड़े भाई की भूमिका में आने के प्रयास में रहा. एक तरफ जहां वह पाकिस्तान की मदद कर रहा है वहीं भारत के कई हिस्से पर अपना दावा करता रहा है. एलएसी को वह स्वीकार नहीं कर रहा है. लेकिन कई दशकों बाद भारत ने लेह के आगे अपने 100 टैंक भेजे और युद्धाभ्यास किया. वहीं अरुणाचल प्रदेश के विकास और सीमा पर सड़क निर्माण कार्य को तेजी से आगे बढ़ाया गया.

तीन सालों की महत्वपूर्ण उपलब्धियां

किसी भी पार्टी का कार्यकाल क्यों न हो, आरोप-प्रत्यारोप का दौर तो जारी रहता ही है, लेकिन तीन सालों में मोदी सरकार की कुछ उपलब्धियां हैं जिनसे कोई भी इंकार नहीं कर सकता। आगे जानिए कि तीन सालों के कार्यकाल में इस सरकार ने कहां-कहां अपने झंडे गाड़कर अपने विरोधियों को नेस्तनाबूत किया -

डिजिटल इंडिया-

पिछले साल मोदी सरकार के अचानक से लिए नोटबंदी के फैसले से भले ही लोगों को परेशानी उठानी पड़ी हो, लेकिन इससे कोई भी इंकार नहीं कर सकता कि इससे कैशलेस इंडिया को बढ़ावा मिला। देश का डिजिटलाईजेशन हुआ। हाथ में पैसे न होने पर लोगों ने डिजिटल तरीकों पर गौर करना शुरू किया। मोदी सरकार ने कैशलेस इंडिया के लिए भीम ऐप की भी शुरूआत की।

दक्षिण एशियाई देशों के लिए सेटेलाइट-

मोदी पड़ोसी देशों के लिए भी लाभकारी साबित हुए। इसरो ने साउथ एशिया सेटेलाइट का इस महीने सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया। GSAT-9 से मिलने वाले डेटा को नेपाल, भूटान, मालदीव, बांग्लादेश और श्रीलंका के साथ साझा किया जाएगा। इसके अलावा इस सेटेलाइट योजना में भाग लेने वाले देशों को सुरक्षित हॉटलाइन उपलब्ध करवाया जाएगा जो आपदा प्रबंधन में मददगार होगा।

मोदी की महत्वाकांक्षी उज्जवला योजना-

देश के आम नागरिकों के लिए ये काफी मददगार योजना साबित हो रही है। इस योजना के तहत बीपीएल कार्ड धारक महिलाओं को मुफ्त में एलपीजी कनेक्शन दिया जाता है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देना है और इस योजना के माध्यम से महिलाओं को चूल्हे से होने वाले धुंए से मुक्ति भी मिल रही है।

मोदी की विदेश यात्राएं-

वैसे तो विपक्षी पार्टियों ने मोदी की विदेश यात्राओं को लेकर हमेशा उनका मजाक ही उड़ाया है, लेकिन मोदी ने विदेश यात्राएं करके अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को बढ़ावा दिया है। चाहे मोदी की अमेरिका यात्रा हो, नेपाल यात्रा या फिर कनाडा यात्रा जिसमें उन्होंने रक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे विभिन्न क्षेत्रों में से जुड़ी परियोजनाओं के लिए समझौता किया।

रेल बजट को आम बजट से जोड़ना-

मोदी सरकार के कार्यकाल में रेल बजट को आम बजट से जोड़कर 90 साल पुरानी परंपरा को समाप्त कर दिया गया। अब रेल मंत्रालय का वित्तीय लेखा जोखा भी आम बजट का उसी तरह से हिस्सा है, जैसे दूसरे मंत्रालय के लिए होता है।

वन रैंक वन पेंशन-

कई सालों से लटके पड़े वन रैंक वन पेंशन को मोदी सरकार ने अमली जामा पहनाया। सैनिकों की मांग को पूरा करते हुए मोदी सरकार ने वन रैंक वन पेंशन को हरी झंडी दी।

रीयल एस्टेट बिल-

मोदी सरकार ने रीयल एस्टेट कानून को भी मान्यता दी। इससे निजी बिल्डरों से फ्लैट खरीदने वाले लोगों को काफी राहत मिली है। निजी बिल्डरों ने फ्लैट खरीदने वाले लोग बिल्डरों से मनमाने रवैये से परेशान होते थे।

जीएसटी बिल-

संविधान संशोधन करके लंबे समय से अटके पड़े जीएसटी बिल को पारित करवाया गया। प्रधानमंत्री ने राज्य सरकारों को भी इस बिल को विधानसभाओं में पारित करने के लिए प्रोत्साहित किया।

सर्जिकल स्ट्राइक-

सर्जिकल स्ट्राइक के जरिए भारत ने पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब भी दिया। नियंत्रण रेखा पर तो भारत ने पाक को सबक सिखाया ही इसके अलावा म्यांमार में आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन भी किया गया।

26 तारीख को मोदी सरकार को सत्ता में आये तीन साल पुरे होने वाले हैं। 26 मई 2014 को भारत की जनता ने एक नये बदलाव को देखते हुए बीजेपी को केंद्र की सत्ता सौंपी थी और नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री चुना था।

अपने चुनावी प्रचार में प्रधानमंत्री मोदी ने देश की जनता से कालेधन की वापसी से लेकर नौजवानों के लिए नौकरी पैदा करे और देश की सुरक्षा को लकेर कई चुनावी वादे किया थे। ऐसे में आज तीन साल गुजर जाने के बाद सबसे बड़ा सवाल उभरता है कि क्या हुआ मोदी सरकार के वादों का ? 

प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 में नौजावनों को रोजगार दिलाने के लिए कई चुनावी वादे किये थे। मगर इन दिनों भारत में बेरोजगारी का स्तर यह हो गया है कि लोगों को नौकरी तक से निकाला जा रहा है। इस समय टेलीकॉम, आईटी और बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं में नौकरियों की छटनी जारी है।

अर्थव्यवस्था के आठ प्रमुख गैर-कृषि क्षेत्रों में सिर्फ 2.3 लाख नौकरियां जुड़ी गईं। इस आठ सेक्टर में विनिर्माण, निर्माण, व्यापार, परिवहन, आवास और रेस्तरां, आईटी / बीपीओ, शिक्षा और स्वास्थ्य शामिल हैं। साथ ही इन सभी सेक्टर में 2 करोड़ लोग काम करते है।

संयुक्त राष्ट्र संघ ( यूएन ) के इटरनेशनल लेबर आफर्गेनाइजेशन के रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल की तुलना में 2017-18 में बेरोजगारी ज्यादा होगी। रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल जो बेरोजगारों की संख्या 1.77 करोड थी वो इस साल 1.78 करोड़ तक जा सकती है।

मोदी सरकार ने भारत में विदेशी निवेश को बढ़ाने के लिए यूपीए सराकार के भूमि अधिग्रहण बिल में कुछ बदलाव करना चाहे। नये भूमि बिल को पारित करवाने के लिए मोदी सरकार कई बार अध्यदेश भी पारित किये। मोदी सरकार किसानों के विकास का दावा करती है। मगर यूपीए के भूमि अधिग्रहण बिल से 'किसानों की सहमति' और 'सामाजिक प्रभाव के आंकलन' की अनिवार्यता को मोदी सरकार ने अपने नये बिल से हटा दिया था। वहीं विपक्ष के कडे विरोध के बाद सरकार को बिल में कुछ बदलाव को वापस लेना पड़ा, लेकिन अभी भी कुछ ऐसे बदलाव है जो अंतरिक रूप से बिजनेस मैन को फायदा पहुंचाते है।

2014 के चुनावी प्रचार में बीजेपी के हर नेता ने और पीएम मोदी ने 100 दिनों के अंदर विदेशों में जमा कालेधन को वापस लाने और प्रत्येक भारतीय के बैंक अकाउंट में 15 से 20 लाख रुपये जमा कराने का वायदा किया था। मगर तीन साल बाद भी कालेधन का मुद्दा महज मुद्दा भर बनकर रह गया है। हालांकि भारत सरकार और स्विस बैंक के बीच कालेधन को लेकर कुछ समझौते भी हुए। मगर परिणाम न बराबर ही देखने को मिला।

यूपीए के समय बीजेपी ने हर दिन पाकिस्तान के द्वारा हो रहे सीजफायर के उल्लंघन का मुद्दा उठाया। साथ ही यूपीए सरकार से कठोर कदम उठाने की मांग करते रहे। मगर जिस बीजेपी की सरकार ने पाकिस्तान को मुंह तोड़ जवाब देने का फैसला किया था। आज वही सरकार हर रोज सीजफायर के उल्लंघन को लेकर चुप बैठी रहती है।

मोदी सरकार ने खुद पिछले महीने इस बात को माना कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने पिछले एक साल में 268 बार सीजफायर का उल्लंघन किया है। 2016-17 में सबसे ज्यादा सीजफायर का उल्लघंन किया गया। पाकिस्तान द्वारा अब तक सीजफायर उल्लंघन 300 के करीब में पहुंच गया है।

सेना से रिटायर्ड एक्स-सर्विसमेन ने ओआरओपी के लिए बहुत संघर्ष किया, अपनी चुनावी वायदों में मोदी सरकार ने रिडायर्ड एक्स-सर्विसमेन के लिए खास योजनना लागू करने का फैसला किया था। मगर सत्ता में आते ही सरकार चुप्पी मार कर बैठ गई। हालांकि कुछ समय बाद सरकार ने वन रैंक वन पेंशन लागू तो किया, मगर लागू किये जाने वाले फैसलाा सच्चाई से एक दम परे है। दिल्ली के जतंर-मंतर पर पिछले 700 दिनों से एक्स-सर्विसमेन सरकार द्वारा लागू किये गये फैसले के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। एक्स-सर्विसमेन द्वारा ये आंदोलन सरकार की सच्चाई की पोल खोलता है।

मेक इन इंडिया मोदी सरकार के महत्वपूर्ण योजनाओं में से एक योजना रही है। मगर इस योजना का फायदा कहां हुआ और किस वर्ग को हुआ इसका आंकडा अभी तक सामने नहीं आया है। मेकर इंडिया के द्वारा कुछ विदेशी कंपनियां भारत में निवेश करने के लिए आकर्षित हुई। मगर परिणाम कुछ खास नहीं रहे। सरकार की इस योजना की कठोरता का इससे ही पता चलता है कि अब मेक इन इंडिया योजना के दौबार नाम बदलकर बॉय इन इंडिया के नाम से लॉच करने वाली है।

खुद को हर मोर्चे पर मजबूत माने वाली बीजेपी की सरकार के राज में भी कानून व्यवस्था का हर भी बाकी सरकारों जैसा ही रहा है। इस साल फरवरी में नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकडों के अनुसार पूरे देश में छोटे-बड़े अपराध 28,51,563 हुए। अकेले एमपी में 2,72,423 हुए। हत्या-अपहरण के मामले में यूपी नंबर वन है। लूट के मामलों में महाराष्ट्र देश में पहले नंबर पर है। ये सभी आंकडे मोदी सरकार की कानून व्यवस्था की सच्चाई बताती हैं।

बीजेपी और प्रधानमंत्री मोदी गंगा नदि को लेकर शुरू से गंभीर रहे हैं। गंगा की सफाई को लेकर मोदी सरकार ने गंगा सफाई अभियान को भी चलाया। मगर इस अभियान का परिणाम सरकार की श्रद्धा पर सवाल खड़े करता है। सरकार की इतनी मेहनत के बाद भी गंगा में गिरने वाले गंदे नाले और ट्रेनरियों का दूषित पानी बंद नही हो रहा है।

मानव विकास पर भी मोदी सरकार का भी कुछ खास योगदान नहीं रहा है। 2016 में जारी यूएनडीपी की मानव विकास रिपोर्ट के अनुसार विकास सूचकांक में शामिल 188 देशों की सूची में भारत 130वें पायदान से फिलकर 131वें पायदान पर आ गया है। जबकि तमाम विपरीत परस्थितियों के बावजूद भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7 प्रतिशत से ज्यादा रहा है।

अपने 3 साल के कार्यकाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेश यात्रा के लिए लगभग 3.4 लाख किलोमीटर तक उड़ान भर चुके हैं। ये दुनिया का करीब आठ बार भ्रमण करने के बराबर है। प्रधानमंत्री की विदेश यात्रा के लिए चार्टर्ड प्लेन पर 275 करोड़ रुपए खर्च किए गए, इसमें उनकी पांच विदेश यात्राओं का खर्च शामिल नहीं है क्योंकि उन पांच यात्राओं का खर्च का ब्योरा सरकार के पास नहीं है। 

साल 2014 में प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद मोदी ने कुल आठ देशों का दौरा किया था। उनकी पहली विदेश यात्रा भूटान से शुरू हुई और इसके बाद वह ब्राजील, नेपाल, जापान, अमेरिका, म्‍यांमार, ऑस्‍ट्रेलिया और फिजी गए थे।

प्रधानमंत्री मोदी ने अगस्त 2014 में नेपाल का आधिकारिक द्विपक्षीय दौरा किया। इस यात्रा की खासियत ये थी कि यह 17 सालों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री का पहला नेपाल दौरा था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-मंगोलिया के 60वीं कूटनीतिक वर्षगांठ पर मंगोलिया की यात्रा की थी। इस यात्रा के बाद मोदी मंगोलिया की यात्रा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने।

सितंबर 2015 में, उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र के दौरान न्यूयॉर्क का दौरा किया था जिसमें उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने कैलिफोर्निया में शीर्ष फॉर्च्यून के 500 सीईओ के साथ बातचीत की थी।

2015 में प्रधानमंत्री मोदी ने कनाडा का दौरा किया था। पिछले 42 वर्षों के बाद ये किसी भारतीय प्रधानमंत्री पहला कनाडा का दौरा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कनाडा यात्रा दोनों देशों के बीच बेहतर संबंध बनाने के नजरिए से काफी अहम थी।

25 दिसंबर 2015 को मोदी ने अचानक पाकिस्तान की यात्रा करके पूरी दुनिया को चौंका दिया था। वहा पाकिस्तान अपने समकक्ष नवाज शरीफ को जन्मदिन की शुभकामनाएं देने पहुंचे थे। यह मोदी की पहली और किसी भारतीय प्रधानमंत्री की 11 साल बाद पहली पाकिस्तान यात्रा थी।

सितंबर 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वियतनाम की यात्रा की थी। पिछले 15 सालों में इस कम्युनिस्ट देश की यात्रा करने वाले नरेंद्र मोदी पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने। इस यात्रा में उन्होंने वियतनाम के साथ विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े 12 समझौतों पर हस्ताक्षर किया था।

इस महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की श्रीलंका यात्रा भी अपने आप में काफी अहम रही। इस दौरे के दौरान मोदी 14वें अंतरराष्ट्रीय वेसाक दिवस में शामिल हुए थे। इस यात्रा में उन्होंने बनारस से श्रीलंका के बीच सीधी विमान सेवा की घोषणा की थी।

मोदी और भाजपा 

किसने क्या खोया ,क्या पाया 

साल 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी के नाम पर बीजेपी को 282 सीटें मिली थी. गठबंधन की सीटों को मिला दें तो ये आंकड़ा 336 का था. मोदी के नाम ही करिश्मा था कि तीस साल में पहली बार किसी पार्टी को स्पष्ट बहुमत हासिल हुआ. इसके बाद देश में जो भी चुनाव हुए उसमें मोदी ही चेहरा थे और उन्हीं के चेहरे को आगे रखकर बीजेपी मैदान में उतरी और जीतती चल गई. देश में मोदी राज आने के बाद सबसे पहले चार राज्यों में विधानसभा के चुनाव हुए. चार में तीन राज्यों में बीजेपी ने विरोधियों के हाथ से अपने दम पर सत्ता छीन ली. महाराष्ट्र, झारखंड, हरियाणा में बीजेपी की सरकार बनी और बाद में पीडीपी से गठबंधन कर जम्मू कश्मीर में भी सरकार बनाने में पार्टी कामयाब रही.

आजादी के बाद पहली बार जम्मू कश्मीर जैसे राज्य में बीजेपी को गठबंधन के साथ सरकार बनाने का मौका मिला. बीजेपी के लिए ये करिश्मा मोदी के नाम की वजह से हुआ. ये वो वक्त था जब देश में मानो मोदी की आंधी चल रही थी. मोदी के सामने टिकने वाला कोई नेता नहीं दिख रहा था.

2015 में दिल्ली में रुका था मोदी का विजय रथ

साल 2015 के शुरुआत में दिल्ली में जाकर मोदी का विजय रथ रुक गया. पीएम मोदी के धुआंधार प्रचार के बाद भी पार्टी हार गई. बीजेपी के सामने हार की इस शुरुआत को रोकने की चुनौती थी. पार्टी ने इसी साल यानी 2015 के अंत में बिहार के चुनाव में पूरी ताकत झोंकी. लेकिन लालू और नीतीश की दोस्ती ने बिहार में भी मोदी के रथ को आगे नहीं बढ़ने दिया. नीतीश जीत गए और बिहार में मोदी हार गए.

असम से पूर्वोत्तर में एंट्री , यू पी में प्रचंड बहुमत 

2015 की हार का ये सिलसिला ज्यादा दिन तक नहीं चल सका और 2016 के विधानसभा चुनाव में असम जैसे राज्य को जीतकर पार्टी ने पूर्वोत्तर में एंट्री की. मोदी के काम के नाम पर यहां वोट मांगे गए और जनता ने हाथों हाथ लेते हुए बंपर जीत के साथ असम को बीजेपी के हवाले कर दिया. इसके बाद तो जो लहर चली वो सुनामी बनकर देश पर छा चुकी है. अभी यूपी सहित पांच राज्यों में विधानसभा के चुनाव हुए हैं. पंजाब को छोड़कर पांच में से चार राज्यों में बीजेपी ने सरकार बनाई है. यूपी में तो वो हुआ जो राम लहर में भी पार्टी नहीं कर पाई थी. राम लहर पर मोदी लहर भारी पड़ी.

29 में से 13 राज्यों में है बीजेपी की सरकार

29 में से 13 राज्यों में बीजेपी की सरकार है. मोदी के पीएम बनने के बाद इनमें से 9 राज्यों में बीजेपी के मुख्यमंत्री बने हैं. मणिपुर, गोवा और अरुणाचल में भी बीजेपी का राज है. जबकि जम्मू कश्मीर और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में सहयोगियों की सरकार है. यानी इस वक्त देश की कुल आबादी के करीब 58 फीसदी हिस्से पर बीजेपी और उसके गठबंधन का राज है.

2014 के बाद हुए चुनावों में 9 राज्यों में बीजेपी की सरकार बनी है.

6 राज्यों में तो मोदी युग के बाद पहली बार पार्टी की सरकार बनी है.

जम्मू कश्मीर जैसे राज्य में गठबंधन की सरकार बनाने में कामयाबी मिली.

बीते हजार दिनों में मोदी की सबसे बड़ी राजनीतिक जीत यूपी में हुई है. जो राम लहर में बीजेपी यूपी में नहीं कर पाई थी वो संभव मोदी लहर में हो पाया. 403 में से बीजेपी गठबंधन को यहां 325 सीटें हासिल हुई है. इस जीत की उम्मीद किसी ने नहीं की थी, लेकिन मोदी के नाम पर ये करिश्मा संभव हो पाया.

इतना ही नहीं छोटे छोटे चुनावों में भी बीजेपी को बडी जीत हासिल हुई है. चाहे महाराष्ट्र नगर निगम की जीत हो या फिर दिल्ली के एमसीडी में जीत. ओडिशा से लेकर चंडीगढ़ के शहरी चुनाव में भी मोदी का डंका बजा है. अब चुनौती 2019 की है जिसके लिए पार्टी पूरा जोर दो साल पहले से ही लगाने में जुट गई है.

नरेन्द्र मोदी के चर्चित बयान 

यूपी लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तत्कालीन अखिलेश सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा था कि अगर गांव में कब्रिस्तान बनता है तो श्मशान भी बनना चाहिए। रमजान में बिजली आती है, तो दीवाली में भी आनी चाहिए। भेदभाव नहीं होना चाहिए। प्रधानमंत्री के इस बयान की विपक्षियों ने बहुत निंदा की थी।

इस साल की 6 फरवरी को प्रधानमंत्री मोदी की जबान फिसल गई थी। मल्लिकार्जुन खड़गे ने सदन में कहा था कि देश की एकता के लिए महात्मा गांधी और इंदिरा गांधी ने अपना जीवन कुर्बान कर दिया। आप बताएं कि आपके घरों से कौन आया? वहां से तो एक कुत्ता भी नहीं आया। इसके जवाब में नरेंद्र मोदी ने कहा था। इतिहास किताबों में ही रहे तो समाज को प्रेरणा नहीं मिलता। उस समय हम थे या नहीं थे, हमारे कुत्ते भी थे या नहीं थे। नहीं पता। औरों के कुत्ते हो सकते हैं। हम कुत्तों वाली परंपरा में पले-बढ़े नहीं है।

फरवरी में सदन में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर निशाना साधते हुए कहा था कि  मनमोहन सिंह के समय में इतने घोटाले हुए। इतना पैसा इधर उधर हुआ। उन पर एक दाग नहीं लगा। राजनेताओं को बाथरूम में रेनकोर्ट पहनकर नहाने की कला डॉक्टर मनमोहन सिंह से सीखना चाहिए।

15 फरवरी 2015 में वो विदेश में भी कांग्रेस को निशाना बनाने से नहीं चूके। कनाडा में उन्होंने कहा कि हमारा मिशन है स्किल इंडिया जबकि इससे पहले भारत की पहचान थी स्कैम इंडिया।

पिछले साल 8 फरवरी को उन्होंने कोलकाता ट्रेजडी को भगवान का इशारा बताया था। उन्होंने कहा था कि जैसी सरकार चलाई है ये भगवान का इशारा है। आज ये ब्रिज टूटा है, कल ये सरकार पूरा बंगाल खत्म कर देगी।

पिछले साल 9 मई को केरल में जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने केरल की स्थिति की तुलना सोमालिया से कर दी थी। 

मई 2015 में विदेश यात्रा के दौरान उनके एक बयान पर जमकर हंगामा हुआ था। उन्होंने कहा था कि पहले आपको भारतीय पैदा होने पर शर्म महसूस होती थी। मगर अब आपको अपने देश का प्रतिनिधित्व करने में गर्व महसूस होता है।


पूर्वोत्तर को तोहफा 

एनडीए सरकार के तीन साल पूरे होने के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली से बाहर गुवाहटी में होंगे. 26 मई को सरकार के तीन साल पूरे हो रहे हैं. इस दिन वह पूर्वोत्तर की जनता को एक खास तोहफा देने के साथ ही दिल्ली और पूर्वोतर के बीच की दूरी को कम करनेवाला पुल राष्ट्र को समर्पित करेंगे. इससे पहले भी प्रधानमंत्री प्रत्येक साल 26 मई को दिल्ली से बाहर लोगों के बीच रहना पसंद करते रहे हैं.सरकार की पहली वर्षगांठ 26 मई, 2015 को मोदी ने उत्तर प्रदेश में दीनदयाल उपाध्याय की जन्मभूमि पर एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया था. वहीं, 26 मई, 2016 को सहारनपुर में थे. इस बार उनका पड़ाव गुवाहटी में होगा. एक अधिकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री हमेशा से किसी खास फंक्शन या त्योहार को दिल्ली से दूर आम आदमी के साथ मिल कर मनाना पसंद करते रहे हैं. इससे जनता और सरकार दोनों को एक दूसरे से कनेक्ट होने का मौका मिलता है.

अगर आपसे पूछा जाए कि देश में सबसे लंबा पुल कौन सा है? तो आप बांद्रा-वर्ली सी लिंक का नाम लेंगे। पर अपनी जानकारी दुरुस्त कर लीजिए। भारत ने अपना सबसे लंबा पुल असम में बना लिया है, जो चीनी सीमा को कवर कर सकेगा। खास बात ये है कि भारतीय सेना को अबतक पूर्वोत्तर में सैन्य समान पहुंचाने में जो दिक्कतें होती थी, वो भी अब खत्म हो चली है। इस पुल से भारतीय सेना के टैंक भी गुजरेंगे, जो जरूरत पड़ने पर किसी भी विदेशी हमले का मुंहतोड़ जवाब देंगे। इस पुल का उद्घाटन 26 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। भारत का ये सबसे लंबा पुल असम में बन चुका है। ये लोहित नदी पर बना है, जो ब्रह्मपुत्र की सहायक नदी है। इस पुल की लंबाई 9.15 किमी है, जो बांद्रा-कुर्ली सी लिंक से भी 3.55 किमी ज्यादा है। इस पुलिस को 26 मई को खोल दिया जाएगा। लोहित नदी पर ढोला-सादिया के बीच बना ये पुल बेहद मजबूत है। इसे भारतीय सेना की जरूरतों को भी ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। तभी तो, ये पुल 60 टन वजनी टैंकों का भार सहन कर भारतीय सेना को मजबूत करने में सक्षम है। भारत को इस पुल की जरूरत इसलिए भी थी, क्योंकि सीमा के पास चीन तेजी से बुनियादी क्षमताओं का विस्तार कर रहा था। जब भारत के पास असम-अरुणाचल को जोड़कर सैनिक साजोसामान सड़क के रास्ते पहुंचाने की खास व्यवस्था नहीं थी। 

असम और अरुणाचल प्रदेश हमारे देश के लिए स्टेटजिक तौर पर बेहद गंभीर राज्य हैं। साथ ही ये पुल चीन के साथ लगी सीमा के भी पास है। ऐसे में इससे मिलिटरी सामानों और गोला बारूद को समय पर पहुंचाने में मदद मिलेगी। ये पुल साल 2011 में बनना शुरू हुआ था, जिसकी लागत 950 करोड़ आई है। ये पुल खासतौर पर मिलिटरी मूवमेंट को झेलने लायक बनाया गया है।

सन्जय तिवारी
वरिष्ठ लेखक ,
संस्थापक - भारत संस्कृति न्यास 

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मोदी सरकार के तीन साल - संजय तिवारी
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