मंदसौर की आग के पीछे - दिवाकर शर्मा

मध्य प्रदेश में किसान आंदोलन के तहत हो रही हिंसा नहीं थम रही। गुरुवार को सरकार ने मंदसौर के कलेक्टर और एसपी का तबादला कर दिया। मंदसौर ...

मध्य प्रदेश में किसान आंदोलन के तहत हो रही हिंसा नहीं थम रही। गुरुवार को सरकार ने मंदसौर के कलेक्टर और एसपी का तबादला कर दिया। मंदसौर में एक दिन पहले फायरिंग में छह किसानों की मौत हुई थी। इसके बाद गुस्साए किसानों ने बुधवार को जिले के बरखेड़ा पंत में कलेक्टर को सिर पर थप्पड़ मार दिया। उनके कपड़े भी फट गए। मामला यहीं नहीं थमा। फायरिंग में मारे गए एक शख्स के अंतिम संस्कार के बाद भीड़ पुलिस की ओर दौड़ी। पुलिस के कई जवान जान बचाने के लिए भागकर पिपलिया मंडी थाने लौट गए। वहीं, देवास के सोनकच्छ में आंदोलनकारियों ने चार्टर्ड बस में आग लगा दी। महिलाओं-बच्चों ने हाथ जोड़े तब उपद्रवियों ने उन्हें उतरने दिया। पैसेंजर्स ने खेतों और मंदिरों में छिपकर जान बचाई। भोपाल-इंदौर हाईवे और देवास जिले को मिलाकर 13 बसों समेत 150 गाड़ियों में आग लगा दी गई। प्रदेश में 19 साल बाद किसान आंदोलन में ऐसी हिंसा हुई है। इससे पहले, 1998 में मुलताई में 18 लोगों की मौत हुई थी। इससे पहले मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के मुलताई में 1998 में किसानों ने इस तरह का आंदोलन किया था। 12 जनवरी 1998 को प्रदर्शन के दौरान 24 लोगों की मौत हुई थी। दरअसल, मुलताई में उस वक्त किसान संघर्ष मोर्चा के बैनर तले आंदोलन हुआ था। किसान बाढ़ से हुई फसलों की बर्बादी के लिए 5000 रुपए प्रति हेक्टेयर मुआवजे और कर्ज माफी की मांग कर रहे थे। उस वक्त राज्य में कांग्रेस सरकार थी। इस बार के आंदोलन के पीछे की ताकतों को लेकर बहुत से तथ्य सोशल मीडिया में चल रहे हैं। इनमे कांग्रेस के एक युवा नेता का वार्तालाप भी चर्चा में है जिसमे वह आंदोलन तेज करने की उकसावे वाली बात कहते दिख रहा है। यह बड़ा प्रश्न है की आखिर मंदसौर में यह हिंसक अन्दीलन हुआ तो क्यों ? 

कर्ज माफी और दूध के दाम बढ़ाने जैसे मुद्दे पर आंदोलन महाराष्ट्र में 1 जून से शुरू हुआ था। वहां अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है। मध्य प्रदेश के किसानों ने भी कर्ज माफी, मिनिमम सपोर्ट प्राइस, जमीन के बदले मिलने वाले मुआवजे और दूध के रेट को लेकर आंदोलन शुरू किया। शनिवार को इंदौर में यह आंदोलन हिंसक हो गया। अब मंदसौर और राज्य के बाकी हिस्सों में भी तनाव है। मंदसौर और पिपलियामंडी के बीच बही पार्श्वनाथ फोरलेन पर मंगलवार सुबह 11.30 बजे एक हजार से ज्यादा किसान सड़कों पर उतर आए। पहले चक्का जाम करने की कोशिश की। पुलिस ने सख्ती दिखाई तो पथराव शुरू कर दिया। पुलिस किसानों के बीच घिर गई। किसानों का आरोप है कि सीआरपीएफ और पुलिस ने बिना वॉर्निंग दिए फायरिंग शुरू कर दी। इसमें 6 लोगों की मौत हो गई। मंदसौर जिले के बरखेड़ा पंत में फायरिंग में मारे गए स्टूडेंट अभिषेक का शव रोड पर रख कर किसान चक्का जाम कर रहे थे। इनकी मांग थी कि सीएम शिवराज सिंह यहां आएं और फायरिंग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का वादा करें। एसपी ओपी त्रिपाठी और कलेक्टर स्वतंत्र कुमार सिंह इसी मामले को सुलझाने के लिए बरखेड़ा पंत पहुंचे थे। तभी एक किसान ने कलेक्टर को पीछे से सिर पर चांटा मारा। लोगों ने उनके साथ बदतमीजी की। उनके कपड़े फाड़ दिए। हालांकि, बाद में अभिषेक के परिजन अंतिम संस्कार करने के लिए राजी हो गए। कलेक्टर ने अभिषेक के परिजनों को उसका स्मारक बनाने का आश्वासन दिया।

बच्चे बिलखते रहे, उपद्रवी बस में तोड़फोड़ करते रहे

भोपाल से इंदाैर जा रही चार्टर्ड बस को उपद्रवियों ने सोनकच्छ में रोककर उसमें आग लगा दी। पैसेंजर्स ने भागकर जान बचाई। इससे पहले आंदोलनकारियों ने बस के शीशे तोड़ दिए गए। जब तोड़फोड़ की जा रही थी, तब बच्चे और महिलाएं बस के अंदर थीं। अंदर बच्चे बिलखते रहे, लेकिन उपद्रवी उसमें तोड़फोड़ करते रहे। इंदौर से भोपाल के बीच हाईवे पर करीब 30 गाड़ियां में आग लगा दी गई। कई टोल बूथ पर तोड़फाेड़ की गई। हिंसा के बाद कई ट्रेवल कंपनियों ने इंदौर-भोपाल के बीच बस सर्विस बंद कर दी। देवास के पास गाड़ियों में लगी आग बुझाने पहुंची फायर बिग्रेड की गाड़ी को भी उपद्रवियों ने आग के हवाले कर दिया। देवास के पास नेवरी फाटा पर तीन वॉल्वो बसें जलाई गईं। थर-थर कांप रही महिलाओं और बच्चों ने हाथ जोड़े, तब उपद्रवियों ने उतरने दिया आैर बसों में आग लगा दी। देवास में किसानों ने दो ट्रेनों को स्टेशन पर रोक लिया। करीब आधे घंटे तक समझाने के बाद इन्होंने ट्रेन को जाने दिया। इस प्रदर्शन का नीमच-रतलाम रेल ट्रैफिक पर असर पड़ा । कुछ ट्रेनों को इन स्टेशनों पर ही रोक दिया गया । मंदसौर, पिपलिया मंडी, नारायणगढ़ और मल्हारगढ़ में कर्फ्यू लगा रहा। वहीं, दलोदा और सुमात्रा में भी धारा 144 लगा गई। मंदसौर में सभी मोबाइल सर्विसेस सस्पेंड कर दी गईं। इंदौर में मंगलवार को शांति रही, लेकिन बुधवार को पड़ोसी जिले देवास के हाट पिपलिया में आंदोलनकारियों ने थाने के अंदर खड़ी गाड़ियों में आग लगा दी। इसी बीच दिग्विजय सिंह ने कहा था कि बुधवार को मध्य प्रदेश में बंद रहेगा। लोग इसमें मदद करें। बंद का असर सबसे ज्यादा इंदौर, धार और मंदसौर जिले में दिखा। इंदौर जिले में राऊ, सांवेर, मांगलिया, देवगुराड़िया इलाकों में बंद का ज्यादा असर दिखा। उज्जैन में भी ज्यादातर मार्केट बंद रहे। जो खुले थे, उन्हें कांग्रेस वर्कर्स ने बंद करवा दिए। 

हिंसक आन्दोलन की तथाकथा -

ध्यान रहे कि किसान आंदोलन के नाम पर जनता के जानमाल के साथ सड़कों पर हो रहे राक्षसी तांडव का केंद्र वो मंदसौर है जो मादक पदार्थों की खेती और तस्करी के लिए देश ही नहीं दुनिया मे पहचाना जाता है।

मंदसौर के बाद सर्वाधिक हिंसा जिन देवास और नीमच में हो रही है उनकी भी आर्थिक सामाजिक पृष्ठभूमि लगभग मंदसौर सी ही है।

मंदसौर में लगभग 30% आबादी अल्पसंख्यकों की है। नारकोटिक्स के धंधे में इन्हीं लोगों का सिक्का चलता है। मंदसौर में इनकी दबंगई कोई रहस्य नहीं है।

पिछले वर्ष अक्टूबर में , ‘शब-ए-बारात’ के दिन मुस्लिम गुंडों ने मंदसौर शहर में पूरी रात जमकर हिंसक उपद्रव किया था. हिन्दुओं के सैकड़ों घरों पर खुलकर पथराव किया था, उनके खिड़की दरवाज़े और घरों के बाहर खड़ी गाड़ियां तोड़ी थीं. पुलिस में शिकायत के बाद भी उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होने के विरोध में मंदसौर की जनता को ईद में लगातार दो दिनों तक मंदसौर बंद रखने का कदम उठाना पड़ा था।

आज लगभग 8 माह बाद कट्टर धर्मांध मानसिकता के गुंडों की फौज आज मध्यप्रदेश में कांग्रेस के राजनीतिक कंधों पर सवार होकर पूरे प्रदेश की सुख शांति सम्पन्नता को अपने दंगाई इरादों से रौंदने के लिए आतुर हो रही है। 
दूसरा प्रमुख कारण भाजपा की आंतरिक गुटबाजी कही जा सकती है | आज ही वरिष्ठ उम्रदराज असंतुष्ट भाजपा नेता व पूर्व मंत्री बाबूलाल गौर का बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने आन्दोलन के पीछे कांग्रेस की भूमिका को नकारा है तथा कहा है कि यह विशुद्ध किसानों का आक्रोश है | किसान अब आत्महत्या के स्थान पर मरने मारने पर आमादा हो गया है |

आन्दोलन का केंद्र मालवा है, और मालवा के प्रमुख भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय का कहीं अतापता ही नहीं है | हाल ही में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जिस प्रकार उन्होंने नर्मदा सेवा यात्रा अभियान के माध्यम से समाज को एकसूत्र में बांधने का सफल अभियान सम्पन्न किया था उससे कांग्रेस के साथ ही साथ कई लोगों के तनमन में आग लग गई थी।

स्वाभाविक ही कांग्रेस इस स्थिति पर नजर रखे हुए है | राहुल गांधी और शरद यादव ने आपस में बातचीत कर एक साथ मंदसौर पहुँचने की रणनीति बनाई है | कांग्रेस नेता कमलनाथ ने भी कहा है कि शिवराज सिंह चौहान को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए।

भाजपा की कमजोर कड़ी -

मंदसौर में गोली किसने चलायी ? एमपी के होम मिनिस्टर भूपेंद्र सिंह का एक बयान मंगलवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इसमें वे यह कहते सुनाई दिए कि पुलिस ने किसानों पर फायरिंग नहीं की। जब ऑडियो टेप के बारे में सिंह से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि सब कुछ ज्यूडिशियल इन्क्वायरी से सामने आ जाएगा। उधर, मंदसौर के कलेक्टर ने भी घटना के बाद कहा था कि हमने गोली चलाने के आदेश नहीं दिए। किन्तु उसके बाद आज यू टर्न लेते हुए गृहमंत्री ने स्वीकार किया कि गोली पुलिस ने ही चलाई, जिसमें छः लोगों की मौत हुई | कुल मिलाकर यह दिखाई डे रहा है कि भाजपा नेताओं के हाथ पाँव फूल गए हैं | उन्हें समझ नहीं आ रहा कि इस स्थिति से कैसे निबटा जाए ? 

इस बीच मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मीडिया में विज्ञापन जारी कर किसानों से अपील की। उन्होंने कहा- दो दिन में किसानों से जो चर्चा हुई, उसके मुताबिक मांगें मंजूर कर ली गई हैं। कुछ असामाजिक तत्व अपने स्वार्थ के कारण प्रदेश में अशांति फैलाना चाहते हैं। आप उनसे सावधान रहें। बहकावे में ना आएं। अभी भी कोई समस्या है तो हम आपस में मिल-बैठकर, चर्चाकर उसका समाधान निकाल लेंगे।

सीएम चौहान ने दो दिन की चर्चा के बाद किसानों पर केस खत्म करने, जमीन मामले में किसान विरोधी प्रावधानों को हटाने, फसल बीमा को ऑप्शनल बनाने, मंडी में किसानों को 50% कैश पेमेंट और 50% आरटीजीएस से देने का एलान किया था। यह भी कहा था कि सरकार किसानों से इस साल 8 रु. किलो प्याज और गर्मी में समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदेगी। खरीदी 30 जून तक चलेगी।

घाटे में सरकार

मध्य प्रदेश सरकार किसानों से आठ रुपए प्रति किलो प्याज खरीद कर उसे खुले बाजार में दो रुपए प्रति किलो बेचेगी। यह कम से कम 10 किलो के बैग में मिलेगा। प्याज की पैदावार करने वाले जिलों में सरकार की एजेंसी मार्कफेड ने खरीदी शुरू कर दी है। साफ है कि इस बार फिर सरकार को प्याज की खरीदी में बड़ा नुकसान होगा। स्टोरेज और ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट मिलाकर सरकार को प्याज 14 रुपए प्रति किलो की पड़ेगी। पिछली बार भी प्याज से सरकार को 50 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था।

दिवाकर शर्मा
संपादक
क्रांतिदूत डॉट इन
(राज्यस्तरीय अधिमान्य पत्रकार)

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