झूठे पीत पत्रकारों के खिलाफ डोभाल परिवार की सर्जीकल स्ट्राईक

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2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने के तत्काल बाद से ही कुछ मीडिया हाउस ने बार बार झूठी और दुर्भावनापूर्ण कहानियों का प्रसारण किया है...


2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने के तत्काल बाद से ही कुछ मीडिया हाउस ने बार बार झूठी और दुर्भावनापूर्ण कहानियों का प्रसारण किया है | उनके निशाने पर रहे हैं नरेंद्र मोदी, अरुण जेटली, अमित शाह से लेकर ताजा ताजा अजीत डोभाल तक। भारतीय जनता पार्टी की प्रमुख राजनीतिक हस्तियों में से किसी को भी नहीं बख्शा गया है। अगर किसी राजनेता के खिलाफ कुछ लिखने की हिम्मत नहीं होती तो इन राजनेताओं के परिवार के सदस्यों को निशाना बनाना शुरू कर दिया जाता है । सबसे पहले, हमने देखा कि कैसे अमित शाह के बेटे जय शाह को झूठे आरोपों में निशाना बनाया गया। और अब, अजीत डोभाल के दूसरे बेटे, विवेक डोभाल पीत पत्रकारों के निशाने पर हैं। 

विगत 16 जनवरी 2019 को, बामपंथियों की कुख्यात अंग्रेजी पत्रिका “कारवाँ” ने कौशल श्राफ का एक आलेख प्रकाशित किया जिसका शीर्षक था – The D-Companies, Ajit Doval’s sons run a web of companies including a Cayman Islands hedge fund even as father demands crackdown on tax havens 

अर्थात “डी कम्पनियां - अजीत डोभाल के बेटों ने केमैन आइलैंड्स पर हेज फंड सहित कई कंपनियों का जाल बिछा रखा है, जबकि उनके पिता कर चोरी पर रोक लगाने की मांग करते हैं ! 

स्वाभाविक ही लेख के निशाने पर अजीत डोभाल के बेटे नहीं, बल्कि स्वयं भारत के सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल थे और दूसरे शब्दों में कहा जाए तो प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी पर ही निशाना साधा गया था | 

आईये पहले लेख की विषय वस्तु पर बात करते हैं – 

लेख में दावा किया गया था कि यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका, सिंगापुर और केमैन द्वीप में कारवां द्वारा की गई जांच में कई ऐसे व्यापार दस्तावेज मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के छोटे बेटे, विवेक डोभाल, टैक्स हेवन के रूप में कुख्यात केमैन द्वीप में एक हेज फंड चलाते हैं। इस हेज फंड का रजिस्ट्रेशन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार द्वारा 2016 में 500 और 1,000 रुपये के पुराने नोटों के विमुद्रीकरण के महज 13 दिन बाद कराया गया था। इतना ही नहीं तो विवेक डोभाल का कारोबार उनके भाई शौर्य डोभाल द्वारा चलाए जा रहे कारोबार से भी जुड़ा हुआ है। लेख में उद्धृत किया गया है कि शौर्य डोभाल, भारतीय जनता पार्टी के नेता होने के साथ मोदी सरकार के काफी नजदीकी विचार समूह इंडिया फाउंडेशन के भी प्रमुख हैं । 

लेख में दावा किया गया है कि यूके के नागरिक चार्टर्ड वित्तीय विश्लेषक विवेक डोभाल, सिंगापुर में रहते हैं, तथा वे इस “जीएनवाई एशिया फंड “ नामक हेज फंड के निदेशक हैं । जुलाई 2018 के दस्तावेज़ के अनुसार, डॉन डब्ल्यू ईबैंक और मोहम्मद अल्ताफ मुसलीम वेटिल भी इसके निर्देशक हैं। केमैन द्वीप में पंजीकृत दो फर्मों के निदेशक के रूप में, अपतटीय संस्थाओं के संबंध में 13 मिलियन से अधिक दस्तावेजों के लीक डेटाबेस “पैराडाइज पेपर्स” में भी ईबेंक्स का नाम आया था । वह पहले केमैन आइलैंड्स सरकार के साथ कार्यरत थे, और इसके वित्त सचिव और कैबिनेट मंत्रियों को सलाह देते थे। मोहम्मद अल्ताफ “लुलु समूह इंटरनेशनल” के क्षेत्रीय निदेशक हैं, जो पश्चिम एशिया में सबसे तेजी से बढ़ती श्रृंखलाओं में से एक का संचालन करता है। GNY एशिया फंड के कानूनी पते से पता चलता है कि यह वॉकर्स कॉर्पोरेट लिमिटेड से सम्बद्ध है, जिसका पैराडाईज पेपर्स के साथ-साथ एक अन्य लीक हुए डेटाबेस “पनामा पेपर्स” में भी उल्लेख है। 

कारवां ने विवेक और उनके बड़े भाई शौर्य डोभाल द्वारा चलाई जा रही फर्मों के बीच प्रशासनिक सम्बन्ध बताते हुए आरोप लगाया कि भारत में शौर्य के कारोबार के लिए काम करने वाले कई कर्मचारी जीएनवाई एशिया और इससे जुड़ी संस्थाओं से भी जुड़े हुए हैं । इन दोनों भाइयों के व्यवसायिक सम्बन्ध सऊदी अरब में सत्तारूढ़ वंश “हाउस ऑफ सऊद” से भी बताये गए । 

कारवाँ ने व्यंग करते हुए लिखा कि 2011 में, इंटेलिजेंस ब्यूरो के पूर्व निदेशक अजीत डोभाल ने, भारतीय जनता पार्टी को एक रिपोर्ट सौंपी, जिसका शीर्षक था, "इंडियन ब्लैक मनी अब्रोड: इन सीक्रेट बैंक्स एंड टैक्स हैवन्स।" इस रिपोर्ट को डोभाल के साथ एस गुरुमूर्ति ने लिखा था, जिन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विचारक के रूप में जाना जाता है, तथा जो वर्तमान में भारतीय रिज़र्व बैंक के निदेशक के रूप में सेवारत हैं। रिपोर्ट में टैक्स हेवन पर कठोर कार्रवाई के लिए कहा गया था। 

स्पष्ट ही यह पूरा आलेख केवल और केवल झूठ का पुलिंदा है | कम्यूनिस्टों के आदिगुरू गोयबल्स की पुरानी मान्यता मशहूर है – झूठ बोलो – बार बार बोलो – जोर से बोलो – सौ बार बोला जाने पर झूठ भी सच लगने लगता है | 

लेकिन इस बार मामला उल्टा होता दिख रहा है | सांच को आंच नहीं की तर्ज पर डोभाल के सुपुत्र विवेक ने आपराधिक मानहानि का मुक़दमा “कारवाँ” पत्रिका, आलेख के लेखक “कौशल श्राफ” के साथ साथ उक्त लेख के आधार पर प्रेस कांफ्रेंस करने वाले वरिष्ठ कांग्रेस नेता “जयराम रमेश” के खिलाफ पटियाला उच्च न्यायालय में दायर कर दिया है | 

मानहानि केस में कहा गया है कि विवेक डोभाल श्री अमित शर्मा के साथ, “GNY एशिया” के संस्थापक-निदेशक हैं, जो कि केमैन द्वीप से बाहर एक हेज फंड है। आरोपी व्यक्तियों ने जानबूझकर उसे बदनाम किया है और ऐसा प्रतीत होता है कि आरोपियों का मुख्य उद्देश्य उनके पिता, अजीत डोभाल पर निशाना साधना था , जो वर्तमान में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं। 

“प्रकाशित लेखों और प्रेस कॉन्फ्रेंसों के माध्यम से आरोपी व्यक्तियों ने शिकायतकर्ता के खिलाफ निराधार आरोप लगाकर उनकी प्रतिष्ठा और सम्मान को अपूरणीय क्षति पहुंचाई है, जो उन्होंने वर्षों की कड़ी मेहनत से अर्जित की थी । आरोपी व्यक्तियों ने उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के जो गंभीर आरोप लगाए हैं, वे पूरी तरह बेबुनियाद और झूठ हैं | शिकायतकर्ता का जो व्यावसायिक उद्यम है, वह पूर्णतः वैध और नैतिक है "।

इतना ही नहीं तो विवेक डोभाल ने पिछले 18 वर्षों के अपने वेतन पर्ची और कर रिटर्न को भी अदालत में प्रस्तुत किया है। जबकि आरोप केवल विगत चार वर्षों के लगाए गए हैं । इसे कहते हैं प्रामाणिकता और पारदर्शिता । 

इस विषय पर सोशल मीडिया पर आई कुछ टिप्पणियाँ देखने योग्य हैं -

विवेक डोभाल द्वारा लगाये गए मानहानि के जन्नाटेदार झापड़ के बाद कांग्रेस की आवाज नहीं निकल रहा है - टोटल साइलेंस !

डोभाल परिवार को डी-कम्पनी का संबोधन देने वाली पत्रिका देश की सुरक्षा का मजाक बना रही है | शर्मनाक !

मानहानि का सम्पूर्ण दावा -



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क्रांतिदूत: झूठे पीत पत्रकारों के खिलाफ डोभाल परिवार की सर्जीकल स्ट्राईक
झूठे पीत पत्रकारों के खिलाफ डोभाल परिवार की सर्जीकल स्ट्राईक
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