नेपाल - भूटान - भारत और चीन – सतत जागते रहना जरूरी ?- दिवाकर शर्मा

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माओ ने कहा था कि तिब्बत पर लाल सेना ने १९४९ में कब्जा कर चीन से अंग्रेजों द्वारा काटी गई हथेली तो दुबारा जोड़ ली, बस अब पांच उंगलियाँ...



माओ ने कहा था कि तिब्बत पर लाल सेना ने १९४९ में कब्जा कर चीन से अंग्रेजों द्वारा काटी गई हथेली तो दुबारा जोड़ ली, बस अब पांच उंगलियाँ जोड़ना बाक़ी हैं | इनमें अंगूठा नेपाल, तर्जनी भूटान, मध्यमा अरुणांचल प्रदेश, अनामिका लद्दाख और कनिष्ठा सिक्किम आते हैं | यही है वह चीनी महत्वाकांक्षा जिसके कारण आज भी चीन और भारत के रिश्तों में तनाव है | आईये भारत की कुछ ऐतिहासिक गलतियों पर नजर दौडाएं - 

1987 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी अपनी ईसाई धर्मावलम्बी पत्नी सोनिया जी के साथ नेपाल गए | उस समय उन्हें काठमांडू के पशुपतिनाथ मंदिर में प्रवेश व दर्शनों की अनुमति नहीं दी गई थी, क्योंकि वहां केवल हिन्दू उपासक ही जा सकते हैं | परिणाम स्वरुप भारत ने नेपाल के साथ तेल, गैस, अनाज, परिवहन व आवागमन प्रतिबंधित कर दिया | नेपाल में जनाक्रोश का तीव्र आवेग उमड़ा और चीन ने अवसर को भुना लिया | भारत ने मदद बंद की तो चीन ने प्रारम्भ कर दी और देखते ही देखते विश्व का एकमात्र हिन्दू राष्ट्र नेपाल हिन्दू वहुल भारत से कटता चला गया | 

चीन समर्थक कम्यूनिस्ट शासन आने के बाद २०१५ में नेपाल का नया संविधान बनाकर उसे धर्मनिरपेक्ष घोषित कर दिया गया | बहुसंख्यक हिन्दू समुदाय के हजारों मदेशी लोगों ने नेपाल को धर्मनिरपेक्ष बनाए जाने का विरोध किया | स्मरणीय है कि इसके पूर्व हुए जनमतसंग्रह में नेपाली जनता ने नेपाल को हिन्दूराष्ट्र बनाने के पक्ष में मत दिया था, जैसा कि चीनी प्रभाव में आने के पूर्व नेपाल था भी । किन्तु पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई, जिसमें 40 से अधिक लोग मारे गए | इसके साथ ही पूरे नेपाल में गुस्से की आग धधक उठी | लोगों ने अपने घरों पर काले झंडे लगाए और तीन दिवसीय बंद की घोषणा की | स्थान स्थान पर नए संविधान की प्रतियां जलाई गई | 

कम्यूनिस्ट शासन तंत्र में जैसा होता है, नेपाली राष्ट्रपति राम बरन यादव ने इन सबकी तरफ कोई ध्यान ही नहीं दिया और नया संविधान लागू हो गया | बस इतना भर हुआ कि हिन्दुओं के जख्मों पर मलहम लगाने के लिए गौवध निषेध को विशेष रूप से संविधान में जोड़कर गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया गया | 

कुछ ऐसी ही मूर्खता २०१३ में भूटान के मामले में भी हुई | भूटान में चुनाव चल रहे थे और ठीक उसी समय तत्कालीन सरकार ने भूटान को तेल और गेस की सप्लाई बंद कर दी | कारण महज तकनीकी था | भारत जिस संधि के आधार पर भूटान को तेल और गैस देता था, उस संधि की अवधि जून २०१३ में समाप्त हो गई, और बस आनन फानन में आदेश दे दिया गया कि सप्लाई रोक दी जाए | बिना इस बात का विचार किये कि इससे महज सात लाख की आबादी वाले भूटान का नागरिक ताना बाना छिन्न भिन्न हो जाएगा | किसी ने नहीं सोचा कि चुनाव के कारण भूटान को महीने भर की मोहलत दे दी जाए, ताकि नई सरकार से संधि का नवीनीकरण हो सके | पडौसी चीन तो मौके की तलाश में था ही, वह कूद पड़ा आग में घी डालने और चुनाव में अपनी समर्थक सरकार बनाने | 

किन्तु वह तो भला हो भूटान की जनता का, जो वह चीनी षडयंत्र में नहीं फंसी और भारत समर्थक प्रधान मंत्री बनाकर दिखा दिया कि कोई भारत हितैषी ही भूटान की सत्ता पर काबिज होगा | अगर यह नहीं होता तो ठीक हिन्दू नेपाल जैसी परिस्थिति बौद्ध भूटान में भी बन जाती | यहाँ ध्यान देने योग्य तथ्य है कि तिब्बत, नेपाल और सिक्किम के त्रिमार्ग पर स्थित भूटान भारत के लिहाज से बहुत ही संवेदनशील और सामरिक महत्व का है | चीन भूटान नरेश को कई बार पेशकश कर चूका है कि वह चुम्बी घाटी चीन को दे दे और बदले में पूर्वी तिब्बत का उतना ही भूभाग ले ले | यह क्षेत्र भारत के सिलीगुड़ी के नजदीक का है और यहीं बंगलादेश की सीमा से लगा वह चिकन नेक है,जिसे कब्जा कर पूर्वोत्तर भारत को शेष भारत से काटने की योजना जे एन यू के गद्दार शरजील इमाम ने सार्वजनिक की थी | 

सोचिये जरा कि तत्कालीन सरकारों ने कितनी मूर्खताएं की हैं | अगर भूटान में भी नेपाल की तरह चीन समर्थक सरकार बन जाती तो चीन की इच्छा पूरी होने से कौन रोक सकता था | शरजील इमाम जैसे लोग देश में मौजूद हैं ही | 

शायद इसीलिए प्रधान मंत्री बार बार भूटान का दौरा करते हैं और मधुर सम्बन्ध बनाये रखने पर ध्यान केन्द्रित किये हैं | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद सबसे पहले भूटान गए थे और मई 2019 में फिर से प्रधानमंत्री बनने के बाद वह 17 अगस्त को दो दिवसीय यात्रा पर भूटान पहुंचे। भारत और भूटान के बीच यह निर्णय हुआ कि इसरो भूटान में एक ग्राउंड स्टेशन लगाएगा। मोदी ने भारतीय रूपे कार्ड को भी भूटान में लॉन्च किया। इससे पहले रूपे कार्ड सिंगापुर में ही लॉन्च किया गया था। इस दौरे में मोदी ने यह भी कहा कि भूटान के युवा वैज्ञानिक भारत आकर अपने लिए एक छोटा सेटेलाइट बनाने पर काम करेंगे। 

स्पष्ट ही मोदी जानते हैं कि उत्तर पूर्वी भारतीय राज्यों को चीन के कुत्सित मंसूबों से बचाने की रणनीति में भूटान सबसे अहम कड़ी है। इसीलिए भूटान, जापान, लुक ईस्ट पॉलिसी के तहत आसियान के देशों को उत्तर पूर्वी भारतीय राज्यों के विकास के काम में लगाने की रणनीति पर भारत काम कर रहा है। 

भूटान के साथ ही जिन देशों को उत्तर पूर्वी भारतीय राज्यों से जोड़ने का काम भारत ने किया है, वह भारत की धार्मिक और आध्यात्मिक डिप्लोमेसी का प्रमाण है। ये सभी देश बौद्ध धर्म को मानने वाले हैं, ये साझी सांस्कृतिक विरासत के भी उत्तराधिकारी हैं। तिब्बत के धर्मगुरु दलाई लामा को भारत ने पहले ही राजनीतिक शरण दे रखी है। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का एक वर्ष पूर्ण हो चुका है, अतः भारत की संप्रभुता और अखंडता कायम रखने को लेकर पुरानी सरकारों और मोदी सरकार के बीच तुलनात्मक अध्ययन समय समय पर किया ही जाना चाहिए | और सबसे जरूरी है सरकार के साथ समाज का भी सतत जागे रहना

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क्रांतिदूत: नेपाल - भूटान - भारत और चीन – सतत जागते रहना जरूरी ?- दिवाकर शर्मा
नेपाल - भूटान - भारत और चीन – सतत जागते रहना जरूरी ?- दिवाकर शर्मा
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