कार्टून विवाद के बाद अमरीकी समाचार पत्र ने भारतीय अमरीकियों से मांगी माफी, कार्टून बनाने वाले को दिखाया बाहर का रास्ता।

 


दिनांक 23 जून को अमरीका में व्यंग चित्रकार लियो केली का एक कार्टून लेवनपोर्ट लोवा के एक समाचार पत्र क्वाड सिटी टाइम्स में प्रकाशित हुआ था, जिसमें रिपब्लिकन पार्टी से राष्ट्रपति प्रत्यासी पद हेतु समर्थन चाह रहे भारतीय मूल के विवेक रामास्वामी को निशाना बनाया गया था। 

जैसा कि आप संलग्न चित्र में देख रहे हैं विवेक रामास्वामी लोगों को वही सम्बोधन दे रहे हैं, जो पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प दिया करते थे - हेलो माय मेगा फ्रेंड्स। जिसका आशय यही हुआ करता था, अमरीका को पुनः महान बनाएं। 

लेकिन इस म्बोधन के जबाब में सामने खड़े कुछ लोग उंगली उठाकर उन्हें ब्लेम करते दिखाए गए हैं। कोई उन्हें मुस्लिम कह रहा है, तो कोई उनसे बर्थ सर्टीफिकेट मांग रहा है, तो कोई उन्हें कीचड़ से लथपथ अप्पू बता रहा है। ध्यान योग्य है कि यह अप्पू अमेरीका के प्रसिद्ध टीवी शो "द प्रॉब्लम विथ अप्पू" का एक पात्र था, जिसका उपयोग प्रवासी भारतीयों पर टोंट के रूप में किया जाने लगा था। 

क्या है अप्पू की कहानी -

अपु नहासापीमापेटिलोन अमेरिकी एनिमेटेड टेलीविजन श्रृंखला द सिम्पसंस का एक चरित्र है। वह एक भारतीय अप्रवासी है, जो स्प्रिंगफील्ड में एक लोकप्रिय सुविधा स्टोर, क्विक-ई-मार्ट चलाता हैं, और अपने वाक्यांश "धन्यवाद, फिर से आओ" के लिए जाना जाता हैं। भारतीय मूल के कॉमेडियन हरि कोंडाबोलु द्वारा लिखित और अभिनीत 2017 की यह डॉक्यूमेंट्री, द प्रॉब्लम विद अपू का कथानक सत्यजीत रे द्वारा लिखित द अपू ट्रिलॉजी पर आधारित था। जबकि इस किरदार को स्वर हांक अजारिया द्वारा द्वारा दिया गया था। 

एपिसोड "होमर एंड अपू" में, अपू कहता है कि वह मूलतः रहमतपुर, पश्चिम बंगाल से है। वर्तमान में अमेरिकी नागरिक होने के साथ साथ उसने स्प्रिंगफील्ड हाइट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एस.एच.आई.टी.) से पीएच.डी. और कंप्यूटर विज्ञान में कलकत्ता टेक्निकल इंस्टीट्यूट से अपनी कक्षा में प्रथम रहते हुए स्नातक की उपाधि भी प्राप्त की है।

अपू ने अपने छात्र ऋण का भुगतान करने के लिए ग्रेजुएट स्कूल के दौरान क्विक-ई-मार्ट में काम करना शुरू किया; वह बाद में वहीं रुक गया क्योंकि उसे अपनी नौकरी और अपने बनाए दोस्तों के साथ आनंद आने लगा। वह लम्बे समय तक एक अवैध आप्रवासी बना रहा, किन्तु बाद में मेयर क्विम्बी ने सभी गैर-दस्तावेजी आधारों को दरकिनार करने का नगरपालिका में कानूनन प्रस्ताव पास कर दिया। अपू ने स्प्रिंगफील्ड माफिया से एक जाली जन्म प्रमाण पत्र खरीदा, जिसमें उसके माता-पिता को ग्रीन बे, विस्कॉन्सिन के अमेरिकी नागरिक हर्ब और जूडी नाहसापीमापेटिलोन के रूप में सूचीबद्ध किया गया था। हालाँकि, जब उसे एहसास हुआ कि वह अपने मूल को त्याग रहा है, तो उने इस योजना को छोड़ दिया और इसके बजाय लिसा और होमर सिम्पसन की मदद से अपनी नागरिकता परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण करने में सफल रहा। इस प्रकार, वह खुद को "अर्ध-कानूनी विदेशी" के रूप में संदर्भित करता है। 

1985 में, अपू होमर सिम्पसन, बार्नी गम्बल और प्रिंसिपल सेमुर स्किनर के साथ नाई की दुकान चौकड़ी द बी शार्प्स का सदस्य था। बैंड मैनेजर, निगेल की सलाह पर, अपू ने मंच का नाम "अपू डी ब्यूमरैचिस" रखा (द बार्बर ऑफ सेविले के लेखक पियरे ब्यूमरैचिस का संदर्भ)। अपू एक शाकाहारी है, जैसा कि सीज़न 7 के एपिसोड "लिसा द वेजिटेरियन" में बताया गया है।[

एपिसोड "द टू मिसेज नहासापीमापेटिलॉन्स" में, अपू को एक स्नातक नीलामी में अनायास शामिल होने के बाद स्प्रिंगफील्ड के एक प्रमुख किरदार के साथ संक्षिप्त अवधि का आनंद मिलता है। किन्तु तभी उसकी मां मंजुला नाम की एक महिला से उसकी शादी तय कर देती है, जिसे उसने बचपन से नहीं देखा था। अपू पहले नानुकुर करता है, मार्ज सिम्पसन उसकी पत्नी होने का नाटक करता है, किन्तु जब अपू की मां एक शादी में उसे मंजुला से मिलाती है, तो वह दोनों शादी करने का फैसला करते हैं। हालांकि उस समय मंजुला ने लापरवाही से कहा था कि उन्हें हमेशा तलाक मिल सकता है। किन्तु बाद में, दोनों को वास्तव में प्यार हो जाता है।

एपिसोड "एट मिसबिहेविन" में, मंजुला को प्रजनन दवाओं की बहुत अधिक खुराक मिलती है, जिसके कारण उसने आठ ऑक्टोपलेट्स को जन्म दिया: अनूप, उमा, नबेंदु, पूनम, प्रिया, संदीप, शशि और घीट। इससे परिवार के लिए कठिनाइयाँ पैदा होती हैं लेकिन अंततः वे अपने जीवन को जारी रखने का निर्णय लेते हैं। एपिसोड "बार्ट-मैंगल्ड बैनर" के दौरान, स्प्रिंगफील्ड अमेरिका विरोधी नाम मानकर शहर का नाम बदलकर लिबर्टीविले कर दिया जाता है, तो अपू ने भी अस्थायी रूप से अपने बच्चों के नाम बदलकर लिंकन, फ्रीडम, कोंडोलीज़ा, कोक, पेप्सी, मेनिफेस्ट डेस्टिनी, एप्पल, पाई और सुपरमैन  रख लिया।

अपू की कामकाजी प्रकृति और लंबे समय तक काम करने तथा आठ बच्चों की देखभाल के तनाव के कारण समझ में आने वाली वैवाहिक समस्याओं के बावजूद, अपू और मंजुला का विवाह अधिकतर खुशहाल है। तनाव तब पैदा हुआ जब अपू ने मंजुला से बेवफाई की, जिसके कारण उसे कुछ समय के लिए बाहर जाना पड़ा और यहां तक कि उसे आत्महत्या के बारे में भी सोचने पर मजबूर होना पड़ा। 

कुल मिलाकर अपू एक काफी हद तक हास्यास्पद पात्र है। इसीलिए इसका उपयोग प्रवासी भारतीयों के लिए अपमानजनक लहजे में किया जाता है। 

स्मरणीय है कि रिपब्लिकन पार्टी की ओर से भारतीय मूल के विवेक रामास्वामी और नम्रता निक्की हैली तथा एक अफ्रीकन अमरीकन सेनेटर टिम स्कॉट राष्ट्रपति पद की दौड़ में हैं। वहीं डेमोक्रेट आलोचना कर रहे हैं कि अश्वेत केवल अपने दल के ही बफादार होते हैं। 

कार्टून प्रकाशन के बाद क्या हुआ ?

कार्टून पर प्रतिक्रिया देते हुए एक पुराने टीवी होस्ट एमिली कंपैग्नो ने कहा कि - यह धुर वामपंथ से टपकता हुआ तिरस्कार है - डेमोक्रेट पार्टी की कुलीन उदारता को हम कभी नहीं छोड़ सकते। 

कार्टून प्रकाशित होने के बाद रामास्वामी ने भी ट्वीट किया - यह देखना आहत करता है कि मुख्य धारा का मिडिया रिपब्लिकन को किस प्रकार देखता है। मैं पूरे अमरीका में ग्रास रुट लेबिल के कई पुराने लोगों से मिला हूँ, किन्तु  मैंने कहीं भी इतनी पक्षपात पूर्ण कट्टरता नहीं देखी, जैसी कि मैं प्रतिदिन बामपंथियों में देखता हूँ। 

(तो केजरीवाल जैसे बामपंथी अशालीन आलोचक अमरीका में भी हैं)

इन प्रतिक्रियाओं के बाद ख़ास बात यह कि कार्टून बनाने वाले कार्टूनिस्ट लिओ केली को समाचार पत्र से निकाल दिया गया। 

किन्तु बड़ा दिल दिखाते हुए रामास्वामी  स्वयं उसके बचाव सामने आये और समाचार पत्र को लिखा - हम सभी इंसान हैं, हमें इस विषय को यहीं छोड़ देना चाहिए। कार्टूनिस्ट को निकालने का कोई अर्थ नहीं है। 

समाचार पत्र समूह द्वारा माफी माँगने के निहितार्थ -

आपने प्रतिक्रियाओं और बाद के घटनाचक्र में देखा कि किस प्रकार अमरीका की दोनों प्रमुख पार्टियों - डेमोक्रेट और रिपब्लिकन ने उक्त कार्टून की आलोचना की और स्वयं समाचार पत्र समूह ने माफी मांगी। यह प्रदर्शित करता है कि अमरीका में बसे भारतीय वहां कितने प्रभावी है। यह उनकी क्षमता, योग्यता व सामर्थ्य का प्रमाण है। इसके लिए न राहुल गांधी को श्रेय दिया जा सकता, ना ही मोदी जी को। यह भारतीयों द्वारा खुद कमाई गई इज्जत है। हाँ यह अवश्य महत्वपूर्ण है कि वे सुयोग्य लोग भारतीय नायक के रूप में किसे अधिक पसंद करते हैं। 

और वह तो सभी जानते हैं। 

जो न समझे वो अनाड़ी है। 

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