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फ़ैज़-ए-इलाही के पास अतिक्रमण हटाने पर हमला: कानून-व्यवस्था को चुनौती

 

दिल्ली के तुर्कमान गेट क्षेत्र में फ़ैज़-ए-इलाही मस्जिद के पास अतिक्रमण हटाने के दौरान जो कुछ हुआ, वह केवल एक स्थानीय घटना नहीं, बल्कि देश की कानून-व्यवस्था और संवैधानिक संस्थाओं को खुली चुनौती है। नगर निगम द्वारा न्यायालय एवं प्रशासनिक आदेशों के तहत अतिक्रमण हटाने की वैध कार्रवाई की जा रही थी, तभी रात करीब 12:30 बजे कुछ असामाजिक तत्वों ने पुलिस बल पर पथराव कर दिया।

यह स्पष्ट है कि यह हमला किसी भावनात्मक प्रतिक्रिया का नहीं, बल्कि पूर्वनियोजित अव्यवस्था फैलाने का प्रयास था। देश की राजधानी में, वह भी आधी रात को, पुलिस पर हमला इस बात का संकेत है कि कुछ लोग कानून को हाथ में लेकर शासन व्यवस्था को डराना चाहते हैं। दुर्भाग्यपूर्ण यह रहा कि इस हमले में पांच पुलिसकर्मी घायल हुए—वे पुलिसकर्मी जो देश की जनता की सुरक्षा के लिए हर परिस्थिति में खड़े रहते हैं।

पुलिस ने अत्यंत संयम का परिचय देते हुए न्यूनतम बल का प्रयोग किया और स्थिति को नियंत्रण में लिया। पांच उपद्रवियों की गिरफ्तारी यह संदेश देती है कि भारत में कानून से ऊपर कोई नहीं है—न धर्म के नाम पर, न भीड़ के नाम पर और न ही अराजकता के नाम पर।

यह घटना हमें याद दिलाती है कि अतिक्रमण चाहे किसी भी स्थान पर हो, वह अवैध ही होता है। भारत का संविधान सभी को पूजा की स्वतंत्रता देता है, लेकिन किसी को भी सार्वजनिक भूमि पर कब्जा करने या कानून तोड़ने की छूट नहीं देता। प्रशासन की कार्रवाई किसी समुदाय के विरुद्ध नहीं, बल्कि अवैध कब्जे के विरुद्ध होती है—और इसे उसी रूप में देखा जाना चाहिए।

अब जांच सीसीटीवी और बॉडी कैमरा फुटेज के आधार पर स्पेशल स्टाफ द्वारा की जा रही है, जो यह सुनिश्चित करेगा कि दोषियों को सख्त सजा मिले। राष्ट्रवादी दृष्टिकोण से यह आवश्यक है कि हम पुलिस और प्रशासन के साथ मजबूती से खड़े हों, क्योंकि कमजोर कानून-व्यवस्था का सीधा लाभ राष्ट्रविरोधी ताकतों को मिलता है।

भारत कानून से चलता है, भीड़ से नहीं। जो भी इस मूल सिद्धांत को चुनौती देगा, उसे कानून के कठोर हाथों का सामना करना ही होगा।

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