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UGC एक्ट के विरोध में अखिल भारतीय सवर्ण समाज का ज्ञापन, आंदोलन की चेतावनी

 

शिवपुरी। अखिल भारतीय सवर्ण समाज जिला शिवपुरी के तत्वावधान में केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में पारित किए गए UGC एक्ट के विरोध में एकजुट होकर जिला कलेक्टर शिवपुरी को राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। संगठन ने इस अधिनियम को सवर्ण समाज के विद्यार्थियों एवं प्रोफेसरों के भविष्य के लिए घातक बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की माँग की।

संगठन का कहना है कि 13 जनवरी 2026 को पारित यह UGC एक्ट सामाजिक समरसता को बाधित करने वाला है। इसके प्रावधानों के तहत किसी भी अन्य वर्ग का छात्र सवर्ण समाज के विद्यार्थियों या महाविद्यालयों में पढ़ाने वाले प्रोफेसरों के विरुद्ध झूठी शिकायत कर सकता है, जिससे उनका शैक्षणिक और व्यावसायिक भविष्य प्रभावित हो सकता है।

सवर्ण समाज के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि यह अधिनियम संविधान की धारा 14 एवं 15 का खुला उल्लंघन करता है और इससे कॉलेज परिसरों में वर्ग संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। संगठन का यह भी कहना है कि अधिकांश शासकीय महाविद्यालयों में सवर्ण विद्यार्थियों की संख्या लगभग 20 प्रतिशत ही है, ऐसे में उत्पीड़न की आशंका एकतरफा बनाई गई है।

ज्ञापन में यह आपत्ति भी दर्ज कराई गई कि इस UGC एक्ट के अंतर्गत गठित होने वाली शिकायत निवारण समितियों में सवर्ण समाज के प्रतिनिधियों को शामिल नहीं किया जाएगा, जिससे निष्पक्ष सुनवाई की संभावना समाप्त हो जाती है। संगठन के अनुसार यह अधिनियम जानबूझकर सवर्ण समाज के छात्रों एवं शिक्षकों को प्रताड़ित करने की मंशा से बनाया गया प्रतीत होता है।

आज शिवपुरी में तेज बारिश के बावजूद आयोजित इस ज्ञापन कार्यक्रम में ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, कायस्थ समाज के लोग, करणी सेना, कर्मचारी संगठन, बार एसोसिएशन के सदस्य, पत्रकार साथी एवं विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में शामिल हुए। सभी ने एक स्वर में UGC एक्ट को “काला कानून” बताते हुए इसके विरोध में आवाज बुलंद की।

अखिल भारतीय सवर्ण समाज ने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार ने यह UGC एक्ट शीघ्र वापस नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में और अधिक उग्र एवं व्यापक आंदोलन किया जाएगा, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी सरकार की होगी।

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