धारा 370 का इतिहास - श्रीमती क्षमा कौल

इस समय भी जो कलह, अंतर्विरोध एवं चिंताएं भारत में चल रही हैं, वे मैकाले द्वारा ब्रिटिष संसद को दी गई रिपोर्ट में समाहित निष्कर्षों के आध...



इस समय भी जो कलह, अंतर्विरोध एवं चिंताएं भारत में चल रही हैं, वे मैकाले द्वारा ब्रिटिष संसद को दी गई रिपोर्ट में समाहित निष्कर्षों के आधार पर बनाई गई रणनीति पर ही आधारित हैं | चूंकि भारतीयता स्वयं में वह सामाजिक चेतना है, जोकि आध्यात्मिक सूत्र में गहरे बंधी है | इसको तार तार करने के उद्देश्य से जो असहज राज्य व्यवस्था के स्तम्भ स्थापित किये गए, उनके कारण वर्तमान परिणाम सामने आये | नेहरू की जीवन शैली के बारे में सबको पता है | उन्होंने तो अनौपचारिक रूप से स्वयं को Last rular of india ही घोषित किया हुआ था | यही कारण था कि वह भारतीय आध्यात्मिक सूत्र से भय खाता था | अतः उसने औपनिवेशिक तर्ज पर संविधान गढ़ा, व तदाधारित विदेशी तर्ज के क़ानून बनाए | इस संविधान की गलतियों की बानगी देखिये –

comman civil code के स्थान पर मुसलामानों के सामाजिक जीवन को उनके धर्मानुसार जीने की छूट और हिन्दुओं के जीवन पर अंग्रेजी सरकार द्वारा बनाए गए नियमों का नियंत्रण | यह विषमता कैसे स्वीकारी गई ? कहने को लोकतंत्र, किन्तु वस्तुतः यह लोकतंत्र यातो वोट बेंक के लिए है, अथवा कुछ विशिष्ट वर्गों व समुदायों के लिए |

संविधान की पहली घोषणा है india that is Bharat | क्या इसकी अर्थध्वनियाँ षडयंत्रकारी नहीं ? क्या आज इंडिया भारत है ? यह लिखते समय क्या इन्हें समझ में नहीं आया कि यह india that was Bharat है ? भारत को विगत की स्मृति मात्र के रूप में ध्वनित किया गया है | इस संविधान ने हिन्दू के हिस्से में दिया है स्वयं के धर्म पर लज्जित होना और अकूत सहिष्णुता की खूंटी से बंधे रहना | यही सत्ता और संविधान की आज्ञा है | संक्षेप में भारतीय संविधान भारत भूमि की परिस्थितियों, पर्यावरण, संस्कृति, सभ्यता, जीवन शैली, चिंतन पद्धति, विश्वास व आस्थाओं के अत्यंत प्रतिकूल है और जो भारत से खार खाता है, भारत द्वेषी है, भारत विरोधी है, उसको बहुत लाभ पहुंचाता है | उसे ऊंचा उठाता है |

3 जनवरी 1977 को संविधान सेक्यूलर बन गया | मेरे हिसाब से यह एक काला दिवस था | उसी दिन से इस देश को आतंकियों का स्वर्ग बना दिया गया और आतंकवाद इसका भविष्य बन गया | इस प्रकार से संविधान का गणतंत्र हो या सेक्यूलरिज्म या समाजवाद, हर यंत्र से इस देश का एक वोट में नगदीकरण कर दिया गया | जो इस नगदी में बदल न पाया वह गया | और वह थे हम कश्मीरी और हम जैसे बहुत बहुत भारतीय भी | संविधान की धारा तीन में लिखा गया है कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, पर इसी धारा ने 370 धारा बनना भी संभव किया | अगर धारा 3 है तो क्या 370 उसी का उल्लंघन नहीं, खंडन नहीं ? 

हर भारतीय को उस नाटक की जानकारी होना चाहिए, जो धारा 370 बनने के लिए हुआ | विशेषकर भारतीयता में विश्वास रखने वालों को, जो इस धारा के नृशंस शिकार हैं | इस धारा को संविधान में सम्मिलित कर जम्मू कश्मीर के लिए एक अलग संविधान की व्यवस्था की गई | यह ऐतिहासिक नाटक जो भी जानेगा, वह यह भी जानेगा कि आज पच्चीस वर्षों से इस भयानक दुर्दशा से गुजर रहे, जिनोसईड, बेघरवार, उपेक्षित, अपमानित, बेरोजगार व जाति संकुचन के जिम्मेदार वे नेता हैं, जिनकी पारिवारिक उपस्थिति राजनीति में विष घोलने की रही | विडम्बना की बात है कि इन नेताओं को महान स्वप्न दृष्टा या महात्माओं की संज्ञा दी जाती है |

नेहरू को इस देश पर राज्य करने की बेसब्री थी, इसलिए उसने आनन् फानन में 370 को बना दिया | डॉ. अम्बेडकर ने इसका घोर विरोध करते हुए जो शब्द कहे थे, उनको मैं शब्दशः उद्धृत करना चाहती हूँ –

You wish India should protect you and borders, she should build roads in your area, she should supply you food, grains, and Kashmir should get equal status as India. But government of India should have only limited powers and Indian people should have no rights in Kashmir. To give consent to this proposal, would be a treacherous thing against the interest of India and I, as the Law Minister of India, will never do it. 

आप चाहते हैं कि भारत आपकी सीमाओं की रक्षा करे, आपके क्षेत्र में सड़कें बनाए, आपको अनाज की आपूर्ति करे तथा कश्मीर भारत के समकक्ष बने | किन्तु भारत सरकार के अधिकार सीमित रहें तथा भारतीय लोगों का कोई अधिकार कश्मीर पर न हो | इस प्रकार के प्रस्ताव को स्वीकार करना, भारत के हितों के विरुद्ध छल और गद्दारी होगी | भारत के क़ानून मंत्री होने के नाते मैं इस प्रस्ताव को कदापि स्वीकार नहीं कर सकता | - धारा 370 पर डॉ. अम्बेडकर का शेख अब्दुल्ला को जबाब 

इसके उपरांत यह पाप किसने किया ? वह कौन था हमें पता है, लेकिन दुःख की बात यह है कि वे गद्दार नहीं नेता कहलाते हैं | इससे बड़ी शर्म और विडम्बना क्या हो सकती है ? नेहरू और गांधी ने यह धारा संभव कर दी | नेहरू मन, बुद्धि, चिंतन और अपनी आतंरिक संरचना से ही मुस्लिम परस्त था | धारा 370 एक षडयंत्र था, जो लम्बे समय के लिए नेहरू ने भारत के विरुद्ध कर दिखाया | तर्क यह दिया कि यह धारा कश्मीर की विशिष्ट पहचान बचाने के लिए निर्मित हुई है | यह भयानक असत्य था, और है भी | यह भी भ्रम फैलाया गया कि इसी धारा के कारण कश्मीर भारत के साथ मिला या संलग्न है | 

सत्य तो यह हैकि यह धारा कश्मीर में मुस्लिम चरित्र के हावी रहने तथा इसके विस्तार के लिए बनाई गई | इसके माध्यम से कश्मीर में भारतीयता, सनातन – धर्म – संस्कृति, ज्ञान – मनीषा – मूल्य नष्ट कर दिए गए | इसका Long term लक्ष्य भारत को, भारतीयता को नष्ट करना है | यह इस कार्यक्रम का समतल रेशमी मार्ग है, जिस पर शत्रु मजे मजे से चल रहा है | 

वस्तुतः कश्मीर की विशिष्टता अपने मूल स्वभाव में भारतीय है | देखा जाए तो भारत के सभी प्रान्तों की अपनी अपनी विशिष्टता है, जो कि बचाई जानी चाहिए | मगर मूल भारतीय होने के कारण उनके लिए किसी 370 जैसी धारा की जैसी व्यवस्था नहीं है | अतः 370 एक षडयंत्र ही है |
370 का यह टाईम बम 19 जनवरी 1990 को ऐसा फटा कि भारतीय कौम के चिथड़े उड़ गए | इस धारा का जो मूल प्रयोजन था वह सामने भी आया और पूर्ण भी हुआ | उसे कोई रोक नहीं पाया | हिन्दुओं का कत्ले आम, बलात्कार, लूटपाट तो हुई ही साथ साथ भयानक भयानक आतताई एवं खूंखार जिहादी पद्धतियों से हिन्दुओं को मौत के घाट उतारा गया |

अतः जिस प्रकार भारतीय संविधान एकता की बात करके व्यवहार में एकता नहीं बना पा रहा, उसी प्रकार कश्मीर के संविधान ने सांस्कृतिक विशिष्टता बचाने के बहाने कश्मीर के हिन्दुओं को बाहर खदेड़ दिया | उनकी जाति का ही सफाया कर दिया | इस सम्बन्ध में भारतीय संविधान भी उनकी रक्षा नहीं कर पाता, क्योंकि वहां आयातित सेक्यूलरिज्म और समाजवाद है | सेक्यूलर छत्र देशद्रोह का पोषण भी करता है तथा अनुरक्षण भी |

अब विरोधाभास देखिये, भारतीय संविधान में सेक्यूलर है, किन्तु जम्मू कश्मीर के संविधान में यह शब्द लाख कोशिशों के बाद भी प्रविष्ट नहीं होने दिया गया | हिन्दू बहुल जम्मू से चुनकर पहुंचे विधायकों ने इसकी पुरजोर कोशिश भी की, किन्तु कश्मीर के जिहादी विधायकों ने विधानसभा में मारकाट मचाकर सबको त्रस्त कर दिया | इस प्रकार सेक्यूलरिज्म तथा लोकतंत्र भारत विरोध तथा भारत द्वेष के कारुक्रमों को संचालित करने की सुविधा बनकर रह गया है | इसी के चलते कश्मीर का मुसलमान अलगाव की आकांक्षा पालता है तथा आतंकी गतिविधियों से भारत राष्ट्र को प्रतिपल प्रति क्षण ब्लैकमेल करता रहता है | 370 तथा भारतीय संविधान का सेक्यूलरिज्म भारतीय संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता के लिए खतरा तथा सांस्कृतिक संहार (Cultural genocide) के आज्ञा पत्रों के अतिरिक्त कुछ नहीं है |

मित्रो मैं यह बातें अनुभव से बोलती हूँ | मैंने अपनी आँखों से यह सब देखा और भोगा है | हम कश्मीरी हिन्दू उन मेंढकों के सामान हैं, जिन पर प्रयोगशाला में हर प्रकार के परीक्षण किये जाते हैं तथा निष्कर्ष निकाले जाते हैं | मेरी भाषा को कोई कटु नहीं कह सकता, क्योंकि मैं सत्य बोल रही हूँ | झेला हुआ सच | मेरी बातें प्रयोगशाला के निष्कर्ष हैं | ये सब सेक्यूलरिज्म, धारा 370, सोशलिज्म व अन्य अनेक पाखंडों के परिणाम हैं, जिसके चलते पांच लाख कश्मीरी हिन्दू अपने ही देश में निर्वासित जीवन जीने को अभिशप्त हुए |

थोड़ा देखें यह अलगावबाद क्या है | यह आतंक का राजनीतिक दर्शन है | जब आतंकवादी कोई भयानक घटना संपन्न करता है, अलागावबादी उसे राजनैतिक आकांक्षा बताकर बयान देता है तथा आतंकवाद को राजनीतिक बताकर शुद्धीकरण होता है | 

धारा 370 आतंकवाद, अलगाव व देशविरोधी तत्वों के लिए Free jump है | संविधान और तद्जन्य कानून इस हद तक लचीला है कि यह देश के मूलभूत सांस्कृतिक, धार्मिक आधार व अखंडता को ही खतरे में डाले हुए है | अलगाव के आलेख लिखकर उन्हें ससम्मान पटल पर रखने की लोकतांत्रिक सिद्धियाँ हैं इसमें |

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