जानिये क्या है टेरीटोरियल आर्मी जिसके द्वारा आपात स्थिति में सामान्य देशवासी भी बन सकते है सेना का हिस्सा ?

टेरीटोरियल आर्मी, प्रादेशिक सेना

देश की रक्षा करना, सीमाओं पर जाकर दुश्मनों के दांत खट्टे करने की हिलोरें भला किस भारतवासी के हृदय में नहीं उठती होंगी ! यूं तो भारतीय सेना में भर्ती होना कई युवा-साथियों का सपना होता है, लेकिन कई बार तमाम कारणों के चलते कुछ लोगों का यह सपना मन ही में दबा रह जाता है. चूंकि नियमित सेना में भर्ती होने की एक खास उम्र भी होती है, जो देखते-देखते निकल जाती है और सैनिक बनने का सपना कई लोगों के दिल में दबा ही रह जाता है ! हालाँकि, हमारे देश की सेना सफल एवं सक्रिय लोगों को (Territorial Army, Hindi Article, New) अपनी 'टेरिटोरियल-विंग' के जरिये ऐसा मौका एक बार फिर मुहैया कराती है ! टेरिटोरियल आर्मी या प्रादेशिक सेना (Territorial Army /TA) भारतीय सेना की ही एक ईकाई है, किन्तु इससे प्रशिक्षित व्यक्ति नियमित सेवा देने की बजाय एक स्वयंसेवक की तरह आपात स्थिति के लिए तैयार रहता है, वह भी बिना किसी मानदेय या वेतनमान के ! इसके स्वयंसेवकों को प्रतिवर्ष लगभग एक महीने का व्यवस्थित सैनिक-प्रशिक्षण दिया जाता है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर देश की रक्षा के लिये उनकी सेवायें ली जा सकें !

टेरिटोरियल आर्मी यानी प्रादेशिक सेना देश के तमाम युवकों को राष्ट्र सेवा का पूरा अवसर प्रदान करती है ! आप देश के आम नागरिक रह कर भी सैनिक की भूमिका निभा सकते हैं ! होनहार युवक इसमें शामिल होकर सैन्य माहौल का अनुभव पा सकते हैं ! अगर आप चुनौती पसंद हैं तो टेरिटोरियल आर्मी आपको एक सैन्य अफसर बनने का अवसर प्रदान करती है ! परंतु यह मौका केवल भारतीय पुरुषों और पूर्व सर्विस अफसरों तक सीमित है ! वे पूरी तरह मेडिकल फिट होने चाहिए !

क्या है प्रादेशिक सेना 

भारतीय संविधान सभा द्वारा सितंबर, १९४८ ई. में पारित प्रादेशिक सेना अधिनियम, १९४८, के अनुसार भारत में अक्टूबर, १९४९ ई. में प्रादेशिक सेना स्थापित हुई ! इसका उद्देश्य संकटकाल में आंतरिक सुरक्षा क दायित्व लेना और आवश्यकता पड़ने पर नियमित सेना को यूनिट (दल) प्रदान करना तथा इस प्रकार नवयुवकों को देशसेवा का अवसर प्रदान करना है !सामान्य श्रमिक से लेकर सुयोग्य प्राविधिज्ञ तक भारत के सभी नागरिक, जो शरीर से समर्थ हों, इसमें भर्ती हो सकते हैं ! आयुसीमाएँ १८ और ३५ वर्ष हैं, जो सेवानिवृत्त सेनिकों और प्राविधिज्ञ सिविलियनों के लिए शिथिल की जा सकती हैं !

प्रादेशिक सेना यानी टेरिटोरियल आर्मी एक स्वैच्छिक अंशकालिक नागरिक सेवा है ! नियमित भारतीय सेना के बाद यह हमारी रक्षापंक्ति की दूसरी सेना है ! यह भारत के आम नागरिकों के लिए सेना को शौकिया अपनाने का जरिया है ! यह प्रोफेशन, करियर या स्थायी नौकरी का स्नोत नहीं है ! प्रादेशिक सेना के लिए यह अवधारणा काम करती है कि युद्ध के समय तैनाती के लिए इसका उपयोग हो सकेगा ! नियमित सेना के संसाधनों के पूरक के रूप में समाज के हर क्षेत्र से इच्छुक, अनुशासित व समर्पित नागरिकों को लेकर, कम लागत वाली इस सेना की तैयारी होती है ! प्रादेशिक सेना में शामिल होने वाले नागरिकों को थोड़े समय के लिए कड़ा प्रशिक्षण दिया जाता है, ताकि वह सक्षम सैनिक बन सकें !

‘इंडियन आर्मी’ के हिस्से के रूप में प्रादेशिक सेना का उपयोग नियमित सेना को आराम देने, नागरिक-प्रशासन को सहयोग देने में होता है ! 1962, 1965 व 1971 के युद्धों में इसकी सक्रिय भूमिका रही है ! भूकंपों/साइक्लोन व विभिन्न ऑप्रेशन में भी इसका उपयोग हुआ है ! ब्रिगेडियर केपी सिंह देव (पूर्व कैबिनेट मंत्री), कैप्टन राव वीरेन्द्र सिंह (हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री) के अलावा प्रसिद्ध ऑलराउंडर क्रिकेटर कपिल देव एवं दक्षिण भारत के लोकप्रिय कलाकार मोहनलाल, सचिन पायलट, महेंद्र सिंह धोनी, अनुराग ठाकुर प्रादेशिक सेना की शान रहे हैं !

कार्य

प्रादेशिक सेना के कार्य निम्नलिखित हैं :

(१) नियमित सेना को स्थैतिक (static) कर्तव्यों से मुक्त करना और आवश्यकता पड़ने पर सिविल प्रशासन की सहायता करना।

(२) समुद्रतट की रक्षा और हवामार यूनिटों की व्यवस्था करना।

(३) आवश्यकता होने पर नियमित सेना के लिए यूनिटों की व्यवस्था करना।

प्रादेशिक सेना के कार्मिकों को प्रशिक्षण की अवधि में और आह्वान करने पर, नियमित सेना के तदनुरूपी पद का वेतन और भत्ता दिया जाता है ! असैनिक नियोक्ता को अनिवार्य रूप से प्रादेशिक सेना से, या उसके प्रशिक्षण से, निवृत्त सदस्य को सिविलियन पद पर पुन: नियुक्त करना आवश्यक होता है ! प्रादेशिक सेना के कार्मिकों को कठिन परिश्रम और सराहनीय कार्यों में प्रोत्साहित करने के लिए भविष्य में राष्ट्रीय रक्षा सेना के सैनिक विभाग की यथार्थ रिक्तियों के प्रतिशत पद उनके लिए आरक्षित किए जाएँगे ! राष्ट्रीय रक्षा सेना में सफलतापूर्वक प्रशिक्षण क्रम पूरा करने के बाद उन्हें सेना में नियमित कार्यभार दिया जा सकता है !

प्रादेशिक सेना में भर्ती पाए हुए व्यक्ति या अफसर के लिए भारत की सीमाओं के बाहर सैनिक सेवा करना, यदि केंद्रीय सरकार का व्यापक या विशिष्ट आदेश न हो, तो आवश्यक नहीं है !

योग्यताएं व सेवा नियम

टेरिटोरियल आर्मी में अफसर पद के लिए भारतीय नागरिक पुरुष तथा पूर्व सैन्य अफसर (आर्मी, एयर फोर्स व नेवी) होना जरूरी है ! उनकी आयु 15 सितंबर, 2010 को 18 से 42 वर्ष के बीच होनी चाहिए। उन्हें मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय ग्रेजुएट होना चाहिए !

अफसर के रूप में चुने जाने पर ‘लेफ्टिनेंट’ का दर्जा मिलता है ! प्रशिक्षण एवं सैन्य सेवा के दौरान उन्हें पद के अनुसार, नियमित सैन्य अफसर के तुल्य वेतन एवं भत्ते मिलते हैं ! योग्यता के अनुसार लेफ्टिनेंट कर्नल तक की पदोन्नति समय/अवधि के अनुसार मिलती है ! कर्नल एवं ब्रिगेडियर के लिए चयन प्रक्रिया से गुजरना होता है ! महत्त्वपूर्ण है कि प्रादेशिक सेना स्थायी रोजगार प्रदान नहीं करती ! इसमें केवल पार्ट-टाइम (अंशकालिक) नौकरी मिलती है ! ‘इंफेंटरी’ के लिए चुने अफसरों को लंबी अवधि के अवसर रहते हैं !

प्रशिक्षण

-बटालियन मिलने के बाद तुरंत एक माह की ‘रिक्रूट ट्रेनिंग’ दी जाती है ! 

-कमीशन प्राप्त होने के बाद ‘पोस्ट कमीशन ट्रेनिंग’ से पहले तीन माह की ‘बेसिक मिलिट्री ट्रेनिंग’ मिलती है ! यह प्रशिक्षण ‘टीए ट्रेनिंग स्कूल’ में दिया जाता है !

-‘बेसिक मिलिट्री ट्रेनिंग’ के बाद तीन माह की ‘पोस्ट कमीशन ट्रेनिंग’ दी जाती है !

-बाद के वर्षो में दो माह का वार्षिक ‘ट्रेनिंग कैंप’ लगता है !

आवेदन पत्र कैसे व कहां भेजें ?

इच्छुक नागरिक उम्मीदवार इसके लिए आवेदन पत्र ‘रोजगार समाचार’ से नोट कर सकते हैं या फिर वेबसाइट www.indianarmy.nic.in से डाउनलोड किया जा सकता है ! आवेदन पत्र के साथ 28 गुणा 12 सेंटीमीटर आकार का लिफाफा साथ भेजना होता है, जिस पर 12 रुपए की टिकट लगी होनी चाहिए ! आवेदन पत्र एवं अपना पता लिखे (सैल्फ एड्रेस्ड) लिफाफे को अपने क्षेत्र के प्रादेशिक सेना ग्रुप हैड-क्वार्टर भेजना चाहिए !

जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली व चंडीगढ़ के प्रार्थियों के लिए पता है- कमांडर टीए ग्रुप हैडक्वार्टर्स, वेस्टर्न कमांड, बिल्डिंग नंबर-750, सेक्टर 8-बी, चंडीगढ़-160018

उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड व छत्तीसगढ़ के लिए इसका पता है- कमांडर, टीए ग्रुप हैडक्वार्टर्स, सेंट्रल कमांड, लखनऊ-2 (उत्तर प्रदेश)।

राजस्थान, महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, गुजरात, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, गोवा, पंडिचेरी, लक्षद्वीप, अंडमान निकोबार द्वीप, दमन-दीव, दादरा व नगर हवेली के लिए इसका पता इस प्रकार है- कमांडर, टीए ग्रुप हैडक्वार्टर्स, सदर्न कमांड, पुणे-1 (महाराष्ट्र)।

मणिपुर, पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा, नगालैंड, मिजोरम, मेघालय, सिक्किम, अरुणाचल के लिए इसका पता है- कमांडर, टीए ग्रुप हैडक्वार्टर्स, ईस्टर्न कमांड, फोर्ट विलियम, कोलकाता-21 (प. बंगाल)।

तीनों सेनाओं के पूर्व अफसरों को आवेदन पत्र एडिशनल डीटीई जनरल, टेरिटोरियल आर्मी स्टाफ ब्रांच, आईएचक्यू ऑफ मॉड (आर्मी), ‘एल’ ब्लॉक, नई दिल्ली-110001 है। आवेदन पत्रों को भेजने की अंतिम तारीख 15 सितंबर, 2010 है।

चयन प्रक्रिया

नागरिक पुरुष प्रार्थियों की स्क्रीनिंग प्रीलिमिनरी इंटरव्यू बोर्ड (पीआईबी) विभिन्न टीए ग्रुप हैडक्वार्टर्स करते हैं ! पीआई के सफल कैंडीडेट को अपना संक्षिप्त ब्यौरा देना होता है ! इसमें केंन्द्र सरकार/अर्ध सरकारी/ प्राइवेट फर्म/अपने व्यवसाय की सूचना देनी होती है ! साथ में सभी स्नोतों से प्राप्त मासिक आय भी लिखनी होती है ! यहां के सफल उम्मीदवार को सर्विस सलेक्शन बोर्ड (एसएसबी) व मेडिकल की स्क्रीनिंग पार करनी होती है !

पूर्व सैन्य अफसरों की स्क्रीनिंग आर्मी हैडक्वार्टर सलेक्शन बोर्ड द्वारा होती है ! सफल अभ्यर्थियों को केवल मेडिकल बोर्ड की प्रक्रिया से गुजरना होता है !

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क्रांतिदूत: जानिये क्या है टेरीटोरियल आर्मी जिसके द्वारा आपात स्थिति में सामान्य देशवासी भी बन सकते है सेना का हिस्सा ?
जानिये क्या है टेरीटोरियल आर्मी जिसके द्वारा आपात स्थिति में सामान्य देशवासी भी बन सकते है सेना का हिस्सा ?
टेरीटोरियल आर्मी, प्रादेशिक सेना
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http://www.krantidoot.in/2016/09/What-is-the-Territorial-Army.html
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