एकाग्र मन, संतुलित साँसें और विश्व बाज़ार - संजय तिवारी

एकाग्र मन और संतुलित सांसें दरअसल बहुत कुछ साध लेती हैं। योग दिवस के बहाने यह अवसर एक उत्सव में बदल गया है। योग दिवस के मौके पर हर साल क...


एकाग्र मन और संतुलित सांसें दरअसल बहुत कुछ साध लेती हैं। योग दिवस के बहाने यह अवसर एक उत्सव में बदल गया है। योग दिवस के मौके पर हर साल कुछ रिकार्ड बन रहे हैं। गत वर्ष 1 लाख से ज्यादा लोगों ने योग कर तोड़ा रिकॉर्ड। फरीदाबाद में बाबा रामदेव के कार्यक्रम में 1 लाख से ज्यादा लोगों ने एक साथ योग करके गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज करवाया है। वहीं पतंजलि के 408 लोगों ने एक साथ 5 सेकेंड शीर्षासन कर पुराने रिकॉर्ड को तोड़ा । इससे पहले यह रिकॉर्ड सिटीजन लैंड के नाम था जहां 265 लोगों ने एक साथ 5 सेकेंड तक शीर्षासन किया था। इस बार अहमदाबाद में यही रिकॉर्ड टूटा जब चार लाख लोगो ने एक साथ योग किया। इस प्रकार की घटनाएं बताती हैं कि योग को लेकर देश में उत्साह का वातावरण है। हर आयु वर्ग के लोग अब इस गतिविधि में हिस्सा ले रहे हैं। देश के संत समाज और योगियों ने इस अद्भुत ज्ञान को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए सार्थक प्रयत्न किए हैं। इसके लोकव्यापीकरण में बाबा रामदेव सबसे चमकदार नाम हैं किंतु उनके अलावा भी विधिध धाराओं से जुड़े संत और धर्मगुरु भी इस विद्या को प्रचारित और प्रोत्साहित करने में अपनी भूमिका निभा रहे हैं। उधर लखनऊ में जिस तरह पानी में भीगते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 55 हजार लोगो के साथ योग किया वह भी अपने आप में एक रेकॉर्ड ही है। स्वयं मोदी ने कहा भी - अब दुनिया में योग का बहुत बड़ा बाज़ार खड़ा हो रहा है।


इसी मुद्दे पर अपने आलेख में सोनिया चपड़ा बता रही है कि योग दिवस के साथ ही इसका विश्लेषण भी शुरू हो चुका है कि भारत को इससे क्या विशेष लाभ हुआ है। गत वर्ष जब 193 देशों ने 21 जून को विश्व योगा दिवस मनाने पर सहमति दी थी तो यह आभास हो गया था कि भारत भी अब विश्व बाजार में एक शक्ति के रूप में खड़ा दिखाई देगा। 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर योग दिवस मनाया जा रहा है और भारत में तो सदियों से योग परम्परागत रूप से जीवन पद्धति का अंग रहा है। योग के चमत्कारिक नतीजों के कारण ही भारत में प्राचीन समय से ही योगाभ्यास की परम्परा रही है लेकिन आधुनिक जीवन पद्धति में इसे केवल कुछ लोगों तक ही सीमित कर दिया गया था और यह वह जमाना था जब संचार का माध्यम केवल अखबार हुआ करते थे, फिर दूरदर्शन आया लेकिन योग में क्रांति तब आयी जब टेलीविजन का दौर शुरू हुआ और बाबा रामदेव ने टी.वी. के माध्यम से इसे घर-घर पहुंचाया और फिर शिविरों के माध्यम से लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ इसे व्यापार और आयुर्वेद से जोड़कर अपना एक सम्राज्य खड़ा कर दिया।


बाबा रामदेव का तो यही दावा है कि उनके इस कारोबार से जो मुनाफा होगा, वह परोपकार में लगाया जाएगा और उनके इस कारोबार को भी उनके परिवार के लोग नहीं बल्कि उनकी संस्था के ही लोग चलाएंगे। कुछ इसी प्रकार की धारणा के साथ धीरूभाई अंबानी ने रिलाएंस इंडस्ट्री की शुरूआत की थी और शेयरों के जरिए अपने कारोबार में हिस्सेदारी देने के नाम पर देखते ही देखते अरबों का सम्राज्य खड़ा कर दिया था। आज रिलाएंस देश की सबसे बड़ी प्राइवेट कम्पनी है और इसके मालिक सबसे धनी हैं। अंबानी इतने बड़े घर में रहते हैं कि भारत के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के घरों से भी बड़ा आलीशान और सुविधा सम्पन्न उनका घर है और इससे जुड़ने वाले लोग कहां हैं या जिन्होंने शुरूआती दिनों में इसमें पैसा लगाया था, उनकी क्या दशा है किसी को भी मालूम नहीं है। इसी गति और धारणा को बाबा रामदेव भी बल दे रहे हैं और जिस गति से बाबा रामदेव का व्यापार बढ़ रहा है उसमें कोई दो राय नहीं है कि वह जल्दी ही अपने मिशन को पूरा कर लेंगे लेकिन वह भी प्रचार की उसी रणनीति को अपना रहे हैं जो बहुराष्ट्रीय कम्पनियां अपनाती हैं। वह अपने उत्पादों के ब्रांड को योग, आयुर्वेद एवं जीवन पद्धति से जोड़ते हुए आगे बढ़ रहे हैं।


पिछले वर्ष अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का भारत में जब आयोजन किया गया था तो विश्व के 193 देशों के प्रतिनिधियों ने इसमें हिस्सा लिया था और इससे पहले जब संयुक्त राष्ट्र में 21 जून का दिन अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की गई थी, तभी यह कयास लगाये जाने लगे थे कि योग के रूप में भी एक बड़ा बाजार विकसित किया जा सकता है। इस वर्ष भी न्यूयार्क सहित विश्व के प्रमुख स्थानों पर अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जा रहा है। यह लगातार दूसरा साल है, जब अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय को विशेष तौर पर रौशन किया जा रहा है और इस अवसर पर संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन और भारतीय वाणिज्य दूतावास द्वारा कई समारोह आयोजित किये जा रहे हैं। विश्वभर में योग की ख्याति होने से निशिचत रूप से इसका बाजार भी विकसित होगा और अभी प्रारंभिक चरण में योग क्रांति के जरिए आयुर्वेद और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं का बड़ा बाजार विकसित हो रहा है।


20,000 करोड़ रुपए का बाज़ार 

विश्व में जिस प्रकार से योग के प्रति लोगों की दीवानगी बढ़ रही है वैसे ही योग से जुड़े छोटे-बड़े व्यापार का दायरा भी बढ़ रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में योग से जुड़े व्यापार का आंकड़ा 20,000 करोड़ रुपए के आसपास हो गया है। योग से जुड़ा कारोबार भारत ही नहीं दुनिया भर में तेजी से बढ़ता जा रहा है। योग से जुड़ी एक्सेसरी का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। इसमें योग से सम्बंधित मैट, जूते, सीडी, डीवीडी, बेंड आदि की मांग तेजी से बढ़ रही है। विश्व में योग एक्सेसरी का कारोबार करीब 7.25 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का आंका गया है। अमेरिका और अन्य पश्चिम देशों में योग के प्रति जागरूकता के कारण एक लाख करोड़ रुपए का योग से जुड़ी किताबों और इससे जुड़ी वस्तुओं का व्यापार हो रहा है। एसोचैम की रिपोर्ट के अनुसार योग सिखाने वाले योग टीचर्स की मांग हर साल 40 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है। योग सिखाने का कारोबार देशभर में करीब 3.5 हजार करोड़ रुपए पहुंच गया है। इसमें लगाए जाने योग शिविर, कॉरपोरेट्स कंपनी को दी जाने वाली ट्रेनिंग और प्राइवेट ट्रेनिंग शामिल है। दुनिया में योग सीखने वाले लोगों की संख्या करीब 30 करोड़ के आसपास पहुंच चुकी है जिसमें 40 प्रतिशत से अधिक भारतीय शामिल हैं।

एक अनुमान के अनुसार योग के दौरान पहने जाने वाले कपड़ों का बाजार ही 1,000 करोड़ रुपए पहुंच चुका है। योग कपड़ो के सेक्टर में फॉरएवर योग और अर्बन योग जैसी कई कंपनियां योग से जुड़े कपड़े बनाने के कारोबार में उतर चुकी हैं। योगा सेंटर्स और कंपनियां अपनी दीवारों पर लगाने के लिए योग से जुड़ी पेंटिंग्स अधिक खरीद रही हैं। योग पेंटिंग कारोबार का टर्नओवर करीब 800 करोड़ रुपए का हो गया है और यह भी हर साल तेजी से बढ़ रहा है। योग गुरूओं ने योग को सीढ़ी बनाकर बड़ा कारोबार खड़ा कर दिया और उनकी संपत्ति साबित करने के लिए काफी है कि योग तन के लिए ही नहीं, धन के लिए भी अच्छा साबित हो रहा है। लेकिन ट्रस्ट के जरिए कारोबार करने वाले इन व्यापारी बाबाओं को टैक्स में रियायत नहीं मिलनी चाहिए।

योग का बाजार के बढ़ने के साथ ही आयुर्वेदिक उत्पादों की मांग में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। पश्चिमी यूरोप, रूस, अमेरिका, कजाकिस्तान, यूएई, नेपाल, यूक्रेन, जापान, फिलीपींस, केन्या जैसे देशों में आयुर्वेदिक उत्पादों की जबरदस्त मांग है। एक अनुमान के अनुसार विश्व में आयुर्वेदिक और हर्बल उत्पादों का 2015 में 83 बिलियन यूएस डॉलर का व्यापार हुआ जो 2020 तक 1 ट्रिलियन यूएस डॉलर तक हो जाएगा। मेक इन इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार योगगुरु बाबा रामदेव की पंतजलि का 31 मार्च 2017 तक 10, 561 करोड़ रुपये का व्यापार रहा।

योग दिवस शुरू होने का अमेरिका में योग बाजार पर कितना बड़ा प्रभाव पड़ा है इसकी बानगी इन आंकड़ों में दिखती है। 2008 के एक आंकड़े के मुताबिक करीब डेढ़ करोड़ (1.58 करोड़) लोग योग करते थे, लेकिन 2016 में यह संख्या बढ़कर 3.67 करोड़ पर पहुंच गयी। जिस रफ्तार से योग करने वाले बढ़े, उसी रफ्तार से योग सिखाने वाले स्कूल भी अमेरिका में खुले और लगातार खुलते जा रहे हैं। 2008 में सिर्फ 818 योग स्कूल थे और अब यह 3900 का आंकड़ा पार कर गया है। आज की तारीख में अमेरिका में योग का बिजनेस करीब 1 लाख 80 हजार करोड़ रुपये का हो गया है। अमेरिका में योग के बारे में 2016 में योग एलांएस की रिपोर्ट के अनुसार 3 करोड़ 60 लाख लोग योग से स्वस्थ रहने के तरीकों को अपना रहे हैं। अमेरिका में योग के बाजार की कुल कीमत लगभग 27 बिलियन डालर हो चुकी है। 2012 की तुलना में इसमें 76 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। योग बाजार में योग सिखाने वाले शिक्षकों की मांग देश ही नहीं विश्व के अन्य देशों में भी बढ़ रही है। योग एलाएंस की 2016 की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में 76,000 पंजीकृत योग शिक्षक हैं और इसके साथ 7000 योग के स्कूल जुड़े हुए हैं।


छोटे से छोटा व्यवसाय शुरू करने के लिए पूंजी की ज़रूरत होती है, लेकिन योग ने कई लोगों को करोड़पति, अरबपति बना दिया है। योग के व्यवसाय ने करोड़ों लोगों की जिन्दगी तो बदली ही लेकिन इसके हाईप्रोफाइल योगाचार्यों पर भी अथाह दौलत बरसाई और वह अब योगाचार्य नहीं व्यवसायी हो गए हैं। देश के कुछ चुनिंदा योग गुरुओं का विवरण इस प्रकार है:-

1. बाबा रामदेव के पतंजलि का कारोबार 11,000 करोड़ रुपए और 2021 तक का टारगेट 20,000 करोड़।
2. योगी हरभजन सिंह, सालाना कारोबार 100 करोड़ डॉलर।
3. भरत ठाकुर, कुल बाजार मूल्य- 10 करोड़ डॉलर।
4. बिक्रम चौधरी, कुल बाजार मूल्य: 7.5 करोड़ डॉलर।
5. श्री श्री रवि शंकर (1956 से), आर्ट ऑफ लिविंग, राजस्व: 1,156 करोड़ रुपए।

इन योग गुरुओं की सम्पत्ति से आंकलन किया जा सकता है कि आने वाले वर्षों में योग का कितना बड़ा बाजार विकसित होने जा रहा है। जब विश्वभर के 200 से ज्यादा देश इससे जुड़कर उत्सुकतावश भारत की ओर देख रहे हैं और उनका भी यह मानना है कि इस जीवन पद्धति का जनक केवल भारत है और भारत ही इसमें विश्व गुरु की भूमिका निभा सकता है।

भारत के साथ जुड़ रही है दुनिया 

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में जनसंचार विभाग के अध्यक्ष डॉ. संजय द्विवेदी का कहना है कि भारतीय ज्ञान परंपरा में योग एक अद्भुत अनुभव है। योग भारतीय ज्ञान का एक ऐसा वरदान है, जिससे मनुष्य की चेतना को वैश्विक चेतना से जुड़ने का अवसर मिलता है। वह स्वयं को जानता है और अपने परिवेश के साथ एकाकार होता है। विश्व योग दिवस, 21 जून के बहाने भारत को विश्व से जुड़ने और अपनी एक पहचान का मौका मिला है। दुनिया के तमाम देश जब योग के बहाने भारत के साथ जुड़ते हैं तो उन्हें भारतबोध होता है, वे एक ऐसी संस्कृति के प्रति आकर्षित होते हैं जो वैश्विक शांति और सद्भाव की प्रचारक है। योग दरअसल भारत की शान है, योग करते हुए हम सिर्फ स्वास्थ्य का विचार नहीं करते बल्कि मन का भी विचार करते हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ ने विश्व योग दिवस को मान्यता देकर भारत के एक अद्भुत ज्ञान का लोकव्यापीकरण और अंतराष्ट्रीयकरण करने में बड़ी भूमिका निभाई है। इसके लिए 21 जून का चयन इसलिए किया गया क्योंकि इस दिन सबसे बड़ा दिन होता है। योग कोई धार्मिक कर्मकाण्ड नहीं है यह मन और जीवन को स्वस्थ रखने का विज्ञान है। यह पूर्णतः वैज्ञानिक पद्धति है जिससे व्यक्ति की जीवंतता बनी रहती है। भारत सरकार के प्रयासों के चलते योग अब एक जनांदोलन बन गया है। निश्चित रूप से प्रधानमंत्री और आयुष मंत्रालय को इसका श्रेय देना चाहिए कि उन्होंने निजी प्रयासों से आगे आकर इसे शासकीय तौर पर स्वीकृति दिलाने का काम किया। यह बहुत सुंदर बात है कि देश में योग ने एक चेतना पैदा की है और वैश्विक स्तर पर भारत को स्थापित करने का काम किया है।

भारत बना योगगुरु

योग को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिलने के बाद पूरी दुनिया भारत की ओर देख रही है। भारत के योगशिक्षकों की पूरी दुनिया में मान्यता बढ़ी है। भारतीय मूल के योगशिक्षकों या भारत में प्रशिक्षित योग शिक्षकों को लोग अधिक भरोसे से देखते हैं। इस बहाने भारत के योगाचार्यों को एक विस्तृत आकाश मिला है और वे अपनी प्रतिभा से वैश्विक स्तर पर अपना स्थान बना रहे हैं। प्रधानमंत्री की रूचि के नाते भारत के दूतावास और विदेश मंत्रालय भी अपने स्तर पर इस गतिविधि को प्रोत्साहित कर रहे हैं। पाठ्यक्रमों में स्थान मिलने के बाद योग की अकादमिक उपस्थिति भी बन रही है। योगिक स्वास्थ्य प्रबंधन जैसे विषय आज हमारे समाज में सम्मान से देखे जा रहे हैं। दुनिया को अच्छे-योग्य-चरित्रवान योग शिक्षक उपलब्ध कराना हमारी जिम्मेदारी है। यह दायित्वबोध हमें काम के अवसर तो देगा ही भारतीय ज्ञान परंपरा को वैश्विक पटल पर स्थापित भी करेगा। गत वर्ष वैश्विक योग दिवस पर दुनिया भर के देशों में योग के आयोजन हुए। जिनमें तमाम मुस्लिम देश भी शामिल थे। दुबई के बुर्ज खलीफा में स्वयं योगगुरु बाबा रामदेव ने 10 हजार महिलाओं को योग करवाया। इस अवसर उन्होंने अपने संबोधन में कहा था कि योग का कोई पंथ नहीं है यह 100 प्रतिशत पंथनिरपेक्ष अभ्यास है। उनका कहना था कि यह जीवन पद्धति है।

मन की बात में पहल की सराहनाः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 जून, 2015 को आकाशवाणी पर 'मन की बात' कार्यक्रम के तहत देशवासियों को संबोधित करते हुए अंतरराष्‍ट्रीय योग दिवस की चर्चा की थी। तब उन्‍होंने कहा कि लाखों लोगों ने यादगार चित्र भेजे और उसे मैंने रीट्वीट भी किए। योग दिवस मेरे मन को आंदोलित कर गया। प्रधानमंत्री मोदी का कहना था कि पूरी दुनिया ने योग को अपनाया। यह भारत के लिए गर्व की बात है। उन्‍होंने कहा कि योगाभ्‍यास का सूरज दुनिया में कहीं नहीं ढलता। योग ने पूरी दुनिया को जोड़ा। फ्रांस व अमेरिका से लेकर अफ्रीकी व मध्‍यपूर्व के देशों में योग करते लोगों को देखना अविस्‍मरणीय क्षण था। उन्‍होंने टाइम्‍स स्‍क्‍वायर से लेकर सियाचिन और दक्षिण चीन सागर में सैनिकों द्वारा योगाभ्‍यास कार्यक्रम में शामिल होने की सराहना की। पीएम मोदी ने कहा कि कहा कि आइटी प्रोफेशनल्‍स योग शिक्षकों का एक डाटाबेस तैयार करें। हम इनका उपयोग दुनिया भर में कर सकते हैं।


विश्वशांति के लिए जरूरी है योग 

दुनिया में मनुष्य आज बहुत अशांत है। उसके मन में शांति नहीं है। इसलिए सर्वत्र हिंसा, आतंकवाद और अशांति का वातावरण है। ऐसे कठिन समय में योग का अनुगमन और अभ्यास विश्वशांति का कारण बन सकता है। मनुष्य का अगर अपने मन पर नियंत्रण हो। उसे चेतना के तल पर शांति अनुभव हो दुनिया में हो रहे तमाम टकराव टाले जा सकते हैं। वैसे भी कहा जाता है कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन-मस्तिष्क निवास करता है। योग जहां आपके तन को शक्ति देता है वहीं जब आप प्राणायाम की ओर बढ़ते हैं तो वह आपके मन का भी समाधान करता है। मन की शांति के लिए आपको जंगलों में जाने की जरूरत नहीं है। योग आपको आपके आवास पर ही अद्भुत शांति का अनुभव देता है।

लेखक भारत संस्कृति न्यास नयी दिल्ली के अध्यक्ष और अपना भारत साप्ताहिक के सम्पादक विचार हैं। 

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एकाग्र मन, संतुलित साँसें और विश्व बाज़ार - संजय तिवारी
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