भारतीय संविधान उवाच – हिन्दू स्वातंत्र्य अभी शेष है ! उपानंद ब्रह्मचारी जी की कलम से !

आप सभी को भारत के 71 वें स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं | आप सदैव आनन्दित ही नहीं, परमानंद में निमग्न रहें | निश्चित रूप से, आप...



आप सभी को भारत के 71 वें स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं | आप सदैव आनन्दित ही नहीं, परमानंद में निमग्न रहें |

निश्चित रूप से, आपने लाल किले की प्राचीर से दिए गए प्रधानमंत्री मोदी के उत्कृष्ट भाषण को सुना होगा, जिसमें उन्होंने आपको दिव्य भारत, भव्य भारत, ईश्वरीय भारत और शानदार भारत का आश्वासन दिया । उसमें कोई भ्रम नहीं खोजा जा सकता, है भी नहीं ।

दिव्यता या आध्यात्मिकता भारत की मूल प्रकृति है, परन्तु यह मुझमें अन्तर्निहित '' धर्मनिरपेक्षता '' के वचन के कारण प्रतिबंधित की गई है, जिसे मेरी प्रस्तावना में लोगों ने डाला है | अब सवाल उठता है कि कैसे सरकार एक सरकारी कार्यक्रम में आध्यात्मिकता की दिव्यता के प्रति आश्वस्त कर सकती है ? क्या यह विरोधाभास नहीं है, यह पूरी तरह अधिकारों का अतिक्रमण है।

प्रिय हिन्दू भारतीयों, वस्तुतः मुझे अर्थात भारतीय संविधान को बनाया ही इस प्रकार गया है, कि उसका दुरुपयोग हो और आपका अपना व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन सदा एक अद्रश्य बंधन में रहे ।

अब देखिये कि आज आप अपने आप को विदेशी शासकों के बंधन से मुक्त मानकर महान स्वतंत्रता महसूस कर रहे हैं। लेकिन क्या वास्तव में आप स्वतंत्र हैं ? अगर आप स्वतंत्र हैं तो फिर क्यों आपके तीनों प्रमुख आराध्य देवता अयोध्या, काशी और मथुरा में सेना और पुलिस के घेरे में है ? आप 71 वें स्वतंत्रता दिवस के जश्न का आनंद ले रहे हैं, लेकिन उसी दिन अर्थात जन्माष्टमी को कृष्णजन्मस्थल सुरक्षा के घेरे में है; काशी विश्वनाथ की भी वही स्थिति है, उसे तो चारों और से औरंगजेब की मस्जिद ने घेर रखा है | और अयोध्या में रामलला तो तम्बू में हैं ही | पर इससे आपको क्या ? आप तो अपनी स्वतंत्रता से बहुत खुश हैं !

भारत के हिंदू भाईयो, आप न तो सिंधु में स्नान कर सकते हो और ना ही आप कैलाश मानसरोवर या हिंगलाज की यात्रा करने के लिए स्वतंत्र हो | इतराते रहो अपनी धर्मनिरपेक्ष और मूर्खतापूर्ण बुद्धि पर, जो आपको मृगमरीचिका के समान स्वतंत्रता की अनुभूति प्रदान करती है ।

ओह हिंदुओं, इस तथाकथित स्वतंत्रता को 70 वर्ष पूर्ण हो चुके, किन्तु आपको कश्मीर में रत्तीभर जमीन खरीदने की अनुमति नहीं है। जब आप अमरनाथ तीर्थ यात्रा के लिए जाते हैं तो आपको भारी सुरक्षा घेरे में जाना पड़ता है | इधर सुरक्षा का प्रतिबंध हटा और उधर आतंकी गोला फटा | आप कब जिहादियों की गोलियों का निशाना बन जाएँ, कहा नहीं जा सकता । यह है आपकी आजादी की हकीकत |

आपकी स्वतंत्रता आपके लिए एक प्रहसन के रूप में है | अधिकारों की बात करें तो वे भी समान नहीं हैं? आप हिंदू कोड विधेयक से प्रतिबंधित होते हैं, तो उन्हें शरिया की मदद से उनकी इच्छानुसार कुछ भी करने की छूट है!

आपको अपने धार्मिक कुंभ मेले या अन्य तीर्थयात्राओं के दौरान सेस और सर्विस टैक्स देना होता है, जबकि उन्हें पवित्र हज यात्रा के लिए सब्सिडी के साथ अनुमति दी जाती है। आपकी स्वतंत्रता ने आपको अपमानित किया और उनकी आजादी ने उन्हें और अधिक पवित्र बनाया है ।

मेरे साथी हिन्दू भारतीयो, क्या आपने एक बार भी सोचा है कि भारत के प्रधान मंत्री हर वर्ष मोइनुद्दीन चिस्ती के उर्स के दौरान चादर भेजना नहीं भूलते, लेकिन स्वर्ण मंदिर या वैष्णो देवी को आदर व्यक्त करने के लिए क्या करते हैं? दरअसल, जो हार गए हैं, या गुलाम हैं, उनका प्रशस्तिगान कोई नहीं करता |

ओह हिंदुओं, यदि आपने सचमुच अपनी आजादी अर्जित कर ली है, तो आपको बंगाल और केरल में हर कदम पर गौहत्या होते हुए क्यों देखना पड़ता है, गोमांस की दुकानें आपको मुंह क्यों चिढाती हैं; क्यों समाज में बड़े पैमाने पर धर्मांतरण होता है, क्यों कश्मीरी पंडित अब भी दिल्ली या जम्मू में शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं? सभी प्रश्नों का उत्तर केवल एक है, और वह यह कि हिंदुओं ने अभी तक कोई स्वतंत्रता हासिल नहीं की है । इसीलिए ना तो गौवध प्रतिबंधित है और नाही सबके लिए समान क़ानून सुनिश्चित है, समान नागरिक संहिता दूर की कौड़ी है । विचित्र स्थिति है कि धर्मनिरपेक्षता के नाम पर केवल हिंदुओं के अधिकारों का मजाक उड़ाया जाता है ।

हिंदुओं, तुम्हारे शंकराचार्य और दूसरे हिंदू संतों को जब चाहे अपुष्ट और मिथ्या आरोपों में, केवल क्षुद्र राजनैतिक कारणों से जेलों में ठूंस दिया जाता है, जबकि अन्य धर्मों के धार्मिक प्रमुखों के सम्मान की रक्षा की जाती है। हिंदू मंदिर सरकार के नियंत्रण में हैं, लेकिन उनके मस्जिद और चर्च उनके ही अधिकार में हैं । सरकार हिंदू मंदिरों से पैसे अर्जित कर मुसलमानों और ईसाइयों पर खर्च करती है । आपकी आजादी के नाम पर, आपको न केवल केराणा से निकाल दिया गया | आप नहीं जानते कि भारत में हर घंटे में कितने हिंदुओं को अपने घरों से विस्थापित होना पड़ रहा है ।

ओह हिंदुओं, आप महान हैं क्योंकि आपने अपनी दासता को ही अपनी स्वतंत्रता माना हुआ है और उस स्वतंत्रता का 71 वां जन्म दिन आनंद और महान उत्साह पूर्वक धूमधाम से मना रहे हैं ।

लेकिन, अगर आपको लगता है कि आपने अभी तक स्वतंत्रता प्राप्त नहीं की है, तो भारत में सांस्कृतिक-संवैधानिक-धार्मिक हिंदु राष्ट्र के लिए प्रयास करें। तभी तुम्हारा उद्धार होगा, वही होगी आपकी वास्तविक स्वतंत्रता और स्वाधीनता ।

वन्दे मातरम। जय हिन्द।

आपका,

सत्यमेव जयते

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क्रांतिदूत: भारतीय संविधान उवाच – हिन्दू स्वातंत्र्य अभी शेष है ! उपानंद ब्रह्मचारी जी की कलम से !
भारतीय संविधान उवाच – हिन्दू स्वातंत्र्य अभी शेष है ! उपानंद ब्रह्मचारी जी की कलम से !
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