बेशर्म बुराई और कमजोर अच्छाई का प्रतीक पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी प्रकरण !

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सन्डे गार्जियन लाईव नामक वेव साईट पर प्रकाशित श्री अभिनन्दन मिश्रा के आलेख पर आधारित   हममें से अधिकाँश ने टीवी चेनलों पर और समाचा...



सन्डे गार्जियन लाईव नामक वेव साईट पर प्रकाशित श्री अभिनन्दन मिश्रा के आलेख पर आधारित  

हममें से अधिकाँश ने टीवी चेनलों पर और समाचार पत्रों में पूर्व उप राष्ट्रपति पर भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसी रॉ के पूर्व अधिकारियों द्वारा लगाये गए आरोपण को सरसरी तौर पर देखा या पढ़ा होगा | किन्तु क्या हमने उन आरोपों की गहराई में जाने का प्रयत्न किया ? अगर नहीं किया तो कोई बात नहीं आज जान लीजिये | यह जानना आपके लिए बेहद जरूरी इसलिए भी है, क्योंकि जब तक आप नहीं जानेंगे, आप जागेंगे भी नहीं | और आपके जागे बिना भारत के हित कतई सुरक्षित नहीं रह सकते | क्योंकि हमारी प्रजातांत्रिक प्रणाली में किन्तु परन्तु की राजनीति ही चल रही है | 

पूर्व अनुसंधान और विश्लेषण विंग (R & AW रॉ) के पूर्व अधिकारियों द्वारा भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी पर लगाये आरोप बेहद गंभीर हैं | इन अधिकारियों के अनुसार अंसारी ने ईरान के तेहरान में राजदूत के पद पर रहते हुए रॉ के अभियान को नुक्सान पहुँचाया । स्मरणीय है कि अंसारी तेहरान में 1990-1992 तक राजदूत रहे थे | इन अधिकारियों सबसे पहले 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पूरे मामले की जानकारी देते हुए, जांच की मांग की थी, किन्तु प्रजातांत्रिक राजनीति की विवशता तो देखिये कि सरकार अभी तक इस आरोप की जांच या तो करवा नहीं पाई, या निष्कर्षों के आधार पर अंसारी के खिलाफ कार्यवाही का होंसला नहीं जुटा पाई, क्योंकि प्रजातंत्र में राष्ट्रीय महत्व के मसलों पर भी लाभ हानि का गणित देखना ही पड़ता है | सचमुच दुष्टों की बेशर्मी और भले लोगों की कमजोरी एक बहुत बड़ी समस्या है | 

आईये अब देखते है कि इन अधिकारियों ने प्रधान मंत्री को की गई अपनी शिकायत में कहा क्या है – 

अंसारी तेहरान में न केवल भारत के राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने में विफल रहे, बल्कि ईरानी सरकार और इसकी खुफिया एजेंसी SAVAK के साथ सहयोग करके उन्होंने R & AW और अपने देश भारत को गंभीर क्षति पहुंचाई। उनके अनुसार, ऐसी एक नहीं, बल्कि चार बड़ी घटनाएं हुईं जब भारतीय दूतावास के अधिकारियों, राजनयिकों का अपहरण SAVAK द्वारा किया गया और अंसारी ने जानबूझकर इन घटनाओं की अनदेखी की । 

इन अधिकारियों में से एक, एन.के.सूद (2010 में एजेंसी से सेवानिवृत्त हुए) ने द संडे गार्जियन लाईव नामक एक वेव साईट को बताया कि अंसारी इस स्तर तक गए ​​कि उन्होंने ईरान में रॉ के स्टेशनों को बंद तक करने की सिफारिश कर दी। 

SAVAK को घोषित तौर पर तो 1979 में भंग कर दिया गया, किन्तु उसके स्थान पर एक नए संगठन, “सजमान-ए-इत्तेला-एत वा अमनिअत ए मेल्ली ए ईरान” का गठन किया गया था। हालाँकि, आज तक R & AW सहित सभी खुफिया एजेंसियां, ईरानी जासूसी एजेंसी को उसके पुराने नाम SAVAK से ही उल्लेख करती हैं, क्योंकि नया संगठन अभी ठीक से जाना पहचाना नहीं है। 

सूद ने कई प्रसंगों को सूचीबद्ध किया है, जिनसे पता चलता है कि तेहरान में अपने कार्यकाल के दौरान अंसारी ने अपना कर्तव्य ठीक से नहीं निभाया । 



ऎसी ही एक घटना का उल्लेख सूद ने किया है कि मई 1991 में, एक भारतीय अधिकारी, संदीप कपूर, को संभवतः SAVAK द्वारा तेहरान हवाई अड्डे से अपहरण कर लिया गया । स्टेशन के रॉ प्रमुख को जब यह जानकारी मिली, उस समय वे दुबई में थे, किन्तु मामले की गंभीरता को समझते हुए, वे तुरंत वापस आये और घटना की जानकारी व्यक्तिगत रूप से अंसारी को दी । किन्तु अंसारी ने कपूर का पता लगाने के लिए तो कोई कदम नहीं उठाया, अपितु विदेश मंत्रालय को एक गोपनीय रिपोर्ट भेजी कि कपूर गायब था और इरान में किसी स्थानीय महिला के साथ संबंधों को लेकर उसकी गतिविधियां संदिग्ध थीं । उन्होंने जानबूझकर यह उल्लेख नहीं किया कि रॉ ने इस मामले में SAVAK की संलिप्तता के बारेमें रिपोर्ट की थी । 

तीन दिन बाद, भारतीय दूतावास को एक गुमनाम फोन से सूचना मिली कि कपूर किसी विशेष स्थान पर सड़क पर पड़ा हुआ है। उसे दवाईयां दी गई थीं, जिनका प्रभाव उस पर कई वर्षों तक रहा। R & AW द्वारा बार बार अनुरोध किये जाने के बाद भी ईरानी विदेशी कार्यालय से कोई विरोध भी नहीं जताया गया और ना ही कोई रिपोर्ट दर्ज कराई गई, अंसारी ने कोई कार्रवाई नहीं की। 

सूद ने याद करते हुए बताया कि अगस्त 1991 में, रॉ उन कश्मीरी युवकों पर नज़र रखे हुए थे जो नियमित रूप से ईरान के धार्मिक केंद्र, क़ोम का दौरा करते थे, और वहां हथियारों का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे थे। पुराने रॉ कर्मचारियों की सलाह न मानते हुए रॉ के नए स्टेशन प्रमुख ने अंसारी को अपने ऑपरेशन के बारे में बता दिया। “अंसारी ने इस ऑपरेशन को संचालित करने वाले अधिकारी डी. बी. माथुर का नाम ईरानी विदेश कार्यालय को बता दिया और वहां से SAVAK को जानकारी मिल गई और उन्होंने माथुर को सुबह सबेरे भारतीय दूतावास से उठा लिया। शाम होते होते यह स्पष्ट हो गया कि उसे SAVAK द्वारा ही उठाया गया है, ”सूद ने याद किया। 

इस घटना का उल्लेख उस पत्र में भी किया गया है जिसे प्रधानमंत्री मोदी के साथ साझा किया गया है। जब अंसारी ने ईरानी विदेश कार्यालय को माथुर की गुमशुदगी रिपोर्ट दर्ज कराने और घटना की जानकारी दिल्ली को देने से साफ़ इनकार कर दिया, तो दूसरे दिन, रॉ अधिकारियों द्वारा अधिकारी को SAVAK द्वारा उठाए जाने की संभावना की जानकारी तत्कालीन विपक्ष के नेता अटल बिहारी वाजपेयी को दी, जिन्होंने तत्कालीन प्रधान मंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव को बताया, तब कहीं जाकर माथुर को एविन जेल से रिहा किया गया, जहाँ उन्हें अपहरण के चार दिन बाद रखा गया था, लेकिन उन्हें 72 घंटे में देश छोड़ने को कहा गया । बाद में माथुर ने ही खुलासा किया कि उनके साथ क्या हुआ था और कैसे SAVAK को सूद और स्टेशन प्रमुख की पहचान के बारे में पहले से पता था| पत्र में आरोप है कि अंसारी ने ही ईरानी विदेश कार्यालय के साथ यह जानकारी साझा की थी । 

इन अधिकारियों का मानना है और वे आशान्वित भी हैं कि पीएम मोदी इस मुद्दे की गहन जांच का आदेश देंगे, जिसने भारत की सामरिक क्षमताओं को गंभीर क्षति पहुंचाई । 

संडे गार्जियन ने ईमेल के माध्यम से पूर्व उप राष्ट्रपति अंसारी के कार्यालय से रॉ अधिकारियों द्वारा लगाए गए आरोपों पर उनकी प्रतिक्रिया मांगी। किन्तु कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। 

सूद ने भारतीय राजदूत के आवास पर तैनात एक सुरक्षा गार्ड मोहम्मद उमर के साथ हुई घटना के बारे में भी उल्लेख किया, जिसे SAVAK ने उठाया था और तीन घंटे के बाद रिहा कर दिया था। जब अंसारी को इसके बारे में बताया गया, तो उन्होंने रॉ स्टेशन प्रमुख को तथ्यों का पता लगाने के लिए कहा, क्योंकि उनका मानना ​​था कि वह SAVAK द्वारा अपने साथ मिला लिया गया था। हालाँकि, रॉ द्वारा स्पष्ट रूप से उसे निर्दोष बताने के बाद भी अंसारी ने उसे वापस भारत भेज दिया गया और वह भी इस सिफारिश के साथ कि उसकी भविष्य में कोई विदेशी पोस्टिंग न की जाए। 

जैसा कि पत्र में उल्लेख है, यह संभवतः रॉ के लिए सर्वाधिक अपमानजनक प्रसंग था, जब रॉ के स्टेशन प्रमुख पी. के. वेणुगोपाल को SAVAK द्वारा पीटा जाना । स्टेशन प्रमुख को उस समय उठाया गया जब वह एक ईरानी महिला के साथ दर्शनीय स्थलों की यात्रा पर थे। अंसारी ने कभी भी ईरानी अधिकारियों के पास इसकी शिकायत दर्ज नहीं कराई। उलटे अंसारी ने उन्हें ईरान से वापस बुलाने की सिफारिश की और बाद में उन्हें सेवा से ही बर्खास्त कर दिया गया। हालांकि, यहाँ से मामले ने एक दिलचस्प मोड़ लिया । वह महिला वेणुगोपाल से मिलने के लिए भारतीय वीजा चाहती थी, जिसका रॉ ने विरोध किया, लेकिन अंसारी ने खुद होकर उसे वीजा दिया। 

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि कैसे एक प्रथम सचिव, जो 10 वर्षों तक ईरान में तैनात रहा, स्वयं को छात्र बताने वाले ईरानी लोगों को भारतीय वीजा दिलाने के नाम पर 500-500 यूएस $ बसूल रहा था और उन्हें बीजा मिल भी रहा था । रॉ द्वारा इसकी जांच की गई और पाया कि भारतीय विश्वविद्यालयों के जिन सिफारिशी पत्रों के आधार पर ईरानी नागरिकों को वीजा दिया जा रहा था, फर्जी थे । अंसारी के सामने रॉ द्वारा लिखित में देने के बावजूद कुछ नहीं हुआ और मामले को ठन्डे बस्ते में डाल दिया गया। 

पत्र में विदेश मंत्रालय को सूचित किये बिना तेहरान में पाकिस्तान के तत्कालीन राजदूत के साथ अंसारी की नियमित और लंबी बैठकों के बारे में भी उल्लेख किया गया है । 

पत्र में यह उल्लेख भी है कि अंसारी के आदेश के कारण रॉ के रक्षात्मक ऑपरेशनों को रोक कर रखा गया। अंसारी ने दुबई, बहरीन, सऊदी अरब में स्थित अन्य भारतीय राजदूतों के माध्यम से भी रॉ के मिशनों में बाधा पहुंचाई । मुम्बई बम धमाकों के समय, इन खाड़ी देशों में रॉ की क्षमता पूरी तरह छिन्न भिन्न हो गई थी । 

सूद ने द संडे गार्जियन लाईव को बताया कि जब अंसारी को 1993 के मध्य में ईरान से स्थानांतरित किया गया, तब भारतीय दूतावास में उत्सव जैसा माहौल था । 

सूद ने इस बात की विस्तृत जांच की मांग की है कि – 

जब तेहरान में स्टाफ के सदस्यों को अगवा किया जा रहा था, तब अंसारी उचित कदम उठाने में असफल क्यों रहे ? 

ईरानी छात्रों को दिए गए फर्जी वीजा में अंसारी की क्या भूमिका थी ? 

और सबसे महत्वपूर्ण यह कि तेहरान और अन्य खाड़ी देशों में रॉ के अभियानों को नुकसान पहुँचाने में अंसारी की क्या भूमिका थी ।

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