एक मुसलमान अधिकारी का अनूठा करतब – संघ प्रमुख सुदर्शन जी के सहयोग से चम्बल के ध्वंस मंदिरों का किया जीर्णोद्धार |


साल 2005 की बात है, जब के.के. मोहम्मद को मध्य प्रदेश के मुरैना में आठवीं सदी में बने बटेश्वर मंदिरों के भग्नावशेषों का पता लगा | यह स्थान चम्बल के बीहड़ों के बीच बसा एक दुर्गम क्षेत्र था, जिसे डाकुओं की प्रमुख शरणस्थली माना जाता था | इसके अतिरिक्त वहां पत्थर माफिया भी सक्रिय थे, जिनके विस्फोटों से इन मंदिरों को बचाना एक चुनौती थी |

स्वयं केके मोहम्मद के शब्दों में सुनिये पूरी कहानी – 

इलाके में मंदिरों के ध्वंसावशेष पड़े हुए थे, उनको उठाउठाकर हमने मंदिरों का पुनर्निर्माण प्रारंभ किया | इस काम में हमें सबका सहयोग मिला | यहाँ तक कि डाकुओं का भी | हमारे विभागीय सहयोगियों और स्थानीय नागरिकों का तो होने को ही ठहरा | 

इलाके पर पत्थर माफियाओं का कब्जा था, किन्तु चम्बल के डाकुओं की घुड़की ने उनके होश ठिकाने ला दिए | मजे की बात देखिये कि जब तक डाकू थे, तब तक हमारा काम ठीक से चला, किन्तु बाद में सरकार ने जब डाकुओं को मार दिया, तो उनके हटने के बाद इलाके पर फिर से पत्थर माफियाओं का कब्जा हो गया | वे माईन्स में विस्फोट करते, जिसके चलते, मंदिरों को भी काफी क्षति पहुंचती | हालात यह हो गई कि उनके द्वारा पहाड़ों पर किये जाने वाले विस्फोटों से हमारे द्वारा बनाई गईं संरचनाएं भी नष्ट होने लगीं | वे फिर से गिरना शुरू हो गए |

हमने शासन से गुहार लगाई, चिट्ठियाँ लिखीं, पर कोई सुनवाई नहीं हुई | अंततः हमने तत्कालीन संघ प्रमुख श्री सुदर्शन जी से संपर्क किया | मैंने उन्हें एक पत्र लिखा – आप मंदिरों को बचाने की बात करने वाले संगठन के मुखिया हैं | अयोध्या के लिए लड़ भी रहे हैं | यहाँ माईनिंग माफिया पुरातत्व महत्व के मन्दिरों को क्षति पहुंचा रहे हैं, हमारी मदद कीजिए |

उस पत्र का असर तुरंत ऐसा हुआ कि 24 घंटे के अन्दर प्रशासन हरकत में आ गया | उस जमाने में हमें 200 में से 40 मंदिरों के पुनर्निर्माण में कामयाबी मिली | यह सारा काम हमने 2 करोड़ में कर दिया है | अगर हमें पांच करोड़ और मिल जाएँ तो यह स्थान विश्व की अनमोल धरोहर बन जायेगा और यह अनजाना क्षेत्र पर्यटन के नक़्शे पर एक महत्वपूर्ण स्थान पा लेगा | आज भी पुनर्निर्माण के बाद यहाँ पर्यटकों की आवाजाही में काफी बढ़ोतरी हुई है | 

स्मरणीय है कि बटेश्वर गाँव श्री अटल बिहारी बाजपेई जी का पैट्रिक गाँव भी है |

बैसे के.के. मोहम्मद अब सेवा निवृत्त हो चुके हैं | अब कार्य की जिम्मेदारी संस्कृति मंत्रालय पर है | देखना दिलचस्प होगा कि क्या अब भी के.के.मोहम्मद जैसी लगन और निष्ठा से काम होगा |

साभार बीबीसी - http://www.bbc.com/hindi/media-41600429


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