क्रांतिदूत

रोहित वेमुला मामले में सनसनीखेज खुलासा ! रोहित की मां को पैसे देकर सरकार पर आरोप लगवाये गए !



आपको हैदरावाद विश्वविद्यालय का शोधछात्र रोहित वेमुला तो स्मरण ही होगा, दो साल पहले जिसकी आत्महत्या के बाद विरोधी दलों ने दलित उत्पीडन का घनघोर शोर पूरे देश में किया था और अवार्ड वापसी के नाटक हुए थे | अनेक मंचों और प्रेस वार्ताओं में रोहित की मां के आंसूओं ने कईयों का दिल भी पिघलाया था | 

किन्तु अब रोहिथ वेमुला की मां ने इन्डियन युनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के खिलाफ कुछ गंभीर आरोप लगाए हैं। 

उनके अनुसार आईयूएमएल ने वेमुला की मृत्यु के तुरंत बाद उनसे बड़ी वित्तीय सहायता का वादा किया था, लेकिन केवल राजनीतिक लाभ के लिए उनका इस्तेमाल किया गया । 

न्यूज़ मिनिट नामक एक वेव पोर्टल को दिए बयान में राधिका वेमुला ने बताया कि जब वेमुला ने अपने छात्रावास के कमरे में खुद को लटका लिया, उसके बाद पार्टी के सदस्यों ने उनसे संपर्क किया और उन्हें घर बनाने के लिए 20 लाख रुपये देने का का वादा किया, क्योंकि वेमुला परिवार एक किराए के आवास में रहता हैं। 

उन्होंने पोर्टल को आगे बताया कि पार्टी के कार्यकर्ता उन्हें केरल ले गये और लगभग 40,000 लोगों की विशाल सभा में उन्हें साथ बैठाया गया । बाद में इसी तरह की कई सभाओं और प्रेस वार्ताओं के लिए उन्हें कई बार केरल और अन्य स्थानों पर ले जाया गया। 

राधिका ने कहा कि उनकी उपस्थिति से पार्टी को राजनैतिक लाभ हुआ, लेकिन इसके बाद भी उनसे किये गए वायदे पूरे नहीं किये गए । इतना ही नहीं तो उन्हें दिए गए दो चेकों में से 2.5 लाख का एक चेक भी बाउंस हो गया । 

अपने बचाव में मुस्लिम लीग के एक कार्यकर्ता ने पोर्टल को बताया कि उन्होंने वेमुला परिवार के लिए 15 लाख रुपये अलग रखे हुए हैं, तथा वे अपने वादे से पीछे नहीं हटेंगे। 

स्मरणीय है कि जनवरी 2016 में अनुशासन हीनता के आरोप में छात्रावास से निष्कासित होने के कुछ ही समय बाद हैदराबाद विश्वविद्यालय के परिसर में रोहिथ ने आत्महत्या कर ली थी, जिसके बाद देश भर में बड़ी संख्या में मीडिया और बामपंथी कार्यकर्ताओं ने दलितों के खिलाफ अत्याचारों को लेकर प्रदर्शन आयोजित किये थे । 

यह अलग बात है कि आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा करवाई गई जांच से यह तथ्य भी सामने आया था कि रोहित वेमुला दलित था ही नहीं, बल्कि वह अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित था । न्यायमूर्ति रूपवन आयोग ने भी एक जांच में यही निष्कर्ष निकाला था कि रोहित एक दलित नहीं थे। साथ ही यह भी निष्कर्ष निकाला था कि रोहित की मृत्यु के लिए कोई और जिम्मेदार नहीं था। 

अब यह निष्कर्ष आप निकालिए कि भारतीय राजनीति में प्रचार के लिए किस हद तक गिरा जा सकता है ? 
साभार आधार - https://swarajyamag.com/insta/rohith-vemulas-mother-accuses-muslim-league-of-using-her-for-political-gains-after-making-false-promises
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